सात हफ्तों में भारत के विदेशी मुद्रा भंडार से निकले करीब 66 अरब डॉलर, सोने की कीमतों में गिरावट ने बढ़ाई चिंता

सात हफ्तों में भारत के विदेशी मुद्रा भंडार से निकले करीब 66 अरब डॉलर, सोने की कीमतों में गिरावट ने बढ़ाई चिंता

भारत की विदेशी मुद्रा संपत्ति में लगातार सातवें सप्ताह गिरावट दर्ज की गई है। देश का विदेशी मुद्रा भंडार अब 720 अरब डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे पहुंच गया है। हालांकि, इस बार गिरावट की वजह विदेशी मुद्रा आस्तियों (FCA) में कमी नहीं, बल्कि सोने के भंडार के मूल्य में आई बड़ी गिरावट रही है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 23 अक्टूबर 2026 को समाप्त सप्ताह में देश का कुल विदेशी मुद्रा भंडार 1.269 अरब डॉलर घटकर 719.748 अरब डॉलर रह गया। इससे पहले वाले सप्ताह में भी इसमें 5.011 अरब डॉलर की बड़ी कमी दर्ज की गई थी।

विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार हो रही गिरावट के कारण एक बार फिर देश के विदेशी वित्तीय संसाधनों को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। खास बात यह है कि सितंबर की शुरुआत में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार अपने रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा हुआ था। लेकिन उसके बाद से इसमें लगातार सात सप्ताह तक गिरावट का सिलसिला जारी है। इस दौरान कुल मिलाकर करीब 66 अरब डॉलर की कमी हो चुकी है। दूसरी तरफ, ताजा आंकड़ों में विदेशी मुद्रा आस्तियों में सुधार देखने को मिला है, जिससे संकेत मिलता है कि सभी प्रमुख घटकों में एक जैसी गिरावट नहीं आई है।

720 अरब डॉलर से नीचे आया देश का फॉरेक्स रिजर्व

भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से शुक्रवार को जारी साप्ताहिक आंकड़ों के अनुसार, 23 अक्टूबर को समाप्त सप्ताह में भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में 1.269 अरब डॉलर की कमी आई। इस गिरावट के बाद कुल भंडार 719.748 अरब डॉलर पर पहुंच गया। इससे पिछले सप्ताह यानी 16 अक्टूबर को समाप्त हुए सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार 5.011 अरब डॉलर कम हुआ था।

ताजा आंकड़ों में गिरावट की रफ्तार पिछले सप्ताह के मुकाबले जरूर कम हुई है, लेकिन लगातार सात सप्ताह तक भंडार में कमी आना एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश की आर्थिक मजबूती का अहम संकेतक माना जाता है। इसके जरिए देश अंतरराष्ट्रीय भुगतान, आयात और वैश्विक आर्थिक चुनौतियों से निपटने की अपनी क्षमता बनाए रखता है।

भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए विदेशी मुद्रा भंडार का विशेष महत्व है। कच्चे तेल, मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अन्य जरूरी वस्तुओं के आयात के भुगतान में विदेशी मुद्रा की जरूरत पड़ती है। ऐसे में पर्याप्त भंडार देश को अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव के दौरान वित्तीय सुरक्षा प्रदान करता है।

विदेशी मुद्रा आस्तियों में उल्टा देखने को मिला सुधार

ताजा आंकड़ों का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि जिस सप्ताह कुल विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट हुई, उसी दौरान विदेशी मुद्रा आस्तियों में बढ़ोतरी दर्ज की गई। RBI के मुताबिक, 23 अक्टूबर को समाप्त सप्ताह में फॉरेन करेंसी एसेट्स (FCA) 1.358 अरब डॉलर बढ़कर 593.205 अरब डॉलर हो गईं।

इससे पहले 16 अक्टूबर को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा आस्तियों में 5.758 अरब डॉलर की भारी कमी आई थी। ऐसे में नए आंकड़ों में हुई बढ़ोतरी को इस घटक के लिहाज से सकारात्मक माना जा सकता है।

दरअसल, भारत के कुल विदेशी मुद्रा भंडार में FCA की हिस्सेदारी सबसे महत्वपूर्ण होती है। इसमें अमेरिकी डॉलर के अलावा यूरो, ब्रिटिश पाउंड और जापानी येन जैसी दूसरी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मुद्राओं में रखी गई संपत्तियां भी शामिल होती हैं। इन संपत्तियों का मूल्य डॉलर के आधार पर आंका जाता है।

इसलिए जब डॉलर के मुकाबले अन्य विदेशी मुद्राओं की विनिमय दर में बदलाव होता है, तो उसका असर भी FCA के मूल्य पर दिखाई देता है। विदेशी मुद्रा आस्तियों में होने वाले बदलाव केवल लेनदेन पर निर्भर नहीं करते, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव भी इन्हें प्रभावित कर सकते हैं।

सोने की कीमतों में गिरावट से बिगड़ा कुल भंडार का आंकड़ा

इस बार विदेशी मुद्रा भंडार में कमी की सबसे बड़ी वजह सोने के भंडार की वैल्यू में आई गिरावट रही। RBI के आंकड़ों के मुताबिक, 23 अक्टूबर को समाप्त सप्ताह के दौरान देश के गोल्ड रिजर्व का मूल्य 2.650 अरब डॉलर घट गया। इसके बाद भारत के सोने के भंडार की कुल वैल्यू 103.150 अरब डॉलर रह गई।

इससे पिछले सप्ताह यानी 16 अक्टूबर को समाप्त सप्ताह में तस्वीर बिल्कुल अलग थी। उस दौरान सोने के भंडार के मूल्य में 706 मिलियन डॉलर की बढ़ोतरी हुई थी। लेकिन नए सप्ताह में सोने की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट ने पिछले सप्ताह की बढ़त को पलट दिया।

यह समझना जरूरी है कि विदेशी मुद्रा भंडार में शामिल सोने का मूल्य उसकी मात्रा के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में चल रही कीमतों पर भी निर्भर करता है। अगर सोने की कीमतें घटती हैं तो देश के पास सोने की मात्रा में कोई बदलाव नहीं होने के बावजूद उसके भंडार का डॉलर मूल्य कम हो सकता है।

मार्च 2026 के अंत तक भारतीय रिजर्व बैंक के पास 880.52 टन सोना मौजूद था। यह देश के कुल विदेशी मुद्रा भंडार का लगभग 16.7 प्रतिशत हिस्सा था। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के भाव में आने वाला उतार-चढ़ाव भारत के कुल फॉरेक्स रिजर्व के आंकड़ों को प्रभावित करने की क्षमता रखता है।

SDR और IMF रिजर्व में भी हुआ बदलाव

विदेशी मुद्रा भंडार के अन्य घटकों में इस सप्ताह मिला-जुला रुझान देखने को मिला। RBI के अनुसार, भारत के स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (SDR) में 27 मिलियन डॉलर की बढ़ोतरी हुई। इसके साथ ही देश का SDR भंडार बढ़कर 18.605 अरब डॉलर हो गया।

इससे पहले वाले सप्ताह में भी SDR में 30 मिलियन डॉलर की वृद्धि दर्ज की गई थी। यानी लगातार दूसरे सप्ताह इस मद में बढ़त बनी रही।

SDR यानी विशेष आहरण अधिकार अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की ओर से तैयार की गई एक अंतरराष्ट्रीय आरक्षित संपत्ति है। इसे सामान्य मुद्रा की तरह रोजमर्रा के लेनदेन में इस्तेमाल नहीं किया जाता, बल्कि सदस्य देशों के आधिकारिक विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने में इसकी भूमिका होती है।

वहीं, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के पास रखे भारत के रिजर्व में मामूली गिरावट दर्ज की गई। इस मद में 4 मिलियन डॉलर की कमी आई और इसका कुल मूल्य 4.787 अरब डॉलर रह गया। इससे पहले सप्ताह में IMF रिजर्व में 11 मिलियन डॉलर की बढ़ोतरी हुई थी।

इस तरह ताजा सप्ताह में FCA और SDR में बढ़त देखने को मिली, जबकि सोने के भंडार और IMF रिजर्व के मूल्य में कमी दर्ज की गई। इन सभी घटकों के संयुक्त प्रभाव से देश का कुल विदेशी मुद्रा भंडार नीचे आ गया।

सात सप्ताह में 65.955 अरब डॉलर की गिरावट

भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में सितंबर से लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। पिछले सात सप्ताह के आंकड़ों पर नजर डालें तो कुल 65.955 अरब डॉलर की कमी सामने आती है। यह गिरावट ऐसे समय में हुई है, जब सितंबर की शुरुआत में देश का विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचा हुआ था।

4 सितंबर 2026 को समाप्त सप्ताह तक भारत का फॉरेक्स रिजर्व लगातार 10 सप्ताह से बढ़ रहा था। इस दौरान भंडार में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई और 4 सितंबर को यह 785.706 अरब डॉलर के ऐतिहासिक उच्च स्तर पर पहुंच गया था।

इस बढ़ोतरी के पीछे FCNR(B) योजना के तहत जुटाई गई विदेशी मुद्रा को भी एक अहम वजह बताया गया था। इस विशेष अभियान के दौरान करीब 133 अरब डॉलर आए थे। इसके चलते देश के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती मिली थी।

लेकिन रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद परिस्थितियां बदल गईं। सितंबर के दूसरे सप्ताह से भंडार में गिरावट का सिलसिला शुरू हुआ और अक्टूबर के अंतिम उपलब्ध आंकड़ों तक यह जारी रहा। सात सप्ताह में हुई करीब 66 अरब डॉलर की कमी के कारण देश का रिजर्व अब अपने सितंबर के रिकॉर्ड स्तर से काफी नीचे आ चुका है।

इन सात सप्ताह में कब कितनी घटी विदेशी मुद्रा संपत्ति?

RBI के साप्ताहिक आंकड़ों के अनुसार, सितंबर से अक्टूबर के बीच विदेशी मुद्रा भंडार में अलग-अलग सप्ताह में अलग-अलग स्तर की गिरावट दर्ज की गई। कुछ सप्ताह में कमी काफी ज्यादा रही, जबकि हाल के आंकड़ों में गिरावट की गति अपेक्षाकृत कम हुई है।

  • 11 सितंबर 2026: विदेशी मुद्रा भंडार में 4.924 अरब डॉलर की कमी।
  • 18 सितंबर 2026: भंडार 14.881 अरब डॉलर घटा।
  • 25 सितंबर 2026: 18.343 अरब डॉलर की बड़ी गिरावट दर्ज हुई।
  • 2 अक्टूबर 2026: विदेशी मुद्रा भंडार में 12.952 अरब डॉलर की कमी।
  • 9 अक्टूबर 2026: भंडार 8.578 अरब डॉलर कम हुआ।
  • 16 अक्टूबर 2026: 5.011 अरब डॉलर की गिरावट दर्ज की गई।
  • 23 अक्टूबर 2026: भंडार में 1.269 अरब डॉलर की कमी हुई।

इन आंकड़ों से पता चलता है कि सितंबर के अंतिम हिस्से में विदेशी मुद्रा भंडार पर सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला था। 25 सितंबर को समाप्त सप्ताह में 18.343 अरब डॉलर की कमी दर्ज हुई, जो इस अवधि की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट थी। इसके बाद अक्टूबर में गिरावट का आकार धीरे-धीरे कम होता दिखाई दिया।

क्या विदेशी मुद्रा भंडार में कमी चिंता का विषय है?

विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट को समझने के लिए केवल कुल आंकड़े को देखना पर्याप्त नहीं है। इसके पीछे मौजूद कारणों और अलग-अलग घटकों में हुए बदलावों का विश्लेषण करना भी जरूरी है। ताजा आंकड़ों में FCA की बढ़ोतरी और गोल्ड रिजर्व की वैल्यू में गिरावट इस बात को स्पष्ट करती है कि कुल भंडार में कमी का कारण हर बार विदेशी मुद्रा की निकासी ही नहीं होता।

सोने की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बदलाव से भी देश के कुल भंडार का मूल्य ऊपर-नीचे हो सकता है। इसी तरह यूरो, पाउंड और येन जैसी मुद्राओं की डॉलर के मुकाबले स्थिति भी विदेशी मुद्रा आस्तियों के मूल्य को प्रभावित करती है।

हालांकि, लगातार सात सप्ताह की गिरावट को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार सितंबर की शुरुआत में 785.706 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर था, जबकि 23 अक्टूबर तक यह घटकर 719.748 अरब डॉलर रह गया। आने वाले सप्ताहों में RBI के आंकड़े बताएंगे कि गिरावट का यह सिलसिला थमता है या देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव आगे भी बना रहता है।