हरियाणा में नमो भारत कॉरिडोर के साथ बदलेगा शहरों का विकास मॉडल, दो नए मार्ग टीओडी नीति में शामिल

हरियाणा में नमो भारत कॉरिडोर के साथ बदलेगा शहरों का विकास मॉडल, दो नए मार्ग टीओडी नीति में शामिल

हरियाणा सरकार ने राज्य में तेज सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क के विस्तार के साथ उसके आसपास के क्षेत्रों के नियोजित विकास की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश के दो प्रमुख नमो भारत क्षेत्रीय त्वरित परिवहन सेवा गलियारों को अब परिवहन आधारित विकास नीति यानी टीओडी के दायरे में शामिल कर लिया गया है। इसके साथ ही एक पुराने प्रस्तावित गलियारे के संरेखण में भी बदलाव किया गया है।

नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग ने वर्ष 2016 में लागू परिवहन आधारित विकास नीति में तत्काल प्रभाव से संशोधन करते हुए दिल्ली-गुरुग्राम-बावल और दिल्ली-पानीपत-करनाल नमो भारत गलियारों को नीति के तहत अधिसूचित किया है। इस बदलाव का उद्देश्य भविष्य में इन परिवहन मार्गों और उनके आसपास के क्षेत्रों का विकास सार्वजनिक परिवहन को केंद्र में रखकर करना है।

सरकार के इस निर्णय से नमो भारत स्टेशनों के आसपास आवासीय, व्यावसायिक और सार्वजनिक सुविधाओं के विकास को अधिक योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने का रास्ता खुलेगा। साथ ही परिवहन नेटवर्क के आसपास अनियोजित शहरी विस्तार को नियंत्रित करने में भी मदद मिल सकती है।

2016 की टीओडी नीति में किया गया संशोधन

हरियाणा में परिवहन आधारित विकास नीति वर्ष 2016 में लागू की गई थी। इसका मूल उद्देश्य बड़े सार्वजनिक परिवहन मार्गों के आसपास ऐसी विकास व्यवस्था तैयार करना है, जिसमें लोगों को परिवहन सुविधा के नजदीक आवास, रोजगार, बाजार और जरूरी सार्वजनिक सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।

अब नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग ने इसी नीति में बदलाव करते हुए नमो भारत के दो महत्वपूर्ण गलियारों को इसके दायरे में शामिल किया है। विभाग की ओर से मंगलवार को जारी संशोधन तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।

संशोधन के तहत पहले से नीति में शामिल सराय काले खां-गुरुग्राम-शाहजहांपुर-नीमराना-बहरोड़ गलियारे के संरेखण में बदलाव किया गया है। इसके स्थान पर सराय काले खां-गुरुग्राम-बावल नमो भारत गलियारे को शामिल किया गया है।

इसके अलावा दिल्ली-पानीपत-करनाल नमो भारत गलियारे को भी पहली बार टीओडी नीति की सूची में जगह दी गई है।

क्या है परिवहन आधारित विकास नीति

परिवहन आधारित विकास नीति को आसान भाषा में समझें तो इसका उद्देश्य सार्वजनिक परिवहन और शहरी विकास को अलग-अलग दिशा में बढ़ने के बजाय एक-दूसरे से जोड़ना है।

इस मॉडल में तेज रेल, मेट्रो या क्षेत्रीय सार्वजनिक परिवहन के स्टेशन और उसके आसपास का इलाका विकास का केंद्र बनता है। ऐसे क्षेत्रों में आवासीय परियोजनाओं के साथ कार्यालय, बाजार, मनोरंजन, सार्वजनिक संस्थान और अन्य सुविधाएं इस तरह विकसित की जाती हैं कि लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए लंबी दूरी तय न करनी पड़े।

इससे निजी वाहनों पर निर्भरता कम करने और सार्वजनिक परिवहन के इस्तेमाल को बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है।

हरियाणा में नमो भारत गलियारों को टीओडी नीति में शामिल किए जाने से भविष्य में इन मार्गों के आसपास विकास योजनाएं बनाते समय स्टेशन और सार्वजनिक परिवहन की उपलब्धता को महत्वपूर्ण आधार बनाया जा सकेगा।

गुरुग्राम-बावल कॉरिडोर में बदला गया पुराना प्रस्ताव

सरकार के ताजा संशोधन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा गुरुग्राम से जुड़े नमो भारत गलियारे का संरेखण बदलना है। पहले टीओडी नीति में सराय काले खां-गुरुग्राम-शाहजहांपुर-नीमराना-बहरोड़ गलियारा शामिल था।

अब इस गलियारे को संशोधित करते हुए सराय काले खां-गुरुग्राम-बावल नमो भारत गलियारे को नीति में शामिल किया गया है। यानी नीति में दर्ज पुराने मार्ग को बदलकर हरियाणा के हिस्से में गुरुग्राम से बावल तक के क्षेत्र को केंद्र में रखा गया है।

इस बदलाव का महत्व इसलिए भी है क्योंकि गुरुग्राम और बावल के बीच का क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहा है। गुरुग्राम पहले से ही प्रमुख शहरी और रोजगार केंद्र है, जबकि बावल और आसपास के क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियां महत्वपूर्ण हैं।

नमो भारत और टीओडी नीति को एक साथ जोड़ने से इन क्षेत्रों के भविष्य के विकास को सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क के अनुरूप आकार देने का अवसर मिलेगा।

एचएमआरटीसी की सिफारिश पर बदलाव

गुरुग्राम से बावल तक नमो भारत गलियारे के संरेखण में किया गया बदलाव हरियाणा मास रैपिड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन की सिफारिश के आधार पर किया गया है।

इसका मतलब है कि राज्य सरकार ने परिवहन नेटवर्क से संबंधित एजेंसी की सिफारिश को ध्यान में रखते हुए टीओडी नीति में संशोधन किया है। अब विकास योजनाओं और परिवहन व्यवस्था के बीच बेहतर तालमेल बनाने की कोशिश की जाएगी।

गुरुग्राम-बावल मार्ग के आसपास आने वाले क्षेत्रों में भविष्य की योजनाओं के दौरान परिवहन गलियारे को एक महत्वपूर्ण आधार के रूप में देखा जा सकेगा। इससे आवासीय और व्यावसायिक विकास के साथ परिवहन सुविधाओं के विस्तार को भी जोड़ने की संभावना बढ़ेगी।

दिल्ली-पानीपत-करनाल मार्ग पहली बार नीति में शामिल

टीओडी नीति में दूसरा बड़ा बदलाव दिल्ली-पानीपत-करनाल नमो भारत गलियारे को शामिल करना है। यह गलियारा हरियाणा के प्रमुख शहरी और औद्योगिक क्षेत्रों को दिल्ली से जोड़ने वाले क्षेत्रीय परिवहन नेटवर्क का हिस्सा है।

इस मार्ग को टीओडी नीति में शामिल करने के बाद इसके स्टेशन और आसपास के इलाके भविष्य की विकास योजनाओं में विशेष महत्व हासिल कर सकते हैं।

पानीपत और करनाल दोनों ही हरियाणा के महत्वपूर्ण शहर हैं। इन शहरों के आसपास पहले से आवासीय, व्यावसायिक और औद्योगिक गतिविधियां मौजूद हैं। ऐसे में नमो भारत जैसे तेज सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क के साथ विकास को जोड़ने से शहरी विस्तार को अधिक व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने का अवसर मिलेगा।

स्टेशन के आसपास बदल सकती है विकास की तस्वीर

टीओडी नीति का सबसे बड़ा प्रभाव परिवहन स्टेशनों के आसपास दिखाई देने की संभावना है। सामान्य तौर पर बड़े परिवहन मार्ग विकसित होने के बाद उनके आसपास तेजी से आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ती हैं। यदि यह विस्तार बिना योजना के हो तो यातायात, पार्किंग, पैदल आवागमन और सार्वजनिक सुविधाओं पर दबाव बढ़ सकता है।

परिवहन आधारित विकास मॉडल में पहले से यह योजना बनाई जाती है कि स्टेशन के आसपास किस प्रकार की गतिविधियां होंगी और लोगों के आवागमन के लिए कौन-कौन सी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

नमो भारत गलियारों को टीओडी नीति में शामिल करने से सरकार को ऐसे क्षेत्रों में विकास को एक व्यापक योजना के तहत आगे बढ़ाने का अवसर मिलेगा।

आवास और रोजगार केंद्रों को परिवहन से जोड़ने पर जोर

टीओडी मॉडल में केवल परिवहन स्टेशन बनाना ही उद्देश्य नहीं होता। इसके साथ आसपास के क्षेत्रों में रोजगार और आवास के अवसर विकसित करने पर भी ध्यान दिया जाता है।

गुरुग्राम-बावल क्षेत्र में औद्योगिक और रोजगार गतिविधियों को देखते हुए यह मॉडल महत्वपूर्ण हो सकता है। इसी तरह पानीपत और करनाल में भी स्टेशन के आसपास आवासीय तथा व्यावसायिक विकास को सार्वजनिक परिवहन के साथ जोड़ा जा सकता है।

इससे ऐसे क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को अपने कार्यस्थल या बाजार तक पहुंचने के लिए निजी वाहन पर कम निर्भर रहना पड़ सकता है।

अनियोजित शहरी फैलाव पर लग सकती है लगाम

तेजी से बढ़ते शहरों के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक अनियोजित शहरी विस्तार है। जब नए आवासीय क्षेत्र, बाजार और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बिना सार्वजनिक परिवहन की योजना के विकसित होते हैं तो बाद में सड़कों और अन्य बुनियादी सुविधाओं पर दबाव बढ़ता है।

टीओडी नीति का उद्देश्य विकास की दिशा पहले से तय करना है। नमो भारत के स्टेशनों को विकास के केंद्र के रूप में देखते हुए आसपास की भूमि के उपयोग और बुनियादी सुविधाओं की योजना बनाई जा सकती है।

इससे परिवहन और शहरी विकास के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने में मदद मिल सकती है।

निजी वाहनों पर निर्भरता कम करने की कोशिश

परिवहन आधारित विकास का एक प्रमुख उद्देश्य सार्वजनिक परिवहन को लोगों की रोजमर्रा की यात्रा का महत्वपूर्ण माध्यम बनाना है। यदि घर, कार्यालय, बाजार और अन्य सुविधाएं सार्वजनिक परिवहन स्टेशनों के आसपास उपलब्ध हों तो लोगों को हर छोटी-बड़ी जरूरत के लिए निजी वाहन का इस्तेमाल करने की आवश्यकता कम हो सकती है।

नमो भारत जैसे तेज क्षेत्रीय परिवहन नेटवर्क के साथ टीओडी नीति लागू होने से यात्रियों के लिए स्टेशन तक पहुंचना और स्टेशन से अपने गंतव्य तक जाना भी विकास योजना का हिस्सा बन सकता है।

इससे क्षेत्रीय स्तर पर यातायात का दबाव कम करने और सार्वजनिक परिवहन के इस्तेमाल को बढ़ावा देने में सहायता मिलने की संभावना है।

गुरुग्राम और करनाल-पानीपत क्षेत्र पर विशेष असर

सरकार के इस संशोधन का प्रभाव दो प्रमुख क्षेत्रों पर पड़ सकता है। पहला गुरुग्राम-बावल क्षेत्र है, जहां शहरी और औद्योगिक गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं। दूसरा दिल्ली-पानीपत-करनाल मार्ग है, जिसमें हरियाणा के कई महत्वपूर्ण शहर शामिल हैं।

इन क्षेत्रों में नमो भारत नेटवर्क के साथ टीओडी नीति के लागू होने से भविष्य की टाउन प्लानिंग में परिवहन को केंद्रीय आधार बनाया जा सकेगा।

आने वाले समय में स्टेशन के आसपास भूमि उपयोग, आवासीय विकास, व्यावसायिक गतिविधियों और सार्वजनिक सुविधाओं से संबंधित योजनाओं में बदलाव देखने को मिल सकता है।

परिवहन और विकास को एक ही योजना में जोड़ने की कोशिश

हरियाणा सरकार का यह संशोधन केवल परिवहन मार्गों की सूची में बदलाव तक सीमित नहीं है। इसका व्यापक उद्देश्य परिवहन बुनियादी ढांचे और शहरी विकास को एक-दूसरे से जोड़ना है।

एक तरफ नमो भारत क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करेगा, वहीं दूसरी तरफ टीओडी नीति इन मार्गों के आसपास होने वाले विकास को योजनाबद्ध स्वरूप देने का आधार उपलब्ध कराएगी।

सरकार के ताजा फैसले के बाद अब गुरुग्राम-बावल और पानीपत-करनाल क्षेत्र में भविष्य की विकास योजनाओं में नमो भारत गलियारों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाएगी। इन क्षेत्रों में आवास, रोजगार, व्यापार और सार्वजनिक सुविधाओं का विस्तार किस तरह होता है, यह आने वाले वर्षों में इस परिवहन आधारित विकास मॉडल की प्रभावशीलता को तय करेगा।

फिलहाल, नीति में किए गए संशोधन से राज्य के दो प्रमुख नमो भारत गलियारों को योजनाबद्ध शहरी विकास के ढांचे में जगह मिल गई है। इससे हरियाणा में सार्वजनिक परिवहन के साथ शहरों और कस्बों के विकास को जोड़ने की दिशा में नई योजना व्यवस्था तैयार होने का रास्ता साफ हुआ है।