विजय माल्या के ‘रिफंड’ दावे पर SBI का जवाब, 10,270 करोड़ की रिकवरी के बाद भी 8,752 करोड़ बकाया

विजय माल्या के ‘रिफंड’ दावे पर SBI का जवाब, 10,270 करोड़ की रिकवरी के बाद भी 8,752 करोड़ बकाया

विजय माल्या और बैंकों के बीच लंबे समय से चल रहा कर्ज और रिकवरी विवाद एक बार फिर बॉम्बे हाई कोर्ट पहुंच गया है। माल्या की ओर से यह दावा किया गया है कि बैंकों ने उनकी देनदारी से कहीं अधिक रकम और संपत्तियां हासिल कर ली हैं, इसलिए उनके खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को खत्म किया जाना चाहिए। दूसरी तरफ, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की अगुवाई वाले बैंकों के कंसोर्टियम ने अदालत के सामने अलग तस्वीर पेश की है। lenders के मुताबिक, अब तक बड़ी रकम और संपत्तियों की रिकवरी के बावजूद 31 अगस्त 2026 तक करीब 8,751.86 करोड़ रुपये की राशि अभी भी वसूल की जानी बाकी थी। यह आंकड़ा कानूनी और अन्य खर्चों को शामिल किए बिना बताया गया है।

मामले में दिलचस्प बात यह है कि बैंकों ने अदालत को यह भी बताया है कि डेट रिकवरी ऑफिसर के स्तर पर करीब 10,270 करोड़ रुपये की राशि अस्थायी रूप से रिकवर की जा चुकी है। इसके अलावा डेट रिकवरी ट्रिब्यूनल यानी DRT में मुकदमा दायर किए जाने से पहले 544.58 करोड़ रुपये की रिकवरी का भी उल्लेख किया गया है। ऐसे में माल्या की ओर से उठाया गया सवाल यह है कि अगर बैंकों और वित्तीय संस्थानों को बड़ी मात्रा में पैसा तथा उनकी अटैच संपत्तियों से प्राप्त रकम मिल चुकी है, तो फिर उनके खिलाफ बकाया रकम का दावा कैसे जारी रह सकता है। हालांकि, SBI के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम का कहना है कि केवल अब तक हासिल की गई रकम को देखकर पूरी देनदारी का हिसाब नहीं लगाया जा सकता।

2020 में हाई कोर्ट पहुंचे थे विजय माल्या

किंगफिशर एयरलाइंस के संस्थापक और यूनाइटेड ब्रुअरीज ग्रुप के पूर्व चेयरमैन विजय माल्या ने साल 2020 में बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया था। उनकी याचिका का संबंध उनके खिलाफ चल रहे आपराधिक मामलों और 2019 में स्पेशल PMLA कोर्ट द्वारा दिए गए उस आदेश से था, जिसके तहत प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा जब्त की गई संपत्तियों का इस्तेमाल बैंक कर्ज की वसूली के लिए किए जाने की अनुमति दी गई थी। अगस्त 2026 में हाई कोर्ट ने इस मामले में SBI और ED से यह स्पष्ट करने को कहा था कि क्या अटैच की गई संपत्तियों के जरिए माल्या की बैंक देनदारियां पूरी तरह खत्म हो चुकी हैं।

माल्या के वकील की ओर से अदालत में यह तर्क दिया गया कि बैंकों ने उनकी संपत्तियों से इतनी बड़ी रकम हासिल कर ली है कि मूल देनदारी से भी अधिक राशि रिकवर हो चुकी है। सितंबर में अदालत के सामने यह भी कहा गया कि कंसोर्टियम को करीब 15,000 करोड़ रुपये तक की रिकवरी हो चुकी है, जबकि मूल डिक्री की रकम लगभग 6,600 करोड़ रुपये और ब्याज अलग था। माल्या की ओर से इसी आधार पर यह दलील दी जा रही है कि अब उनके खिलाफ लंबित आपराधिक कार्यवाही को जारी रखने का औचित्य नहीं रह गया है।

हालांकि, SBI-led consortium ने अपने ताजा हलफनामे में इस गणना को स्वीकार नहीं किया है। बैंकों का कहना है कि रिकवरी की अलग-अलग मदों को एक-दूसरे से अलग करके देखना सही नहीं होगा। उनके मुताबिक, रिकवरी सर्टिफिकेट के तहत अभी भी रकम बकाया है और समय के साथ उस पर देनदारी बढ़ती रही है। यही वजह है कि जनवरी 2026 में जहां कानूनी और अन्य खर्चों को छोड़कर बकाया रकम 8,135.63 करोड़ रुपये बताई गई थी, वहीं 31 अगस्त तक यह आंकड़ा बढ़कर 8,751.86 करोड़ रुपये हो गया।

10,270 करोड़ की रिकवरी का क्या मतलब है?

बैंकों के ताजा जवाब में 10,270 करोड़ रुपये की रिकवरी का आंकड़ा सबसे ज्यादा चर्चा में है। कंसोर्टियम के अनुसार, डेट रिकवरी ऑफिसर ने लेंडर्स के बॉन्ड अंडरटेकिंग के आधार पर यह रकम अस्थायी रूप से रिकवर की थी। इसके साथ ही DRT में मामला दाखिल होने से पहले 544.58 करोड़ रुपये की रकम भी वसूल की गई थी। यानी अदालत के सामने बैंकों ने खुद बड़ी मात्रा में हुई रिकवरी का उल्लेख किया है, लेकिन उनका कहना है कि इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि माल्या की पूरी कानूनी देनदारी खत्म हो चुकी है।

बैंकों की दलील का एक अहम हिस्सा यह है कि रिकवरी सर्टिफिकेट के तहत देनदारी और अब तक प्राप्त रकम को साथ में देखा जाना चाहिए। एक वरिष्ठ बैंकर के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि संपत्तियों और रकम की अब तक हुई प्राप्ति के बावजूद कानूनी तौर पर अभी भी पर्याप्त राशि वसूल की जा सकती है। इसी वजह से माल्या की यह दलील कि बैंकों ने अपनी मूल देनदारी से अधिक रकम हासिल कर ली है, lenders के मुताबिक अंतिम स्थिति नहीं दर्शाती।

कई अटैच संपत्तियां अभी भी नहीं बिकीं

इस पूरे विवाद में केवल नकद रकम की रिकवरी ही मुद्दा नहीं है। बैंकों ने हाई कोर्ट को बताया है कि मामले में अटैच की गई कुछ शेयर होल्डिंग्स अभी भी सुरक्षित हैं और उन्हें बेचा नहीं गया है। इसका मतलब यह है कि रिकवरी की प्रक्रिया को केवल अब तक बैंक खातों में आई रकम के आधार पर खत्म मानना lenders के अनुसार उचित नहीं होगा। DRT की प्रक्रिया और अटैच की गई संपत्तियों की बिक्री या वापसी के जरिए आगे भी रिकवरी की कोशिश की जा सकती है।

यही बिंदु माल्या और बैंकों के बीच विवाद को जटिल बनाता है। एक तरफ माल्या की ओर से यह कहा जा रहा है कि उनकी संपत्तियों से हुई रिकवरी मूल देनदारी से कहीं ज्यादा है। दूसरी तरफ बैंक यह बता रहे हैं कि रिकवरी के बावजूद रिकवरी सर्टिफिकेट के तहत बड़ी रकम अभी भी बकाया है। अदालत को अब इन दोनों दावों के बीच वास्तविक वित्तीय स्थिति को रिकॉर्ड पर उपलब्ध दस्तावेजों और रिकवरी के कानूनी आधार के आधार पर देखना होगा।

ED ने 14,000 करोड़ से ज्यादा की संपत्तियों का दिया ब्यौरा

मामले में प्रवर्तन निदेशालय का पक्ष भी महत्वपूर्ण है। ED ने अदालत के सामने बताया है कि लगभग 14,131 करोड़ रुपये की संपत्तियां SBI के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम को वापस की गई हैं। सितंबर में सामने आए ED के हलफनामे के बाद इस रिकवरी को लेकर माल्या की ओर से यह सवाल और मजबूती से उठाया गया कि जब इतनी बड़ी संपत्ति बैंकों को मिल चुकी है, तो आपराधिक मामला जारी रखने की जरूरत क्यों है।

लेकिन ED का रुख यह है कि संपत्तियों की रिकवरी और आपराधिक कार्यवाही दो अलग-अलग कानूनी पहलू हैं। एजेंसी ने अदालत में यह स्पष्ट किया कि PMLA के तहत चल रही आपराधिक कार्यवाही केवल इसलिए अपने आप समाप्त नहीं हो जाती क्योंकि अटैच की गई संपत्तियों से बैंक की कुछ या बड़ी देनदारी की भरपाई हो गई है। यानी कर्ज की वसूली का सवाल और कथित मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी आपराधिक जिम्मेदारी का सवाल अलग-अलग कानूनी आधार पर तय हो सकता है।

माल्या की याचिका पर अब 13 अक्टूबर को सुनवाई

इस मामले की अगली महत्वपूर्ण सुनवाई 13 अक्टूबर 2026 को होनी है। सितंबर में ED के हलफनामे और रिकवरी से जुड़े दावों के बाद बॉम्बे हाई कोर्ट ने SBI कंसोर्टियम को नई जानकारी के आधार पर ताजा हलफनामा दाखिल करने को कहा था। इसके बाद माल्या को भी अपनी याचिका में व्यापक संशोधन करने की अनुमति दी गई। अब अदालत के सामने बैंक की ओर से बताई गई 8,751.86 करोड़ रुपये की बकाया राशि, 10,270 करोड़ रुपये की अस्थायी रिकवरी, 544.58 करोड़ रुपये की शुरुआती रिकवरी और ED द्वारा बताई गई करीब 14,131 करोड़ रुपये की संपत्तियों की वापसी जैसे आंकड़े महत्वपूर्ण होंगे।

इस बीच सितंबर में अदालत ने माल्या द्वारा सोशल मीडिया पर ED का हलफनामा साझा किए जाने पर भी टिप्पणी की थी। कोर्ट ने कहा था कि लंबित न्यायिक मामले को सोशल मीडिया के जरिए आगे बढ़ाने के बजाय कानूनी प्रक्रिया के भीतर ही दलील रखी जानी चाहिए। इसके बाद अदालत ने SBI को ED की ओर से सामने रखी गई रिकवरी संबंधी जानकारी पर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था।

फिलहाल मामले की सबसे बड़ी पेचीदगी यही है कि अलग-अलग एजेंसियों और पक्षों द्वारा बताई गई रिकवरी की रकम और बकाया देनदारी के आंकड़े अलग संदर्भों में हैं। माल्या जिस आधार पर आपराधिक कार्यवाही खत्म करने की मांग कर रहे हैं, उसमें कुल रिकवरी और मूल देनदारी का अनुपात अहम है। वहीं SBI-led consortium का कहना है कि रिकवरी सर्टिफिकेट के तहत देनदारी अभी खत्म नहीं हुई है और 31 अगस्त तक 8,751.86 करोड़ रुपये की रकम वसूल की जानी बाकी थी। अब 13 अक्टूबर की सुनवाई में हाई कोर्ट इस विवाद से जुड़े ताजा हलफनामों और दोनों पक्षों की दलीलों पर आगे विचार करेगा।