हिमाचल प्रदेश सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर वरिष्ठ नागरिकों को मिलने वाली वृद्धावस्था पेंशन में केंद्रीय सहायता बढ़ाने की मांग करते हुए केंद्र सरकार के समक्ष औपचारिक प्रस्ताव रखा है। राज्य सरकार का कहना है कि राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) के तहत केंद्र की ओर से दी जाने वाली पेंशन राशि कई वर्षों से अपरिवर्तित है, जबकि इस दौरान महंगाई, स्वास्थ्य सेवाओं की लागत और जीवन-यापन का खर्च लगातार बढ़ा है। ऐसे में मौजूदा सहायता राशि आज की जरूरतों के मुकाबले बेहद कम साबित हो रही है।
सरकार का मानना है कि केंद्र की हिस्सेदारी बढ़ने से न केवल बुजुर्गों को अधिक आर्थिक सुरक्षा मिलेगी, बल्कि राज्यों पर पड़ रहा अतिरिक्त वित्तीय दबाव भी कम होगा। प्रस्ताव में यह भी उल्लेख किया गया है कि सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप समय-समय पर संशोधित किया जाना आवश्यक है।
वर्षों से नहीं बढ़ी केंद्र की सहायता
राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम के तहत केंद्र सरकार गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन करने वाले पात्र वरिष्ठ नागरिकों को वृद्धावस्था पेंशन उपलब्ध कराती है। वर्तमान व्यवस्था के अनुसार 60 से 79 वर्ष आयु वर्ग के लाभार्थियों को केंद्र सरकार की ओर से 200 रुपये प्रतिमाह की सहायता दी जाती है, जबकि 80 वर्ष या उससे अधिक आयु के बुजुर्गों को 500 रुपये प्रति माह दिए जाते हैं।
गौरतलब है कि 60 से 79 वर्ष आयु वर्ग के लिए 200 रुपये प्रतिमाह की राशि वर्ष 2007 से लागू है, जबकि 80 वर्ष से अधिक आयु वाले लाभार्थियों के लिए 500 रुपये प्रतिमाह की सहायता वर्ष 2011 से प्रभावी है। इन दोनों श्रेणियों में पिछले कई वर्षों से कोई संशोधन नहीं किया गया है।
राज्य सरकार का कहना है कि इतने लंबे समय तक राशि में बढ़ोतरी न होने के कारण पेंशन का वास्तविक मूल्य लगातार घटता गया है। महंगाई के कारण दैनिक जरूरतों, दवाइयों, इलाज और अन्य आवश्यक खर्चों में कई गुना वृद्धि हो चुकी है, लेकिन केंद्रीय सहायता आज भी पुराने स्तर पर बनी हुई है।
हिमाचल अपने संसाधनों से दे रहा अधिक पेंशन
केंद्र की सीमित सहायता के बावजूद हिमाचल प्रदेश सरकार अपने बजट से अतिरिक्त राशि जोड़कर पात्र बुजुर्गों को अधिक पेंशन उपलब्ध करा रही है। वर्तमान में राज्य सरकार पात्र वरिष्ठ नागरिकों को उनकी श्रेणी और पात्रता के अनुसार 1100 रुपये से लेकर 1700 रुपये प्रतिमाह तक सामाजिक सुरक्षा पेंशन प्रदान कर रही है।
राज्य सरकार का कहना है कि यदि केंद्र अपनी हिस्सेदारी बढ़ाता है तो सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को और मजबूत बनाया जा सकेगा तथा भविष्य में लाभार्थियों को बेहतर सहायता उपलब्ध कराने में भी आसानी होगी।
1.16 लाख बुजुर्गों को मिल रहा योजना का लाभ
हिमाचल प्रदेश में लगभग 1.16 लाख आर्थिक रूप से कमजोर बुजुर्ग राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम के अंतर्गत पंजीकृत हैं। ये सभी लाभार्थी केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त व्यवस्था के तहत वृद्धावस्था पेंशन प्राप्त कर रहे हैं।
प्रदेश सरकार सामाजिक सुरक्षा पेंशन का भुगतान त्रैमासिक आधार पर करती है। यानी हर तीन महीने की पेंशन एक साथ लाभार्थियों के बैंक खातों में हस्तांतरित की जाती है। इस व्यवस्था से प्रशासनिक प्रक्रिया सरल होती है और लाभार्थियों को नियमित अंतराल पर एकमुश्त राशि प्राप्त होती है।
राज्य पर बढ़ रहा वित्तीय बोझ
हिमाचल सरकार का कहना है कि केंद्र की सहायता राशि लंबे समय से स्थिर रहने के कारण राज्य सरकार को अपने संसाधनों से अधिक धन खर्च करना पड़ रहा है। सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का दायरा लगातार बढ़ रहा है और हर वर्ष नए पात्र लाभार्थी भी जुड़ रहे हैं। ऐसे में यदि केंद्र की हिस्सेदारी नहीं बढ़ती है तो भविष्य में राज्यों पर वित्तीय दबाव और बढ़ सकता है।
राज्य सरकार ने अपने प्रस्ताव में यह भी उल्लेख किया है कि केंद्र और राज्यों की साझेदारी वाली योजनाओं में समय-समय पर वित्तीय पुनरीक्षण होना चाहिए ताकि सहायता राशि वास्तविक जरूरतों के अनुरूप बनी रहे।
महंगाई के अनुरूप संशोधन की मांग
सरकार का तर्क है कि वर्तमान पेंशन राशि उस समय तय की गई थी जब महंगाई का स्तर काफी कम था। पिछले डेढ़ दशक में खाद्य पदार्थों, दवाइयों, बिजली, परिवहन और स्वास्थ्य सेवाओं की लागत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। ऐसे में सामाजिक सुरक्षा पेंशन की राशि में भी महंगाई के अनुरूप संशोधन किया जाना जरूरी है।
विशेषज्ञों का भी मानना है कि वृद्धावस्था में अधिकांश लोगों की आय सीमित या समाप्त हो जाती है। ऐसे में सरकारी पेंशन उनके लिए दवाइयों, उपचार, भोजन और अन्य आवश्यक खर्चों का महत्वपूर्ण सहारा बनती है। यदि सहायता राशि समय के अनुसार नहीं बढ़ाई जाती तो उसका वास्तविक लाभ धीरे-धीरे कम होता जाता है।
वर्तमान व्यवस्था कैसे करती है काम
राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम के तहत केंद्र सरकार अपनी निर्धारित हिस्सेदारी सीधे लाभार्थियों के खातों में नहीं भेजती। इसके बजाय यह राशि राज्य सरकार को जारी की जाती है। इसके बाद राज्य सरकार अपनी ओर से निर्धारित अतिरिक्त अंश जोड़कर लाभार्थियों के खातों में पूरी पेंशन राशि हस्तांतरित करती है।
मौजूदा व्यवस्था में केंद्रीय सहायता राशि में हर वर्ष स्वतः बढ़ोतरी का कोई प्रावधान नहीं है। यह राशि महंगाई सूचकांक से भी जुड़ी नहीं है। इसमें संशोधन तभी संभव होता है जब केंद्र सरकार नीतिगत स्तर पर निर्णय ले और उसके लिए आवश्यक बजटीय प्रावधान करे।
सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में कदम
हिमाचल प्रदेश सरकार का मानना है कि वरिष्ठ नागरिक समाज का महत्वपूर्ण वर्ग हैं और उनकी आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। यही कारण है कि राज्य लगातार सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को मजबूत करने के प्रयास कर रहा है।
केंद्र को भेजे गए प्रस्ताव के माध्यम से सरकार ने आग्रह किया है कि राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम के तहत दी जाने वाली केंद्रीय पेंशन राशि का पुनर्मूल्यांकन किया जाए। यदि इस प्रस्ताव पर सकारात्मक निर्णय लिया जाता है तो राज्य के करीब 1.16 लाख गरीब बुजुर्गों सहित देशभर के लाखों लाभार्थियों को इसका लाभ मिल सकता है।
अब निगाहें केंद्र सरकार के फैसले पर टिकी हैं। यदि केंद्रीय सहायता राशि में बढ़ोतरी होती है तो इससे वरिष्ठ नागरिकों को आर्थिक राहत मिलेगी और राज्यों पर पड़ रहा अतिरिक्त वित्तीय भार भी काफी हद तक कम हो सकेगा।



