हरियाणा सरकार ने राज्य में सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने, भूजल प्रदूषण की आशंका कम करने और जल संसाधनों के बेहतर संरक्षण के उद्देश्य से वॉटर वर्क्स की संरचनाओं के व्यापक आधुनिकीकरण की दिशा में बड़ा निर्णय लिया है। जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की योजनाओं की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को बताया गया कि राज्यभर के 446 वॉटर वर्क्स टैंकों को चरणबद्ध तरीके से आधुनिक आरसीसी (रीइन्फोर्स्ड सीमेंट कंक्रीट) लाइनिंग से सुसज्जित किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य पेयजल भंडारण प्रणाली को अधिक मजबूत, टिकाऊ और सुरक्षित बनाना है।
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में विभागीय अधिकारियों ने बताया कि मौजूदा समय में कई वॉटर वर्क्स टैंकों में पारंपरिक ईंट लाइनिंग का उपयोग किया गया है। समय के साथ इन संरचनाओं में दरारें आने, रिसाव होने और बाहरी स्रोतों से दूषित तत्वों के प्रवेश की संभावना बनी रहती है। इसके चलते पेयजल की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। इन चुनौतियों को देखते हुए सरकार ने आधुनिक आरसीसी लाइनिंग तकनीक अपनाने का निर्णय लिया है, जिससे जल भंडारण प्रणाली अधिक सुरक्षित और लंबे समय तक उपयोगी बनी रहेगी।
अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को जानकारी दी कि इस परियोजना की शुरुआत वर्ष 2026-27 में पहले चरण के तहत की जाएगी। शुरुआती चरण में हिसार, रोहतक, झज्जर, भिवानी और चरखी दादरी जिलों के 44 वॉटर वर्क्स टैंकों को आरसीसी लाइनिंग में परिवर्तित किया जाएगा। इन स्थानों पर पुरानी ईंट लाइनिंग को हटाकर आधुनिक कंक्रीट संरचना विकसित की जाएगी, जिससे पानी के रिसाव को रोका जा सके और भूजल के संपर्क से पेयजल की गुणवत्ता पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को कम किया जा सके।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी निर्माण कार्य निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरे किए जाएं और गुणवत्ता के साथ किसी भी प्रकार का समझौता न किया जाए। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक उपयोग की परियोजनाओं में टिकाऊ निर्माण और उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित करना सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए, ताकि लोगों को लंबे समय तक उसका लाभ मिल सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में लगातार बढ़ती जल संबंधी चुनौतियों को देखते हुए केवल पेयजल आपूर्ति बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जल संरक्षण और जल प्रबंधन को भी समान महत्व देना होगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जहां भी संभव हो, जल संरचनाओं को आधुनिक तकनीक से मजबूत बनाया जाए और भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए योजनाओं का क्रियान्वयन किया जाए।
समीक्षा बैठक में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में सीवरेज व्यवस्था तथा अपशिष्ट जल प्रबंधन को और प्रभावी बनाने पर भी विस्तार से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच सीवरेज नेटवर्क को मजबूत करना आवश्यक है ताकि पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ स्वच्छता के मानकों को भी बेहतर बनाया जा सके। उन्होंने विभाग को निर्देश दिए कि सीवरेज और जल निकासी से जुड़ी परियोजनाओं की नियमित निगरानी की जाए और लंबित कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए।
बैठक में शोधित अपशिष्ट जल (ट्रीटेड वेस्टवॉटर) के अधिकतम उपयोग पर भी विशेष जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उपचारित पानी का उपयोग सिंचाई, औद्योगिक गतिविधियों, हरित क्षेत्रों के रखरखाव और अन्य गैर-पीने योग्य कार्यों में बढ़ाया जाना चाहिए। इससे एक ओर ताजे पानी पर निर्भरता कम होगी और दूसरी ओर जल संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने अधिकारियों को इस दिशा में ठोस कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।
भूजल स्तर में लगातार हो रही गिरावट को देखते हुए मुख्यमंत्री ने उन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने की बात कही जहां पानी की उपलब्धता सीमित है। उन्होंने निर्देश दिए कि ऐसे इलाकों में नहरी पानी के माध्यम से पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ किया जाए, ताकि लोगों की निर्भरता भूजल पर कम हो सके और भविष्य में जल संकट की स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।
अधिकारियों ने बैठक में बताया कि राज्य सरकार जल अवसंरचना को आधुनिक बनाने के साथ-साथ ऐसी तकनीकों को अपनाने पर भी काम कर रही है, जो लंबे समय तक टिकाऊ साबित हों। आरसीसी लाइनिंग वाली संरचनाएं पारंपरिक निर्माण की तुलना में अधिक मजबूत मानी जाती हैं और इनमें रखरखाव की आवश्यकता भी अपेक्षाकृत कम होती है। इससे जल भंडारण प्रणाली की कार्यक्षमता बढ़ने के साथ-साथ संचालन लागत में भी कमी आने की संभावना है।
सरकार का मानना है कि वॉटर वर्क्स टैंकों के आधुनिकीकरण से पेयजल वितरण व्यवस्था अधिक विश्वसनीय बनेगी। रिसाव कम होने से जल की बर्बादी पर नियंत्रण मिलेगा और जल स्रोतों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा। साथ ही, आधुनिक संरचनाओं के कारण जल गुणवत्ता बनाए रखने में भी सहायता मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि राज्य की सभी जल आपूर्ति परियोजनाओं की नियमित समीक्षा की जाए और जिन योजनाओं पर कार्य चल रहा है, उन्हें तय समय के भीतर पूरा करने के लिए प्रभावी निगरानी व्यवस्था विकसित की जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि भविष्य में जल संरक्षण, अपशिष्ट जल के पुनः उपयोग और आधुनिक जल प्रबंधन प्रणालियों को सरकार की विकास रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जाए।
राज्य सरकार की यह पहल केवल आधारभूत ढांचे के उन्नयन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने, भूजल संसाधनों के संरक्षण, जल गुणवत्ता में सुधार और दीर्घकालिक जल प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करना भी है। चरणबद्ध तरीके से 446 वॉटर वर्क्स टैंकों के आधुनिकीकरण की योजना को इसी व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा माना जा रहा है, जिससे आने वाले वर्षों में हरियाणा की पेयजल व्यवस्था को अधिक सक्षम और टिकाऊ बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।



