हरियाणा में पावर इंफ्रास्ट्रक्चर को मिलेगा बड़ा बूस्ट, 26 हजार से ज्यादा नए ट्रांसफॉर्मर खरीदने को मंजूरी

हरियाणा में पावर इंफ्रास्ट्रक्चर को मिलेगा बड़ा बूस्ट, 26 हजार से ज्यादा नए ट्रांसफॉर्मर खरीदने को मंजूरी

हरियाणा सरकार ने प्रदेश की बिजली व्यवस्था को अधिक मजबूत और भरोसेमंद बनाने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई हाई पावर्ड परचेज कमेटी की बैठक में बिजली निगमों से जुड़े कई महत्वपूर्ण खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इसके तहत प्रदेश में 26 हजार 161 नए ट्रांसफॉर्मर खरीदे जाएंगे। इसके अलावा बिजली कर्मचारियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लाइनमैन और सहायक लाइनमैनों के लिए हजारों सुरक्षा किट खरीदी जाएंगी। विभिन्न बिजलीघरों में गैस इंसुलेटेड स्विचगियर यानी जीआईएस-बे के निर्माण को भी हरी झंडी दी गई है।

सोमवार को हरियाणा निवास में हुई बैठक में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बिजली निगमों से संबंधित प्रस्तावों की समीक्षा की। बैठक में शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री विपुल गोयल और कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। हाई पावर्ड वर्क्स परचेज कमेटी की बैठक में बिजली ढांचे को मजबूत करने वाली विभिन्न परियोजनाओं और खरीद योजनाओं पर विस्तार से विचार किया गया।

सरकार की ओर से लिए गए फैसले का सीधा असर प्रदेश में बिजली वितरण व्यवस्था पर पड़ने की उम्मीद है। खासकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति को सुचारु बनाए रखने के लिए पर्याप्त संख्या में ट्रांसफॉर्मर उपलब्ध होना जरूरी है। गर्मी के मौसम में बिजली की मांग बढ़ने या किसी क्षेत्र में ट्रांसफॉर्मर खराब होने की स्थिति में तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराने के लिए पर्याप्त स्टॉक रखना बिजली निगमों के लिए अहम होता है। सरकार ने इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए बड़े पैमाने पर नए ट्रांसफॉर्मर खरीदने का फैसला किया है।

स्वीकृत प्रस्तावों के अनुसार दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम लिमिटेड के लिए 11 केवी/433-250 वोल्ट क्षमता वाले 400 केवीए के 100 थ्री-फेज डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफॉर्मर खरीदे जाएंगे। इसके साथ ही हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम लिमिटेड यानी एचवीपीएनएल के लिए 40/50 एमवीए क्षमता के 132/33 केवी के 28 पावर ट्रांसफॉर्मर तथा 25/33.5 एमवीए क्षमता के 66/11 केवी के 33 पावर ट्रांसफॉर्मर खरीदे जाने हैं।

इसके अलावा उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम लिमिटेड के लिए 100 केवीए क्षमता वाले 26 हजार डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफॉर्मर खरीदने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई है। इन सभी खरीद प्रस्तावों का उद्देश्य बिजली वितरण और ट्रांसमिशन नेटवर्क की क्षमता बढ़ाना तथा जरूरत के समय बिजली आपूर्ति को बनाए रखना है।

बैठक में मुख्यमंत्री ने खरीद प्रक्रिया के दौरान संबंधित कंपनियों के साथ कीमतों को लेकर विशेष रूप से बातचीत भी की। सरकार की ओर से बताया गया कि ट्रांसफॉर्मर, सुरक्षा उपकरणों और जीआईएस-बे से संबंधित कार्यों के लिए फर्मों के साथ बातचीत के बाद निर्धारित दरों से कम कीमतों पर सहमति बनाई गई। इससे सरकारी खजाने पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ को नियंत्रित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

बिजली निगमों के लिए मंजूर किए गए प्रस्तावों में केवल नए ट्रांसफॉर्मर खरीदना ही शामिल नहीं है। विभिन्न बिजलीघरों में जीआईएस-बे के निर्माण को भी मंजूरी दी गई है। इन कार्यों पर करीब 81 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। जीआईएस तकनीक से बिजलीघरों में उपलब्ध स्थान का बेहतर उपयोग करने और विद्युत नेटवर्क की विश्वसनीयता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। राज्य में बढ़ती बिजली जरूरतों के मद्देनजर इस तरह के आधुनिक विद्युत ढांचे का विस्तार महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सरकार ने बिजली व्यवस्था में काम करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा को भी खरीद योजना का अहम हिस्सा बनाया है। लाइनमैन और सहायक लाइनमैनों के लिए 5,000 से 7,500 तक टीएंडपी किट खरीदी जाएंगी। प्रत्येक किट में 14 अलग-अलग सुरक्षा और कार्य संबंधी उपकरण शामिल होंगे। बिजली की लाइनों और उपकरणों पर काम करने वाले कर्मचारियों के लिए उचित सुरक्षा उपकरण उपलब्ध होना बेहद जरूरी है, क्योंकि फील्ड में काम के दौरान उन्हें कई तरह के जोखिमों का सामना करना पड़ता है।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बैठक के दौरान स्पष्ट किया कि राज्य सरकार के लिए आम लोगों को निर्बाध और बेहतर बिजली आपूर्ति उपलब्ध कराना प्राथमिकता है। इसके लिए बिजली वितरण नेटवर्क को लगातार मजबूत किया जा रहा है। उनका जोर इस बात पर रहा कि जिन क्षेत्रों में ट्रांसफॉर्मर की आवश्यकता अधिक है, वहां पर्याप्त संख्या में उपकरण उपलब्ध कराए जाएं। साथ ही बिजली निगमों के पास आपात परिस्थितियों से निपटने के लिए अतिरिक्त बैकअप भी मौजूद होना चाहिए।

सरकार का मानना है कि पर्याप्त ट्रांसफॉर्मर उपलब्ध होने से किसी उपकरण के खराब होने पर उसे बदलने में लगने वाला समय कम किया जा सकेगा। इससे लंबे समय तक बिजली बाधित होने की समस्या को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। विशेषकर गर्मियों में जब बिजली की खपत काफी बढ़ जाती है, उस दौरान ट्रांसफॉर्मर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। ऐसे समय में पर्याप्त बैकअप व्यवस्था बिजली आपूर्ति को स्थिर रखने में अहम भूमिका निभाती है।

हरियाणा में कृषि, घरेलू और औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली की मांग लगातार महत्वपूर्ण बनी हुई है। ऐसे में केवल बिजली उत्पादन बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उत्पादित बिजली को उपभोक्ताओं तक प्रभावी तरीके से पहुंचाने के लिए वितरण और ट्रांसमिशन नेटवर्क को भी मजबूत करना जरूरी है। सरकार द्वारा स्वीकृत नए ट्रांसफॉर्मर और जीआईएस-बे इसी व्यापक बिजली ढांचे को अपग्रेड करने की दिशा में उठाए गए कदम के रूप में देखे जा रहे हैं।

औद्योगिक क्षेत्रों के लिए भी मजबूत बिजली नेटवर्क काफी महत्वपूर्ण है। बिजली आपूर्ति में बार-बार व्यवधान से उत्पादन प्रभावित होने के साथ उद्योगों की लागत बढ़ सकती है। इसलिए ट्रांसमिशन और वितरण क्षमता में सुधार से औद्योगिक गतिविधियों को भी लाभ मिलने की संभावना है। इसी तरह किसानों के लिए सिंचाई व्यवस्था और ग्रामीण उपभोक्ताओं के लिए नियमित बिजली आपूर्ति बनाए रखने में ट्रांसफॉर्मर की पर्याप्त उपलब्धता अहम है।

बैठक में सरकार की खरीद नीति का एक और महत्वपूर्ण पहलू लागत में कमी लाना रहा। मुख्यमंत्री ने संबंधित फर्मों के साथ बातचीत कर प्रस्तावित कीमतों को नीचे लाने पर जोर दिया। इससे एक ओर जहां आवश्यक उपकरणों की खरीद संभव होगी, वहीं दूसरी ओर सरकारी धन का अधिक प्रभावी उपयोग किया जा सकेगा। सरकार की ओर से कहा गया कि खरीद प्रक्रिया में गुणवत्ता और लागत दोनों को ध्यान में रखा जा रहा है।

जीआईएस-बे के निर्माण को मिली मंजूरी भी बिजली ढांचे के आधुनिकीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। बढ़ती बिजली मांग के साथ बिजलीघरों और ट्रांसमिशन नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने की जरूरत होती है। आधुनिक तकनीक आधारित विद्युत प्रतिष्ठानों से नेटवर्क के संचालन और रखरखाव को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिल सकती है।

मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि बिजली निगमों में तैनात कर्मचारियों की सुरक्षा को किसी भी स्तर पर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। फील्ड में काम करने वाले लाइनमैन और सहायक लाइनमैन बिजली व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए उन्हें आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। प्रस्तावित टीएंडपी किट की खरीद इसी दिशा में उठाया गया कदम है।

बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव अरुण कुमार गुप्ता, अतिरिक्त मुख्य सचिव विजयेंद्र कुमार, ऊर्जा विभाग की आयुक्त एवं सचिव आशीमा बराड़, उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के महानिदेशक यश गर्ग, हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक, सूचना, जनसंपर्क एवं भाषा विभाग के निदेशक डॉ. आदित्य दहिया तथा ऊर्जा विभाग के विशेष सचिव विक्रम सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

सरकार के इन फैसलों से प्रदेश की बिजली व्यवस्था को तीन स्तरों पर मजबूती मिलने की उम्मीद है। पहला, बड़े पैमाने पर नए ट्रांसफॉर्मर उपलब्ध होने से वितरण नेटवर्क में बैकअप क्षमता बढ़ेगी। दूसरा, जीआईएस-बे के निर्माण से ट्रांसमिशन और बिजलीघरों के आधुनिक ढांचे को विस्तार मिलेगा। तीसरा, फील्ड कर्मचारियों के लिए सुरक्षा किट उपलब्ध कराने से काम के दौरान उनकी सुरक्षा बेहतर होगी।

कुल मिलाकर, नायब सिंह सैनी सरकार ने बिजली आपूर्ति को अधिक स्थिर बनाने के साथ-साथ विद्युत ढांचे के आधुनिकीकरण पर जोर दिया है। 26 हजार से अधिक नए ट्रांसफॉर्मरों की खरीद, 81 करोड़ रुपये के जीआईएस-बे निर्माण और हजारों कर्मचारियों के लिए सुरक्षा किट की व्यवस्था को सरकार की व्यापक बिजली सुधार रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। यदि इन परियोजनाओं को तय समयसीमा में लागू किया जाता है तो प्रदेश के उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति में बेहतर स्थिरता मिलने के साथ आपात परिस्थितियों से निपटने की क्षमता भी मजबूत हो सकती है।