पंजाब कांग्रेस के नवनियुक्त प्रभारी सचिन पायलट मंगलवार को चंडीगढ़ पहुंचे और अपने पहले बड़े पंजाब दौरे की शुरुआत पार्टी के विरोध प्रदर्शन में शामिल होकर की। सेक्टर-15 स्थित पंजाब कांग्रेस भवन के बाहर आयोजित इस प्रदर्शन में पार्टी के प्रदेश स्तर के लगभग सभी प्रमुख नेता और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता जुटे। प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा संगरूर में गुलजार सिंह की मौत का मामला रहा, जिसे लेकर कांग्रेस ने पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई।
दोपहर करीब एक बजे सचिन पायलट प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे। उनके पहुंचते ही पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह दिखाई दिया। मंच पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी ने भी इस कार्यक्रम को खास बना दिया। लंबे समय बाद पंजाब कांग्रेस के कई ऐसे चेहरे एक ही मंच पर दिखाई दिए, जिनके बीच पिछले कुछ समय से राजनीतिक दूरी और अलग-अलग गतिविधियों को लेकर चर्चा होती रही है। पायलट की मौजूदगी में पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा और अन्य वरिष्ठ नेता एक साथ नजर आए।
पायलट के सामने जुटे कांग्रेस के प्रमुख चेहरे
सचिन पायलट के पंजाब कांग्रेस प्रभारी बनने के बाद यह उनका पहला बड़ा पंजाब दौरा है। ऐसे में पार्टी के इस विरोध प्रदर्शन को उनके लिए संगठन की जमीनी स्थिति को समझने और प्रदेश के प्रमुख नेताओं के साथ संवाद स्थापित करने के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रदर्शन में जिस तरह कांग्रेस के अलग-अलग खेमों से जुड़े वरिष्ठ नेता एक साथ दिखाई दिए, उससे पार्टी ने सार्वजनिक तौर पर एकजुटता का संदेश देने की कोशिश की।
मंच पर सचिन पायलट के दोनों ओर पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग बैठे नजर आए। उनके अलावा प्रताप सिंह बाजवा सहित पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता भी मंच पर मौजूद रहे। बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं की मौजूदगी ने प्रदर्शन को व्यापक रूप दिया।
पार्टी नेताओं ने इस दौरान पंजाब सरकार और वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा के खिलाफ नारेबाजी की। कांग्रेस नेताओं का कहना था कि संगरूर में गुलजार सिंह की मौत के मामले में जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।
चन्नी और वड़िंग एक मंच पर, लेकिन दूरी भी दिखी
प्रदर्शन की राजनीतिक तस्वीर का एक अहम पहलू यह भी रहा कि लंबे समय बाद चरणजीत सिंह चन्नी और अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग एक ही मंच पर दिखाई दिए। दोनों नेता सचिन पायलट के दोनों ओर बैठे थे, लेकिन कार्यक्रम के दौरान उनके बीच ज्यादा बातचीत होती नजर नहीं आई।
मंच पर दोनों की मौजूदगी को कांग्रेस के भीतर चल रही विभिन्न राजनीतिक धाराओं के बीच समन्वय के संदर्भ में देखा गया। हालांकि दोनों नेताओं के बीच सार्वजनिक रूप से किसी तरह का टकराव नजर नहीं आया, लेकिन उनके हाव-भाव और एक-दूसरे से सीमित बातचीत ने भी ध्यान खींचा।
कांग्रेस के लिए यह स्थिति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पंजाब में पार्टी लंबे समय से संगठनात्मक स्तर पर अलग-अलग नेताओं और गुटों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने की चुनौती से जूझती रही है। सचिन पायलट को प्रभारी बनाए जाने के बाद पार्टी नेतृत्व की कोशिश प्रदेश संगठन में समन्वय बढ़ाने की है। ऐसे में मंगलवार का प्रदर्शन उनके लिए एक ऐसा अवसर भी रहा, जहां उन्हें पार्टी के लगभग सभी प्रमुख नेताओं के साथ एक ही मंच साझा करना पड़ा।
गुलजार सिंह मामले को लेकर सरकार पर निशाना
कांग्रेस के प्रदर्शन का केंद्र संगरूर में गुलजार सिंह की मौत का मामला रहा। पार्टी नेताओं ने इस मामले को लेकर वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा पर सवाल उठाए और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
कांग्रेस का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है। पार्टी नेताओं ने सरकार से मांग की कि पूरे प्रकरण में तथ्यों को सार्वजनिक किया जाए और यदि किसी स्तर पर लापरवाही या जिम्मेदारी सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारे लगाए। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार को इस मामले में जवाब देना चाहिए। कांग्रेस ने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक मामले में उचित कार्रवाई नहीं होती, पार्टी इस मुद्दे को राजनीतिक और सार्वजनिक मंचों पर उठाती रहेगी।
पायलट के सामने संगठन की एकता की चुनौती
पंजाब कांग्रेस प्रभारी के तौर पर सचिन पायलट के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में प्रदेश संगठन को एकजुट रखना भी शामिल है। मंगलवार का प्रदर्शन इस लिहाज से उनके लिए महत्वपूर्ण रहा। एक ही मंच पर पूर्व मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष और अन्य वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी ने पार्टी की सामूहिक तस्वीर पेश की।
हालांकि मंच साझा करना और संगठनात्मक स्तर पर स्थायी एकता के बीच अंतर होता है। पंजाब कांग्रेस में अलग-अलग नेताओं की अपनी राजनीतिक पकड़ और समर्थक आधार है। ऐसे में पायलट के सामने आने वाले समय में इन नेताओं के बीच बेहतर तालमेल कायम करने की चुनौती रहेगी।
पायलट के पंजाब दौरे को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं में भी उत्सुकता दिखाई दी। उनके पहुंचने के बाद कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया और पार्टी के पक्ष में नारे लगाए। प्रदर्शन स्थल पर कार्यकर्ताओं की भीड़ के कारण माहौल काफी सक्रिय रहा।
बड़े मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी
कांग्रेस ने संकेत दिया है कि वह पंजाब सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरने की रणनीति के तहत आगे बढ़ेगी। गुलजार सिंह मामले को लेकर मंगलवार का प्रदर्शन इसी राजनीतिक अभियान का हिस्सा रहा। पार्टी नेताओं ने सरकार से जवाबदेही की मांग की और कहा कि गंभीर मामलों में सरकार को स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए।
कांग्रेस नेताओं ने वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा को निशाने पर लेते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग दोहराई। पार्टी का आरोप है कि इस मामले को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। वहीं, कांग्रेस की ओर से मामले की जांच और जिम्मेदारी तय करने पर जोर दिया गया।
मंच पर दिखी एकजुटता, आगे की राह पर नजर
मंगलवार के प्रदर्शन में सबसे अधिक राजनीतिक चर्चा कांग्रेस के बड़े नेताओं के एक साथ दिखाई देने को लेकर रही। सचिन पायलट के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में चन्नी, वड़िंग, बाजवा और अन्य वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी ने पार्टी के भीतर एकजुटता का संदेश दिया।
हालांकि मंच पर नेताओं के बीच बातचीत और आपसी दूरी की तस्वीरें भी सामने आईं। खास तौर पर चन्नी और वड़िंग के बीच सीमित संवाद चर्चा का विषय रहा। इसके बावजूद दोनों नेताओं का एक ही मंच पर मौजूद रहना कांग्रेस के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रहा।
पार्टी के लिए अब चुनौती यह होगी कि प्रदर्शन के दौरान दिखाई दी यह सामूहिक मौजूदगी संगठन के रोजमर्रा के कामकाज और भविष्य की राजनीतिक गतिविधियों में भी नजर आए। सचिन पायलट की भूमिका इस लिहाज से अहम मानी जा रही है कि वे पंजाब कांग्रेस के अलग-अलग नेताओं के बीच संवाद और समन्वय को किस तरह आगे बढ़ाते हैं।
पायलट के दौरे से पार्टी में नई सक्रियता
सचिन पायलट के प्रभारी बनने के बाद उनका यह पहला बड़ा पंजाब दौरा है। उनके दौरे की शुरुआत ही एक बड़े विरोध प्रदर्शन से हुई, जिसमें पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए। इससे प्रदेश कांग्रेस में नई राजनीतिक सक्रियता का संकेत मिला।
प्रदर्शन के दौरान पार्टी नेताओं ने सरकार के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की और गुलजार सिंह मामले में कार्रवाई की मांग की। वहीं, पायलट की मौजूदगी ने कार्यक्रम को संगठनात्मक दृष्टि से भी अहम बना दिया।
आने वाले दिनों में पायलट के सामने पंजाब कांग्रेस के नेताओं के साथ लगातार संवाद स्थापित करने, संगठनात्मक गतिविधियों को गति देने और पार्टी की विभिन्न इकाइयों के बीच तालमेल बढ़ाने की चुनौती रहेगी। मंगलवार का कार्यक्रम इस दिशा में उनकी पहली बड़ी सार्वजनिक राजनीतिक गतिविधि रहा, जहां उन्होंने प्रदेश कांग्रेस के लगभग सभी प्रमुख चेहरों को एक साथ देखा।
इस प्रदर्शन ने एक तरफ कांग्रेस को सरकार के खिलाफ अपना राजनीतिक रुख सामने रखने का मंच दिया, तो दूसरी ओर पार्टी के भीतर लंबे समय से चर्चा में रहे गुटीय समीकरणों के बीच एक साझा मंच की तस्वीर भी पेश की। अब यह देखना होगा कि मंगलवार को दिखाई दी यह एकजुटता आगे पार्टी की गतिविधियों में किस रूप में नजर आती है।




