हिमाचल प्रदेश सरकार राज्य को औद्योगिक निवेश का नया केंद्र बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। उद्योगों के विस्तार, निवेशकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करने के उद्देश्य से सरकार जल्द ही नई औद्योगिक नीति लागू करने की तैयारी में है। इस नीति के माध्यम से प्रदेश में उद्योग स्थापित करने की प्रक्रिया को अधिक सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जाएगा, ताकि घरेलू और बाहरी निवेशकों का विश्वास मजबूत हो सके।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने उद्योग विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य केवल उद्योग स्थापित करना नहीं, बल्कि ऐसा औद्योगिक वातावरण तैयार करना है, जहां निवेशकों को हर स्तर पर सहयोग मिले और स्थानीय युवाओं को रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध हों। उन्होंने कहा कि नई औद्योगिक नीति आधुनिक जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है और इसमें उद्योग जगत की अपेक्षाओं को भी शामिल किया जाएगा।
उद्योगों के लिए आसान होगी प्रक्रिया
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार व्यापार में सुगमता (ईज ऑफ डूइंग बिजनेस) को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। इसके तहत उद्योग लगाने से जुड़ी विभिन्न सरकारी मंजूरियों और प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाएगा। कई विभागों की अनुमति लेने में होने वाली देरी को समाप्त करने के लिए सिंगल विंडो सिस्टम को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा, जिससे निवेशकों को एक ही मंच पर सभी आवश्यक सेवाएं उपलब्ध हो सकें।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए, ताकि उद्योग स्थापित करने के इच्छुक निवेशकों को अनावश्यक कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। उन्होंने कहा कि पारदर्शी और तकनीक आधारित व्यवस्था निवेशकों का भरोसा बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
सभी हितधारकों से लिए जा रहे सुझाव
मुख्यमंत्री ने बताया कि नई औद्योगिक नीति तैयार करने से पहले उद्योग संगठनों, व्यापारिक संस्थाओं, विशेषज्ञों और अन्य संबंधित पक्षों से लगातार चर्चा की जा रही है। सरकार का प्रयास है कि नीति व्यावहारिक हो और उद्योग जगत की वास्तविक जरूरतों को पूरा करे।
उन्होंने कहा कि बदलते वैश्विक आर्थिक माहौल में राज्यों के बीच निवेश आकर्षित करने की प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है। ऐसे में हिमाचल को भी अपनी औद्योगिक नीतियों को समय के अनुरूप बनाना होगा, ताकि राज्य निवेशकों की पहली पसंद बन सके।
ऊना बल्क ड्रग पार्क परियोजना पर सरकार का विशेष ध्यान
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने ऊना जिले में विकसित किए जा रहे बल्क ड्रग पार्क की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की। लगभग 2071 करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी परियोजना को प्रदेश की औद्योगिक विकास यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि परियोजना पूरी होने के बाद हिमाचल प्रदेश फार्मास्यूटिकल क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत पहचान बना सकेगा।
मुख्यमंत्री ने बताया कि परियोजना क्षेत्र में करीब 800 बीघा भूमि का समतलीकरण पूरा किया जा चुका है और आधारभूत ढांचे का निर्माण तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माण कार्य तय समय सीमा के भीतर पूरा किया जाए और किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरती जाए।
15 जुलाई तक जरूरी सुविधाएं पूरी करने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि बल्क ड्रग पार्क में कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) और स्टीम जनरेशन सुविधा से जुड़े कार्य 15 जुलाई तक हर हाल में पूरे किए जाएं। उन्होंने कहा कि इन आधारभूत सुविधाओं के बिना उद्योगों की स्थापना की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है, इसलिए समयबद्ध तरीके से सभी कार्य पूरे किए जाएं।
उन्होंने यह भी कहा कि परियोजना के विकास के साथ-साथ पर्यावरणीय मानकों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि औद्योगिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बना रहे।
बड़ी कंपनियों को निवेश के लिए आमंत्रण
मुख्यमंत्री ने उद्योग विभाग को निर्देश दिए कि देश की अग्रणी फार्मा और विनिर्माण कंपनियों से संपर्क कर उन्हें हिमाचल में निवेश के लिए आमंत्रित किया जाए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार निवेशकों को बेहतर बुनियादी ढांचा, सुगम प्रक्रियाएं और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
सरकार का मानना है कि प्रतिष्ठित कंपनियों के आने से न केवल पूंजी निवेश बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार, तकनीकी प्रशिक्षण और सहायक उद्योगों के विकास को भी गति मिलेगी।
युवाओं के लिए खुलेंगे रोजगार के नए रास्ते
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की औद्योगिक नीति का सबसे बड़ा उद्देश्य प्रदेश के युवाओं को अपने ही राज्य में बेहतर रोजगार उपलब्ध कराना है। बड़े औद्योगिक निवेश से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों प्रकार के रोजगार सृजित होंगे। इससे युवाओं का पलायन कम होगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि भविष्य की औद्योगिक आवश्यकताओं को देखते हुए कौशल विकास कार्यक्रमों को भी उद्योगों से जोड़ा जाए, ताकि स्थानीय युवाओं को रोजगार के लिए आवश्यक प्रशिक्षण समय रहते उपलब्ध कराया जा सके।
धर्मशाला के यूनिटी मॉल का निर्माण तेज
बैठक में धर्मशाला में विकसित किए जा रहे यूनिटी मॉल की प्रगति की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने बताया कि इस परियोजना के लिए 66 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी कर दी गई है और निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है।
उन्होंने कहा कि यूनिटी मॉल स्थानीय हस्तशिल्प, पारंपरिक उत्पादों, हस्तनिर्मित वस्तुओं और विभिन्न जिलों के विशेष उत्पादों के विपणन का प्रमुख केंद्र बनेगा। इससे स्थानीय कारीगरों, स्वयं सहायता समूहों और छोटे उद्यमियों को अपने उत्पादों के लिए बड़ा बाजार मिलेगा।
वन डिस्ट्रिक्ट-थ्री प्रोडक्ट्स कार्यक्रम को मिलेगा बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि “वन डिस्ट्रिक्ट-थ्री प्रोडक्ट्स” कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए। इसके तहत प्रत्येक जिले के तीन प्रमुख और विशिष्ट उत्पादों की पहचान कर उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की रणनीति तैयार की जाएगी।
उन्होंने कहा कि हिमाचल के पारंपरिक उत्पाद, जैविक कृषि उत्पाद, हस्तशिल्प, हथकरघा और स्थानीय खाद्य सामग्री की बड़ी मांग है। यदि इन उत्पादों की उचित ब्रांडिंग और मार्केटिंग की जाए तो ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार औद्योगिक विकास के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करने पर विशेष ध्यान दे रही है। स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने से किसानों, महिला स्वयं सहायता समूहों, कारीगरों और छोटे उद्यमियों की आय में वृद्धि होगी।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जिला स्तर पर ऐसे उत्पादों की पहचान कर उनके गुणवत्ता मानकों, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और विपणन की व्यापक योजना तैयार की जाए, ताकि हिमाचल के उत्पाद राष्ट्रीय बाजार में अपनी अलग पहचान बना सकें।
समयबद्ध क्रियान्वयन पर जोर
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने सभी विभागों को स्पष्ट संदेश दिया कि सरकार की विकास योजनाओं में अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि प्रत्येक परियोजना की नियमित समीक्षा की जाए और निर्धारित समय सीमा के भीतर सभी कार्य पूरे किए जाएं।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पारदर्शी प्रशासन, तेज निर्णय प्रक्रिया और निवेशक हितैषी वातावरण तैयार करने के लिए लगातार प्रयासरत है। नई औद्योगिक नीति भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
वरिष्ठ अधिकारियों ने लिया भाग
इस समीक्षा बैठक में उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान, अतिरिक्त मुख्य सचिव आर.डी. नजीम, सचिव आशीष सिंहमार, सचिव अमरजीत सिंह, उद्योग निदेशक यूनुस, अतिरिक्त निदेशक तिलक राज शर्मा सहित उद्योग विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति, निवेश प्रस्तावों, आधारभूत ढांचे के विकास तथा आगामी औद्योगिक नीति के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
नई औद्योगिक नीति के लागू होने के बाद हिमाचल प्रदेश में निवेश प्रक्रिया अधिक सरल होने, बड़े उद्योगों के आगमन को बढ़ावा मिलने और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद जताई जा रही है। सरकार का मानना है कि यह पहल प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति देने के साथ-साथ हिमाचल को देश के उभरते औद्योगिक राज्यों की श्रेणी में मजबूत स्थान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।




