चंडीगढ़: मानसून की दस्तक के साथ ही पंजाब में मौसमी बीमारियों के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। डेंगू, मलेरिया, वायरल बुखार, टाइफाइड, वायरल हेपेटाइटिस और एक्यूट गैस्ट्रोएंटेराइटिस जैसी बीमारियां तेजी से लोगों को अपनी चपेट में ले रही हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस मौसम में लापरवाही गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है। ऐसे समय में पंजाब सरकार की मुख्यमंत्री सेहत योजना (MMSY) जरूरतमंद परिवारों के लिए बड़ी राहत बनकर सामने आ रही है, जिसके तहत पात्र लाभार्थियों को सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में कैशलेस इलाज की सुविधा मिल रही है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार बारिश का मौसम अपने साथ केवल ठंडक ही नहीं लाता, बल्कि मच्छरों और दूषित पानी से फैलने वाली बीमारियों का खतरा भी कई गुना बढ़ा देता है। हर वर्ष जुलाई से सितंबर के बीच अस्पतालों में तेज बुखार और संक्रमण के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जाती है। इस वर्ष भी यही स्थिति सामने आ रही है और स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।
अमृतसर की रहने वाली 32 वर्षीय बलविंदर कौर ने बताया कि हाल ही में उन्हें तेज बुखार के कारण अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। वह आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से हैं और सिलाई का काम करके परिवार का गुजारा करती हैं। उन्होंने बताया कि अस्पताल पहुंचने पर स्टाफ ने उन्हें मुख्यमंत्री सेहत योजना में पंजीकृत कराया, जिसके बाद उनका करीब 8,400 रुपये का इलाज पूरी तरह कैशलेस हुआ।
बलविंदर कौर ने कहा कि यदि यह योजना न होती तो उनके लिए इलाज का खर्च उठाना बेहद मुश्किल होता। उन्होंने बताया कि समय पर उपचार मिलने से उनकी तबीयत में तेजी से सुधार हुआ और उन्हें आर्थिक चिंता से भी राहत मिली। उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान और राज्य सरकार का आभार जताते हुए कहा कि यह योजना जरूरतमंद परिवारों के लिए कठिन समय में बड़ा सहारा साबित हो रही है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के दौरान होने वाले अधिकांश बुखार की शुरुआत एक जैसे लक्षणों से होती है। ऐसे में लोग अक्सर इसे सामान्य वायरल संक्रमण समझकर घर पर ही दवा लेना शुरू कर देते हैं, जिससे कई बार बीमारी गंभीर रूप ले लेती है। वर्ष 2025 में भारतीय अस्पतालों में किए गए एक अध्ययन में यह पाया गया कि मानसून के दौरान अस्पताल में भर्ती होने वाले तीव्र बुखार (एक्यूट फेब्राइल इलनेस) के मरीजों में डेंगू सबसे प्रमुख कारण था। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर जांच और सही उपचार से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि राज्य सरकार ने मानसून के दौरान फैलने वाली बीमारियों से निपटने के लिए व्यापक तैयारी की है। अस्पतालों में आवश्यक दवाओं, जांच सुविधाओं और चिकित्सा स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। साथ ही रोगों की निगरानी व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है ताकि संक्रमण फैलने की स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।
उन्होंने लोगों से अपील की कि घरों और आसपास पानी जमा न होने दें, क्योंकि यही मच्छरों के पनपने का सबसे बड़ा कारण है। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को लगातार बुखार, कमजोरी या अन्य लक्षण महसूस हों तो बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को इलाज के खर्च की चिंता किए बिना समय पर उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।
डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि पानी और मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों की रोकथाम केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक परिवार और समुदाय की भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने लोगों से स्वच्छता बनाए रखने, मच्छररोधी उपाय अपनाने और स्वास्थ्य संबंधी निर्देशों का पालन करने की अपील की।
कम्युनिटी हेल्थ सेंटर वेरका में वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी एवं एमडी मेडिसिन डॉ. राज कुमार ने बताया कि हर मानसून में बड़ी संख्या में ऐसे मरीज अस्पताल पहुंचते हैं, जिन्होंने शुरुआती तीन-चार दिन घर पर स्वयं दवा लेकर बिताए होते हैं। उन्होंने कहा कि कई बार जब तक मरीज अस्पताल पहुंचते हैं, तब तक उनमें डिहाइड्रेशन, प्लेटलेट्स में गिरावट या डेंगू के गंभीर लक्षण विकसित हो चुके होते हैं।
डॉ. राज कुमार ने कहा कि शुरुआती 48 घंटे किसी भी बुखार के इलाज के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। यदि समय रहते रक्त जांच कराकर सही उपचार शुरू कर दिया जाए तो गंभीर जटिलताओं से आसानी से बचा जा सकता है। उन्होंने लोगों को बिना चिकित्सकीय सलाह के दवाएं लेने से बचने की सलाह दी।
उन्होंने बताया कि मानसून के दौरान केवल डेंगू ही नहीं, बल्कि मलेरिया, टाइफाइड, वायरल हेपेटाइटिस और एक्यूट गैस्ट्रोएंटेराइटिस के मामले भी तेजी से बढ़ते हैं। इन सभी बीमारियों के शुरुआती लक्षण लगभग समान होते हैं, इसलिए स्वयं बीमारी का अनुमान लगाकर इलाज करना जोखिम भरा हो सकता है।
डॉ. राज कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी), सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), उपमंडल अस्पताल, जिला अस्पताल और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में इन बीमारियों का प्रभावी इलाज उपलब्ध है। समय पर जांच और उपचार मिलने से मरीजों को बड़े अस्पतालों में रेफर करने की जरूरत भी काफी कम हो जाती है।
स्टेट हेल्थ एजेंसी (SHA) के ताजा आंकड़ों के अनुसार 6 जुलाई 2026 तक मुख्यमंत्री सेहत योजना के अंतर्गत सबसे अधिक इलाज तीव्र बुखार (एक्यूट फेब्राइल इलनेस) के मामलों का किया गया है। इसके अलावा मलेरिया, वायरल हेपेटाइटिस, एक्यूट गैस्ट्रोएंटेराइटिस और अन्य मौसमी संक्रमणों के मामलों में भी बड़ी संख्या में मरीजों ने योजना का लाभ उठाया।
योजना के तहत बुखार और उससे संबंधित बीमारियों के इलाज के लिए 2,100 रुपये से लेकर 8,400 रुपये तक के कैशलेस पैकेज उपलब्ध हैं। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि मरीजों की बीमारी की गंभीरता के अनुसार उपचार उपलब्ध कराया जाता है और पात्र लाभार्थियों को किसी प्रकार का अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं उठाना पड़ता।
आंकड़ों के अनुसार फाजिल्का, मोगा, संगरूर, गुरदासपुर और होशियारपुर जैसे जिलों से बड़ी संख्या में बुखार से संबंधित इलाज के दावे सामने आए हैं। इससे संकेत मिलता है कि अब लोग अपने नजदीकी स्वास्थ्य संस्थानों में ही इलाज करवा रहे हैं और उन्हें बड़े शहरों का रुख नहीं करना पड़ रहा।
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि मुख्यमंत्री सेहत योजना केवल मौसमी बीमारियों तक सीमित नहीं है। इसके तहत डायलिसिस, हृदय रोगों का उपचार, आईसीयू सेवाएं और कई अन्य महंगे उपचार भी कैशलेस उपलब्ध कराए जा रहे हैं। यही कारण है कि यह योजना सामान्य बुखार से लेकर गंभीर बीमारियों तक मरीजों और उनके परिवारों के लिए आर्थिक सुरक्षा कवच बनती जा रही है।
विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि यदि बुखार दो दिनों से अधिक बना रहे या उसके साथ तेज शरीर दर्द, उल्टी, पेट दर्द, सांस लेने में तकलीफ, खून आने जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए। इसके अलावा घरों में कूलर, गमलों और अन्य स्थानों पर पानी जमा नहीं होने देना, पूरी बांह के कपड़े पहनना, मच्छररोधी क्रीम या स्प्रे का इस्तेमाल करना तथा साफ-सफाई बनाए रखना मानसून के दौरान संक्रमण से बचाव के सबसे प्रभावी उपाय हैं।
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि समय पर जांच, सतर्कता और मुख्यमंत्री सेहत योजना जैसी स्वास्थ्य सुरक्षा व्यवस्था के संयोजन से मानसून के दौरान होने वाली बीमारियों से होने वाले जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। राज्य सरकार लोगों से अपील कर रही है कि किसी भी तरह के लगातार बुखार या संक्रमण के लक्षणों को हल्के में न लें और समय रहते नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में पहुंचकर जांच एवं उपचार कराएं।




