पेपर लीक से लेकर ‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ तक विपक्ष पर बरसे अनिल विज, बोले- मुद्दों का समाधान नहीं, राजनीति करना है मकसद

पेपर लीक से लेकर ‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ तक विपक्ष पर बरसे अनिल विज, बोले- मुद्दों का समाधान नहीं, राजनीति करना है मकसद

हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने पेपर लीक के मुद्दे पर विपक्षी दलों को आड़े हाथों लेते हुए आरोप लगाया कि उनका उद्देश्य युवाओं के हितों की रक्षा करना नहीं, बल्कि हर संवेदनशील विषय को राजनीतिक विवाद में बदलना है। उन्होंने कहा कि जब भी कोई घटना सामने आती है, विपक्ष उसका समाधान तलाशने के बजाय उसे राजनीतिक रंग देकर माहौल खराब करने की कोशिश करता है। विज ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि कुछ दल ऐसे व्यवहार करते हैं मानो वे “हाथ में पेट्रोल का कनस्तर लेकर घूम रहे हों और जहां भी कोई छोटी चिंगारी दिखाई दे, वहां आग भड़काने का प्रयास करें।”

अनिल विज ने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाएं देश के लाखों युवाओं की मेहनत और भविष्य से जुड़ी होती हैं, इसलिए सरकार ने इस विषय को अत्यंत गंभीरता से लिया। उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार ने शुरुआत से ही इस पूरे मामले पर संवेदनशीलता के साथ काम किया और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए। उनके अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं इस पूरे घटनाक्रम की लगातार समीक्षा करते रहे और युवाओं की भावनाओं को समझते हुए त्वरित निर्णय लिए।

उन्होंने कहा कि पेपर लीक की घटनाएं सामने आने के बाद सरकार ने विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया, जिससे मामलों की निष्पक्ष और तेज जांच सुनिश्चित हो सके। विज का कहना था कि जांच एजेंसियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि किसी भी दोषी को बख्शा न जाए, चाहे उसका प्रभाव या पहुंच कितनी भी बड़ी क्यों न हो। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनी रहे और प्रतिभाशाली युवाओं का विश्वास भर्ती प्रक्रिया पर कायम रहे।

विज ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार हमेशा पारदर्शी और निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया की पक्षधर रही है। उनका कहना था कि सरकार की सोच स्पष्ट है कि प्रत्येक योग्य उम्मीदवार को उसकी मेहनत के आधार पर अवसर मिलना चाहिए और किसी भी प्रकार की धांधली के लिए व्यवस्था में कोई स्थान नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि कहीं कोई अनियमितता सामने आती है तो सरकार उसे छिपाने के बजाय कठोर कार्रवाई करती है।

उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ विपक्षी दलों ने छात्रों के आंदोलन और उनकी नाराजगी का राजनीतिक लाभ उठाने का प्रयास किया। विज के अनुसार, विपक्ष ने युवाओं की वास्तविक समस्याओं का समाधान सुझाने के बजाय आंदोलन को राजनीतिक मंच बनाने की कोशिश की, लेकिन जनता ने उनकी मंशा को समझ लिया। उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगी और भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह निष्पक्ष बनाए रखने के लिए आवश्यक सभी कदम उठाती रहेगी।

अपने राजनीतिक जीवन के अनुभव साझा करते हुए अनिल विज ने कहा कि उन्होंने स्वयं कई जन आंदोलनों में हिस्सा लिया है और उस दौर को भी देखा है जब आंदोलनों के दौरान प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज होता था और उनकी मांगों को लंबे समय तक अनसुना कर दिया जाता था। उन्होंने कहा कि पहले की सरकारों में जनता की आवाज सुनने की इच्छाशक्ति का अभाव था, जबकि वर्तमान सरकार लोकतांत्रिक भावना के साथ लोगों की समस्याओं को गंभीरता से सुनती है।

उन्होंने कहा, “हमने भी आंदोलनों में डंडे खाए हैं। उस समय कई बार सरकारें जनता की मांगों पर ध्यान देने को तैयार नहीं होती थीं। लेकिन आज परिस्थितियां बदल चुकी हैं। वर्तमान सरकार जनता की भावनाओं का सम्मान करती है और लोगों की अपेक्षाओं के अनुरूप निर्णय लेने का प्रयास करती है।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उल्लेख करते हुए विज ने कहा कि उन्होंने कई अवसरों पर यह साबित किया है कि उनकी सरकार जनता की भावनाओं को प्राथमिकता देती है। उनके अनुसार, देश के 140 करोड़ नागरिकों के हित सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता हैं और किसी भी महत्वपूर्ण मुद्दे पर समयबद्ध निर्णय लेने का प्रयास किया जाता है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक रोकने के लिए कठोर कानून और सख्त कार्रवाई इसी प्रतिबद्धता का प्रमाण है।

संसद में पेपर लीक रोकने से जुड़े विधेयक पर हुई बहस का जिक्र करते हुए विज ने विपक्ष पर फिर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब सरकार इस दिशा में कानूनी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कदम उठा रही थी, तब भी विपक्ष ने रचनात्मक सहयोग देने के बजाय विरोध का रास्ता अपनाया। उनके अनुसार, यदि विपक्ष वास्तव में युवाओं के हितों को लेकर गंभीर होता तो वह सुधारों का समर्थन करता, लेकिन उसने संसद के भीतर भी राजनीतिक टकराव का रास्ता चुना।

उन्होंने कहा कि देश में पेपर लीक की घटनाएं केवल वर्तमान समय की समस्या नहीं हैं। पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल में भी ऐसे मामले सामने आते रहे हैं। फर्क केवल इतना है कि वर्तमान सरकार दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कानून और व्यवस्था दोनों स्तर पर कदम उठा रही है।

विज ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी केवल चुनावी घोषणाएं करने वाली पार्टी नहीं है, बल्कि जो वादे करती है उन्हें पूरा करने का प्रयास भी करती है। उन्होंने कहा कि सरकार ने पारदर्शी भर्ती प्रणाली, भ्रष्टाचार पर नियंत्रण और प्रशासनिक सुधारों के क्षेत्र में लगातार काम किया है। पेपर लीक के खिलाफ बनाए गए कड़े कानूनी प्रावधान इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं।

इस दौरान अनिल विज ने ‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ के प्रस्ताव पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में देश के अलग-अलग राज्यों में वर्षभर किसी न किसी स्तर के चुनाव होते रहते हैं। इससे प्रशासनिक मशीनरी का बड़ा हिस्सा चुनावी प्रक्रिया में व्यस्त रहता है और विकास कार्यों की गति प्रभावित होती है।

उन्होंने कहा कि यदि पूरे देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराए जाएं तो सरकारी संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग संभव होगा। चुनावों पर होने वाला खर्च कम होगा, प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों का समय बचेगा तथा विकास योजनाओं के क्रियान्वयन पर अधिक ध्यान दिया जा सकेगा।

विज का कहना था कि लगातार चुनावी आचार संहिता लागू होने से कई विकास परियोजनाएं प्रभावित होती हैं और नई योजनाओं की घोषणा या क्रियान्वयन में भी विलंब होता है। यदि एक साथ चुनाव कराने की व्यवस्था लागू होती है तो सरकारें बिना बार-बार चुनावी व्यवधान के अपने कार्यकाल में योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू कर सकेंगी।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासनिक दृष्टि से भी यह व्यवस्था अधिक व्यावहारिक साबित हो सकती है क्योंकि सुरक्षा बलों, चुनाव कर्मचारियों और सरकारी मशीनरी पर बार-बार पड़ने वाला दबाव कम होगा। इससे शासन व्यवस्था अधिक प्रभावी ढंग से कार्य कर सकेगी।

अनिल विज ने विश्वास जताया कि यदि वर्ष 2029 तक ‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ की व्यवस्था लागू हो जाती है तो यह देश के लोकतांत्रिक ढांचे में एक महत्वपूर्ण बदलाव होगा। उनके अनुसार इससे विकास कार्यों को गति मिलेगी, सरकारी संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और जनता को भी बार-बार चुनावी प्रक्रिया से गुजरने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

अपने संबोधन के अंत में विज ने कहा कि सरकार का लक्ष्य युवाओं के लिए पारदर्शी भर्ती व्यवस्था, भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन और तेज विकास सुनिश्चित करना है। उन्होंने दोहराया कि पेपर लीक जैसे मामलों में किसी भी दोषी के साथ नरमी नहीं बरती जाएगी और सरकार ऐसे अपराधों के खिलाफ सख्त रुख अपनाती रहेगी। साथ ही उन्होंने विपक्ष से भी अपील की कि वह संवेदनशील मुद्दों पर राजनीति करने के बजाय रचनात्मक सुझाव देकर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करने में अपनी भूमिका निभाए।