हिमाचल प्रदेश सरकार प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव की दिशा में कदम बढ़ा रही है। राज्य सरकार अब वन विभाग की संरचना को नए सिरे से व्यवस्थित करने की योजना पर काम कर रही है, जिसके तहत भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारियों के कैडर में बड़ी कटौती प्रस्तावित की गई है। सरकार का मानना है कि विभाग में अफसरों की संख्या कम कर जमीनी स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों को मजबूत बनाया जाए, ताकि वन संरक्षण और फील्ड मॉनिटरिंग को अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
सूत्रों के अनुसार वर्तमान में हिमाचल प्रदेश में आईएफएस अधिकारियों की स्वीकृत कैडर स्ट्रेंथ 114 है, लेकिन नई योजना के तहत इसे घटाकर 83 करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। यानी करीब 31 पद कम किए जा सकते हैं। इस संबंध में राज्य सरकार ने केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेज दिया है और मंजूरी मिलने के बाद नई प्रशासनिक व्यवस्था लागू की जा सकती है।
विभागीय ढांचे में होगा व्यापक बदलाव
सरकार केवल आईएफएस अधिकारियों की संख्या घटाने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि वन विभाग के पूरे प्रशासनिक ढांचे को पुनर्गठित करने पर विचार कर रही है। विभागीय मुख्यालय से लेकर फील्ड स्तर तक अधिकारियों की तैनाती और जिम्मेदारियों का नया मॉडल तैयार किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री Sukhvinder Singh Sukhu ने हाल ही में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की। बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव वन कमलेश कुमार पंत, प्रधान मुख्य अरण्यपाल संजय सूद सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को ऐसा मॉडल तैयार करने के निर्देश दिए हैं, जिससे प्रशासनिक खर्च कम हो और विभाग की कार्यक्षमता बढ़े।
हर जिले में सिर्फ एक DFO की तैनाती का प्रस्ताव
नई व्यवस्था के तहत जिलों में डीएफओ (डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर) की संख्या भी कम की जा सकती है। प्रस्ताव है कि सामान्य परिस्थितियों में हर जिले में केवल एक डीएफओ तैनात किया जाए। हालांकि बड़े जिलों और वन्यजीव अभ्यारण वाले क्षेत्रों में जरूरत के हिसाब से दो डीएफओ स्तर के अधिकारियों की नियुक्ति संभव होगी।
सरकारी स्तर पर यह तर्क दिया जा रहा है कि जब एक उपायुक्त (DC) पूरे जिले की प्रशासनिक व्यवस्था संभाल सकता है, तो वन विभाग में भी सीमित अधिकारियों के जरिए कामकाज संचालित किया जा सकता है। अधिकारियों का मानना है कि इससे निर्णय प्रक्रिया तेज होगी और विभाग में अनावश्यक प्रशासनिक परतें कम होंगी।
फील्ड स्टाफ बढ़ाने पर जोर
सरकार का फोकस अब वन रक्षक, रेंज ऑफिसर (RO) और फील्ड कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने पर है। विभाग का मानना है कि जंगलों की सुरक्षा और अवैध कटान रोकने में सबसे अहम भूमिका जमीनी स्तर के कर्मचारियों की होती है, जबकि वरिष्ठ अधिकारियों की अधिक संख्या का सीधा फायदा फील्ड कार्यों में नहीं दिखता।
अधिकारियों ने बैठक में यह भी बताया कि हर समय 15 से 20 आईएफएस अधिकारी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर रहते हैं, इसके बावजूद विभाग का नियमित काम प्रभावित नहीं होता। इसी आधार पर कैडर कम करने की जरूरत महसूस की जा रही है।
पुराने मॉडल का दिया गया हवाला
बैठक के दौरान 1980 के दशक का प्रशासनिक ढांचा भी चर्चा में रहा। अधिकारियों ने जानकारी दी कि वर्ष 1984 से 1990 के बीच प्रदेश में आईएफएस अधिकारियों की संख्या करीब 85 से 90 के बीच थी और उस समय वन विभाग बेहतर ढंग से काम कर रहा था। सीमित अधिकारियों के बावजूद वन संरक्षण, निगरानी और प्रशासनिक व्यवस्था को प्रभावी माना जाता था।
सरकार अब उसी मॉडल से प्रेरणा लेते हुए “कम अफसर, ज्यादा फील्ड फोर्स” की नीति पर आगे बढ़ रही है।
वन विभाग में 8 हजार से अधिक कर्मचारी
वर्तमान में हिमाचल प्रदेश वन विभाग में कुल 8011 पद स्वीकृत हैं। इनमें 322 राजपत्रित अधिकारी शामिल हैं। इसके अलावा द्वितीय श्रेणी के लगभग 300 कर्मचारी, तृतीय श्रेणी के 4447 और चतुर्थ श्रेणी के 2942 कर्मचारी कार्यरत हैं।
आईएफएस अधिकारियों की मौजूदा संख्या 114 है, जबकि हिमाचल वन सेवा (HFS) अधिकारियों की कैडर स्ट्रेंथ 160 है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आईएफएस कैडर में कटौती होती है तो इसका असर एचएफएस अधिकारियों की संरचना पर भी पड़ सकता है।
प्रशासनिक खर्च घटाने की कवायद
सरकार इस बदलाव को “व्यवस्था परिवर्तन” अभियान का हिस्सा बता रही है। माना जा रहा है कि इससे विभागीय खर्च में कमी आएगी और संसाधनों का उपयोग सीधे वन संरक्षण और निगरानी तंत्र को मजबूत करने में किया जा सकेगा। हालांकि विभाग के भीतर इस प्रस्ताव को लेकर अलग-अलग राय भी सामने आ रही हैं। कुछ अधिकारी इसे प्रशासनिक सुधार मान रहे हैं, जबकि कुछ का मानना है कि अधिकारियों की संख्या कम होने से भविष्य में कार्यभार बढ़ सकता है।



