हरियाणा में चुनावी जंग अंतिम दौर में: थमा प्रचार अभियान, अब मतदाताओं तक पहुंचने की आखिरी कोशिशें तेज

हरियाणा में चुनावी जंग अंतिम दौर में: थमा प्रचार अभियान, अब मतदाताओं तक पहुंचने की आखिरी कोशिशें तेज

हरियाणा में स्थानीय निकाय और पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव को लेकर कई दिनों से जारी राजनीतिक हलचल अब मतदान के चरण में पहुंच गई है। प्रदेश के अलग-अलग शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में चुनाव प्रचार का शोर शुक्रवार शाम निर्धारित समय के साथ थम गया। प्रचार अभियान खत्म होने के बाद अब उम्मीदवारों और उनके समर्थकों के पास मतदाताओं से व्यक्तिगत संपर्क करने और अपनी अंतिम रणनीति को जमीन पर उतारने का समय है। प्रत्याशी घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क कर रहे हैं और अपने पक्ष में मतदान की अपील कर रहे हैं।

रविवार को हरियाणा के कई शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय स्तर की सरकार के प्रतिनिधियों को चुनने के लिए मतदान कराया जाएगा। इन चुनावों में नगर निगमों के महापौर और पार्षद से लेकर नगर परिषद, नगर पालिका और पंचायती राज संस्थाओं के विभिन्न पदों के लिए मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे।

राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से मतदान को लेकर आवश्यक तैयारियां पूरी किए जाने का दावा किया गया है। प्रशासन की प्राथमिकता शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और व्यवस्थित तरीके से मतदान कराना है। चुनावी मुकाबले में कई प्रमुख राजनीतिक दलों के साथ-साथ निर्दलीय उम्मीदवार भी मैदान में हैं, जिसके कारण कई सीटों पर मुकाबला रोचक और बहुकोणीय बना हुआ है।

रविवार सुबह 8 बजे से शुरू होगा मतदान

राज्य में निर्धारित चुनाव कार्यक्रम के अनुसार रविवार को सुबह 8 बजे मतदान प्रक्रिया शुरू होगी और शाम 6 बजे तक मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकेंगे। मतदान के लिए निर्धारित समय के दौरान मतदाताओं को अपने संबंधित मतदान केंद्र पर पहुंचकर चुनावी प्रक्रिया में हिस्सा लेना होगा।

इस बार चुनाव प्रक्रिया इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम के माध्यम से पूरी कराई जाएगी। इससे मतदान और मतगणना की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। चुनाव आयोग और जिला प्रशासन की ओर से मतदान केंद्रों पर आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों को जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

मतदान केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी विशेष तैयारी की गई है। संवेदनशील और अतिसंवेदनशील मतदान केंद्रों की पहचान कर वहां अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किए जाने की व्यवस्था की गई है। प्रशासन का प्रयास है कि मतदाता बिना किसी दबाव या डर के अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें।

ईवीएम पर उम्मीदवार की तस्वीर भी दिखाई देगी

इस चुनाव में मतदाताओं के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि ईवीएम पर उम्मीदवारों के नाम के साथ उनकी तस्वीर भी दिखाई देगी। इससे मतदाताओं को अपने पसंदीदा प्रत्याशी की पहचान करने में सुविधा मिलने की उम्मीद है।

स्थानीय चुनावों में कई बार एक जैसे या मिलते-जुलते नाम वाले उम्मीदवार मैदान में उतरते हैं। ऐसे में तस्वीर का विकल्प मतदाताओं को सही उम्मीदवार चुनने में मदद कर सकता है। चुनाव आयोग की ओर से मतदाताओं को मतदान से पहले ईवीएम की प्रक्रिया और उम्मीदवारों की सूची को समझने की अपील भी की गई है।

मतदाताओं को मतदान केंद्र पर पहुंचने के बाद चुनाव कर्मियों द्वारा बताए गए निर्देशों का पालन करना होगा। मतदान की गोपनीयता बनाए रखना चुनाव प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसके लिए मतदान केंद्रों पर आवश्यक व्यवस्थाएं की जाती हैं।

अलग-अलग पदों के लिए अलग रंग के मतपत्र

चुनावी प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए अलग-अलग पदों के लिए मतपत्रों के रंग अलग निर्धारित किए गए हैं। महापौर और अध्यक्ष पद के उम्मीदवारों के लिए गुलाबी रंग का मतपत्र निर्धारित किया गया है, जबकि पार्षद और वार्ड सदस्य पदों के लिए सफेद रंग का मतपत्र इस्तेमाल किया जाएगा।

रंगों की यह व्यवस्था मतदाताओं को अलग-अलग पदों के लिए मतदान करते समय पहचान करने में सहायता कर सकती है। स्थानीय निकाय चुनावों में कई पदों के लिए एक साथ मतदान होने के कारण मतदाताओं के लिए यह व्यवस्था उपयोगी मानी जा रही है।

इसके अलावा मतदाताओं को नोटा यानी ‘उपरोक्त में से कोई नहीं’ का विकल्प भी उपलब्ध रहेगा। यदि कोई मतदाता किसी भी उम्मीदवार को अपने समर्थन के योग्य नहीं मानता है, तो वह नोटा का विकल्प चुनकर अपनी असहमति दर्ज करा सकता है।

अंबाला, पंचकूला और सोनीपत में महापौर पद पर मुकाबला

इन चुनावों में अंबाला, पंचकूला और सोनीपत नगर निगमों के महापौर पद के लिए भी मतदान कराया जाएगा। इसके साथ ही संबंधित नगर निगम क्षेत्रों में पार्षद पद के उम्मीदवारों के लिए भी मतदाता मतदान करेंगे।

नगर निगम चुनावों को स्थानीय राजनीति के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। महापौर और पार्षद शहरों में सड़क, सफाई, स्ट्रीट लाइट, जल निकासी, पार्क, कचरा प्रबंधन और अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

इसी वजह से चुनाव प्रचार के दौरान उम्मीदवारों ने स्थानीय विकास और नागरिक सुविधाओं को प्रमुख मुद्दा बनाया। कई प्रत्याशियों ने अपने क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को बेहतर करने, सफाई व्यवस्था सुधारने और यातायात से जुड़ी समस्याओं को दूर करने के वादे किए हैं।

रेवाड़ी और तीन नगर पालिकाओं में भी मतदान

नगर निकाय चुनावों के तहत रेवाड़ी नगर परिषद के अध्यक्ष और वार्ड सदस्यों के लिए भी मतदान होगा। इसके अलावा सांपला, धारूहेड़ा और उकलाना नगर पालिकाओं में अध्यक्ष और वार्ड सदस्य पदों के लिए चुनाव कराया जाएगा।

इन क्षेत्रों में भी चुनाव प्रचार के दौरान उम्मीदवारों ने मतदाताओं से सीधा संपर्क किया। स्थानीय मुद्दों के साथ-साथ शहरों के विस्तार, जल निकासी, सड़क निर्माण, सफाई व्यवस्था और बाजारों से जुड़ी समस्याएं चुनावी चर्चा का हिस्सा बनीं।

नगर परिषद और नगर पालिका स्तर के चुनावों में स्थानीय समस्याओं का प्रभाव अधिक दिखाई देता है। ऐसे में मतदाता उम्मीदवारों के स्थानीय कामकाज, उनकी उपलब्धता और क्षेत्र के विकास को लेकर उनकी योजनाओं के आधार पर निर्णय ले सकते हैं।

छह खाली सीटों पर होंगे उपचुनाव

हरियाणा के कुछ नगर निकाय क्षेत्रों में खाली पड़ी सीटों को भरने के लिए भी उपचुनाव आयोजित किए जा रहे हैं। टोहाना, झज्जर, राजौंद, तरावड़ी, कनीना और साढौरा की नगर परिषदों एवं नगर पालिकाओं में छह रिक्त सीटों पर उपचुनाव होगा।

इन सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर भी राजनीतिक दलों ने पूरी ताकत लगाई है। खाली सीटों पर जीत दर्ज करना संबंधित दलों के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे स्थानीय स्तर पर पार्टी की स्थिति मजबूत हो सकती है।

उपचुनाव में कई बार स्थानीय समीकरण सामान्य चुनावों से अलग होते हैं। उम्मीदवारों की व्यक्तिगत लोकप्रियता, स्थानीय संबंध और क्षेत्रीय मुद्दे परिणामों को प्रभावित कर सकते हैं।

पंचायत चुनावों में भी ग्रामीण मतदाताओं की भूमिका अहम

शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ हरियाणा के ग्रामीण इलाकों में भी पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव को लेकर उत्साह देखने को मिल रहा है। हिसार जिले की मंडी आदमपुर और जवाहर नगर ग्राम पंचायतों के साथ कैथल जिले के गोविंदपुरा और पोलड़ गांव में आम चुनाव होंगे।

इन चुनावों में ग्राम स्तर पर प्रतिनिधियों का चयन किया जाएगा। गांवों में पंचायतें स्थानीय विकास की योजनाओं को लागू करने और ग्रामीण सुविधाओं को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

ग्रामीण मतदाताओं के लिए सड़क, पेयजल, नालियों की व्यवस्था, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं और सरकारी योजनाओं का लाभ जैसे मुद्दे अक्सर चुनावी चर्चा का हिस्सा रहते हैं। इसके अलावा गांवों में उम्मीदवारों के व्यक्तिगत संपर्क और सामाजिक संबंध भी मतदान के दौरान प्रभाव डाल सकते हैं।

528 रिक्त पदों के लिए भी होगा उपचुनाव

पंचायती राज संस्थाओं के तहत प्रदेशभर में पंच, सरपंच, पंचायत समिति और जिला परिषद की कुल 528 रिक्त सीटों पर भी उपचुनाव कराया जाएगा। इन सीटों पर होने वाले चुनाव के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में भी राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।

कई उम्मीदवार अपने समर्थकों के साथ मतदाताओं के घर पहुंच रहे हैं और व्यक्तिगत रूप से समर्थन मांग रहे हैं। स्थानीय स्तर के चुनावों में उम्मीदवार और मतदाता एक-दूसरे से सीधे जुड़े होते हैं, इसलिए अंतिम समय तक चुनावी समीकरण बदलने की संभावना बनी रहती है।

कुछ क्षेत्रों में मुकाबला सीधे दो उम्मीदवारों के बीच है, जबकि कई सीटों पर एक से अधिक प्रत्याशियों के मैदान में होने के कारण वोटों का बंटवारा भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

मतदान केंद्रों पर पहचान पत्र जरूरी

राज्य निर्वाचन आयोग ने मतदाताओं से मतदान के दौरान निर्धारित पहचान पत्र साथ रखने की अपील की है। मतदान केंद्र पर मतदाता की पहचान सुनिश्चित करने के बाद ही उसे वोट डालने की अनुमति दी जाएगी।

मतदाताओं को अपने मतदान केंद्र की जानकारी पहले से प्राप्त कर लेने और मतदान के दिन समय पर पहुंचने की सलाह दी गई है। इसके अलावा मतदान केंद्र पर चुनाव अधिकारियों द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करना भी आवश्यक होगा।

चुनाव आयोग की कोशिश है कि मतदान प्रक्रिया के दौरान किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो और सभी पात्र मतदाता स्वतंत्र रूप से अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें।

संवेदनशील बूथों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी

स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को प्राथमिकता दी है। संवेदनशील और अतिसंवेदनशील मतदान केंद्रों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया जाएगा।

चुनाव के दौरान किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से बचने के लिए प्रशासन की ओर से निगरानी बढ़ाई गई है। मतदान केंद्रों के आसपास सुरक्षा बलों की मौजूदगी सुनिश्चित करने के साथ-साथ कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए भी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

स्थानीय चुनावों में उम्मीदवारों और समर्थकों के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा अधिक होने के कारण प्रशासन का ध्यान विशेष रूप से संवेदनशील क्षेत्रों पर रहता है। अधिकारियों का प्रयास है कि मतदान प्रक्रिया पूरी तरह शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हो।

मतदान के बाद कब आएंगे नतीजे?

नगर निकाय चुनावों के लिए मतों की गिनती 13 मई को सुबह 8 बजे से निर्धारित मतगणना केंद्रों पर शुरू होगी। मतगणना पूरी होने के बाद चुनाव परिणाम जारी किए जाएंगे।

वहीं पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव परिणाम मतदान समाप्त होने के तुरंत बाद घोषित किए जाने की व्यवस्था है। इसका मतलब है कि ग्रामीण क्षेत्रों में मतदाताओं और उम्मीदवारों को परिणाम के लिए ज्यादा लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

मतगणना के दौरान चुनाव अधिकारियों की निगरानी में ईवीएम खोली जाएंगी और प्राप्त मतों के आधार पर उम्मीदवारों की जीत और हार का फैसला होगा। परिणाम आने के बाद विजयी उम्मीदवारों और उनके समर्थकों में उत्साह देखने को मिल सकता है।

जरूरत पड़ने पर 12 मई को हो सकता है पुनर्मतदान

चुनाव आयोग की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी मतदान केंद्र पर तकनीकी समस्या या किसी अन्य कारण से मतदान प्रभावित होता है, तो परिस्थितियों के अनुसार 12 मई को पुनर्मतदान कराया जा सकता है।

पुनर्मतदान की आवश्यकता तभी होगी जब किसी क्षेत्र में निर्धारित प्रक्रिया के तहत मतदान पूरा नहीं हो सके। ऐसी स्थिति में संबंधित अधिकारियों की रिपोर्ट और चुनाव आयोग के निर्णय के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी पात्र मतदाता का अधिकार प्रभावित न हो और चुनाव प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी की जा सके।

स्थानीय मुद्दों पर केंद्रित रहा चुनाव प्रचार

इस बार चुनाव प्रचार के दौरान स्थानीय समस्याओं को प्रमुखता से उठाया गया। शहरी क्षेत्रों में सड़क, सफाई, जल निकासी, पेयजल, स्ट्रीट लाइट, पार्क और यातायात जैसी समस्याएं प्रमुख मुद्दे रहीं।

वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों से जुड़े विषय, सिंचाई, सड़क, स्वास्थ्य केंद्र, स्कूल, बिजली, पानी और सरकारी योजनाओं का लाभ जैसे मुद्दों पर उम्मीदवारों ने मतदाताओं का ध्यान आकर्षित किया।

कुछ उम्मीदवारों ने युवाओं के लिए रोजगार और खेल सुविधाओं को बढ़ावा देने की बात कही, जबकि महिलाओं के लिए सुरक्षा और स्थानीय स्तर पर सुविधाओं में सुधार का मुद्दा भी चुनाव प्रचार में देखने को मिला।

डोर-टू-डोर अभियान में जुटे उम्मीदवार

प्रचार अभियान समाप्त होने के बाद अब उम्मीदवारों के पास बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम या रैलियां करने का अवसर नहीं है। ऐसे में प्रत्याशी और उनके समर्थक व्यक्तिगत संपर्क अभियान पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

डोर-टू-डोर अभियान के दौरान उम्मीदवार मतदाताओं से सीधे बातचीत कर रहे हैं। कई प्रत्याशी अपने परिवार और समर्थकों के साथ घर-घर जाकर मतदान की अपील कर रहे हैं। स्थानीय चुनावों में व्यक्तिगत संपर्क को काफी प्रभावी माना जाता है, क्योंकि उम्मीदवार सीधे अपने क्षेत्र के मतदाताओं तक पहुंच सकते हैं।

अंतिम समय में मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए उम्मीदवार अपने प्रमुख मुद्दों और वादों को दोहरा रहे हैं। वहीं मतदाता भी अलग-अलग प्रत्याशियों के दावों और स्थानीय स्तर पर उनकी छवि को ध्यान में रखते हुए अपने निर्णय पर पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।

चुनाव परिणामों पर राजनीतिक दलों की नजर

स्थानीय निकाय और पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों को केवल स्थानीय प्रशासन के गठन तक सीमित नहीं माना जा रहा है। राजनीतिक दल इन चुनावों को अपनी जमीनी संगठनात्मक क्षमता और जनसमर्थन को परखने के अवसर के रूप में भी देख रहे हैं।

नगर निगम, नगर परिषद, नगर पालिका और पंचायत स्तर पर मिलने वाली जीत किसी भी राजनीतिक दल के लिए कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने वाली हो सकती है। वहीं कमजोर प्रदर्शन से संबंधित दलों को अपनी रणनीति और संगठनात्मक व्यवस्था की समीक्षा करनी पड़ सकती है।

इसी वजह से चुनावी मैदान में उतरने वाले उम्मीदवारों के साथ-साथ राजनीतिक दलों की नजर भी मतदान प्रतिशत और परिणामों पर टिकी हुई है। रविवार को होने वाला मतदान स्थानीय स्तर पर जनता की पसंद को सामने लाएगा और इसके बाद 13 मई की मतगणना से शहरी निकायों की कई सीटों पर तस्वीर स्पष्ट हो जाएगी।