लोंगोवाल में 20 अगस्त को आमने-सामने होंगे अकाली धड़े….? एक ही अनाज मंडी में कार्यक्रमों की मंजूरी से बढ़ा तनाव

लोंगोवाल में 20 अगस्त को आमने-सामने होंगे अकाली धड़े….? एक ही अनाज मंडी में कार्यक्रमों की मंजूरी से बढ़ा तनाव

संत हरचंद सिंह लोंगोवाल की 41वीं बरसी के अवसर पर 20 अगस्त को लोंगोवाल में होने वाले कार्यक्रमों को लेकर अकाली दल के दो धड़ों के बीच विवाद गहरा गया है। दोनों पक्षों को एक ही अनाज मंडी में कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति मिलने के बाद इलाके का राजनीतिक माहौल गरमा गया है। शिरोमणि अकाली दल बादल ने प्रशासन के फैसले पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि पार्टी ने कार्यक्रम के लिए कई महीने पहले प्रक्रिया पूरी कर अनुमति हासिल की थी, इसके बावजूद उसी स्थान पर दूसरे अकाली धड़े को भी कार्यक्रम करने की मंजूरी दे दी गई।

मंगलवार को शिरोमणि अकाली दल बादल की ओर से लोंगोवाल की अनाज मंडी में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं की मौजूदगी के बीच प्रेस कॉन्फ्रेंस की गई। पार्टी नेताओं ने इस दौरान प्रशासन के फैसले को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई और कहा कि एक ही स्थान पर एक ही दिन दो राजनीतिक कार्यक्रमों को अनुमति देना व्यवस्था और कानून-व्यवस्था की दृष्टि से गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है।

अकाली नेताओं के अनुसार, संत हरचंद सिंह लोंगोवाल की बरसी के मौके पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम के लिए पार्टी ने अप्रैल 2026 से ही प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी थी। पार्टी का दावा है कि निर्धारित सरकारी फीस भी जमा करवाई गई और आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद अनाज मंडी में कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति प्राप्त की गई। अब पार्टी ने आरोप लगाया है कि प्रशासन ने अकाली दल पुनर सुरजीत गुट को भी इसी स्थान पर कार्यक्रम करने की मंजूरी दे दी है।

शिरोमणि अकाली दल बादल का कहना है कि एक ही तारीख और एक ही स्थल पर दो राजनीतिक दलों को कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति देना व्यावहारिक रूप से टकराव की स्थिति पैदा कर सकता है। पार्टी नेताओं ने प्रशासन से सवाल किया कि जब एक पक्ष ने पहले ही कार्यक्रम के लिए प्रक्रिया पूरी कर ली थी, तो उसी स्थान पर दूसरे पक्ष को अनुमति किस आधार पर दी गई।

पार्टी नेताओं ने पंजाब सरकार पर प्रशासनिक मशीनरी पर राजनीतिक दबाव डालने का आरोप भी लगाया। उनका कहना है कि प्रशासन को कानून-व्यवस्था और पूर्व में दी गई अनुमति को ध्यान में रखते हुए फैसला करना चाहिए था। अकाली नेताओं ने स्पष्ट किया कि पार्टी 20 अगस्त को लोंगोवाल की अनाज मंडी में संत हरचंद सिंह लोंगोवाल की बरसी का कार्यक्रम आयोजित करने के अपने फैसले से पीछे नहीं हटेगी।

इस विवाद के बीच सुनाम से अकाली नेता विनरजीत सिंह गोल्डी ने आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और सुनाम विधायक अमन अरोड़ा पर भी गंभीर आरोप लगाए। गोल्डी ने आरोप लगाया कि अमन अरोड़ा की ओर से कार्यक्रम को रोकने या प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि 20 अगस्त को दोनों पक्षों के कार्यक्रमों के कारण किसी प्रकार का टकराव पैदा होता है तो इसकी जिम्मेदारी पंजाब सरकार और संगरूर प्रशासन की होगी।

अकाली दल बादल ने यह भी संकेत दिया है कि बरसी कार्यक्रम में पार्टी अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल सहित बड़ी संख्या में वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता शामिल होंगे। ऐसे में कार्यक्रम का राजनीतिक महत्व और बढ़ गया है। पार्टी कार्यकर्ताओं की बड़ी मौजूदगी को भी आगामी कार्यक्रम के लिए शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है।

संत हरचंद सिंह लोंगोवाल की बरसी अकाली राजनीति में लंबे समय से महत्वपूर्ण आयोजन रही है। इस मौके पर हर वर्ष बड़ी संख्या में अकाली नेता और कार्यकर्ता लोंगोवाल पहुंचते हैं। ऐसे में इस बार एक ही स्थल पर अकाली राजनीति से जुड़े दो गुटों के कार्यक्रमों को मंजूरी मिलने से विवाद ने राजनीतिक रंग ले लिया है।

प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती दोनों पक्षों के कार्यक्रमों के बीच समन्वय बनाए रखना और कानून-व्यवस्था को नियंत्रित रखना है। यदि दोनों गुट एक ही समय या आसपास के समय में अनाज मंडी में शक्ति प्रदर्शन करते हैं तो कार्यकर्ताओं के आमने-सामने आने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। प्रशासन के लिए यह तय करना भी चुनौतीपूर्ण होगा कि दोनों कार्यक्रमों के लिए प्रवेश, पार्किंग, मंच और भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था किस तरह की जाए।

अकाली दल बादल के नेताओं का कहना है कि उनकी ओर से कार्यक्रम की तैयारी लंबे समय से चल रही है। पार्टी ने कार्यकर्ताओं को बड़ी संख्या में लोंगोवाल पहुंचने का आह्वान किया है। नेताओं के मुताबिक बरसी समारोह को लेकर पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं में उत्साह है और 20 अगस्त को बड़ी भीड़ जुटने की संभावना है।

दूसरी ओर, अकाली दल पुनर सुरजीत को भी उसी अनाज मंडी में कार्यक्रम की अनुमति मिलने के बाद राजनीतिक प्रतिस्पर्धा खुलकर सामने आ गई है। दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से चले आ रहे मतभेदों के बीच एक ही स्थान पर कार्यक्रम आयोजित करने का फैसला विवाद को और बढ़ा सकता है।

शिरोमणि अकाली दल बादल ने प्रशासन के सामने अनुमति से जुड़े दस्तावेज और प्रक्रिया का मुद्दा भी उठाया है। पार्टी का कहना है कि उसने कार्यक्रम के लिए काफी पहले आवेदन किया था और सरकारी प्रक्रिया के तहत फीस भी जमा करवाई थी। ऐसे में प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि दूसरे गुट को उसी स्थल पर कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति किस आधार पर दी गई।

अकाली नेताओं का आरोप है कि यदि प्रशासन को एक ही स्थान पर दो कार्यक्रमों की अनुमति देनी ही थी तो दोनों पक्षों के बीच समय और व्यवस्था को लेकर स्पष्ट समन्वय किया जाना चाहिए था। उनका मानना है कि बिना पर्याप्त व्यवस्था के एक ही जगह पर दो बड़े राजनीतिक कार्यक्रम होने से कानून-व्यवस्था की चुनौती बढ़ सकती है।

इस पूरे विवाद में आम आदमी पार्टी सरकार का नाम भी राजनीतिक तौर पर सामने आ गया है। अकाली दल ने सरकार पर अपने राजनीतिक विरोधियों के कार्यक्रम को प्रभावित करने की कोशिश का आरोप लगाया है। वहीं, प्रशासन के सामने चुनौती यह है कि वह किसी भी राजनीतिक पक्ष के आरोपों से अलग रहकर कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक अनुमति के नियमों के अनुसार व्यवस्था सुनिश्चित करे।

20 अगस्त को होने वाला कार्यक्रम इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि इसमें अकाली दल बादल के शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी प्रस्तावित है। सुखबीर सिंह बादल के शामिल होने की घोषणा के बाद स्थानीय स्तर पर पार्टी कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ी है। यदि बड़ी संख्या में समर्थक कार्यक्रम स्थल पर पहुंचते हैं तो प्रशासन को यातायात, सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के लिए अतिरिक्त इंतजाम करने पड़ सकते हैं।

राजनीतिक तौर पर देखा जाए तो यह विवाद केवल कार्यक्रम स्थल को लेकर नहीं है। एक ही स्थान पर दो अकाली गुटों की गतिविधियां राज्य में अकाली राजनीति के भीतर जारी मतभेदों को भी सामने ला रही हैं। बरसी जैसे भावनात्मक और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण आयोजन को लेकर दोनों पक्ष अपनी-अपनी ताकत दिखाने की कोशिश कर सकते हैं।

अकाली दल बादल ने अपने रुख में स्पष्टता दिखाते हुए कहा है कि वह निर्धारित तारीख को कार्यक्रम आयोजित करेगा। पार्टी का कहना है कि संत हरचंद सिंह लोंगोवाल की बरसी का कार्यक्रम उनके लिए महत्वपूर्ण है और इसे किसी दबाव में रद्द नहीं किया जाएगा। पार्टी नेतृत्व ने कार्यकर्ताओं से बड़ी संख्या में पहुंचने की अपील भी की है।

अब निगाहें संगरूर प्रशासन के अगले कदम पर हैं। प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि दोनों पक्षों को मिली अनुमति के बीच कोई ऐसी स्थिति न बने जिससे कानून-व्यवस्था प्रभावित हो। साथ ही उसे यह भी स्पष्ट करना होगा कि एक ही अनाज मंडी में दो कार्यक्रमों को अनुमति देने के पीछे प्रशासनिक आधार क्या है।

यदि दोनों गुटों के कार्यक्रम एक ही समय पर आयोजित होते हैं, तो सुरक्षा व्यवस्था सबसे अहम मुद्दा होगी। दोनों पक्षों के समर्थकों की संख्या अधिक होने की स्थिति में पुलिस को भीड़ को अलग-अलग रखने, प्रवेश और निकास के लिए अलग व्यवस्था करने तथा संभावित विवाद को रोकने के लिए अतिरिक्त बल तैनात करना पड़ सकता है।

फिलहाल लोंगोवाल में राजनीतिक सरगर्मी तेज है और 20 अगस्त का दिन प्रशासन के साथ-साथ अकाली राजनीति के लिए भी अहम रहने वाला है। एक ही अनाज मंडी में दो कार्यक्रमों को मिली अनुमति ने विवाद को और हवा दे दी है। शिरोमणि अकाली दल बादल ने जहां कार्यक्रम हर हाल में आयोजित करने का ऐलान किया है, वहीं दूसरे अकाली गुट को भी उसी स्थल की अनुमति मिलने से टकराव की आशंका को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

अब यह प्रशासन पर निर्भर करेगा कि वह दोनों पक्षों के कार्यक्रमों को किस तरह व्यवस्थित करता है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए क्या कदम उठाता है। 20 अगस्त को लोंगोवाल में होने वाले कार्यक्रमों पर न केवल अकाली दलों के समर्थकों बल्कि पूरे पंजाब की राजनीतिक निगाहें टिकी रहेंगी।