पंजाब विधानसभा में शब्दों की जंग ने पकड़ा तूल, BJP के अश्वनी शर्मा ने कहा- महिलाओं का सम्मान हमारी सोच का हिस्सा

पंजाब विधानसभा में शब्दों की जंग ने पकड़ा तूल, BJP के अश्वनी शर्मा ने कहा- महिलाओं का सम्मान हमारी सोच का हिस्सा

चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान एक शब्द के इस्तेमाल को लेकर सत्ता पक्ष आम आदमी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। भाजपा विधायक अश्वनी शर्मा की ओर से सदन में केंद्र और पंजाब सरकार से जुड़े एक मुद्दे पर अपनी बात रखते हुए ‘बेटी’ शब्द और एक प्रचलित मुहावरे का इस्तेमाल किया गया, जिस पर आम आदमी पार्टी के विधायक और मंत्री भड़क गए। सत्ता पक्ष ने भाजपा विधायक की टिप्पणी पर आपत्ति जताते हुए इसे महिलाओं के प्रति भाजपा की सोच से जोड़ने का प्रयास किया। इसके बाद सदन का माहौल काफी गरमा गया और दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई।

विवाद बढ़ने के बाद अश्वनी शर्मा ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि उनके शब्दों का वह अर्थ नहीं था, जिस तरह से उन्हें पेश किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उन्होंने पंजाब में आम बोलचाल के दौरान इस्तेमाल होने वाले एक सामान्य शब्द और मुहावरे का प्रयोग किया था। यदि उनके किसी शब्द से किसी सदस्य या किसी अन्य व्यक्ति की भावनाएं आहत हुई हैं तो वह इसके लिए खेद व्यक्त करने में कोई संकोच नहीं करते। हालांकि उन्होंने साथ ही आम आदमी पार्टी पर इस पूरे मामले को राजनीतिक मुद्दा बनाकर सरकार की नाकामियों से जनता का ध्यान हटाने का आरोप लगाया।

सदन में हुई बहस के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए अश्वनी शर्मा ने कहा कि आम आदमी पार्टी की राजनीति लगातार केंद्र सरकार को हर मुद्दे के लिए जिम्मेदार ठहराने के इर्द-गिर्द घूमती रही है। उनका कहना था कि जब सरकार से उसके कामकाज और नीतियों को लेकर सवाल किए जाते हैं तो वह मूल मुद्दे का जवाब देने के बजाय दूसरे विषयों को राजनीतिक विवाद में बदलने की कोशिश करती है।

शर्मा ने कहा कि विधानसभा लोकतांत्रिक बहस का मंच है और यहां सत्ता पक्ष तथा विपक्ष दोनों को अपने-अपने विचार रखने का अधिकार है। उनके मुताबिक विपक्ष का काम सरकार से सवाल पूछना और उसकी नीतियों की समीक्षा करना है, जबकि सरकार को उन सवालों का जवाब देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में मूल मुद्दे से हटकर उनके द्वारा इस्तेमाल किए गए एक शब्द को ही बहस का केंद्र बना दिया गया।

भाजपा विधायक ने कहा कि उन्होंने सदन में जिस मुहावरे का इस्तेमाल किया, वह पंजाब की आम बोलचाल में लंबे समय से प्रयोग होता आया है। उनके मुताबिक इसका किसी महिला, बेटी या किसी वर्ग के अपमान करने से कोई संबंध नहीं था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी को संदर्भ से अलग करके देखना उचित नहीं है। शर्मा ने कहा कि यदि किसी सदस्य को उनका शब्द अनुचित लगा तो उन्होंने स्वयं सदन में कहा था कि उसे विधानसभा की कार्यवाही से हटाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि उनके लिए महिलाओं का सम्मान किसी राजनीतिक बयान का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह उनके संस्कारों और सामाजिक सोच से जुड़ा विषय है। शर्मा ने कहा कि वह महिलाओं का सम्मान केवल सार्वजनिक मंचों पर शब्दों के माध्यम से नहीं करते, बल्कि इसे अपनी व्यक्तिगत और सामाजिक जिम्मेदारी भी मानते हैं।

अश्वनी शर्मा ने कहा कि उनके परिवार में बेटियों को हमेशा सम्मान और स्नेह दिया गया है। उन्होंने कहा कि वह घर से निकलते समय बेटियों का आशीर्वाद लेकर निकलने की बात पर गर्व करते हैं। ऐसे में उनके किसी बयान को महिलाओं के अपमान से जोड़ना सही नहीं है। उन्होंने दोहराया कि यदि उनके शब्दों से किसी को ठेस पहुंची है तो उन्हें इसका व्यक्तिगत रूप से अफसोस है और सार्वजनिक रूप से खेद व्यक्त करने में उन्हें कोई परेशानी नहीं है।

वहीं, सदन में आम आदमी पार्टी के विधायकों और मंत्रियों ने भाजपा विधायक की टिप्पणी पर कड़ी प्रतिक्रिया जताई। सत्ता पक्ष की ओर से कहा गया कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले जनप्रतिनिधियों को शब्दों के चयन को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। आप विधायकों का आरोप था कि महिलाओं और बेटियों को लेकर किसी भी तरह की ऐसी टिप्पणी स्वीकार नहीं की जा सकती, जिससे समाज में गलत संदेश जाए।

सत्ता पक्ष के सदस्यों ने बहस के दौरान भाजपा पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि भाजपा की राजनीति में आज भी बेटे और बेटी के बीच अंतर की सोच दिखाई देती है। इस पर भाजपा विधायक ने विरोध करते हुए कहा कि उनके बयान का गलत अर्थ निकाला जा रहा है और इसे राजनीतिक रंग दिया जा रहा है।

विवाद के दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई। सत्ता पक्ष ने जहां टिप्पणी को मुद्दा बनाकर भाजपा पर निशाना साधा, वहीं भाजपा की ओर से इसे राजनीतिक रूप से मुद्दा बनाए जाने का विरोध किया गया। इससे विधानसभा की कार्यवाही के दौरान कुछ समय के लिए माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया।

अश्वनी शर्मा ने इस पूरे विवाद को पंजाब के बड़े राजनीतिक मुद्दों से जोड़ते हुए कहा कि राज्य सरकार को वास्तविक समस्याओं पर जवाब देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब के लोग रोजगार, कर्मचारियों से जुड़े मामलों, विकास कार्यों, वित्तीय स्थिति और प्रशासनिक फैसलों को लेकर सरकार से जवाब चाहते हैं, लेकिन इन विषयों पर चर्चा करने के बजाय छोटी-छोटी बातों को बड़ा बनाकर राजनीतिक बहस को दूसरी दिशा में ले जाया जा रहा है।

भाजपा विधायक ने कर्मचारियों से जुड़े मामलों में सरकार के अदालत जाने के फैसले पर भी सवाल उठाए। उन्होंने इसे कर्मचारी हितों के खिलाफ बताते हुए कहा कि सरकार को कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान बातचीत और सहमति से करने की कोशिश करनी चाहिए। उनके अनुसार कर्मचारियों के मुद्दे केवल प्रशासनिक विषय नहीं हैं, बल्कि हजारों परिवारों की आजीविका और भविष्य से जुड़े हुए हैं।

शर्मा ने कहा कि कर्मचारियों के साथ टकराव की स्थिति पैदा करने के बजाय सरकार को उनकी मांगों और समस्याओं पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उनका कहना था कि यदि कर्मचारी अपने अधिकारों को लेकर सरकार के खिलाफ अदालत का रुख कर रहे हैं या सरकार स्वयं अदालत में जा रही है, तो इससे यह संकेत मिलता है कि सरकार और कर्मचारियों के बीच संवाद की प्रक्रिया कमजोर हुई है।

उन्होंने आम आदमी पार्टी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्ता पक्ष को विधानसभा में विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे सवालों का जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका केवल विरोध करना नहीं, बल्कि सरकार की नीतियों की समीक्षा करना और जनता की आवाज सदन तक पहुंचाना भी है। यदि विपक्ष किसी मुद्दे पर सवाल उठाता है तो सरकार को तथ्यात्मक जवाब देना चाहिए।

अश्वनी शर्मा ने कहा कि विधानसभा में शब्दों को लेकर विवाद होना कोई नई बात नहीं है, लेकिन किसी टिप्पणी के पीछे की मंशा को समझे बिना उसे राजनीतिक हथियार बना देना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि उनके बयान की भावना किसी महिला या बेटी को ठेस पहुंचाने की नहीं थी। इसके बावजूद यदि किसी को बुरा लगा है तो उन्होंने स्पष्ट रूप से खेद व्यक्त कर दिया है।

उन्होंने कहा कि वह अपने बयान को लेकर किसी प्रकार की गलतफहमी नहीं रखना चाहते। उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष, महिला वर्ग या बेटियों का अपमान करना नहीं था। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में रहते हुए वह जिम्मेदारी समझते हैं और यदि किसी शब्द का अर्थ किसी दूसरे तरीके से लिया गया है तो उसे स्पष्ट करना उनका दायित्व है।

भाजपा विधायक ने यह भी कहा कि राजनीतिक दलों को महिलाओं के सम्मान जैसे संवेदनशील मुद्दों को दलगत राजनीति से ऊपर रखना चाहिए। महिलाओं की सुरक्षा, शिक्षा, सम्मान और आर्थिक आत्मनिर्भरता को लेकर सभी राजनीतिक दलों को सकारात्मक भूमिका निभानी चाहिए। उनके अनुसार इस प्रकार के मुद्दों पर राजनीति करने के बजाय समाज में सकारात्मक संदेश देने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि पंजाब की राजनीतिक संस्कृति में कई स्थानीय शब्द, मुहावरे और बोलचाल की अभिव्यक्तियां लंबे समय से इस्तेमाल होती रही हैं। किसी शब्द का अर्थ उसके संदर्भ के आधार पर समझा जाना चाहिए। यदि किसी अभिव्यक्ति को गलत समझा गया है तो उसे स्पष्ट करना जरूरी है, लेकिन उसे लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा करना उचित नहीं।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर पंजाब विधानसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बढ़ती राजनीतिक तल्खी को सामने ला दिया है। एक तरफ आम आदमी पार्टी विधायक इस टिप्पणी को लेकर भाजपा पर हमलावर नजर आए, वहीं भाजपा ने इसे सरकार की नीतियों से जुड़े मूल सवालों से ध्यान भटकाने की कोशिश करार दिया।

राजनीतिक जानकारों की नजर अब इस बात पर है कि क्या यह विवाद आने वाले दिनों में भी विधानसभा के भीतर राजनीतिक बहस का मुद्दा बना रहेगा या दोनों पक्ष इसे यहीं समाप्त कर देंगे। हालांकि अश्वनी शर्मा की ओर से खेद व्यक्त किए जाने के बाद उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी टिप्पणी के संदर्भ को लेकर पूरी तरह स्पष्ट हैं और महिलाओं के प्रति सम्मान की अपनी भावना को लेकर किसी प्रकार का भ्रम नहीं चाहते।

शर्मा ने अपने बयान में यह भी संदेश देने की कोशिश की कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन व्यक्तिगत सम्मान और सामाजिक संवेदनशीलता को बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि उनके शब्दों से किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो वह इसके लिए खेद व्यक्त करते हैं, लेकिन इसके साथ ही सरकार को भी विधानसभा में उठाए जा रहे गंभीर मुद्दों पर जवाब देना चाहिए।

इस घटनाक्रम के बाद विधानसभा की राजनीति में एक ओर जहां महिलाओं और बेटियों के सम्मान को लेकर बयानबाजी तेज हुई है, वहीं दूसरी ओर कर्मचारियों से जुड़े मुद्दे और सरकार के फैसलों पर विपक्ष के सवाल भी चर्चा में आ गए हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में सदन की कार्यवाही के दौरान यह मुद्दा किस रूप में आगे बढ़ता है, इस पर राजनीतिक हलकों की नजर बनी हुई है।