करनाल से हरियाणा के औद्योगिक बदलाव का शंखनाद, 10 अगस्त को CM सैनी लॉन्च करेंगे नई MSME नीति

करनाल से हरियाणा के औद्योगिक बदलाव का शंखनाद, 10 अगस्त को CM सैनी लॉन्च करेंगे नई MSME नीति

करनाल। हरियाणा सरकार प्रदेश के औद्योगिक विकास को नई रफ्तार देने और छोटे एवं मध्यम उद्योगों को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूत स्थिति दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी 10 अगस्त को करनाल स्थित नूर महल में प्रगतिशील हरियाणा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम तथा निर्यात प्रोत्साहन नीति-2026 का औपचारिक शुभारंभ करेंगे। हाल ही में राज्य मंत्रिमंडल से मंजूरी प्राप्त इस नीति को हरियाणा में एमएसएमई क्षेत्र के विस्तार, निर्यात क्षमता बढ़ाने, नए निवेश को आकर्षित करने और रोजगार के अधिक अवसर पैदा करने की सरकार की व्यापक रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है।

नई नीति के जरिए राज्य के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को वित्तीय एवं निवेश प्रोत्साहन के साथ आधुनिक तकनीक अपनाने, उत्पादन क्षमता बढ़ाने, गुणवत्ता सुधारने, डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल करने, कुशल मानव संसाधन तैयार करने और नए बाजारों तक पहुंच बनाने में सहायता देने की योजना है। सरकार का विशेष ध्यान ऐसे उद्यमियों पर रहेगा जो पहली बार अपना कारोबार शुरू कर रहे हैं, पहली बार निर्यात के क्षेत्र में कदम रख रहे हैं या तकनीकी बदलाव के जरिए अपने कारोबार का विस्तार करना चाहते हैं। युवाओं और महिला उद्यमियों को भी इस नीति के माध्यम से प्रोत्साहित करने की तैयारी है।

सरकार का मानना है कि हरियाणा के आर्थिक विकास में एमएसएमई सेक्टर की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। राज्य में हजारों छोटे और मध्यम उद्योग अलग-अलग क्षेत्रों में उत्पादन और सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं। इनमें से बड़ी संख्या ऐसी इकाइयों की है जो बड़े उद्योगों की सप्लाई चेन का हिस्सा हैं। यदि इन इकाइयों को पूंजी, आधुनिक तकनीक, बाजार और निर्यात से जुड़ी सुविधाएं आसानी से मिलें तो उनके कारोबार का विस्तार होने के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर भी पैदा किए जा सकते हैं। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए नई नीति में उद्योगों की व्यावहारिक जरूरतों को प्राथमिकता देने की कोशिश की गई है।

हरियाणा पहले से ही देश के प्रमुख औद्योगिक राज्यों में अपनी पहचान बना चुका है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से नजदीकी, मजबूत सड़क और परिवहन नेटवर्क, औद्योगिक क्षेत्रों का विस्तार, बिजली और अन्य आधारभूत सुविधाओं की उपलब्धता तथा कुशल मानव संसाधन प्रदेश को निवेश के लिहाज से महत्वपूर्ण बनाते हैं। गुरुग्राम और मानेसर से लेकर फरीदाबाद, सोनीपत, पानीपत, रोहतक और करनाल तक कई औद्योगिक केंद्र प्रदेश की अर्थव्यवस्था को गति दे रहे हैं। ऑटोमोबाइल, ऑटो कंपोनेंट्स, इंजीनियरिंग, टेक्सटाइल, खाद्य प्रसंस्करण, आईटी और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में हरियाणा की मजबूत मौजूदगी है।

नई नीति के माध्यम से अब इस औद्योगिक आधार को निर्यात केंद्रित अर्थव्यवस्था के साथ जोड़ने की कोशिश की जाएगी। सरकार चाहती है कि राज्य के छोटे और मध्यम उद्योग केवल घरेलू बाजार तक सीमित न रहें, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों की मांग के अनुरूप अपने उत्पादों और उत्पादन प्रक्रियाओं को विकसित करें। इसके लिए गुणवत्ता प्रमाणन, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, डिजिटल मार्केटिंग, अंतरराष्ट्रीय खरीदारों तक पहुंच और निर्यात प्रक्रियाओं को आसान बनाने जैसी जरूरतों पर ध्यान दिया जाएगा। पहली बार निर्यात करने वाले उद्यमियों को विशेष रूप से प्रोत्साहित करने की योजना है, ताकि अधिक से अधिक छोटे उद्योग वैश्विक व्यापार का हिस्सा बन सकें।

हरियाणा को उद्यमिता और एमएसएमई क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिल चुकी है। वर्ष 2022 में उद्यमिता और छोटे उद्योगों के विकास के क्षेत्र में राज्य को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला था। सरकार इसे उद्योग समर्थक नीतियों, बेहतर प्रशासन और कारोबार के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने की दिशा में किए गए प्रयासों की उपलब्धि के रूप में देखती है।

राज्य की औद्योगिक नीति व्यवस्था को मजबूत करने में उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित कुमार अग्रवाल की भूमिका भी महत्वपूर्ण बताई जा रही है। विभाग के अनुसार, पिछले एक वर्ष के दौरान राज्य में कुल 11 औद्योगिक नीतियों को अंतिम रूप देकर लागू किया गया है। इनमें ‘मेक इन हरियाणा औद्योगिक नीति’ के अलावा अलग-अलग क्षेत्रों की जरूरतों के अनुरूप तैयार की गई नौ क्षेत्र-विशिष्ट नीतियां शामिल हैं। इन नीतियों का शुभारंभ मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने 1 जून 2026 को गुरुग्राम में आयोजित कार्यक्रम के दौरान किया था। अब एमएसएमई एवं निर्यात प्रोत्साहन नीति के लागू होने से राज्य की औद्योगिक नीति व्यवस्था का दायरा और विस्तृत होने की उम्मीद है।

इन नीतियों को तैयार करने की प्रक्रिया में उद्योग जगत के साथ व्यापक संवाद पर भी जोर दिया गया। कई क्षेत्र-विशिष्ट नीतियों पर वर्ष 2023 से काम चल रहा था, लेकिन वे अंतिम चरण तक नहीं पहुंच सकी थीं। इसके बाद उद्योग एवं वाणिज्य विभाग ने विभिन्न औद्योगिक संगठनों, व्यापारिक संस्थाओं, उद्यमियों और अन्य हितधारकों से चर्चा की। अधिकारियों ने औद्योगिक क्षेत्रों का दौरा कर कारोबारियों की समस्याओं और सुझावों को समझने का प्रयास किया। सरकार का दावा है कि उद्योगों से प्राप्त सुझावों को नीतियों में शामिल किया गया, जिससे इनका स्वरूप अधिक व्यावहारिक और उद्योगों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप बनाया जा सके।

प्रदेश में नए निवेश को लेकर भी सरकार काफी सक्रिय है। पारंपरिक औद्योगिक क्षेत्रों के साथ-साथ अब ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर, डेटा सेंटर, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, टेक्सटाइल एवं परिधान, फार्मास्यूटिकल्स, मेडिकल डिवाइसेज, खाद्य प्रसंस्करण, एयरोस्पेस एवं रक्षा विनिर्माण और नई तकनीक आधारित उद्योगों की ओर से हरियाणा में निवेश की संभावनाएं बढ़ रही हैं। सरकार की कोशिश है कि इन क्षेत्रों के लिए ऐसा कारोबारी माहौल तैयार किया जाए, जहां कंपनियों को भूमि, बुनियादी ढांचे, मानव संसाधन और प्रशासनिक मंजूरियों के स्तर पर कम से कम बाधाओं का सामना करना पड़े।

इसी कड़ी में हरियाणा सरकार अगले वर्ष ‘हैपनिंग हरियाणा 2.0’ निवेश शिखर सम्मेलन आयोजित करने की तैयारी कर रही है। इसके जरिए देश-विदेश की बड़ी कंपनियों, निवेशकों, उद्योगपतियों और वैश्विक संस्थाओं को हरियाणा में उपलब्ध निवेश अवसरों से परिचित कराने की योजना है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने 1 जून 2026 को गुरुग्राम में आयोजित कार्यक्रम में ‘हैपनिंग हरियाणा 2.0’ के लोगो का अनावरण भी किया था। सरकार का उद्देश्य इस सम्मेलन के माध्यम से बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित करने के साथ-साथ विनिर्माण और रोजगार के नए केंद्र विकसित करना है।

सरकार का ध्यान निवेशकों को बेहतर प्रशासनिक सुविधाएं देने पर भी है। इसी उद्देश्य से एक आधुनिक और पूरी तरह पुनर्विकसित सिंगल विंडो सिस्टम तैयार किया जा रहा है। प्रस्तावित डिजिटल व्यवस्था में निवेशकों को विभिन्न विभागों से जुड़े आवेदन, अनुमोदन, प्रोत्साहन, भूमि संबंधी जानकारी और अन्य जरूरी सेवाएं एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने की योजना है। इसका उद्देश्य निवेश प्रक्रिया को सरल बनाने के साथ-साथ विभिन्न विभागों के बीच तालमेल बेहतर करना और मंजूरियों में लगने वाले समय को कम करना है।

नई सिंगल विंडो व्यवस्था में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल भी प्रस्तावित है। एआई आधारित सुविधाओं के जरिए निवेशकों को आवेदन प्रक्रिया, जरूरी दस्तावेजों और संबंधित सरकारी सेवाओं के बारे में त्वरित जानकारी उपलब्ध कराई जा सकेगी। इसके अलावा ऑनलाइन ट्रैकिंग और डिजिटल सहायता के जरिए निवेशकों को अपनी परियोजनाओं की प्रगति पर नजर रखने की सुविधा मिलेगी। सरकार का मानना है कि इस तरह की व्यवस्था निवेश के माहौल में पारदर्शिता बढ़ाने और कारोबार करने में आसानी को बेहतर बनाने में मदद करेगी।

एमएसएमई क्षेत्र को मजबूत करने का सीधा असर रोजगार सृजन पर भी पड़ सकता है। छोटे और मध्यम उद्योग स्थानीय स्तर पर बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार उपलब्ध कराते हैं। यदि उन्हें कारोबार बढ़ाने के लिए पर्याप्त वित्तीय सहायता, तकनीकी सहयोग और बाजार उपलब्ध कराया जाए तो नई इकाइयों की स्थापना और मौजूदा इकाइयों के विस्तार की संभावनाएं बढ़ेंगी। इससे युवाओं के लिए रोजगार के साथ-साथ स्वरोजगार और उद्यमिता के नए रास्ते भी खुल सकते हैं।

महिला उद्यमियों और युवा कारोबारियों को प्रोत्साहित करना भी सरकार की इस रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। राज्य में नए कारोबार शुरू करने वाले युवाओं को यदि शुरुआती चरण में प्रशिक्षण, बाजार की जानकारी और सरकारी सहायता मिले तो वे आगे चलकर रोजगार देने वाले उद्यमों में बदल सकते हैं। इसी तरह महिला स्वामित्व वाले व्यवसायों को बढ़ावा देकर औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।

10 अगस्त को करनाल से होने वाला नीति का शुभारंभ इसी व्यापक औद्योगिक रणनीति का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। करनाल कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, व्यापार और अन्य आर्थिक गतिविधियों के लिहाज से प्रदेश का महत्वपूर्ण क्षेत्र है। ऐसे में यहां से एमएसएमई और निर्यात केंद्रित नीति की शुरुआत का राजनीतिक और आर्थिक दोनों स्तरों पर महत्व है। सरकार इस कार्यक्रम के जरिए यह संदेश देने की कोशिश करेगी कि हरियाणा का औद्योगिक विकास अब केवल बड़े निवेश तक सीमित नहीं है, बल्कि छोटे कारोबारियों और स्थानीय उद्यमियों को भी विकास की मुख्यधारा से जोड़ने पर बराबर जोर दिया जा रहा है।

नई नीति के लागू होने के बाद इसके वास्तविक प्रभाव पर उद्योग जगत की नजर रहेगी। सरकार की योजनाओं और प्रोत्साहनों का लाभ यदि जमीनी स्तर तक तेजी से पहुंचता है तो छोटे उद्योगों की उत्पादन क्षमता बढ़ सकती है, नए निर्यातक तैयार हो सकते हैं और रोजगार के अवसरों में वृद्धि हो सकती है। साथ ही बड़े उद्योगों और एमएसएमई के बीच सप्लाई चेन मजबूत होने से राज्य के औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र को भी फायदा मिल सकता है।

हरियाणा सरकार का दीर्घकालिक लक्ष्य प्रदेश को निवेश, विनिर्माण, एमएसएमई और निर्यात के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करना है। इसके लिए एक ओर क्षेत्र-विशिष्ट औद्योगिक नीतियों को लागू किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर डिजिटल प्रशासन और निवेश सुविधा प्रणाली को आधुनिक बनाने पर जोर दिया जा रहा है। करनाल में 10 अगस्त को होने वाला कार्यक्रम इसी क्रम में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। अब यह देखना अहम होगा कि नई नीति के प्रावधान किस तेजी से लागू होते हैं और उनका वास्तविक लाभ प्रदेश के छोटे उद्योगों, नए उद्यमियों, निर्यातकों और युवाओं तक कितनी प्रभावी ढंग से पहुंचता है।