हरियाणा सरकार ने राज्य में सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण पेयजल उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार ने सार्वजनिक जल आपूर्ति व्यवस्था को आधुनिक बनाने के उद्देश्य से राज्यभर के 446 वॉटर वर्क्स टैंकों को चरणबद्ध तरीके से आरसीसी (रीइन्फोर्स्ड सीमेंट कंक्रीट) लाइनिंग से सुसज्जित करने का निर्णय लिया है। इस परियोजना का मकसद केवल पुराने जल भंडारण ढांचे को मजबूत बनाना नहीं है, बल्कि पेयजल की गुणवत्ता में सुधार, जल रिसाव पर नियंत्रण, भूजल प्रदूषण की संभावना कम करना और भविष्य की बढ़ती जल आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए टिकाऊ जल अवसंरचना विकसित करना भी है।
राज्य सरकार का मानना है कि जल संरक्षण और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना आने वाले वर्षों की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में से एक है। इसी सोच के साथ जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (Public Health Engineering Department) को राज्यभर के जल भंडारण ढांचे का व्यापक आधुनिकीकरण करने की जिम्मेदारी दी गई है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने की योजनाओं की समीक्षा
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अधिकारियों ने पेयजल परियोजनाओं की प्रगति की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। बैठक में बताया गया कि राज्य के अनेक वॉटर वर्क्स टैंक कई वर्षों पहले बनाए गए थे और उनमें पारंपरिक ईंट लाइनिंग का उपयोग किया गया था।
समय बीतने के साथ इन संरचनाओं में दरारें आने, पानी के रिसाव और बाहरी तत्वों के प्रवेश जैसी समस्याएं सामने आने लगी हैं। इससे न केवल जल भंडारण क्षमता प्रभावित होती है बल्कि पेयजल की गुणवत्ता पर भी असर पड़ने की आशंका बनी रहती है। इन समस्याओं को स्थायी रूप से दूर करने के लिए आधुनिक आरसीसी लाइनिंग अपनाने का निर्णय लिया गया है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि परियोजना के प्रत्येक चरण में गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए और सभी कार्य निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरे किए जाएं।
क्यों जरूरी है RCC लाइनिंग?
जल विशेषज्ञों के अनुसार पारंपरिक ईंट लाइनिंग की तुलना में आरसीसी लाइनिंग अधिक मजबूत, टिकाऊ और सुरक्षित मानी जाती है। इससे पानी का रिसाव काफी हद तक रुक जाता है और जल भंडारण क्षमता लंबे समय तक बनी रहती है।
आरसीसी लाइनिंग के प्रमुख लाभ इस प्रकार हैं-
- पानी के रिसाव में उल्लेखनीय कमी।
- बाहरी दूषित तत्वों के प्रवेश की संभावना कम।
- जल गुणवत्ता को लंबे समय तक बनाए रखने में सहायता।
- संरचना की आयु में वृद्धि।
- रखरखाव पर कम खर्च।
- जल भंडारण प्रणाली की विश्वसनीयता में सुधार।
- भूजल प्रदूषण के जोखिम में कमी।
सरकार का मानना है कि यह तकनीक भविष्य की जल आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए अधिक उपयुक्त विकल्प साबित होगी।
पहले चरण में किन जिलों में होगा काम?
परियोजना का पहला चरण वित्तीय वर्ष 2026-27 में शुरू किया जाएगा।
इस चरण में पांच प्रमुख जिलों के 44 वॉटर वर्क्स टैंकों का आधुनिकीकरण किया जाएगा।
इन जिलों में शामिल हैं—
- हिसार
- रोहतक
- झज्जर
- भिवानी
- चरखी दादरी
इन स्थानों पर पुरानी ईंट लाइनिंग हटाकर आधुनिक आरसीसी संरचना विकसित की जाएगी। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से राज्य के अन्य जिलों में भी यह कार्य आगे बढ़ाया जाएगा।
446 वॉटर वर्क्स का होगा चरणबद्ध आधुनिकीकरण
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह केवल सीमित परियोजना नहीं बल्कि पूरे राज्य की जल संरचना को आधुनिक बनाने की व्यापक योजना का हिस्सा है।
446 वॉटर वर्क्स टैंकों के आधुनिकीकरण के बाद-
- पेयजल वितरण व्यवस्था अधिक विश्वसनीय होगी।
- रिसाव से होने वाली पानी की बर्बादी कम होगी।
- जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।
- जल गुणवत्ता बेहतर बनी रहेगी।
- रखरखाव और मरम्मत पर होने वाला खर्च घटेगा।
यह योजना भविष्य में बढ़ती आबादी और पेयजल की मांग को देखते हुए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
सुरक्षित पेयजल सरकार की प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने समीक्षा बैठक के दौरान कहा कि केवल जलापूर्ति बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। जल की गुणवत्ता बनाए रखना और जल स्रोतों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि सभी परियोजनाओं में आधुनिक तकनीक का अधिकतम उपयोग किया जाए ताकि लंबे समय तक टिकाऊ परिणाम प्राप्त किए जा सकें।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि आने वाले वर्षों में जल संरक्षण और जल प्रबंधन राज्य की विकास नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा रहेगा।
भूजल संरक्षण पर भी रहेगा विशेष फोकस
हरियाणा के कई क्षेत्रों में लगातार गिरते भूजल स्तर को देखते हुए सरकार अब वैकल्पिक जल प्रबंधन पर भी विशेष ध्यान दे रही है।
बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि-
- जहां भूजल स्तर कम है वहां नहरी पानी से पेयजल आपूर्ति को मजबूत किया जाए।
- भूजल दोहन कम करने के लिए दीर्घकालिक योजनाएं तैयार की जाएं।
- जल संरक्षण से जुड़े कार्यक्रमों को तेज किया जाए।
- वर्षा जल संचयन जैसी योजनाओं को भी प्रोत्साहित किया जाए।
सरकार का मानना है कि केवल नए जल स्रोत विकसित करना पर्याप्त नहीं होगा बल्कि उपलब्ध जल संसाधनों का वैज्ञानिक और संतुलित उपयोग भी आवश्यक है।
सीवरेज और अपशिष्ट जल प्रबंधन पर भी जोर
समीक्षा बैठक में केवल पेयजल योजनाओं पर ही चर्चा नहीं हुई, बल्कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की सीवरेज व्यवस्था को मजबूत बनाने पर भी विस्तार से विचार किया गया।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि-
- लंबित सीवरेज परियोजनाओं को प्राथमिकता से पूरा किया जाए।
- जल निकासी व्यवस्था में सुधार किया जाए।
- तेजी से बढ़ते शहरीकरण को ध्यान में रखते हुए नई योजनाएं तैयार की जाएं।
- पर्यावरण संरक्षण के मानकों का पूरी तरह पालन किया जाए।
उन्होंने कहा कि स्वच्छ जल और प्रभावी सीवरेज व्यवस्था दोनों एक-दूसरे से जुड़े हुए विषय हैं और दोनों पर समान रूप से ध्यान देना जरूरी है।
उपचारित पानी के उपयोग को मिलेगा बढ़ावा
बैठक के दौरान शोधित अपशिष्ट जल (Treated Wastewater) के उपयोग पर भी विशेष चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उपचारित पानी का उपयोग निम्न क्षेत्रों में बढ़ाया जाना चाहिए:
- कृषि एवं सिंचाई
- औद्योगिक इकाइयां
- पार्क एवं हरित क्षेत्र
- सार्वजनिक उद्यान
- निर्माण कार्य
- अन्य गैर-पीने योग्य उपयोग
इससे ताजे पानी की बचत होगी और जल संसाधनों का अधिक संतुलित उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।
आधुनिक तकनीक से होगी बेहतर निगरानी
सरकार जल परियोजनाओं में आधुनिक तकनीकों को शामिल करने की दिशा में भी काम कर रही है।
अधिकारियों ने बताया कि भविष्य में ऐसी प्रणालियों पर भी ध्यान दिया जाएगा जिनसे-
- जल स्तर की निगरानी आसान हो।
- रिसाव का तुरंत पता चल सके।
- रखरखाव कार्य समय पर किए जा सकें।
- संचालन लागत कम हो।
- जल वितरण व्यवस्था अधिक प्रभावी बने।
तकनीक आधारित निगरानी प्रणाली से विभाग को वास्तविक समय में जानकारी मिलने में भी सहायता मिलेगी।
गुणवत्ता से नहीं होगा कोई समझौता
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक धन से बनने वाली प्रत्येक परियोजना में गुणवत्ता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि-
- निर्माण सामग्री उच्च गुणवत्ता की हो।
- कार्य निर्धारित मानकों के अनुसार हो।
- नियमित निरीक्षण किया जाए।
- परियोजनाओं की समय-समय पर समीक्षा की जाए।
- किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
सरकार का उद्देश्य केवल निर्माण कार्य पूरा करना नहीं बल्कि ऐसा मजबूत बुनियादी ढांचा तैयार करना है जो वर्षों तक लोगों को लाभ पहुंचा सके।
जल संरक्षण को मिलेगा नया आयाम
हरियाणा सरकार की यह योजना केवल वॉटर वर्क्स टैंकों की मरम्मत या आधुनिकीकरण तक सीमित नहीं है। इसे राज्य की दीर्घकालिक जल सुरक्षा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
यदि परियोजना निर्धारित योजना के अनुसार पूरी होती है तो इससे-
- लाखों लोगों को बेहतर पेयजल सुविधा मिलेगी।
- जल भंडारण क्षमता में सुधार होगा।
- रिसाव के कारण होने वाली जल हानि कम होगी।
- भूजल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।
- जल गुणवत्ता बेहतर बनी रहेगी।
- सार्वजनिक जलापूर्ति प्रणाली अधिक मजबूत और विश्वसनीय बनेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती आबादी, जलवायु परिवर्तन और घटते भूजल स्तर जैसी चुनौतियों को देखते हुए इस प्रकार की आधुनिक जल अवसंरचना भविष्य की आवश्यकता है। चरणबद्ध तरीके से 446 वॉटर वर्क्स टैंकों का आरसीसी लाइनिंग के माध्यम से आधुनिकीकरण हरियाणा की पेयजल व्यवस्था को अधिक सुरक्षित, टिकाऊ और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।




