लिल्ह की जनसभा में मुख्यमंत्री ने भाजपा विधायक को घेरा, पुरुषों की बच्चेदानी के ऑपरेशन के बिल बनाने का लगाया आरोप; जियालाल कपूर की अनदेखी और भरमौर के विकास को लेकर भी साधा निशाना
भरमौर। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भरमौर के लिल्ह में आयोजित जनसभा के दौरान भाजपा पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। भाजपा की पदयात्राओं और लोकतंत्र बचाने के दावों पर पलटवार करते हुए मुख्यमंत्री ने कांग्रेस विधायकों की खरीद-फरोख्त का आरोप लगाया। उन्होंने भाजपा विधायक डा. जनक राज को भी निशाने पर लेते हुए हिमकेयर योजना में कथित अनियमितताओं, भाजपा की टिकट वितरण व्यवस्था और भरमौर के विकास से जुड़े कई सवाल उठाए। मुख्यमंत्री के भाषण से स्पष्ट हो गया कि भरमौर में राजनीतिक मुकाबला अब केवल विकास कार्यों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें स्वास्थ्य सेवाओं, पूर्व सरकार के फैसलों और भाजपा की अंदरूनी राजनीति को भी प्रमुखता से उठाया जाएगा।
लिल्ह की जनसभा में मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन के दौरान पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल में शुरू की गई हिमकेयर योजना को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि गरीब और जरूरतमंद परिवारों को मुफ्त इलाज उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से शुरू की गई योजना में कथित तौर पर ऐसी अनियमितताएं हुईं, जिनकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। इस दौरान उन्होंने पुरुषों की बच्चेदानी के ऑपरेशन के बिल बनाए जाने का उल्लेख करते हुए भाजपा विधायक डा. जनक राज पर तंज कसा। मुख्यमंत्री की इस टिप्पणी ने जनसभा में राजनीतिक चर्चा का माहौल गर्म कर दिया।
हिमकेयर योजना के बिलों पर मुख्यमंत्री ने उठाए सवाल
मुख्यमंत्री सुक्खू ने हिमकेयर योजना में कथित फर्जी बिलिंग का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इस योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाना था, लेकिन इसके संचालन में गंभीर गड़बड़ियों के आरोप सामने आए। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या पुरुषों की भी बच्चेदानी होती है, जिसका ऑपरेशन करवाया जा सकता है?
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि डा. जनक के नाम से पुरुषों की बच्चेदानी के ऑपरेशन से संबंधित बिल भी बनाए गए थे। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य जैसी संवेदनशील योजना में इस तरह की कथित अनियमितताएं गरीब लोगों के अधिकारों के साथ खिलवाड़ हैं। सरकार की योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचना चाहिए, न कि उनका इस्तेमाल गलत तरीके से किया जाना चाहिए।
उन्होंने इस मामले में उस समय आईजीएमसी के चिकित्सा अधीक्षक की भूमिका पर भी सवाल उठाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े मामलों में जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। हालांकि जनसभा में लगाए गए इन आरोपों को लेकर संबंधित पक्ष का जवाब सामने आना बाकी है।
मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे के जरिए भाजपा के शासनकाल में स्वास्थ्य व्यवस्था के संचालन पर भी सवाल खड़े किए। उनका कहना था कि जिन योजनाओं को जनता के हित में शुरू किया जाता है, उनमें पारदर्शिता और जवाबदेही सबसे जरूरी है। गरीब मरीजों के इलाज के लिए निर्धारित धनराशि का सही इस्तेमाल होना चाहिए।
जियालाल कपूर को टिकट नहीं देने पर भाजपा को घेरा
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में भरमौर की भाजपा राजनीति और टिकट वितरण व्यवस्था को भी निशाने पर लिया। उन्होंने पूर्व विधायक जियालाल कपूर का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने वर्षों तक भाजपा के लिए काम किया। पार्टी के कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी निभाई, झंडे उठाए और संगठन को मजबूत करने के लिए लगातार मेहनत की, लेकिन चुनाव के समय उन्हें ही दरकिनार कर दिया गया।
सुक्खू ने तंज कसते हुए कहा कि जियालाल कपूर लंबे समय तक पार्टी के लिए काम करते रहे, लेकिन जब विधानसभा चुनाव में टिकट देने की बारी आई तो उनकी जगह चिकित्सक डा. जनक राज को उम्मीदवार बना दिया गया। मुख्यमंत्री ने इस घटनाक्रम को भाजपा की अंदरूनी राजनीति और कार्यकर्ताओं की अनदेखी से जोड़कर पेश किया।
उन्होंने कहा कि एक ओर वर्षों तक संगठन के लिए समर्पित रहने वाले नेता को टिकट नहीं दिया गया, वहीं दूसरी ओर अस्पताल में सेवाएं दे रहे चिकित्सक ने अचानक राजनीति में प्रवेश किया और चुनाव मैदान में उतर गए। मुख्यमंत्री के इस बयान को भरमौर में भाजपा के पुराने और नए नेतृत्व के बीच राजनीतिक समीकरणों पर निशाने के रूप में देखा जा रहा है।
चिकित्सक से विधायक बने जनक राज को विकास के मुद्दों पर घेरा
मुख्यमंत्री ने डा. जनक राज के चिकित्सक से विधायक बनने के सफर का उल्लेख करते हुए उनके राजनीतिक दायित्वों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि डा. जनक राज एक न्यूरोसर्जन हैं और उन्हें गंभीर बीमारियों के उपचार का विशेषज्ञ अनुभव है। यदि उनका उद्देश्य केवल लोगों को दवाइयां लिखना और स्वास्थ्य संबंधी सलाह देना है तो यह काम वह आईजीएमसी में चिकित्सा अधीक्षक रहते हुए भी कर सकते थे।
सुक्खू ने कहा कि विधायक बनने के बाद उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी विधानसभा में अपने क्षेत्र की समस्याओं को उठाना, विकास योजनाओं के लिए प्रयास करना और जनता की जरूरतों को सरकार तक पहुंचाना है। उन्होंने सवाल किया कि भरमौर के सरकारी स्कूलों में शिक्षा की स्थिति खराब थी और अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी बनी हुई थी, तब क्षेत्र के प्रतिनिधि ने इन समस्याओं को दूर करने के लिए क्या प्रयास किए?
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब सरकारी स्कूलों में पांचवीं कक्षा के बच्चे दूसरी कक्षा की किताबें पढ़ने में कठिनाई महसूस कर रहे थे, तब शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए आवाज उठाने की जरूरत थी। इसी तरह भरमौर के अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी और स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता भी महत्वपूर्ण मुद्दे थे। उन्होंने पूछा कि इन समस्याओं के समाधान के लिए विधायक ने विधानसभा में कितनी प्रभावी पहल की?
होली-उतराला सड़क के अलावा अन्य समस्याओं पर भी जवाब मांगा
मुख्यमंत्री ने भरमौर क्षेत्र की विकास संबंधी जरूरतों का उल्लेख करते हुए होली-उतराला सड़क का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने सवाल किया कि क्षेत्र की अन्य बुनियादी समस्याओं पर पहले पर्याप्त ध्यान क्यों नहीं दिया गया और अब अचानक विकास के मुद्दे किस तरह प्रमुखता से उठाए जाने लगे हैं?
उन्होंने कहा कि किसी भी जनप्रतिनिधि का काम केवल चुनिंदा मुद्दों को लेकर राजनीति करना नहीं है, बल्कि अपने पूरे विधानसभा क्षेत्र की समस्याओं को समझना और उनके समाधान के लिए लगातार प्रयास करना है। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य आधारभूत सुविधाएं ग्रामीण क्षेत्रों के विकास की बुनियाद हैं।
मुख्यमंत्री ने भाजपा विधायक से इन मुद्दों पर जवाब देने की अपेक्षा जताई। उनका कहना था कि भरमौर जैसे दुर्गम क्षेत्र में विकास की जरूरतें अधिक हैं। यहां लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं, बेहतर सड़क संपर्क और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए विशेष प्रयासों की आवश्यकता है। इसलिए जनप्रतिनिधियों को राजनीतिक बयानबाजी के बजाय इन सवालों पर जवाबदेही दिखानी चाहिए।
भाजपा की पदयात्राओं और लोकतंत्र बचाने के दावों पर पलटवार
जनसभा में मुख्यमंत्री ने भाजपा की पदयात्राओं और लोकतंत्र बचाने के अभियान को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने भाजपा पर राजनीतिक विरोधियों को कमजोर करने और कांग्रेस विधायकों की खरीद-फरोख्त के आरोप लगाए। सुक्खू ने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा का दावा करने वाली भाजपा को पहले अपनी राजनीतिक कार्यप्रणाली पर विचार करना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की सरकार को अस्थिर करने के लिए विधायकों को तोड़ने और राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिशें की गईं। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में सरकारें जनता के जनादेश से बनती हैं और उन्हें अस्थिर करने के लिए किसी भी तरह के राजनीतिक हथकंडे अपनाना उचित नहीं है।
सुक्खू ने अपने संबोधन में भाजपा के लोकतंत्र संबंधी दावों को राजनीतिक विरोधाभास के रूप में प्रस्तुत किया। उनके अनुसार, एक तरफ भाजपा लोकतांत्रिक मूल्यों की बात करती है और दूसरी तरफ निर्वाचित सरकारों को प्रभावित करने के प्रयास करती है। उन्होंने कहा कि जनता ऐसे राजनीतिक तौर-तरीकों को समझती है और समय आने पर इसका जवाब देती है।
भरमौर में विकास और राजनीतिक जवाबदेही पर बढ़ेगी बहस
लिल्ह की जनसभा में मुख्यमंत्री का पूरा संबोधन भाजपा विधायक डा. जनक राज और पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल पर केंद्रित रहा। हिमकेयर योजना में कथित अनियमितताओं से लेकर भाजपा की टिकट वितरण व्यवस्था तक उन्होंने कई मुद्दे उठाए। साथ ही भरमौर की शिक्षा, स्वास्थ्य और सड़क सुविधाओं को लेकर विधायक की भूमिका पर सवाल खड़े किए।
मुख्यमंत्री के इस हमले से भरमौर की राजनीति में आने वाले दिनों में बयानबाजी तेज होने की संभावना है। खासकर हिमकेयर योजना से जुड़े आरोपों और भाजपा के टिकट वितरण पर की गई टिप्पणियों को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया सामने आ सकती है।
कुल मिलाकर लिल्ह की जनसभा के माध्यम से सुक्खू ने भाजपा को एक साथ कई मोर्चों पर घेरने की कोशिश की। उन्होंने स्वास्थ्य योजनाओं में कथित गड़बड़ियों, पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं की अनदेखी, विधायक की क्षेत्र के प्रति जिम्मेदारी और लोकतांत्रिक मूल्यों के सवाल को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया। मुख्यमंत्री के निशाने पर रहे डा. जनक राज के लिए अब क्षेत्र के विकास और उठाए गए आरोपों पर राजनीतिक जवाब देने की चुनौती भी खड़ी हो गई है।




