हरियाणा सरकार ने राज्यभर में रोडवेज विभाग की संपत्तियों और बस अड्डों पर बढ़ रहे अतिक्रमण के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू करने का फैसला किया है। परिवहन एवं ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि रोडवेज की भूमि, बस स्टैंड परिसरों और अन्य सरकारी संपत्तियों पर किए गए सभी अवैध कब्जों की पहचान कर उन्हें जल्द से जल्द हटाया जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि सरकारी भूमि पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को भी जवाबदेह ठहराया जाएगा।
मंत्री ने कहा कि सरकारी संपत्ति जनता की अमानत होती है और इसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। यदि किसी स्थान पर लंबे समय से अवैध कब्जे बने हुए हैं और संबंधित अधिकारी उन्हें हटाने में विफल रहते हैं, तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
लगातार मिल रही थीं कब्जों की शिकायतें
सूत्रों के अनुसार, परिवहन विभाग को पिछले कुछ समय से राज्य के विभिन्न जिलों से शिकायतें प्राप्त हो रही थीं कि रोडवेज की कई मूल्यवान जमीनों पर अवैध कब्जे किए गए हैं। कई स्थानों पर विभाग की भूमि पर अस्थायी और स्थायी निर्माण खड़े कर दिए गए हैं, जबकि कुछ जगहों पर व्यवसायिक गतिविधियां भी संचालित की जा रही हैं।
इसके अलावा कई बस अड्डों के भीतर और आसपास रेहड़ियां, खोखे और अन्य अस्थायी ढांचे स्थापित हो गए हैं, जिससे यात्रियों को आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। भीड़भाड़ बढ़ने के कारण बस अड्डों की व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है और सुरक्षा संबंधी चुनौतियां भी सामने आ रही हैं।
इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए परिवहन मंत्री ने सभी रोडवेज महाप्रबंधकों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं।
हर जिले में होगा जमीनों का सर्वे
सरकार ने रोडवेज अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में विभाग की सभी जमीनों का विस्तृत सर्वेक्षण कराएं। इस प्रक्रिया के दौरान यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कहीं भी सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा तो नहीं है।
सर्वे रिपोर्ट तैयार होने के बाद अतिक्रमण वाले क्षेत्रों की सूची बनाई जाएगी और कानूनी प्रक्रिया अपनाते हुए कब्जे हटाने की कार्रवाई शुरू की जाएगी। अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि वे जमीनों का रिकॉर्ड अपडेट रखें ताकि भविष्य में किसी प्रकार के विवाद या अवैध कब्जे की स्थिति पैदा न हो।
विभाग का मानना है कि नियमित सर्वेक्षण और निगरानी से सरकारी संपत्तियों को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।
बस अड्डों की व्यवस्था सुधारने पर जोर
परिवहन विभाग केवल जमीनों को अतिक्रमण मुक्त कराने तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि बस अड्डों की व्यवस्था को भी बेहतर बनाने की दिशा में काम कर रहा है।
अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि बस स्टैंड परिसरों में अनधिकृत ढंग से संचालित होने वाले खोखों, रेहड़ियों और अन्य अस्थायी निर्माणों की पहचान की जाए। जहां आवश्यक हो, वहां वैकल्पिक व्यवस्था बनाकर परिसर को व्यवस्थित किया जाए ताकि यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
सरकार का उद्देश्य बस अड्डों को अधिक स्वच्छ, सुरक्षित और सुचारू बनाना है, जिससे यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
स्वयं निरीक्षण करेंगे अनिल विज
परिवहन मंत्री ने स्पष्ट किया है कि वह केवल कागजी रिपोर्टों के आधार पर संतुष्ट नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में वह स्वयं विभिन्न जिलों का दौरा करेंगे और रोडवेज परिसरों तथा बस अड्डों की स्थिति का निरीक्षण करेंगे।
निरीक्षण के दौरान यदि कहीं अतिक्रमण पाया गया या अधिकारियों की लापरवाही सामने आई तो उनसे सीधे जवाब मांगा जाएगा। विज ने कहा कि सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए अभियान को परिणाम तक पहुंचाया जाएगा और इसमें किसी भी स्तर पर ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी।
उनका कहना है कि विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया जा चुका है कि समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए और हर जिले से प्रगति रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाए।
करोड़ों रुपये की संपत्तियों की सुरक्षा पर फोकस
रोडवेज विभाग के पास राज्य के विभिन्न हिस्सों में बड़ी मात्रा में जमीन और अन्य संपत्तियां हैं। इनमें बस अड्डे, कार्यशालाएं, डिपो परिसर और अन्य प्रशासनिक भवन शामिल हैं। इन संपत्तियों की बाजार कीमत करोड़ों रुपये में आंकी जाती है।
सरकार का मानना है कि यदि इन जमीनों पर अवैध कब्जे होते हैं तो इससे न केवल सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचता है बल्कि भविष्य की विकास योजनाएं भी प्रभावित होती हैं। इसी कारण विभाग अब अपनी संपत्तियों की सुरक्षा और संरक्षण को प्राथमिकता दे रहा है।
आंधी-तूफान से प्रभावित बिजली व्यवस्था पर भी सख्ती
रोडवेज की जमीनों को लेकर सख्त निर्देश जारी करने के साथ-साथ अनिल विज ने हाल ही में प्रदेश में आए तेज आंधी-तूफान से प्रभावित बिजली व्यवस्था की भी समीक्षा की है।
उन्होंने बिजली विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि तूफान के कारण हुए नुकसान की विस्तृत रिपोर्ट 24 घंटे के भीतर उपलब्ध कराई जाए। रिपोर्ट में यह जानकारी शामिल करने को कहा गया है कि कितने बिजली के खंभे गिरे, कितनी जगहों पर तार टूटे और किन क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई।
इसके अलावा अधिकारियों को यह भी बताना होगा कि बिजली सेवाओं को बहाल करने में कितना समय लगा और भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए क्या तैयारियां की गई हैं।
क्षतिग्रस्त लाइनों की तत्काल मरम्मत के निर्देश
ऊर्जा मंत्री ने स्पष्ट किया है कि जहां-जहां बिजली के पोल क्षतिग्रस्त हुए हैं या तार टूटे हैं, वहां मरम्मत कार्य में किसी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए। विभागीय टीमों को निर्देश दिए गए हैं कि वे प्रभावित क्षेत्रों में प्राथमिकता के आधार पर कार्य करें और लोगों को जल्द से जल्द बिजली आपूर्ति उपलब्ध कराएं।
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं और खराब मौसम के दौरान बिजली व्यवस्था को बनाए रखना बड़ी चुनौती होती है, लेकिन विभाग को ऐसी परिस्थितियों के लिए पहले से तैयार रहना चाहिए। इसके लिए आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र को और मजबूत बनाने पर भी जोर दिया गया है।
जवाबदेही तय करने की तैयारी
अनिल विज ने अधिकारियों को साफ संदेश दिया है कि चाहे मामला अतिक्रमण का हो या बिजली व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं का, जवाबदेही तय की जाएगी। उन्होंने कहा कि जनता की सुविधाओं से जुड़े मामलों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सरकार चाहती है कि विभागीय अधिकारी नियमित निरीक्षण करें, समस्याओं की पहचान करें और समय रहते समाधान सुनिश्चित करें। यदि किसी स्तर पर अनदेखी या लापरवाही सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की जा सकती है।
प्रशासनिक सक्रियता का संकेत
सरकार के हालिया निर्देशों को प्रशासनिक सक्रियता और जवाबदेह शासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। एक ओर जहां रोडवेज विभाग की जमीनों को अतिक्रमण मुक्त कराने की तैयारी की जा रही है, वहीं दूसरी ओर बिजली व्यवस्था को मजबूत करने और आपदा के बाद त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन निर्देशों को प्रभावी ढंग से लागू किया गया तो न केवल सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी बल्कि यात्रियों और आम नागरिकों को भी बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी। आने वाले दिनों में जिलों से प्राप्त रिपोर्टों और मंत्री के प्रस्तावित दौरों के बाद इस अभियान की दिशा और गति और अधिक स्पष्ट होगी।



