केंद्र सरकार की ओर से प्रस्तावित 20 हजार करोड़ रुपये के नेशनल फ्रंटियर एआई एंड कंप्यूट फंड को लेकर पंजाब ने अभी से अपनी दावेदारी मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया है। पूर्व विशेष मुख्य सचिव केबीएस सिद्धू ने केंद्रीय इलेक्ट्रानिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र भेजकर सुझाव दिया है कि पंजाब को केंद्र के इस प्रस्तावित फंड में अपनी हिस्सेदारी के लिए जल्द से जल्द ठोस परियोजनाएं तैयार करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था, विशाल कृषि डाटा, सिंचाई व्यवस्था, इंजीनियरिंग संस्थानों और पंजाबी भाषा से जुड़ी जरूरतों को एआई विकास की योजनाओं का आधार बनाया जा सकता है।
सिद्धू के मुताबिक पंजाब को केंद्र सरकार की ओर से फंड के अंतिम नियम और दिशा-निर्देश जारी होने का इंतजार नहीं करना चाहिए। राज्य सरकार को अभी से अपनी प्राथमिकताएं तय कर केंद्र के समक्ष परियोजनाओं का खाका रखना चाहिए। इससे फंड की रूपरेखा तैयार करते समय पंजाब की जरूरतों और संभावित परियोजनाओं को भी ध्यान में रखा जा सकेगा।
कृषि क्षेत्र में एआई के बड़े इस्तेमाल की संभावना
पंजाब के लिए कृषि को एआई विकास का प्रमुख क्षेत्र बनाने की संभावना जताई गई है। राज्य में खेती से संबंधित बड़े पैमाने पर डाटा उपलब्ध है। भूमि रिकार्ड, फसल पैटर्न, सिंचाई व्यवस्था, मौसम, उत्पादन और कृषि गतिविधियों से जुड़े आंकड़ों का इस्तेमाल एआई आधारित सेवाओं के विकास में किया जा सकता है।
सिद्धू का कहना है कि पंजाब की कृषि अर्थव्यवस्था और उपलब्ध आंकड़े राज्य को एआई आधारित कृषि समाधान विकसित करने के लिए उपयुक्त आधार देते हैं। यदि अलग-अलग विभागों के आंकड़ों को सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से एकीकृत किया जाए तो किसानों के लिए अधिक उपयोगी डिजिटल सेवाएं विकसित की जा सकती हैं।
एआई आधारित मॉडल के माध्यम से किसानों को फसल चयन, बुवाई का समय, सिंचाई की जरूरत, संभावित रोग और मौसम की परिस्थितियों के अनुरूप सलाह देने की दिशा में काम किया जा सकता है। इसके अलावा फसल उत्पादन और कृषि संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के लिए भी तकनीक का इस्तेमाल संभव है।
पानी के प्रबंधन में तकनीक का इस्तेमाल
पंजाब के लिए जल प्रबंधन भी एआई आधारित परियोजनाओं का महत्वपूर्ण क्षेत्र बन सकता है। राज्य में भूजल स्तर में गिरावट और कृषि में पानी की बढ़ती जरूरत लंबे समय से प्रमुख मुद्दे रहे हैं। ऐसे में उपलब्ध जल संसाधनों और सिंचाई व्यवस्था से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण कर अधिक प्रभावी प्रबंधन मॉडल विकसित किए जा सकते हैं।
एआई की मदद से विभिन्न क्षेत्रों में पानी की जरूरत, फसलों के आधार पर सिंचाई की आवश्यकता और जल उपलब्धता के आंकड़ों का विश्लेषण किया जा सकता है। इससे पानी के इस्तेमाल को अधिक प्रभावी बनाने और कृषि क्षेत्र में अनावश्यक खपत कम करने के लिए नीति निर्माण में भी मदद मिल सकती है।
सिद्धू ने इसी तरह के क्षेत्रों में पंजाब की संभावित क्षमता को केंद्र के प्रस्तावित फंड से जोड़ने पर जोर दिया है। उनका तर्क है कि राज्य की स्थानीय जरूरतों पर आधारित परियोजनाएं तैयार होने से एआई में होने वाले निवेश का सीधा उपयोग सार्वजनिक सेवाओं और कृषि क्षेत्र में किया जा सकेगा।
आइआइटी रोपड़ की विशेषज्ञता को आधार बनाने का सुझाव
पंजाब की दावेदारी में रोपड़ स्थित आइआइटी की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया गया है। संस्थान में कृषि क्षेत्र के लिए राष्ट्रीय एआई सेंटर आफ एक्सीलेंस मौजूद है। ऐसे में राज्य सरकार, शैक्षणिक संस्थानों और तकनीकी विशेषज्ञों के बीच समन्वय बनाकर एआई आधारित कृषि परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जा सकता है।
कृषि से जुड़े एआई मॉडल विकसित करने के लिए विश्वविद्यालयों, तकनीकी संस्थानों, सरकारी विभागों और किसानों के बीच सहयोग की व्यवस्था बनाई जा सकती है। इससे केवल तकनीक विकसित करने के बजाय स्थानीय स्तर पर उसकी उपयोगिता और प्रभाव का परीक्षण भी किया जा सकेगा।
सिद्धू के अनुसार पंजाब में उपलब्ध तकनीकी संस्थानों और कृषि क्षेत्र से जुड़े डाटा को एक साथ इस्तेमाल करने की दिशा में काम किया जाना चाहिए। इससे राज्य केंद्र के एआई फंड के तहत ऐसी परियोजनाएं पेश कर सकता है जिनका इस्तेमाल अन्य कृषि प्रधान राज्यों के लिए भी मॉडल के तौर पर किया जा सके।
पंजाबी भाषा के लिए विशेष एआई मॉडल की जरूरत
सिद्धू ने पंजाबी भाषा के लिए एआई मॉडल विकसित करने पर भी विशेष जोर दिया है। उनका कहना है कि भारत में एआई का विस्तार केवल अंग्रेजी या कुछ प्रमुख भाषाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए। भारतीय भाषाओं में तकनीक उपलब्ध कराने पर भी समान रूप से ध्यान दिया जाना आवश्यक है।
पंजाबी भाषा के लिए विशेष एआई मॉडल तैयार होने पर इसका इस्तेमाल सरकारी सेवाओं, शिक्षा, नागरिक सुविधाओं और डिजिटल संचार में किया जा सकता है। स्थानीय भाषा में एआई आधारित सेवाएं उपलब्ध होने से उन लोगों तक भी तकनीक की पहुंच बढ़ाई जा सकती है जो अंग्रेजी या अन्य भाषाओं में डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल आसानी से नहीं कर पाते।
सरकारी विभागों में पंजाबी भाषा आधारित एआई प्रणाली का इस्तेमाल दस्तावेज तैयार करने, नागरिकों की शिकायतों को समझने, सूचनाएं उपलब्ध कराने और विभिन्न सेवाओं तक पहुंच आसान बनाने के लिए किया जा सकता है। शिक्षा के क्षेत्र में भी पंजाबी में एआई आधारित अध्ययन सामग्री और संवादात्मक सेवाएं विकसित करने की संभावना है।
मोहाली में विकसित हो सकता है एआई और डाटा सेंटर का आधार
सिद्धू ने मोहाली के आइटी क्लस्टर को भी एआई और डाटा सेंटर से जुड़ी क्षमता विकसित करने के लिए उपयोगी आधार बताया है। मोहाली में पहले से मौजूद आइटी और तकनीकी ढांचे को आगे बढ़ाकर एआई से जुड़ा मजबूत इकोसिस्टम तैयार किया जा सकता है।
इसके लिए राज्य सरकार को बिजली, जमीन, कनेक्टिविटी और अन्य बुनियादी ढांचे की उपलब्धता का आकलन पहले से करना होगा। डाटा सेंटर और एआई कंप्यूट क्षमता विकसित करने के लिए बड़े स्तर पर बिजली और तकनीकी संसाधनों की आवश्यकता होती है। इसलिए संभावित निवेश और परियोजनाओं के लिए भूमि तथा बिजली की जरूरतों को ध्यान में रखकर दीर्घकालीन योजना तैयार करने का सुझाव दिया गया है।
मोहाली में एआई कंपनियों, स्टार्टअप, अनुसंधान संस्थानों और डाटा सेंटर से जुड़ी गतिविधियों को एक साथ बढ़ावा देने से राज्य में तकनीकी रोजगार और निवेश की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं। हालांकि इसके लिए राज्य स्तर पर स्पष्ट नीति और केंद्र के प्रस्तावित फंड के साथ समन्वय की आवश्यकता होगी।
अलग एआई मिशन सेल बनाने का सुझाव
सिद्धू ने पंजाब सरकार को तत्काल एक एआई मिशन सेल स्थापित करने का सुझाव दिया है। यह सेल राज्य के अलग-अलग विभागों से एआई आधारित परियोजनाओं की पहचान कर सकता है और उन्हें केंद्र सरकार के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए तैयार कर सकता है।
इस व्यवस्था के तहत कृषि, जल संसाधन, शिक्षा, सरकारी सेवाओं, पंजाबी भाषा और तकनीकी ढांचे से जुड़ी परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जा सकती है। साथ ही राज्य के विश्वविद्यालयों, तकनीकी संस्थानों और निजी क्षेत्र के विशेषज्ञों को भी इस प्रक्रिया से जोड़ा जा सकता है।
उनका कहना है कि केंद्र सरकार द्वारा फंड के अंतिम नियम तैयार किए जाने से पहले ही पंजाब को अपनी प्राथमिक परियोजनाओं का खाका तैयार कर लेना चाहिए। इससे राज्य को फंड की दिशा तय होने के बाद परियोजनाएं तैयार करने में लगने वाला समय बच सकता है और पंजाब की जरूरतों को शुरुआती चरण में ही केंद्र के सामने रखा जा सकता है।
एआई फंड में पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर
केंद्रीय मंत्री को भेजे पत्र में सिद्धू ने एआई फंड के इस्तेमाल को लेकर छह जवाबदेही मानक तय करने की मांग की है। इनमें देश में उपलब्ध मौजूदा एआई कंप्यूट क्षमता के इस्तेमाल से संबंधित जानकारी नियमित रूप से सार्वजनिक करने का सुझाव शामिल है।
उन्होंने कहा कि मौजूदा एआई कंप्यूट क्षमता का कितना उपयोग हो रहा है, इसकी जानकारी कम से कम प्रत्येक तिमाही सार्वजनिक की जानी चाहिए। इससे उपलब्ध संसाधनों के इस्तेमाल की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी और यह पता लगाया जा सकेगा कि निवेश के बाद वास्तविक कंप्यूट क्षमता का कितना उपयोग किया जा रहा है।
उन्होंने फंड के तहत स्वीकृत परियोजनाओं के आउटपुट, परिणाम और प्रभाव की सालाना रिपोर्ट संसद के समक्ष रखने का सुझाव भी दिया है। इससे परियोजनाओं पर खर्च होने वाली राशि और उनसे मिलने वाले वास्तविक परिणामों की निगरानी की जा सकेगी।
एआई मॉडलों का स्वतंत्र मूल्यांकन हो
सिद्धू ने प्रस्तावित फंड से विकसित होने वाले एआई मॉडलों का स्वतंत्र मूल्यांकन कराने की मांग भी की है। उनका कहना है कि केवल एआई मॉडल तैयार कर लेना पर्याप्त नहीं है। यह देखना भी जरूरी है कि मॉडल वास्तविक परिस्थितियों में कितना उपयोगी है और उससे लक्षित वर्ग को कितना लाभ मिल रहा है।
विशेष रूप से कृषि, भारतीय भाषाओं और आम नागरिकों से जुड़ी परियोजनाओं में स्वतंत्र मूल्यांकन से उनकी उपयोगिता का आकलन किया जा सकता है। इससे सरकारी संसाधनों से विकसित तकनीक के वास्तविक प्रभाव को मापने और जरूरत के अनुसार उसमें सुधार करने में मदद मिल सकती है।
पंजाब के लिए समय पर तैयारी का अवसर
प्रस्तावित राष्ट्रीय एआई फंड को लेकर पंजाब के सामने कृषि, जल प्रबंधन, भाषा तकनीक और आइटी क्षेत्र में अपनी क्षमता को परियोजनाओं में बदलने का अवसर है। इसके लिए राज्य सरकार को अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर प्राथमिक क्षेत्रों की पहचान करनी होगी।
पंजाब की ओर से तैयार प्रस्तावों में स्थानीय डाटा, तकनीकी संस्थानों की विशेषज्ञता और राज्य की सामाजिक-आर्थिक जरूरतों को शामिल किया जा सकता है। कृषि और जल प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में एआई का इस्तेमाल राज्य की मौजूदा चुनौतियों से सीधे जुड़ा होगा, जबकि पंजाबी भाषा के लिए एआई मॉडल डिजिटल सेवाओं और शिक्षा के क्षेत्र में उपयोगी हो सकते हैं।
सिद्धू ने केंद्र को भेजे सुझावों में इस बात पर जोर दिया है कि एआई के क्षेत्र में बड़े निवेश के साथ पारदर्शिता, जवाबदेही और परिणामों की निगरानी की व्यवस्था भी समान रूप से मजबूत होनी चाहिए। उनके अनुसार फंड से तैयार होने वाली तकनीक का लाभ केवल तकनीकी ढांचे तक सीमित न रहकर कृषि, भारतीय भाषाओं और आम नागरिकों से जुड़े क्षेत्रों तक पहुंचना चाहिए।
ऐसे में पंजाब सरकार के लिए अगला कदम अपनी प्राथमिकताओं और संभावित परियोजनाओं की पहचान कर उन्हें केंद्र के प्रस्तावित फंड की रूपरेखा के अनुरूप तैयार करना होगा। इससे राज्य कृषि और भाषा तकनीक के साथ-साथ एआई तथा कंप्यूट क्षमता के क्षेत्र में अपनी संभावित भूमिका को केंद्र के समक्ष व्यवस्थित तरीके से रख सकेगा।




