हरियाणा में प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन पर नई सुविधा, आधार से पहचान होगी आसान; PMAY-U 2.0 लाभार्थियों को स्टांप शुल्क में बड़ी राहत

हरियाणा में प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन पर नई सुविधा, आधार से पहचान होगी आसान; PMAY-U 2.0 लाभार्थियों को स्टांप शुल्क में बड़ी राहत

हरियाणा सरकार ने जमीन और मकान की खरीद-बिक्री से जुड़ी प्रक्रियाओं को अधिक सुविधाजनक और पारदर्शी बनाने के लिए दो अहम फैसले लिए हैं। पहले फैसले के तहत जमीन की खरीद-बिक्री के दौरान खरीदार, विक्रेता और गवाह की पहचान सत्यापित करने के लिए आधार प्रमाणीकरण की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। यह व्यवस्था पूरी तरह स्वैच्छिक रहेगी और आधार धारक की सहमति के बाद ही इसका इस्तेमाल किया जा सकेगा।

दूसरे फैसले में प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 यानी पीएमएवाई-यू 2.0 के तहत पंजीकृत 60 वर्ग मीटर तक के मकानों के हस्तांतरण विलेख पर स्टांप शुल्क घटाकर महज 500 रुपये प्रति विलेख कर दिया गया है। सरकार के दोनों निर्णय राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से जारी अधिसूचनाओं के माध्यम से लागू किए गए हैं और इन्हें हरियाणा सरकार के राजपत्र में प्रकाशित किया जा चुका है।

आधार प्रमाणीकरण से जुड़ी अधिसूचना के अनुसार, प्रदेश में किसी भूखंड की खरीद या बिक्री के समय संबंधित पक्षों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए आधार आधारित प्रमाणीकरण का विकल्प उपलब्ध रहेगा। इसके लिए ‘हां/नहीं प्रमाणीकरण’ अथवा ई-केवाईसी प्रमाणीकरण सुविधा का इस्तेमाल किया जा सकता है।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि आधार आधारित पहचान सत्यापन अनिवार्य नहीं होगा। यदि कोई खरीदार, विक्रेता या गवाह आधार प्रमाणीकरण नहीं करवाना चाहता है तो उसे इसके लिए बाध्य नहीं किया जा सकेगा। इसी तरह यदि कोई व्यक्ति किसी कारण से आधार प्रमाणीकरण करवाने में सक्षम नहीं है, तो केवल इस आधार पर उसे संबंधित सेवा से वंचित नहीं किया जाएगा।

ऐसे मामलों में संबंधित व्यक्ति की पहचान स्थापित करने के लिए वैकल्पिक और व्यावहारिक दस्तावेज या माध्यम उपलब्ध कराने होंगे। सरकार ने अधिसूचना में कुछ वैकल्पिक पहचान दस्तावेजों का भी उल्लेख किया है। इनमें भारतीय पासपोर्ट, ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया यानी ओसीआई कार्ड और परिवार पहचान पत्र यानी पीपीपी शामिल हैं।

इस व्यवस्था के पीछे सरकार का उद्देश्य जमीन की खरीद-बिक्री के दौरान पहचान प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और डिजिटल माध्यम से सुगम बनाना है। आधार प्रमाणीकरण का विकल्प उपलब्ध होने से उन लोगों को सुविधा मिल सकती है, जो अपनी पहचान को ऑनलाइन या इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से सत्यापित करवाना चाहते हैं।

हालांकि, सरकार ने नागरिकों की सहमति को इस पूरी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया है। आधार संख्या धारक की अनुमति के बिना प्रमाणीकरण नहीं किया जाएगा। यानी जमीन की रजिस्ट्री या भूखंड के हस्तांतरण के दौरान आधार आधारित पहचान सत्यापन को अनिवार्य शर्त के रूप में लागू नहीं किया गया है।

हरियाणा सरकार को आधार प्रमाणीकरण की यह अनुमति केंद्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की ओर से भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण यानी यूआईडीएआई से परामर्श के बाद मिली है। इसके बाद राज्य के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने संबंधित अधिसूचना जारी की।

यह अनुमति ‘सुशासन के लिए आधार प्रमाणीकरण (सामाजिक कल्याण, नवाचार, ज्ञान) नियम, 2020’ के तहत दी गई है। इसके आधार पर राज्य में जमीन की खरीद-बिक्री से जुड़ी पहचान प्रक्रिया में आधार प्रमाणीकरण को एक अतिरिक्त विकल्प के तौर पर शामिल किया गया है।

दूसरा महत्वपूर्ण फैसला प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 से जुड़े मकानों के लिए लिया गया है। सरकार ने इस योजना के तहत पंजीकृत 60 वर्ग मीटर तक के मकानों के हस्तांतरण विलेख पर स्टांप शुल्क की राशि घटाकर 500 रुपये प्रति विलेख तय कर दी है।

इस निर्णय का सीधा लाभ उन लोगों को मिलेगा, जो पीएमएवाई-यू 2.0 के तहत पंजीकृत लाभार्थी हैं और योजना के दायरे में आने वाले 60 वर्ग मीटर तक के मकान का हस्तांतरण करवा रहे हैं। इससे पात्र लाभार्थियों पर संपत्ति हस्तांतरण के दौरान आने वाला वित्तीय बोझ कम होगा।

सरकार ने यह भी साफ किया है कि 500 रुपये का स्टांप शुल्क सभी 60 वर्ग मीटर या उससे छोटे मकानों पर लागू नहीं होगा। केवल मकान का क्षेत्रफल 60 वर्ग मीटर तक होना इस रियायत के लिए पर्याप्त नहीं है। इसके लिए मकान का पीएमएवाई-यू 2.0 के तहत पंजीकृत होना और हस्तांतरिती का इस योजना का पंजीकृत लाभार्थी होना जरूरी है।

रियायती स्टांप शुल्क का लाभ लेने के लिए लाभार्थी को संबंधित प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना होगा। यह प्रमाणपत्र सर्वजन आवास विभाग यानी डीएचएफए या उसके द्वारा नामित सक्षम प्राधिकारी की ओर से जारी किया गया होना चाहिए। प्रमाणपत्र में यह पुष्टि होनी चाहिए कि संबंधित व्यक्ति पीएमएवाई-यू 2.0 के तहत पंजीकृत लाभार्थी है।

सरकार ने यह फैसला 10 अगस्त को जारी आदेश के माध्यम से किया। आदेश में बताया गया है कि भारतीय स्टांप अधिनियम, 1899 की धारा 9 के तहत प्राप्त शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए यह रियायत प्रदान की गई है। 500 रुपये की निर्धारित दर अधिनियम की अनुसूची 1-ए के अनुच्छेद 23(क) के तहत लागू होगी।

इस फैसले से शहरी क्षेत्रों में प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थियों को मकान के हस्तांतरण के समय होने वाले खर्च में राहत मिलने की उम्मीद है। विशेष रूप से सीमित आय वाले उन परिवारों के लिए यह कदम महत्वपूर्ण हो सकता है, जिनके लिए संपत्ति से जुड़े अतिरिक्त शुल्क भी आर्थिक बोझ बन सकते हैं।

दोनों फैसलों को अलग-अलग नजरिए से देखा जाए तो सरकार ने एक तरफ संपत्ति संबंधी प्रक्रियाओं में डिजिटल पहचान का विकल्प उपलब्ध कराया है, जबकि दूसरी ओर आवास योजना के पात्र लाभार्थियों को आर्थिक राहत दी है। आधार प्रमाणीकरण व्यवस्था का इस्तेमाल पहचान सत्यापन को आसान बनाने के लिए किया जा सकेगा, जबकि स्टांप शुल्क में कमी का उद्देश्य पीएमएवाई-यू 2.0 के लाभार्थियों को सीधे वित्तीय राहत देना है।

जमीन की खरीद-बिक्री में पहचान सत्यापन एक महत्वपूर्ण चरण होता है। खरीदार, विक्रेता और गवाह की सही पहचान सुनिश्चित करना संपत्ति लेन-देन की प्रक्रिया का अहम हिस्सा है। अब इच्छुक व्यक्ति आधार के माध्यम से अपनी पहचान सत्यापित करवा सकेंगे। इससे डिजिटल माध्यम से पहचान की पुष्टि करने वाले लोगों के लिए प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक हो सकती है।

हालांकि, आधार को लेकर सरकार ने स्पष्ट सुरक्षा प्रावधान भी रखा है। किसी व्यक्ति द्वारा आधार प्रमाणीकरण से इनकार करने पर उसे सेवा से वंचित नहीं किया जा सकता। इसके अलावा तकनीकी या अन्य कारणों से आधार आधारित प्रमाणीकरण संभव न होने की स्थिति में भी वैकल्पिक पहचान व्यवस्था उपलब्ध कराना संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी।

वैकल्पिक दस्तावेजों में पासपोर्ट, ओसीआई कार्ड और परिवार पहचान पत्र को शामिल किए जाने से उन लोगों के लिए भी पहचान सत्यापन का रास्ता खुला रहेगा, जो आधार आधारित प्रक्रिया का इस्तेमाल नहीं कर पाते या नहीं करना चाहते।

पीएमएवाई-यू 2.0 से जुड़े आदेश में भी पात्रता को स्पष्ट रूप से सीमित रखा गया है, ताकि स्टांप शुल्क की रियायत का लाभ केवल योजना के वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचे। इसके लिए सक्षम विभाग या प्राधिकरण का प्रमाणपत्र जरूरी होगा। इससे सामान्य संपत्ति हस्तांतरण और योजना के तहत मिलने वाली विशेष रियायत के बीच स्पष्ट अंतर बना रहेगा।

सरकार के इन फैसलों का प्रभाव संपत्ति पंजीकरण और किफायती आवास, दोनों क्षेत्रों में देखने को मिल सकता है। आधार प्रमाणीकरण का विकल्प रजिस्ट्री प्रक्रिया में पहचान सत्यापन को डिजिटल बनाने की दिशा में एक कदम है, जबकि 500 रुपये का स्टांप शुल्क पीएमएवाई-यू 2.0 के पात्र लाभार्थियों के लिए संपत्ति हस्तांतरण को कम खर्चीला बना सकता है।

राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से जारी दोनों फैसले अब सरकारी राजपत्र में प्रकाशित हो चुके हैं। इससे इनके संबंध में आधिकारिक व्यवस्था स्पष्ट हो गई है। संपत्ति से जुड़े लेन-देन में आधार प्रमाणीकरण का इस्तेमाल करने वाले लोगों को अपनी सहमति देनी होगी, जबकि पीएमएवाई-यू 2.0 के लाभार्थियों को स्टांप शुल्क में रियायत के लिए निर्धारित प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना होगा।

इस तरह हरियाणा सरकार ने जमीन की खरीद-बिक्री में पहचान सत्यापन के लिए एक वैकल्पिक डिजिटल सुविधा देने के साथ-साथ शहरी आवास योजना के पात्र परिवारों के लिए वित्तीय राहत का रास्ता खोला है। दोनों फैसलों का उद्देश्य संपत्ति से जुड़ी प्रक्रियाओं को अधिक सुविधाजनक बनाने और पात्र नागरिकों को लक्षित राहत उपलब्ध कराने की दिशा में आगे बढ़ना है।