चंडीगढ़। देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक और छात्रों के विरोध प्रदर्शनों को लेकर पंजाब विधानसभा में सियासी बहस तेज हो गई। विधानसभा ने पेपर लीक की घटनाओं की निंदा करते हुए ध्वनिमत से प्रस्ताव पारित किया। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि परीक्षा व्यवस्था में बार-बार सामने आ रही गड़बड़ियों ने देश के करोड़ों युवाओं की मेहनत, उम्मीदों और भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार युवाओं के साथ मजबूती से खड़ी है और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता तथा जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार पर प्रभावी कदम उठाने का दबाव बनाएगी।
मुख्यमंत्री ने विधानसभा में बहस का जवाब देते हुए कहा कि पेपर लीक केवल एक परीक्षा से जुड़ी अनियमितता नहीं है, बल्कि इससे लाखों विद्यार्थियों और उनके परिवारों की वर्षों की मेहनत प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थी अपनी पढ़ाई के साथ-साथ परिवार की आर्थिक और भावनात्मक उम्मीदों का भी बोझ उठाते हैं। ऐसे में यदि परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र ही गलत हाथों में पहुंच जाए तो ईमानदारी से तैयारी करने वाले छात्रों के साथ सबसे बड़ा अन्याय होता है।
मान ने आरोप लगाया कि केंद्र की भाजपा सरकार के कार्यकाल में देश के अलग-अलग हिस्सों में पेपर लीक की घटनाएं सामने आई हैं। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2014 के बाद देश में 93 पेपर लीक के मामले सामने आए हैं, जबकि 2019 से 2024 के बीच ऐसे 65 मामलों का उल्लेख किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इनमें बड़ी संख्या उन राज्यों से जुड़ी है जहां भाजपा की सरकारें रही हैं। उन्होंने राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों का नाम लेते हुए केंद्र और राज्य सरकारों की परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पेपर लीक का सबसे ज्यादा नुकसान उन छात्रों को होता है जो सीमित संसाधनों के बावजूद दिन-रात मेहनत करके परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। उनके मुताबिक आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे कोचिंग, किताबों और यात्रा पर अपनी क्षमता के अनुसार पैसा खर्च करते हैं। परीक्षा रद्द होने या पेपर लीक होने के बाद उन्हें दोबारा तैयारी करनी पड़ती है, जिससे समय और पैसा दोनों बर्बाद होते हैं।
उन्होंने कहा कि देश में परीक्षा व्यवस्था पर भरोसा कायम रखना सरकार की जिम्मेदारी है। यदि बार-बार प्रश्नपत्र लीक होते हैं, परीक्षाएं रद्द होती हैं और जांच लंबे समय तक चलती रहती है तो इससे छात्रों का सिस्टम पर विश्वास कमजोर होता है। मान ने कहा कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ ऐसी व्यवस्था बनाने की जरूरत है, जिससे पेपर लीक की संभावना को शुरुआत में ही खत्म किया जा सके।
मुख्यमंत्री ने छात्रों के विरोध प्रदर्शनों का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पेपर लीक के खिलाफ आवाज उठाने वाले विद्यार्थियों को कई जगह पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ा। उन्होंने अश्रु गैस, पैलेट गन और बल प्रयोग का उल्लेख करते हुए कहा कि अपने भविष्य और अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाले युवाओं के साथ सख्ती करना समस्या का समाधान नहीं है। सरकार को छात्रों की शिकायत सुनकर जवाबदेही तय करनी चाहिए।
मान ने कहा कि पंजाब सरकार विधानसभा में पारित निंदा प्रस्ताव को प्रधानमंत्री कार्यालय, केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय और केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजेगी। उन्होंने कहा कि इसके जरिए केंद्र सरकार से पेपर लीक रोकने, परीक्षा प्रक्रिया को सुरक्षित बनाने और दोषियों के खिलाफ तेजी से कार्रवाई करने की मांग की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल जांच के आदेश देना पर्याप्त नहीं है। उनका कहना था कि कई मामलों में केंद्रीय जांच एजेंसियों से जांच कराने की घोषणा होती है, लेकिन छात्रों को लंबे समय तक न्याय नहीं मिल पाता। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि पेपर लीक की घटनाएं होती रहें और कार्रवाई वर्षों तक चलती रहे तो इससे परीक्षा व्यवस्था में विश्वास कैसे कायम होगा।
मान ने कहा कि सरकार को ऐसी तकनीकी और प्रशासनिक व्यवस्था विकसित करनी चाहिए, जिसमें प्रश्नपत्र तैयार होने से लेकर परीक्षा केंद्र तक पहुंचने और परीक्षा शुरू होने तक हर स्तर पर सुरक्षा सुनिश्चित हो। उन्होंने कहा कि परीक्षा संचालन में पारदर्शिता, गोपनीयता और जवाबदेही तीनों को प्राथमिकता देनी होगी।
मुख्यमंत्री ने नीट जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि पेपर लीक और परीक्षा संबंधी विवादों के कारण बड़ी संख्या में विद्यार्थियों पर मानसिक दबाव पड़ा है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में प्रभावित छात्रों और उनके परिवारों की स्थिति को भी सरकारों को गंभीरता से समझना चाहिए।
मान ने केंद्र सरकार से मांग की कि पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर दर्ज मामलों की समीक्षा की जाए और जहां जरूरी हो, उन्हें वापस लिया जाए। उन्होंने यह भी मांग रखी कि परीक्षा संबंधी घटनाओं से प्रभावित परिवारों को उचित सहायता दी जाए तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस राष्ट्रीय व्यवस्था बनाई जाए।
विधानसभा में बहस के दौरान कांग्रेस के वाकआउट का मुद्दा भी मुख्यमंत्री ने जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं से जुड़े इतने महत्वपूर्ण विषय पर विपक्ष को सदन में चर्चा में हिस्सा लेना चाहिए था। मान के अनुसार कांग्रेस ने प्रस्ताव पर बहस का बहिष्कार कर दिया, जबकि उसे छात्रों के पक्ष में अपनी बात रखने का अवसर मिला था।
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक तरफ विपक्षी नेता शिक्षा और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करते हैं, लेकिन जब उसी विषय पर विधानसभा में चर्चा का मौका मिलता है तो सदन से बाहर चले जाते हैं। उन्होंने इसे राजनीतिक विरोधाभास बताते हुए कहा कि युवाओं से जुड़े मुद्दों पर राजनीति से ऊपर उठकर एकजुट होने की आवश्यकता है।
मान ने कहा कि पंजाब में उनकी सरकार के कार्यकाल के दौरान भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक का कोई मामला सामने नहीं आया है। उन्होंने कहा कि कुछ परीक्षाओं में नकल के मामले जरूर पकड़े गए, लेकिन वे मामले सरकार की अपनी निगरानी में सामने आए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की गई। उनके मुताबिक नकल और प्रश्नपत्र लीक दो अलग-अलग अपराध हैं और दोनों को एक जैसा बताना सही नहीं है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि परीक्षा में अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गईं और कई मामलों में आरोपियों को जेल भी भेजा गया। उन्होंने दावा किया कि परीक्षा से जुड़े गिरोहों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की गई है। भर्ती परीक्षाओं में सक्रिय कुछ गिरोहों के हरियाणा से जुड़े होने का भी उन्होंने उल्लेख किया।
मान ने पंजाब में सरकारी भर्ती व्यवस्था को लेकर सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि प्रदेश में नौकरियों का आधार मेरिट रखा गया है। उन्होंने कहा कि सरकारी नौकरी पाने के लिए सिफारिश और रिश्वत की जगह योग्यता को प्राथमिकता दी जा रही है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि उनकी सरकार के कार्यकाल में अब तक 68 हजार से ज्यादा युवाओं को सरकारी नौकरियां दी जा चुकी हैं।
मुख्यमंत्री ने शिक्षा के क्षेत्र में पंजाब की स्थिति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था में सुधार, शिक्षकों के प्रशिक्षण, स्मार्ट क्लासरूम और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों पर जोर दिया है। उनके अनुसार इन प्रयासों का असर शिक्षा के परिणामों में दिखाई दे रहा है।
मान ने दावा किया कि नीति आयोग के आंकड़ों के अनुसार पंजाब ने प्राथमिक और मिडिल स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन करते हुए कई राज्यों को पीछे छोड़ा है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण और प्रतिस्पर्धी शिक्षा देना है।
मुख्यमंत्री ने अपने कार्यकाल की शुरुआत के समय पंजाब की स्कूली शिक्षा की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय प्रदेश शिक्षा के क्षेत्र में काफी पीछे था। उन्होंने दावा किया कि लगातार किए गए सुधारों के बाद राज्य अब अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है। उन्होंने शिक्षकों के प्रशिक्षण और स्मार्ट कक्षाओं को शिक्षा सुधार की महत्वपूर्ण कड़ी बताया।
मान ने सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों की मेडिकल प्रवेश परीक्षा में सफलता का आंकड़ा भी सदन के सामने रखा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2021 में पंजाब के सरकारी स्कूलों से केवल 80 विद्यार्थियों ने नीट परीक्षा पास की थी, जबकि 2026 में यह संख्या बढ़कर 881 हो गई। मुख्यमंत्री ने इसे सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार का उदाहरण बताया।
उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल रोजगार पाने का माध्यम नहीं बल्कि सामाजिक और आर्थिक बदलाव का सबसे मजबूत साधन है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के बच्चों को भी उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं में आगे बढ़ने का समान अवसर मिले।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार आने वाले समय में भी स्कूल शिक्षा को मजबूत करने पर ध्यान देगी। उनके अनुसार आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रशिक्षण और गुणवत्तापूर्ण बुनियादी ढांचे के जरिए विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार किया जाएगा।
विधानसभा में पारित प्रस्ताव को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब केवल राज्य के छात्रों के मुद्दे तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि देशभर के युवाओं के साथ खड़ा है। उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बहाल करना राष्ट्रीय जिम्मेदारी है और केंद्र सरकार को इस दिशा में राज्यों के साथ मिलकर ठोस कदम उठाने चाहिए।
मान ने कहा कि देश के युवाओं का भरोसा टूटना किसी भी सरकार के लिए गंभीर चिंता का विषय होना चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्र अपनी मेहनत के आधार पर आगे बढ़ना चाहते हैं और उन्हें ऐसी व्यवस्था चाहिए जिसमें किसी भी स्तर पर पैसे, सिफारिश या पेपर लीक के कारण उनकी मेहनत बेकार न हो।
मुख्यमंत्री ने दोहराया कि पंजाब सरकार युवाओं की आवाज विधानसभा से लेकर केंद्र तक पहुंचाती रहेगी। उन्होंने कहा कि पेपर लीक के खिलाफ पारित प्रस्ताव को संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों तक भेजकर जवाबदेही और सुधार की मांग की जाएगी।
कुल मिलाकर पंजाब विधानसभा में पेपर लीक के मुद्दे पर हुई बहस ने परीक्षा व्यवस्था, छात्रों की सुरक्षा और राजनीतिक जवाबदेही को लेकर नई बहस छेड़ दी है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने जहां केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ का आरोप लगाया, वहीं पंजाब में अपनी सरकार की भर्ती और शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बताया। अब विधानसभा से पारित निंदा प्रस्ताव केंद्र तक भेजे जाने के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पेपर लीक रोकने और परीक्षा प्रणाली में भरोसा बहाल करने के लिए केंद्र सरकार की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं।




