चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा में अनिवार्य ई-20 एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम को स्थगित करने की मांग को लेकर पारित प्रस्ताव के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। भारतीय जनता पार्टी पंजाब के अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने आम आदमी पार्टी सरकार के इस कदम पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे राजनीतिक सोच से प्रेरित फैसला बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार एथेनॉल ब्लेंडिंग को लेकर किसानों और आम जनता के बीच भ्रम पैदा कर रही है, जबकि यह नीति देश की ऊर्जा सुरक्षा के साथ-साथ कृषि क्षेत्र के लिए भी नए अवसर पैदा कर सकती है।
केवल ढिल्लों ने कहा कि केंद्र सरकार की एथेनॉल ब्लेंडिंग नीति को केवल पेट्रोल में मिश्रण की प्रक्रिया के तौर पर देखना उचित नहीं होगा। इसके पीछे देश की कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने, विदेशी मुद्रा बचाने, प्रदूषण घटाने और कृषि उपज के लिए नए बाजार तैयार करने जैसे कई उद्देश्य जुड़े हुए हैं। उनके अनुसार पंजाब सरकार को इस नीति का विरोध करने के बजाय यह सुनिश्चित करना चाहिए कि राज्य के किसान इससे मिलने वाले आर्थिक अवसरों का अधिकतम लाभ उठा सकें।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने विधानसभा में पारित प्रस्ताव पर सवाल उठाते हुए कहा कि आम आदमी पार्टी सरकार को केंद्र की हर नीति का राजनीतिक विरोध करने के बजाय उसके प्रभावों का तथ्यों के आधार पर मूल्यांकन करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि ई-20 कार्यक्रम को लेकर किसानों के बीच ऐसी आशंकाएं पैदा की जा रही हैं, जिनका वास्तविकता से सीधा संबंध नहीं है।
ढिल्लों ने कहा कि एथेनॉल ब्लेंडिंग भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति का हिस्सा है। दुनिया के कई देशों में लंबे समय से पेट्रोल में एथेनॉल का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने ब्राजील और अमेरिका का उदाहरण देते हुए कहा कि इन देशों ने एथेनॉल आधारित ईंधन को अपनी ऊर्जा व्यवस्था में महत्वपूर्ण स्थान दिया है। उनका कहना था कि भारत भी इसी दिशा में आगे बढ़कर आयातित जीवाश्म ईंधन पर अपनी निर्भरता कम करने का प्रयास कर रहा है।
उन्होंने कहा कि एथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने, मक्का और अन्य कृषि आधारित कच्चे माल की मांग बढ़ने से किसानों के लिए अतिरिक्त बाजार तैयार हो सकता है। इससे किसानों को पारंपरिक फसलों और सरकारी खरीद व्यवस्था पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय अपनी उपज बेचने के नए विकल्प मिलेंगे। उनके मुताबिक फसल विविधीकरण के लिए संघर्ष कर रहे पंजाब के सामने यह एक संभावित अवसर है।
केवल ढिल्लों ने कहा कि पंजाब में कृषि क्षेत्र लंबे समय से धान-गेहूं के पारंपरिक फसल चक्र के दबाव में है। भूजल स्तर में गिरावट और कृषि लागत बढ़ने के कारण राज्य में फसल विविधीकरण की आवश्यकता लगातार महसूस की जा रही है। ऐसे में मक्का जैसी फसलों के लिए स्थायी बाजार विकसित करना किसानों को वैकल्पिक खेती की ओर ले जाने में मदद कर सकता है।
उन्होंने कहा कि यदि राज्य सरकार एथेनॉल उद्योग को बढ़ावा देने के लिए अनुकूल माहौल तैयार करे तो पंजाब में कृषि आधारित उद्योगों में निवेश बढ़ सकता है। इससे केवल किसानों को बाजार नहीं मिलेगा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में प्रसंस्करण, भंडारण, परिवहन और औद्योगिक गतिविधियों से जुड़े रोजगार के अवसर भी पैदा हो सकते हैं।
भाजपा नेता ने एथेनॉल ब्लेंडिंग और कृषि मशीनरी को लेकर उठाई जा रही चिंताओं पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि पंजाब के किसान ट्रैक्टर, हार्वेस्टर, ट्यूबवेल जनरेटर और अन्य कृषि उपकरणों के लिए मुख्य रूप से डीजल का इस्तेमाल करते हैं, जबकि ई-20 कार्यक्रम पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण से संबंधित है। इसलिए इस नीति को सीधे तौर पर कृषि मशीनरी के ईंधन से जोड़ना उचित नहीं है।
ढिल्लों ने कहा कि सरकार को किसानों के बीच भ्रम फैलाने के बजाय यह स्पष्ट करना चाहिए कि ई-20 किस प्रकार काम करता है और इसका वास्तविक प्रभाव किन क्षेत्रों पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्रीय नीति पर असहमति हो सकती है, लेकिन उस पर चर्चा तथ्यों और वैज्ञानिक जानकारी के आधार पर होनी चाहिए।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने दावा किया कि एथेनॉल ब्लेंडिंग से भारत को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने में मदद मिल सकती है। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में पेट्रोल में घरेलू स्तर पर उत्पादित एथेनॉल का मिश्रण बढ़ने से पेट्रोलियम उत्पादों की मांग में कुछ कमी लाने और विदेशी मुद्रा की बचत करने में मदद मिल सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि एथेनॉल एक नवीकरणीय स्रोत से तैयार किया जा सकता है और इसका इस्तेमाल जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने की दिशा में एक कदम है। उनके अनुसार एथेनॉल मिश्रण बढ़ने से परिवहन क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन और प्रदूषण को कम करने में भी योगदान मिल सकता है।
ढिल्लों ने पंजाब सरकार पर आरोप लगाया कि राज्य के हितों को ध्यान में रखते हुए केंद्र के साथ मिलकर काम करने के बजाय वह टकराव की राजनीति को प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार को ई-20 कार्यक्रम के किसी पहलू पर आपत्ति है तो उसे केंद्र के साथ बातचीत करके किसानों की चिंताओं का समाधान तलाशना चाहिए। विधानसभा में प्रस्ताव पारित करना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है।
उन्होंने कहा कि पंजाब पहले ही कृषि संकट, गिरते भूजल स्तर, फसल विविधीकरण की धीमी गति और ग्रामीण रोजगार जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है। ऐसे में राज्य को नई कृषि-आधारित औद्योगिक संभावनाओं की तलाश करनी चाहिए। एथेनॉल उत्पादन को इसी व्यापक रणनीति के तहत देखा जाना चाहिए।
भाजपा नेता ने कहा कि एथेनॉल उद्योग से पंजाब में चीनी मिलों और कृषि आधारित उद्योगों को भी नए अवसर मिल सकते हैं। यदि उचित निवेश और बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराया जाए तो राज्य में एथेनॉल उत्पादन क्षमता बढ़ाई जा सकती है। इससे किसानों को अपनी उपज के लिए स्थानीय और वैकल्पिक बाजार मिल सकते हैं।
उन्होंने पंजाब सरकार से आग्रह किया कि वह एथेनॉल नीति का विरोध करने के बजाय राज्य में निवेश आकर्षित करने की दिशा में कदम उठाए। उनके अनुसार सरकार को किसानों को मक्का और अन्य वैकल्पिक फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए तथा ऐसी फसलों के लिए बाजार, भंडारण और प्रसंस्करण की व्यवस्था विकसित करनी चाहिए।
ढिल्लों ने कहा कि केवल फसल बदलने की सलाह देने से किसान अपनी खेती का पैटर्न नहीं बदलेंगे। जब तक वैकल्पिक फसलों की खरीद और बिक्री के लिए भरोसेमंद बाजार उपलब्ध नहीं होगा, तब तक किसान धान और गेहूं के पारंपरिक चक्र से बाहर निकलने में हिचकिचाएंगे। एथेनॉल उद्योग इस दिशा में एक संभावित बाजार उपलब्ध करा सकता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी सरकार किसानों के वास्तविक हितों पर चर्चा करने के बजाय केंद्र के साथ राजनीतिक टकराव को ज्यादा महत्व दे रही है। उन्होंने कहा कि पंजाब जैसे कृषि प्रधान राज्य को राष्ट्रीय ऊर्जा नीति से मिलने वाले अवसरों को अपने पक्ष में इस्तेमाल करना चाहिए।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की नीतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार ऊर्जा सुरक्षा, किसान आय और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ आगे बढ़ाने पर जोर दे रही है। उनके अनुसार एथेनॉल ब्लेंडिंग इसी व्यापक नीति का हिस्सा है, जिसमें कृषि और ऊर्जा क्षेत्र के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने कहा कि भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। आयातित तेल पर निर्भरता कम होने से देश बाहरी बाजार के उतार-चढ़ाव से कुछ हद तक सुरक्षित हो सकता है।
ढिल्लों ने कहा कि एथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी गतिविधियां बढ़ सकती हैं। कृषि उपज की खरीद से लेकर उसके परिवहन, प्रसंस्करण और औद्योगिक इस्तेमाल तक कई स्तरों पर आर्थिक गतिविधियां पैदा होती हैं। इससे किसानों के साथ-साथ ग्रामीण युवाओं के लिए भी रोजगार के नए अवसर विकसित हो सकते हैं।
हालांकि एथेनॉल ब्लेंडिंग को लेकर देश में तकनीकी और व्यावहारिक सवाल भी उठते रहे हैं, लेकिन ढिल्लों का कहना है कि इन विषयों का समाधान नीति को खारिज करने के बजाय विशेषज्ञों और संबंधित पक्षों के साथ बातचीत के जरिए किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी नीति की कमियों को दूर किया जा सकता है, लेकिन उसके संभावित लाभों को पूरी तरह नकार देना उचित नहीं है।
उन्होंने पंजाब सरकार से विधानसभा में पारित प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने और केंद्र के साथ सहयोगात्मक रवैया अपनाने की मांग की। उनका कहना था कि राज्य को ऐसी नीतियों का समर्थन करना चाहिए, जिनसे किसानों की आय बढ़े, कृषि में विविधता आए और ग्रामीण क्षेत्रों में निवेश बढ़े।
ढिल्लों ने कहा कि पंजाब के किसानों को राजनीतिक बहस का हिस्सा बनाने के बजाय उन्हें भविष्य के कृषि बाजारों के लिए तैयार करने की जरूरत है। यदि राज्य सरकार किसानों को वैकल्पिक फसलों, आधुनिक कृषि तकनीक और कृषि आधारित उद्योगों से जोड़ती है तो इससे लंबे समय में पंजाब की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है।
उन्होंने दोहराया कि एथेनॉल ब्लेंडिंग को केवल पेट्रोल की नीति के रूप में देखना अधूरा दृष्टिकोण होगा। इसके साथ कृषि, ऊर्जा, पर्यावरण, उद्योग और ग्रामीण अर्थव्यवस्था जैसे कई क्षेत्र जुड़े हैं। उनके मुताबिक पंजाब को इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए अपनी रणनीति तैयार करनी चाहिए।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने अंत में कहा कि राज्य सरकार को राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर किसानों और पंजाब की अर्थव्यवस्था के दीर्घकालिक हितों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर काम करें तो एथेनॉल उत्पादन और फसल विविधीकरण के क्षेत्र में पंजाब के लिए नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं।
कुल मिलाकर ई-20 एथेनॉल ब्लेंडिंग को लेकर पंजाब विधानसभा में पारित प्रस्ताव ने राज्य में केंद्र और आम आदमी पार्टी सरकार के बीच राजनीतिक टकराव को एक और मुद्दा दे दिया है। जहां पंजाब सरकार इस कार्यक्रम को लेकर अपनी चिंताएं सामने रख रही है, वहीं भाजपा इसे किसानों, ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण के लिए लाभकारी नीति बता रही है। अब देखना होगा कि इस मुद्दे पर राज्य सरकार और केंद्र के बीच आगे क्या बातचीत होती है और पंजाब के किसान फसल विविधीकरण तथा एथेनॉल आधारित बाजार से किस हद तक जुड़ पाते हैं।




