अमृतसर। अमृतसर के पुलिस कमिश्नर रहे आईपीएस अधिकारी गुरप्रीत सिंह भुल्लर को पद से हटाए जाने के बाद पंजाब की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए एक प्रदर्शन के दौरान कथित सुरक्षा साजिश और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से जुड़े संभावित मॉड्यूल को लेकर मीडिया को जानकारी देने वाले भुल्लर के तबादले पर भाजपा नेता रवनीत सिंह बिट्टू ने आम आदमी पार्टी सरकार को घेरा है। बिट्टू ने अधिकारी को हटाए जाने के समय और परिस्थितियों पर सवाल उठाते हुए पूरे घटनाक्रम की जांच की मांग की है।
सरकार की ओर से जारी आदेश के अनुसार आईपीएस गुरप्रीत सिंह भुल्लर को अमृतसर पुलिस कमिश्नर के पद से हटा दिया गया है और उन्हें चंडीगढ़ रिपोर्ट करने के निर्देश दिए गए हैं। फिलहाल उनके अगले पदस्थापन को लेकर अलग से कोई आदेश जारी नहीं किया गया है। उनकी जगह बॉर्डर जोन के डीआईजी हरमनबीर सिंह गिल को अमृतसर पुलिस कमिश्नर का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है।
भुल्लर को पद से हटाए जाने की खबर सामने आने के बाद भाजपा ने इसे राजनीतिक मुद्दा बना दिया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता रवनीत सिंह बिट्टू ने दावा किया कि भुल्लर एक अनुभवी और सक्षम पुलिस अधिकारी हैं, जिन्होंने अलग-अलग सरकारों के कार्यकाल में अपनी जिम्मेदारी निभाई है। बिट्टू ने कहा कि जिस समय पुलिस अधिकारी की ओर से सुरक्षा से संबंधित गंभीर जानकारी सार्वजनिक की गई, उसके तुरंत बाद उन्हें पद से हटाया जाना कई सवाल खड़े करता है।
यह विवाद उस घटना से जुड़ा है जिसमें 4 अगस्त को तत्कालीन अमृतसर पुलिस कमिश्नर गुरप्रीत सिंह भुल्लर ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिल्ली में एक छात्र आंदोलन के दौरान कथित आतंकी साजिश से संबंधित पुलिस कार्रवाई के बारे में जानकारी दी थी। पुलिस की ओर से उस समय एक संदिग्ध की गिरफ्तारी और उसके कथित संपर्कों से जुड़ी जानकारी मीडिया के सामने रखी गई थी।
पुलिस कमिश्नर के अनुसार, जांच के दौरान सुखमन नाम के एक आरोपी को गिरफ्तार किए जाने की बात सामने आई थी। पुलिस के मुताबिक, आरोपी अपने कुछ साथियों के साथ दिल्ली पहुंचा था और उसका कथित तौर पर उत्तर प्रदेश के एक व्यक्ति से संपर्क हुआ था। पुलिस ने यह भी दावा किया था कि इस संपर्क के माध्यम से कथित तौर पर किसी हमले के लिए सामान उपलब्ध कराने की योजना थी।
इसी बयान के बाद मामले ने राजनीतिक रूप लेना शुरू कर दिया। भाजपा की ओर से सोशल मीडिया पर पुलिस की कार्रवाई को कथित आईएसआई मॉड्यूल से जोड़ते हुए कई पोस्ट और वीडियो सामने आए। इसके बाद पुलिस की ओर से स्पष्टीकरण भी दिया गया कि मीडिया में पुलिस कमिश्नर के बयान को जिस तरीके से प्रस्तुत किया गया, उससे मूल बात का अर्थ बदल गया। पुलिस ने यह स्पष्ट करने का प्रयास किया कि उनके बयान को संदर्भ से अलग तरीके से पेश किया गया।
इस घटनाक्रम के कुछ ही समय बाद भुल्लर को अमृतसर पुलिस कमिश्नर के पद से हटाए जाने के आदेश ने राजनीतिक बहस को और हवा दे दी। भाजपा नेता रवनीत सिंह बिट्टू ने सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि भुल्लर ने अपने पद पर रहते हुए कानून-व्यवस्था और सुरक्षा से जुड़े मामलों में गंभीरता से काम किया।
बिट्टू ने दावा किया कि पुलिस ने कुछ लोगों को पेट्रोल बम जैसी आपत्तिजनक वस्तुओं के साथ पकड़ा था और इसी कार्रवाई की जानकारी पुलिस कमिश्नर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी थी। उन्होंने सवाल किया कि यदि पुलिस अधिकारी ने सुरक्षा से जुड़ी कार्रवाई की जानकारी दी थी तो उसके बाद उनका तबादला क्यों किया गया।
हालांकि, बिट्टू के बयान में लगाए गए राजनीतिक आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस खबर में नहीं हुई है। उन्होंने आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल पर भी गंभीर आरोप लगाए और दावा किया कि जंतर-मंतर पर हुए घटनाक्रम के पीछे राजनीतिक साजिश थी। इन आरोपों पर संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया इस विवरण में उपलब्ध नहीं है।
बिट्टू ने कहा कि पुलिस अधिकारी सरकारी सेवा में होने के कारण हर जानकारी सार्वजनिक रूप से साझा नहीं कर सकते। उनके अनुसार, यदि पुलिस ने किसी संभावित हमले या हिंसक गतिविधि को रोकने के लिए कार्रवाई की थी तो उस कार्रवाई की पूरी जानकारी सामने आनी चाहिए।
भाजपा नेता ने यह भी कहा कि पुलिस कमिश्नर को हटाए जाने के फैसले के पीछे की परिस्थितियों की जांच होनी चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि यदि भविष्य में भाजपा की सरकार बनती है तो इस पूरे घटनाक्रम की जांच करवाई जाएगी। उनका कहना है कि यह पता लगाया जाना चाहिए कि अधिकारी के तबादले का वास्तविक कारण क्या था और क्या उनकी ओर से सुरक्षा से संबंधित जानकारी सार्वजनिक करने के बाद कोई प्रशासनिक कार्रवाई की गई।
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि भुल्लर को अमृतसर पुलिस कमिश्नर के पद से हटाने का फैसला नियमित प्रशासनिक फेरबदल का हिस्सा था या इसका संबंध हालिया प्रेस कॉन्फ्रेंस और उसके बाद पैदा हुए विवाद से था। सरकार की ओर से जारी तबादला आदेश में इस कार्रवाई के पीछे कोई विशेष कारण सार्वजनिक रूप से नहीं बताया गया है।
गुरप्रीत सिंह भुल्लर पंजाब कैडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी हैं और उन्होंने राज्य पुलिस में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं। उनके अमृतसर पुलिस कमिश्नर के रूप में कार्यकाल के दौरान कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण और सुरक्षा से जुड़े कई मुद्दे पुलिस के सामने रहे हैं। ऐसे में उनके अचानक पद से हटने को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई है।
अमृतसर पंजाब का एक संवेदनशील सीमावर्ती शहर है। अंतरराष्ट्रीय सीमा के नजदीक होने के कारण यहां सुरक्षा व्यवस्था को विशेष महत्व दिया जाता है। शहर में धार्मिक और पर्यटक गतिविधियों के अलावा बड़ी संख्या में महत्वपूर्ण संस्थान भी हैं। ऐसे में पुलिस कमिश्नर के पद पर बदलाव को सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया के साथ-साथ सुरक्षा के नजरिए से भी देखा जा रहा है।
विवाद का एक दूसरा पहलू जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन से जुड़ा है। पुलिस की ओर से सामने रखी गई जानकारी के मुताबिक, दिल्ली में आंदोलन के दौरान कुछ संदिग्ध गतिविधियों की आशंका सामने आई थी और जांच एजेंसियों ने कुछ लोगों से पूछताछ अथवा गिरफ्तारी की कार्रवाई की थी। इसी मामले को लेकर पुलिस कमिश्नर ने मीडिया को जानकारी दी थी।
बाद में जब सोशल मीडिया पर इस घटना को आईएसआई से जुड़े कथित मॉड्यूल के रूप में प्रचारित किया गया तो पुलिस की ओर से स्पष्टीकरण सामने आया। इससे पूरे मामले को लेकर अलग-अलग दावे और राजनीतिक आरोप शुरू हो गए। भाजपा ने जहां इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ते हुए सरकार को घेरा, वहीं पुलिस की ओर से बयान को गलत तरीके से पेश किए जाने की बात कही गई।
रवनीत बिट्टू ने इसी पृष्ठभूमि में सरकार से जवाब मांगा है। उनका कहना है कि यदि पुलिस अधिकारी ने सुरक्षा संबंधी जानकारी साझा की थी और पुलिस ने संभावित हिंसक गतिविधि को रोकने के लिए कार्रवाई की थी तो अधिकारी को हटाने के बजाय सरकार को उस कार्रवाई को स्पष्ट करना चाहिए था।
बिट्टू ने कहा कि वह पुलिस अधिकारियों के मनोबल से जुड़े मुद्दे को भी गंभीर मानते हैं। उनके अनुसार, यदि कोई अधिकारी कानून के तहत कार्रवाई करता है और बाद में उसे उसी मामले के बाद पद से हटा दिया जाता है तो इससे पुलिस बल में गलत संदेश जा सकता है। हालांकि, यह भी स्पष्ट है कि किसी अधिकारी का तबादला प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है और केवल समय के आधार पर उसके कारण का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
भाजपा नेता ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि पूरे मामले में कोई गलतफहमी हुई है तो सरकार को तथ्यों के साथ स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि जंतर-मंतर से जुड़े पूरे घटनाक्रम, पुलिस कार्रवाई, गिरफ्तारियों, कथित बरामदगी और बाद में हुए प्रशासनिक फेरबदल की कड़ियों की जांच की जाए।
उन्होंने दावा किया कि सत्ता परिवर्तन की स्थिति में भाजपा सरकार इस मामले की समीक्षा करेगी। बिट्टू ने कहा कि जांच का उद्देश्य किसी अधिकारी को राजनीतिक रूप से निशाना बनाना नहीं, बल्कि यह पता लगाना होना चाहिए कि घटनाक्रम की वास्तविक सच्चाई क्या थी और प्रशासनिक निर्णय किन परिस्थितियों में लिए गए।
दूसरी ओर, भुल्लर को हटाए जाने के बाद अमृतसर पुलिस की कमान अतिरिक्त रूप से डीआईजी हरमनबीर सिंह गिल को सौंप दी गई है। अब उनके सामने शहर की कानून-व्यवस्था के साथ-साथ सीमावर्ती क्षेत्र से जुड़े सुरक्षा मामलों को प्रभावी ढंग से संभालने की जिम्मेदारी होगी।
मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है। भाजपा इस मुद्दे को राष्ट्रीय सुरक्षा और पुलिस अधिकारियों के मनोबल से जोड़कर उठा सकती है, जबकि सरकार की ओर से तबादले को प्रशासनिक निर्णय के रूप में देखा जा सकता है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि भुल्लर की अगली नियुक्ति कहां होगी।
जंतर-मंतर से जुड़े पूरे घटनाक्रम में पुलिस की प्रारंभिक जानकारी, बाद में जारी स्पष्टीकरण और राजनीतिक दलों के दावों के बीच कई सवाल अब भी चर्चा में हैं। इन सवालों का अंतिम जवाब जांच या आधिकारिक तौर पर सामने आने वाले तथ्यों से ही स्पष्ट हो सकेगा।
रवनीत सिंह बिट्टू ने इस पूरे प्रकरण को लेकर सरकार पर दबाव बढ़ाते हुए कहा है कि सुरक्षा से जुड़े मामलों में पारदर्शिता जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि किसी पुलिस अधिकारी ने संभावित खतरे को रोकने के लिए कार्रवाई की थी तो उसके बाद हुए प्रशासनिक फैसलों की भी समीक्षा होनी चाहिए।
फिलहाल अमृतसर पुलिस कमिश्नर के पद पर बदलाव और जंतर-मंतर प्रकरण को लेकर पंजाब की सियासत में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। भुल्लर को चंडीगढ़ रिपोर्ट करने का आदेश जारी हो चुका है, लेकिन उनकी नई तैनाती अभी तय नहीं हुई है। वहीं भाजपा ने इस मुद्दे को हाथ से निकलने देने के बजाय सरकार से जवाब मांगना शुरू कर दिया है। आने वाले दिनों में यदि सरकार या पुलिस की ओर से पूरे घटनाक्रम पर विस्तृत स्पष्टीकरण सामने आता है, तो विवाद की वास्तविक तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।




