AC की आदत बना रही शरीर को कमजोर! मामूली गर्मी में भी बिगड़ रही लोगों की हालत

AC की आदत बना रही शरीर को कमजोर! मामूली गर्मी में भी बिगड़ रही लोगों की हालत

देश के कई हिस्सों में गर्मी का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। कई राज्यों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक दर्ज किया जा रहा है, जिसके कारण लोगों के लिए घर से बाहर निकलना चुनौती बन गया है। भीषण गर्मी और लू से बचने के लिए अधिकांश लोग घर, कार्यालय, शॉपिंग मॉल और वाहनों में एयर कंडीशनर (AC) का लगातार उपयोग कर रहे हैं। आधुनिक जीवनशैली में एसी अब केवल सुविधा का साधन नहीं रह गया है, बल्कि कई लोगों की दैनिक आवश्यकता बन चुका है।

हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक समय तक लगातार एयर कंडीशनर वाले वातावरण में रहना शरीर पर कई तरह के प्रभाव डाल सकता है। एसी का संतुलित उपयोग गर्मी से राहत देता है, लेकिन यदि व्यक्ति लंबे समय तक पूरी तरह कृत्रिम तापमान वाले वातावरण में ही रहे, तो शरीर की प्राकृतिक अनुकूलन क्षमता प्रभावित हो सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि गर्मी के मौसम में एसी का उपयोग करना सामान्य बात है, लेकिन इसके साथ पर्याप्त पानी पीना, समय-समय पर प्राकृतिक वातावरण में रहना और नियमित शारीरिक गतिविधियां बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है।

शरीर की प्राकृतिक तापमान नियंत्रण प्रणाली कैसे काम करती है?

मानव शरीर में तापमान को संतुलित बनाए रखने की एक स्वाभाविक प्रणाली होती है। जब बाहरी वातावरण गर्म होता है तो शरीर पसीना निकालकर स्वयं को ठंडा रखने का प्रयास करता है। पसीने के वाष्पीकरण से शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है और अत्यधिक गर्मी के प्रभाव को कम करने में मदद मिलती है।

इसी प्रकार सर्द मौसम में शरीर की गर्मी बनाए रखने के लिए अलग तरीके से प्रतिक्रिया करता है। यह अनुकूलन क्षमता (Adaptation) शरीर की प्राकृतिक विशेषता है, जो मौसम के अनुसार धीरे-धीरे विकसित होती रहती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार यदि कोई व्यक्ति लगातार नियंत्रित तापमान वाले वातावरण में ही रहता है, तो शरीर को प्राकृतिक मौसम के अनुरूप स्वयं को ढालने के अवसर कम मिलते हैं।

लगातार एसी में रहने से गर्मी ज्यादा क्यों महसूस होने लगती है?

डॉक्टरों के अनुसार शरीर जिस तापमान में अधिक समय बिताता है, धीरे-धीरे उसी वातावरण का अभ्यस्त हो जाता है। यदि कोई व्यक्ति दिनभर 22 से 24 डिग्री सेल्सियस तापमान वाले कमरे में रहता है और अचानक 42 से 45 डिग्री तापमान वाले वातावरण में जाता है, तो उसे गर्मी सामान्य से अधिक महसूस हो सकती है।

इसका अर्थ यह नहीं है कि शरीर की क्षमता पूरी तरह समाप्त हो जाती है, बल्कि तापमान में अचानक होने वाला बड़ा अंतर शरीर के लिए असुविधा पैदा कर सकता है। यही कारण है कि कई लोगों को बिजली चले जाने या एसी बंद होने पर बेचैनी, अत्यधिक गर्मी या असहजता महसूस होती है।

क्या एसी डिहाइड्रेशन का कारण बन सकता है?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि एयर कंडीशनर कमरे की हवा में मौजूद नमी (Humidity) को कम कर देता है। लंबे समय तक ऐसे वातावरण में रहने पर शरीर और त्वचा से नमी कम होने लगती है। यदि व्यक्ति पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पीता, तो डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ सकता है।

डिहाइड्रेशन की स्थिति में प्यास अधिक लगना, सिरदर्द, थकान, कमजोरी और शरीर में ऊर्जा की कमी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इसलिए एसी में रहने वाले लोगों को नियमित अंतराल पर पानी पीने की सलाह दी जाती है, भले ही उन्हें प्यास कम महसूस हो।

त्वचा और आंखों पर क्या असर पड़ सकता है?

लगातार एसी वाले वातावरण में रहने से त्वचा की प्राकृतिक नमी कम हो सकती है। इससे त्वचा में रूखापन, खुजली या खिंचाव जैसी समस्या महसूस हो सकती है। जिन लोगों की त्वचा पहले से संवेदनशील होती है, उनमें यह प्रभाव अधिक दिखाई दे सकता है।

इसी प्रकार कम आर्द्रता के कारण आंखों में सूखापन, जलन, खुजली या कॉन्टैक्ट लेंस पहनने वालों में असुविधा की शिकायत भी बढ़ सकती है। लंबे समय तक कंप्यूटर स्क्रीन के सामने एसी में काम करने वाले लोगों को यह समस्या अपेक्षाकृत अधिक हो सकती है।

गले और श्वसन तंत्र पर भी पड़ सकता है प्रभाव

एयर कंडीशनर वाले वातावरण में लंबे समय तक रहने से कुछ लोगों को गले में सूखापन या हल्की खराश महसूस हो सकती है। यदि एसी की नियमित सफाई न की जाए या फिल्टर गंदे हों, तो धूल, फफूंद या अन्य सूक्ष्म कण हवा के साथ कमरे में फैल सकते हैं।

एलर्जी या अस्थमा से पीड़ित लोगों में ऐसे वातावरण से सांस संबंधी परेशानी बढ़ने की संभावना अधिक रहती है। इसलिए समय-समय पर एसी की सर्विसिंग और फिल्टर की सफाई कराना महत्वपूर्ण माना जाता है।

क्या है ‘सिक बिल्डिंग सिंड्रोम’?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार लंबे समय तक बंद इमारतों में रहने और खराब वेंटिलेशन की स्थिति में कुछ लोगों को एक साथ कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याएं महसूस हो सकती हैं। इसे सामान्य रूप से “सिक बिल्डिंग सिंड्रोम” (Sick Building Syndrome) कहा जाता है।

इस स्थिति में सिरदर्द, थकान, आंखों में जलन, गले में खराश, सूखी खांसी, चक्कर आना, सांस लेने में परेशानी, त्वचा में जलन और काम में ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। हालांकि इन लक्षणों के पीछे कई अन्य कारण भी हो सकते हैं, इसलिए लगातार समस्या होने पर चिकित्सकीय सलाह लेना आवश्यक है।

प्राकृतिक वेंटिलेशन क्यों है जरूरी?

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि घर या कार्यालय पूरी तरह बंद रहता है और ताजी हवा का प्रवेश नहीं होता, तो इनडोर एयर क्वालिटी प्रभावित हो सकती है। ऐसे में समय-समय पर खिड़कियां खोलकर प्राकृतिक हवा आने देना उपयोगी माना जाता है।

प्राकृतिक वेंटिलेशन से कमरे के भीतर जमा कार्बन डाइऑक्साइड, धूल और अन्य सूक्ष्म कणों का स्तर कम करने में मदद मिल सकती है। इससे इनडोर वातावरण अधिक ताजा और आरामदायक बना रहता है।

एसी का सही तापमान कितना होना चाहिए?

ऊर्जा संरक्षण और स्वास्थ्य दोनों दृष्टिकोण से कई विशेषज्ञ एयर कंडीशनर का तापमान लगभग 24 से 26 डिग्री सेल्सियस के बीच रखने की सलाह देते हैं। अत्यधिक कम तापमान पर लगातार एसी चलाने से बाहर और अंदर के तापमान में बड़ा अंतर पैदा हो सकता है, जिससे शरीर को बार-बार अनुकूलन करना पड़ता है।

यदि व्यक्ति को बार-बार बाहर आना-जाना पड़ता है, तो तापमान का अंतर कम रखना अधिक आरामदायक हो सकता है।

लंबे समय तक एसी में रहने वालों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

यदि आपका अधिकांश समय एयर कंडीशनर वाले वातावरण में बीतता है, तो कुछ सामान्य सावधानियां अपनाना लाभदायक हो सकता है। पर्याप्त मात्रा में पानी पीना, बीच-बीच में बाहर प्राकृतिक वातावरण में कुछ समय बिताना, नियमित रूप से चलना-फिरना, एसी की समय पर सर्विस कराना और कमरे में उचित वेंटिलेशन बनाए रखना महत्वपूर्ण माना जाता है।

इसके अलावा आंखों में सूखापन महसूस होने पर बार-बार पलकें झपकाना, आवश्यकता होने पर चिकित्सकीय सलाह के अनुसार आई ड्रॉप का उपयोग करना तथा त्वचा की नमी बनाए रखने के लिए मॉइस्चराइज़र का इस्तेमाल भी मददगार हो सकता है।

गर्मी से बचाव और संतुलित उपयोग दोनों हैं जरूरी

विशेषज्ञों का कहना है कि भीषण गर्मी और लू से बचाव के लिए एयर कंडीशनर का उपयोग कई परिस्थितियों में आवश्यक हो सकता है, विशेषकर बुजुर्गों, छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए। लेकिन इसके साथ-साथ शरीर की प्राकृतिक जरूरतों का भी ध्यान रखना जरूरी है।

यदि एसी का उपयोग संतुलित तरीके से किया जाए, पर्याप्त पानी पिया जाए, नियमित रूप से ताजी हवा ली जाए और उपकरण की साफ-सफाई का ध्यान रखा जाए, तो गर्मी से राहत के साथ स्वास्थ्य संबंधी संभावित जोखिमों को भी काफी हद तक कम किया जा सकता है। किसी भी प्रकार की लगातार स्वास्थ्य समस्या, सांस लेने में दिक्कत, आंखों में गंभीर जलन या अन्य असामान्य लक्षण दिखाई देने पर स्वयं उपचार करने के बजाय योग्य चिकित्सक से सलाह लेना उचित रहता है।

नोट: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। किसी भी चिकित्सकीय समस्या या लक्षण की स्थिति में डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से व्यक्तिगत सलाह अवश्य लें।