हरियाणा में गरीबों के राशन में हो सकता है इजाफा, दूसरे राज्यों के मॉडल का होगा अध्ययन

हरियाणा में गरीबों के राशन में हो सकता है इजाफा, दूसरे राज्यों के मॉडल का होगा अध्ययन

हरियाणा सरकार सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) को और अधिक प्रभावी तथा लाभार्थी-केंद्रित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रही है। राज्य सरकार गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले परिवारों और अंत्योदय श्रेणी के लाभार्थियों को मिलने वाले राशन में बढ़ोतरी अथवा अतिरिक्त खाद्य सामग्री शामिल करने की संभावनाओं का अध्ययन कर रही है। इसके लिए खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के अधिकारियों को अन्य राज्यों की व्यवस्थाओं का विस्तृत अध्ययन करने के निर्देश दिए गए हैं।

सरकार चाहती है कि यदि देश के अन्य राज्यों में गरीब परिवारों को राशन के साथ अतिरिक्त खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है और उसका सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल रहा है, तो उसी प्रकार की व्यवस्था हरियाणा में भी लागू करने की संभावनाओं पर विचार किया जाए। इसी उद्देश्य से विभागीय अधिकारियों की एक टीम विभिन्न राज्यों का दौरा करेगी और वहां की सार्वजनिक वितरण प्रणाली का विस्तृत मूल्यांकन करेगी।

जानकारी के अनुसार, अध्ययन दल उत्तर प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, दिल्ली और हिमाचल प्रदेश सहित कई राज्यों में जाकर वहां लागू राशन वितरण मॉडल का निरीक्षण करेगा। टीम यह समझने का प्रयास करेगी कि विभिन्न राज्यों में बीपीएल और अंत्योदय परिवारों को किस प्रकार की खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई जाती है, वितरण की प्रक्रिया कैसी है और लाभार्थियों को नियमित रूप से कौन-कौन से खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराए जाते हैं।

सरकार विशेष रूप से इस बात पर ध्यान दे रही है कि यदि किसी राज्य में गेहूं के अतिरिक्त चना, दाल या अन्य आवश्यक खाद्य सामग्री भी वितरित की जा रही है, तो उस मॉडल का अध्ययन कर हरियाणा के लिए भी उपयुक्त विकल्प तैयार किया जा सके। अधिकारियों को इन राज्यों की व्यवस्थाओं का तुलनात्मक विश्लेषण कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।

खाद्य एवं आपूर्ति राज्य मंत्री राजेश नागर ने हाल ही में प्रदेश के सभी जिलों के खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रकों के साथ आयोजित ऑनलाइन समीक्षा बैठक में इस संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे अध्ययन के दौरान केवल खाद्य सामग्री की मात्रा ही नहीं, बल्कि वितरण व्यवस्था की पारदर्शिता, निगरानी प्रणाली, पात्र लाभार्थियों की पहचान तथा तकनीकी व्यवस्थाओं का भी विस्तृत मूल्यांकन करें।

अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट के आधार पर राज्य सरकार भविष्य की रणनीति तैयार करेगी। यदि अध्ययन में यह सामने आता है कि अन्य राज्यों में लाभार्थियों को अतिरिक्त खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने की व्यवस्था सफलतापूर्वक संचालित हो रही है, तो हरियाणा सरकार भी अपने राशन वितरण ढांचे में आवश्यक बदलाव करने पर विचार कर सकती है।

राज्य सरकार का यह कदम केंद्र सरकार की “एक राष्ट्र-एक राशन कार्ड” योजना को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस योजना के तहत पात्र लाभार्थी देश के किसी भी हिस्से में अपने राशन कार्ड के माध्यम से खाद्यान्न प्राप्त कर सकते हैं। हरियाणा सरकार चाहती है कि राज्य की सार्वजनिक वितरण प्रणाली राष्ट्रीय स्तर की सर्वोत्तम व्यवस्थाओं के अनुरूप विकसित हो और पात्र परिवारों को अधिकतम लाभ मिल सके।

प्रदेश में वर्तमान समय में बीपीएल और अंत्योदय श्रेणी के लगभग 40 लाख राशन कार्ड सक्रिय हैं। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से प्रत्येक माह करीब 1.57 करोड़ लाभार्थियों तक खाद्यान्न पहुंचाया जाता है। इनमें लगभग 2.86 लाख अंत्योदय परिवार तथा 37.14 लाख बीपीएल परिवार शामिल हैं। इतनी बड़ी संख्या में लाभार्थियों तक नियमित रूप से खाद्यान्न पहुंचाने के कारण यह योजना राज्य की सबसे महत्वपूर्ण जनकल्याणकारी योजनाओं में शामिल है।

वर्तमान व्यवस्था के अनुसार खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत अंत्योदय अन्न योजना के पात्र परिवारों को प्रति माह 35 किलोग्राम गेहूं निशुल्क उपलब्ध कराया जाता है। वहीं बीपीएल श्रेणी के लाभार्थियों को परिवार के प्रत्येक सदस्य के हिसाब से प्रति माह पांच किलोग्राम गेहूं मुफ्त दिया जाता है। इसके अतिरिक्त पात्र परिवारों को सरसों का तेल और चीनी भी रियायती दरों पर उपलब्ध कराई जाती है।

हालांकि अब सरकार यह जानना चाहती है कि क्या अन्य राज्यों में लाभार्थियों को पोषण की दृष्टि से अधिक उपयोगी खाद्य सामग्री भी उपलब्ध कराई जा रही है। प्रारंभिक जानकारी में यह बात सामने आई है कि कुछ राज्यों में राशन के साथ चना अथवा विभिन्न प्रकार की दालें भी वितरित की जाती हैं। इन्हीं व्यवस्थाओं का प्रत्यक्ष अध्ययन करने के लिए विभागीय टीम को भेजने का निर्णय लिया गया है।

राजेश नागर ने संकेत दिए हैं कि सरकार का उद्देश्य केवल राशन की मात्रा बढ़ाना नहीं है, बल्कि गरीब परिवारों को संतुलित एवं उपयोगी खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने की संभावनाओं का भी मूल्यांकन करना है। यदि अध्ययन रिपोर्ट सकारात्मक रहती है और वित्तीय दृष्टि से यह व्यवस्था व्यवहारिक साबित होती है, तो भविष्य में राशन वितरण प्रणाली में सुधार संबंधी प्रस्ताव तैयार किए जा सकते हैं।

सरकार यह भी सुनिश्चित करना चाहती है कि किसी भी संभावित बदलाव से वितरण व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव न पड़े और सभी पात्र लाभार्थियों तक समय पर खाद्यान्न पहुंचता रहे। इसलिए अधिकारियों से कहा गया है कि वे अध्ययन के दौरान लॉजिस्टिक्स, भंडारण क्षमता, आपूर्ति श्रृंखला और वितरण तंत्र की कार्यप्रणाली का भी विस्तृत परीक्षण करें।

विशेषज्ञों का मानना है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली में समय-समय पर सुधार करना आवश्यक होता है, क्योंकि बदलती सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार लाभार्थियों की जरूरतें भी बदलती रहती हैं। यदि अन्य राज्यों के सफल मॉडलों से उपयोगी अनुभव प्राप्त होते हैं, तो हरियाणा की राशन व्यवस्था को भी अधिक प्रभावी, पारदर्शी और लाभार्थी-केंद्रित बनाया जा सकता है।

अब अधिकारियों की अध्ययन रिपोर्ट पर सरकार की नजर रहेगी। इस रिपोर्ट के आधार पर तय किया जाएगा कि प्रदेश में मौजूदा राशन व्यवस्था में किस प्रकार के सुधार किए जा सकते हैं और क्या गरीब परिवारों को गेहूं के अलावा अतिरिक्त खाद्य सामग्री भी उपलब्ध कराई जाएगी। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो भविष्य में हरियाणा के लाखों बीपीएल और अंत्योदय परिवारों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत पहले से अधिक सुविधाएं मिलने की संभावना बन सकती है।