केवल सिंह पठानिया ने मुख्यमंत्री का जताया आभार, डीबीटी के माध्यम से खातों में पहुंचेगी राशि; दूध खरीद का आंकड़ा एक लाख से बढ़कर तीन लाख लीटर प्रतिदिन के करीब पहुंचा
शिमला: हिमाचल प्रदेश में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और पशुपालकों की आमदनी बढ़ाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने दूध उत्पादकों को दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि में दोगुनी बढ़ोतरी करने का फैसला किया है। अब पात्र दूध उत्पादकों को प्रति लीटर तीन रुपये के स्थान पर छह रुपये प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। सरकार के इस निर्णय को दुग्ध उत्पादन से जुड़े किसानों और पशुपालकों के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है। उप-मुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया ने इस फैसले के लिए मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू का आभार व्यक्त किया है।
प्रेस को जारी बयान में पठानिया ने कहा कि प्रदेश सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले पशुपालकों और दूध उत्पादकों की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। प्रोत्साहन राशि को तीन रुपये से बढ़ाकर छह रुपये प्रति लीटर करना इसी दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है। इससे उन परिवारों को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा, जिनकी आजीविका का बड़ा हिस्सा पशुपालन और दूध उत्पादन पर निर्भर है।
उन्होंने बताया कि बढ़ी हुई प्रोत्साहन राशि पात्र दूध उत्पादकों को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से उपलब्ध करवाई जाएगी। इसके लिए राज्य सरकार ने 14 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है। सीधे बैंक खातों में राशि पहुंचने से लाभार्थियों को भुगतान प्राप्त करने में सुविधा होगी और सरकारी सहायता का लाभ पारदर्शी तरीके से उन तक पहुंच सकेगा।
दूध उत्पादकों को आर्थिक रूप से मजबूत करने पर जोर
पठानिया ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में बड़ी संख्या में ग्रामीण परिवार खेती के साथ पशुपालन को भी अपनी आय का प्रमुख साधन बनाए हुए हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में सीमित कृषि भूमि और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण पशुपालन ग्रामीण परिवारों की आर्थिक गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में दूध के बेहतर दाम और अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि मिलने से किसानों की आय में सुधार की संभावनाएं बढ़ेंगी।
उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि पशुपालकों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य मिले और उन्हें दूध बेचने के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराया जाए। दूध उत्पादन को केवल पारंपरिक गतिविधि तक सीमित रखने के बजाय इसे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और स्वरोजगार का मजबूत माध्यम बनाया जा रहा है।
पठानिया के अनुसार, प्रोत्साहन राशि में बढ़ोतरी से छोटे और सीमांत पशुपालकों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है। अतिरिक्त आमदनी से वे अपने पशुओं के लिए बेहतर चारा, स्वास्थ्य सुविधाएं और देखभाल की व्यवस्था कर सकेंगे। इससे दूध उत्पादन की गुणवत्ता और मात्रा दोनों में सुधार की संभावनाएं बनेंगी।
दूध पर एमएसपी लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना हिमाचल
उप-मुख्य सचेतक ने कहा कि हिमाचल प्रदेश देश का पहला राज्य है, जिसने दूध खरीद पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) लागू किया है। सरकार ने दूध उत्पादकों को बेहतर मूल्य उपलब्ध कराने के उद्देश्य से गाय और भैंस के दूध के खरीद मूल्य में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है।
उन्होंने बताया कि गाय के दूध का खरीद मूल्य पहले 32 रुपये प्रति लीटर था, जिसे बढ़ाकर 61 रुपये प्रति लीटर किया गया है। इसी तरह भैंस के दूध का खरीद मूल्य 47 रुपये से बढ़ाकर 71 रुपये प्रति लीटर किया गया है। इस फैसले से दूध उत्पादकों को उनके उत्पादन का बेहतर मूल्य मिल रहा है।
पठानिया ने कहा कि खरीद मूल्य में बढ़ोतरी का लाभ बड़े पशुपालकों के साथ-साथ छोटे किसानों को भी मिल रहा है। सरकार की ओर से उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, दूध खरीद मूल्य में वृद्धि से उत्पादकों को औसतन 48.86 करोड़ रुपये प्रतिमाह का लाभ मिल रहा है। यह राशि ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।
उन्होंने कहा कि दूध का उचित मूल्य मिलने से पशुपालकों में उत्पादन बढ़ाने का उत्साह पैदा हुआ है। पहले जहां कई परिवार पशुपालन को सीमित स्तर पर करते थे, वहीं अब बेहतर कीमत और सरकारी प्रोत्साहन के कारण इस क्षेत्र में निवेश करने की संभावनाएं बढ़ी हैं।
दूध खरीद में तीन गुना के करीब वृद्धि
पठानिया ने कहा कि राज्य सरकार की नीतियों का सकारात्मक असर दूध खरीद के आंकड़ों में भी दिखाई देने लगा है। प्रदेश में पहले जहां प्रतिदिन लगभग एक लाख लीटर दूध की खरीद होती थी, वहीं अब यह बढ़कर करीब तीन लाख लीटर प्रतिदिन तक पहुंच गई है।
दूध खरीद में हुई यह वृद्धि पशुपालकों के बढ़ते भरोसे और दुग्ध संग्रहण व्यवस्था के विस्तार को दर्शाती है। बेहतर खरीद मूल्य मिलने से अधिक किसान संगठित दुग्ध आपूर्ति व्यवस्था से जुड़ रहे हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में दूध के विपणन और प्रसंस्करण की संभावनाएं भी मजबूत हो रही हैं।
उन्होंने कहा कि दूध की खरीद बढ़ने के साथ-साथ उसके संग्रहण, परिवहन, गुणवत्ता जांच और प्रसंस्करण के लिए आधुनिक सुविधाएं विकसित करना भी जरूरी है। इसी उद्देश्य से प्रदेश सरकार दुग्ध क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दे रही है।
ढगवार में 250 करोड़ से बनेगा आधुनिक दुग्ध संयंत्र
पठानिया ने बताया कि कांगड़ा जिले के ढगवार में लगभग 250 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक दुग्ध प्रसंस्करण संयंत्र का निर्माण किया जा रहा है। इस संयंत्र की क्षमता प्रतिदिन 1.50 लाख लीटर दूध के प्रसंस्करण की होगी।
इस परियोजना को प्रदेश के दुग्ध क्षेत्र के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण निवेश माना जा रहा है। संयंत्र के माध्यम से दूध के प्रसंस्करण और उससे बनने वाले विभिन्न उत्पादों की क्षमता बढ़ाई जा सकेगी। इससे दूध की खरीद को व्यवस्थित करने के साथ-साथ उत्पादकों को बाजार से जोड़ने में भी सहायता मिलेगी।
उन्होंने कहा कि आधुनिक प्रसंस्करण सुविधाएं विकसित होने से दूध की गुणवत्ता बनाए रखने, उत्पादों की विविधता बढ़ाने और बाजार की मांग के अनुसार आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। इससे प्रदेश के दुग्ध उत्पादकों को भी बेहतर व्यवस्था का लाभ मिल सकेगा।
ढगवार परियोजना के अलावा आगामी वर्षों में राज्य में दूध संग्रहण और प्रसंस्करण से संबंधित सुविधाओं के विस्तार पर लगभग 150 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना है। इसके तहत दुग्ध संग्रहण केंद्रों और अन्य आवश्यक बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा।
ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा करने की पहल
पठानिया ने कहा कि सरकार की दुग्ध क्षेत्र से जुड़ी नीतियों का उद्देश्य केवल दूध की खरीद बढ़ाना नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में स्थायी सुधार लाना भी है। हिमाचल के अनेक ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन महिलाओं, छोटे किसानों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए आय का महत्वपूर्ण साधन है।
दूध के बेहतर खरीद मूल्य और अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि से इन परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार हो सकता है। इसके साथ ही चारा उत्पादन, पशु चिकित्सा सेवाओं, दूध के परिवहन, संग्रहण और प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में भी रोजगार की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
उन्होंने कहा कि दुग्ध क्षेत्र का विस्तार होने से ग्रामीण युवाओं को अपने गांव में ही स्वरोजगार के अवसर मिलेंगे। इससे रोजगार के लिए शहरों की ओर पलायन को कम करने में भी मदद मिल सकती है।
पशुपालकों की आय बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता
उप-मुख्य सचेतक ने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार पशुपालकों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई स्तरों पर काम कर रही है। दूध के खरीद मूल्य में वृद्धि, प्रोत्साहन राशि का दोगुना किया जाना और आधुनिक प्रसंस्करण संयंत्रों का निर्माण इसी व्यापक प्रयास का हिस्सा हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में मेहनत करने वाले किसानों और पशुपालकों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिले। इसके लिए दूध खरीद व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ आधारभूत ढांचे में निवेश किया जा रहा है।
पठानिया ने विश्वास जताया कि आने वाले समय में इन पहलों से हिमाचल प्रदेश का दुग्ध क्षेत्र और अधिक मजबूत होगा। इससे न केवल दूध उत्पादकों की आमदनी बढ़ेगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी।
उन्होंने कहा कि छह रुपये प्रति लीटर प्रोत्साहन राशि का निर्णय प्रदेश के हजारों दूध उत्पादकों के लिए राहतकारी साबित होगा। सरकार का लक्ष्य है कि पशुपालन को ग्रामीण परिवारों के लिए अधिक लाभकारी और टिकाऊ व्यवसाय बनाया जाए, ताकि किसान अपनी मेहनत से बेहतर आमदनी अर्जित कर सकें और प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले।




