डिहाइड्रेशन से बढ़ सकता है गंभीर स्वास्थ्य जोखिम; जानिए क्या कहते हैं विशेषज्ञ
भीषण गर्मी और हीटवेव के दौरान लोग अक्सर लू, सनबर्न और हीट स्ट्रोक जैसी समस्याओं से बचाव पर ध्यान देते हैं, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस मौसम में उल्टी और दस्त (डायरिया) जैसी समस्याओं को भी बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। सामान्य दिनों में पेट खराब होना एक साधारण समस्या लग सकती है, लेकिन तेज गर्मी के दौरान यही स्थिति तेजी से डिहाइड्रेशन (शरीर में पानी की कमी) और इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन का कारण बन सकती है।
डॉक्टरों के अनुसार, गर्मियों में शरीर पहले से ही पसीने के माध्यम से लगातार पानी और आवश्यक खनिज तत्व खोता रहता है। यदि इसी दौरान किसी व्यक्ति को बार-बार उल्टी या दस्त होने लगें तो शरीर में पानी की कमी बहुत तेजी से बढ़ सकती है। समय पर उपचार और पर्याप्त तरल पदार्थ न मिलने की स्थिति में इसका असर किडनी, हृदय, मस्तिष्क और अन्य महत्वपूर्ण अंगों की कार्यप्रणाली पर भी पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि हीटवेव के दौरान शरीर का तापमान नियंत्रित रखने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीना, सुरक्षित भोजन करना और संक्रमण से बचाव के उपाय अपनाना बेहद जरूरी है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
गर्मी के मौसम में क्यों बढ़ जाती हैं पेट संबंधी समस्याएं
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि गर्मियों में ऊंचा तापमान बैक्टीरिया, वायरस और अन्य सूक्ष्म जीवों के तेजी से पनपने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करता है। यदि भोजन लंबे समय तक खुले में रखा जाए या उचित तापमान पर सुरक्षित न रखा जाए तो उसमें हानिकारक जीवाणु तेजी से बढ़ सकते हैं। ऐसे भोजन का सेवन करने से फूड पॉइजनिंग, गैस्ट्रोएंटेराइटिस और डायरिया जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।
इसके अलावा असुरक्षित पेयजल, खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थ, सड़क किनारे मिलने वाला स्ट्रीट फूड, कटे हुए फल, दूषित बर्फ और साफ-सफाई का अभाव भी संक्रमण का कारण बन सकते हैं। गर्मी के मौसम में छोटी-सी लापरवाही भी पेट के संक्रमण का जोखिम बढ़ा सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि घर में बने भोजन को भी लंबे समय तक कमरे के तापमान पर छोड़ना उचित नहीं है। यदि भोजन तुरंत नहीं खाना है तो उसे सुरक्षित तरीके से रेफ्रिजरेट करना चाहिए और दोबारा सेवन करने से पहले अच्छी तरह गर्म करना चाहिए।
उल्टी-दस्त के दौरान शरीर में क्या होता है
जब किसी व्यक्ति को बार-बार उल्टी या दस्त होते हैं, तब शरीर से केवल पानी ही नहीं बल्कि सोडियम, पोटैशियम, क्लोराइड और अन्य महत्वपूर्ण इलेक्ट्रोलाइट्स भी बाहर निकल जाते हैं। ये तत्व शरीर की सामान्य कार्यप्रणाली के लिए आवश्यक होते हैं। इनकी कमी होने पर मांसपेशियों, नसों, हृदय और मस्तिष्क की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है।
यदि समय रहते शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की पूर्ति नहीं की जाए तो डिहाइड्रेशन की स्थिति गंभीर रूप ले सकती है। इससे रक्तचाप कम हो सकता है, चक्कर आ सकते हैं, अत्यधिक कमजोरी महसूस हो सकती है और गंभीर मामलों में अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता भी पड़ सकती है।
डॉक्टरों का कहना है कि कई बार लोग केवल पानी पीकर स्थिति को संभालने की कोशिश करते हैं, लेकिन शरीर से इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी पूरी करना भी उतना ही आवश्यक होता है। इसलिए चिकित्सकीय सलाह के अनुसार ओआरएस (Oral Rehydration Solution) का सेवन उपयोगी माना जाता है।
डिहाइड्रेशन क्यों हो सकता है खतरनाक
डिहाइड्रेशन का अर्थ है शरीर में आवश्यक मात्रा से कम पानी होना। गर्मियों में अत्यधिक पसीना आने के कारण शरीर पहले ही अधिक तरल पदार्थ खोता है। यदि इसके साथ उल्टी और दस्त भी हो जाएं तो स्थिति तेजी से बिगड़ सकती है।
शरीर में पानी की कमी होने पर रक्त की मात्रा कम होने लगती है, जिससे विभिन्न अंगों तक पर्याप्त ऑक्सीजन और पोषक तत्व पहुंचाने में कठिनाई हो सकती है। गंभीर डिहाइड्रेशन की स्थिति में किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है और कुछ मामलों में मरीज को नसों के माध्यम से तरल पदार्थ (IV Fluids) देने की आवश्यकता पड़ सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर पर्याप्त हाइड्रेशन बनाए रखना इस जोखिम को काफी हद तक कम कर सकता है।
डिहाइड्रेशन के प्रमुख लक्षण जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार डिहाइड्रेशन के शुरुआती लक्षणों की पहचान करना बहुत महत्वपूर्ण है। शुरुआत में व्यक्ति को बार-बार प्यास लग सकती है, मुंह सूख सकता है और कमजोरी महसूस हो सकती है। यदि समय पर ध्यान न दिया जाए तो स्थिति धीरे-धीरे गंभीर हो सकती है।
डिहाइड्रेशन के सामान्य संकेतों में बार-बार प्यास लगना, मुंह और होंठ सूखना, पेशाब की मात्रा कम होना, गहरे पीले रंग का मूत्र आना, चक्कर महसूस होना, अत्यधिक थकान, आंखों का धंसना और त्वचा का सूखापन शामिल हो सकते हैं। छोटे बच्चों में रोने के दौरान आंसू कम आना, सुस्ती और दूध पीने में कमी भी महत्वपूर्ण संकेत माने जाते हैं।
यदि इन लक्षणों के साथ लगातार उल्टी-दस्त भी बने रहें तो चिकित्सकीय सलाह लेने में देरी नहीं करनी चाहिए।
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किन लोगों में अधिक होता है जोखिम
डॉक्टरों के अनुसार कुछ लोगों में डिहाइड्रेशन और पेट के संक्रमण का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में अधिक होता है। इनमें छोटे बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं, मधुमेह (डायबिटीज) के मरीज, हृदय रोग, किडनी रोग या अन्य पुरानी बीमारियों से पीड़ित लोग शामिल हैं।
इसके अलावा निर्माण कार्य, खेती, फैक्ट्री, सड़क निर्माण या अन्य बाहरी कार्यों में लंबे समय तक धूप में काम करने वाले लोगों में भी शरीर से अत्यधिक पानी निकलने की संभावना रहती है। ऐसे लोगों को नियमित अंतराल पर पानी पीने और आराम करने की सलाह दी जाती है।
गर्मी में भोजन और पानी को सुरक्षित रखना क्यों जरूरी है
गर्मी के मौसम में भोजन जल्दी खराब हो सकता है। इसलिए हमेशा ताजा और स्वच्छ भोजन का सेवन करना चाहिए। यदि भोजन लंबे समय तक बाहर रखा गया हो या उसमें खराब होने के संकेत दिखाई दें तो उसका सेवन नहीं करना चाहिए।
फल और सब्जियों को अच्छी तरह धोकर ही खाना चाहिए। बाहर मिलने वाले कटे हुए फल, खुले में रखे खाद्य पदार्थ, अस्वच्छ स्ट्रीट फूड और संदिग्ध गुणवत्ता वाले पेय पदार्थों से बचना बेहतर माना जाता है। पीने के लिए हमेशा स्वच्छ और सुरक्षित पानी का उपयोग करना चाहिए।
यदि यात्रा के दौरान बोतलबंद पानी का उपयोग किया जा रहा हो तो उसकी सील की जांच करना भी एक अच्छी आदत मानी जाती है।
ओआरएस और पर्याप्त पानी का सेवन क्यों है महत्वपूर्ण
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि केवल प्यास लगने का इंतजार नहीं करना चाहिए। गर्मियों में शरीर को नियमित अंतराल पर पर्याप्त मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है। यदि उल्टी या दस्त हो रहे हों तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार ओआरएस का सेवन शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी को पूरा करने में मदद कर सकता है।
ओआरएस का घोल शरीर में सोडियम, पोटैशियम और अन्य आवश्यक तत्वों के संतुलन को बनाए रखने में सहायक होता है। हालांकि, यदि मरीज लगातार उल्टी कर रहा हो और तरल पदार्थ भी नहीं पी पा रहा हो, तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेना आवश्यक हो सकता है।
किन परिस्थितियों में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए
डॉक्टरों के अनुसार यदि उल्टी या दस्त लगातार जारी रहें, मरीज पानी पीने में असमर्थ हो, पेशाब बहुत कम आने लगे, तेज बुखार हो, मल में खून दिखाई दे, अत्यधिक कमजोरी महसूस हो या बार-बार चक्कर आए, तो तुरंत चिकित्सा सलाह लेनी चाहिए।
छोटे बच्चों और बुजुर्गों में डिहाइड्रेशन बहुत तेजी से बढ़ सकता है। इसलिए इन वर्गों में लक्षण दिखाई देने पर इलाज में देरी नहीं करनी चाहिए। स्वयं दवा लेने के बजाय योग्य चिकित्सक की सलाह लेना अधिक सुरक्षित माना जाता है।
हीटवेव के दौरान अपनाई जा सकने वाली सामान्य सावधानियां
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि तेज गर्मी के दौरान पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें, हल्का और ताजा भोजन करें, लंबे समय तक खाली पेट न रहें, अत्यधिक धूप से बचें और आवश्यकता होने पर छायादार स्थान पर आराम करें। ढीले और हल्के रंग के सूती कपड़े पहनना भी शरीर का तापमान नियंत्रित रखने में मदद कर सकता है।
घर और कार्यस्थल पर स्वच्छता बनाए रखना, हाथों को साबुन से नियमित धोना, भोजन तैयार करने और खाने से पहले साफ-सफाई का ध्यान रखना तथा दूषित पानी से बचना पेट के संक्रमण के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह
डॉक्टरों का कहना है कि हीटवेव के दौरान उल्टी और दस्त जैसी समस्याओं को सामान्य पेट खराब होने की शिकायत मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर पर्याप्त हाइड्रेशन, स्वच्छ भोजन, सुरक्षित पेयजल, ओआरएस का उचित उपयोग और जरूरत पड़ने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेने से गंभीर जटिलताओं के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। गर्मियों के मौसम में छोटी-छोटी सावधानियां अपनाकर डिहाइड्रेशन और उससे जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं से प्रभावी बचाव किया जा सकता है।




