NFHS-6 रिपोर्ट: देश में बढ़ रहा मोटापा और डायबिटीज का खतरा, महिलाओं की स्थिति ज्यादा चिंताजनक

NFHS-6 रिपोर्ट: देश में बढ़ रहा मोटापा और डायबिटीज का खतरा, महिलाओं की स्थिति ज्यादा चिंताजनक

देश में बदलती जीवनशैली का असर अब लोगों की सेहत पर साफ दिखाई देने लगा है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (NFHS-6) की नई रिपोर्ट ने मोटापा, हाई ब्लड शुगर और अन्य जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों को लेकर गंभीर संकेत दिए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक पिछले कुछ वर्षों में वयस्क आबादी में मोटापा और ब्लड शुगर की समस्या तेजी से बढ़ी है, जिसमें महिलाओं की स्थिति पुरुषों की तुलना में अधिक चिंताजनक नजर आई है।

रिपोर्ट बताती है कि 15 से 49 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं में मोटापे की दर 2019-21 के 24 प्रतिशत से बढ़कर 2023-24 में 30.7 प्रतिशत हो गई है। वहीं पुरुषों में यह आंकड़ा 22.9 प्रतिशत से बढ़कर 27.3 प्रतिशत तक पहुंच गया। इससे साफ है कि मोटापा दोनों वर्गों में बढ़ रहा है, लेकिन महिलाओं में इसकी रफ्तार ज्यादा तेज है।

राज्यों के आंकड़ों पर नजर डालें तो महिलाओं में मोटापे की सबसे अधिक दर पुडुचेरी में दर्ज की गई, जहां 46.3 प्रतिशत महिलाएं इस समस्या से प्रभावित हैं। इसके बाद चंडीगढ़, दिल्ली और पंजाब का स्थान है। दूसरी ओर बिहार, छत्तीसगढ़ और असम जैसे राज्यों में महिलाओं में मोटापे की दर अपेक्षाकृत कम पाई गई। पुरुषों के मामले में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह सबसे आगे है, जहां करीब 38 प्रतिशत पुरुष मोटापे का शिकार हैं।

मोटापे के साथ-साथ हाई ब्लड शुगर के मामलों में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। 15 वर्ष और उससे अधिक उम्र की महिलाओं में हाई ब्लड शुगर या उसकी दवा लेने वालों की संख्या 13.5 प्रतिशत से बढ़कर 17.8 प्रतिशत हो गई है। पुरुषों में यह आंकड़ा 15.6 प्रतिशत से बढ़कर 20.9 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जो भविष्य में मधुमेह के बढ़ते खतरे की ओर इशारा करता है।

हालांकि रिपोर्ट में कुछ सकारात्मक संकेत भी मिले हैं। 15 से 24 वर्ष की युवतियों में मासिक धर्म के दौरान सुरक्षित स्वच्छता उत्पादों का उपयोग बढ़ा है। यह आंकड़ा 77.6 प्रतिशत से बढ़कर 79.2 प्रतिशत हो गया है। विशेषज्ञ इसके पीछे सरकारी योजनाओं और सस्ते सैनिटरी उत्पादों की बेहतर उपलब्धता को अहम कारण मानते हैं।

रिपोर्ट में परिवार नियोजन से जुड़ा एक दिलचस्प बदलाव भी सामने आया है। विवाहित महिलाओं के बीच आधुनिक गर्भनिरोधक तरीकों का उपयोग घटा है, जबकि पारंपरिक तरीकों की लोकप्रियता बढ़ी है। आधुनिक तरीकों का इस्तेमाल 56.4 प्रतिशत से घटकर 52.7 प्रतिशत रह गया, जबकि पारंपरिक उपायों को अपनाने वाली महिलाओं का प्रतिशत 10.3 से बढ़कर 16.4 हो गया है।

कुल मिलाकर NFHS-6 के आंकड़े संकेत देते हैं कि देश में जीवनशैली से जुड़ी स्वास्थ्य चुनौतियां तेजी से बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच ही इन बढ़ती समस्याओं पर काबू पाने का सबसे प्रभावी तरीका हो सकता है।

(Photo : AI Generated)