हिमाचल प्रदेश कांग्रेस संगठन में अब पद पर बने रहने के लिए केवल नियुक्ति ही पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि सक्रियता और कामकाज के आधार पर पदाधिकारियों का मूल्यांकन किया जाएगा। कांग्रेस हाईकमान ने साफ संकेत दिया है कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी से लेकर जिला और ब्लॉक स्तर तक किसी भी पदाधिकारी का पद स्थायी नहीं माना जाएगा। यदि कोई पदाधिकारी संगठनात्मक गतिविधियों में सुस्ती दिखाता है या अपेक्षित प्रदर्शन नहीं करता तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में गुरुवार को हिमाचल कांग्रेस के संगठनात्मक कामकाज की विस्तृत समीक्षा के दौरान इस दिशा में महत्वपूर्ण चर्चा हुई। बैठक की अध्यक्षता कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल ने की। इसमें मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू, हिमाचल कांग्रेस प्रभारी रजनी पाटिल, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार तथा सह प्रभारी विदित चौधरी और चेतन चौहान मौजूद रहे।
बैठक में प्रदेश कांग्रेस संगठन की मौजूदा स्थिति, जिला और ब्लॉक स्तर पर चल रही गतिविधियों तथा पदाधिकारियों की सक्रियता का फीडबैक लिया गया। हाईकमान ने संगठन के पदाधिकारियों के पिछले तीन महीने के कामकाज की रिपोर्ट भी मांगी है। इस रिपोर्ट के आधार पर यह तय करने की तैयारी है कि कौन से पदाधिकारी संगठन को मजबूत करने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं और किन पदाधिकारियों की कार्यशैली में सुधार की आवश्यकता है।
बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि पार्टी संगठन में किसी पद पर बने रहना किसी व्यक्ति का स्थायी अधिकार नहीं होगा। पदाधिकारी का मूल्यांकन उसके काम, पार्टी कार्यक्रमों में भागीदारी, कार्यकर्ताओं के साथ संपर्क और संगठन को सक्रिय रखने में योगदान के आधार पर किया जाएगा। इसका सीधा संकेत यह है कि आने वाले समय में निष्क्रिय पदाधिकारियों पर कार्रवाई हो सकती है।
कांग्रेस संगठन में पदाधिकारियों के प्रदर्शन को अलग-अलग श्रेणियों में रखने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। इसके तहत सक्रिय और बेहतर प्रदर्शन करने वाले नेताओं को ‘ग्रीन जोन’ में रखने की बात सामने आई है। ऐसे पदाधिकारियों को संगठन में आगे बड़ी जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना है। पार्टी के लिए लगातार बेहतर काम करने वालों को उनकी मेहनत के आधार पर प्रोत्साहित करने की रणनीति अपनाई जा सकती है।
दूसरी श्रेणी ‘यलो जोन’ की होगी। इसमें ऐसे पदाधिकारियों को शामिल किया जाएगा, जिनका प्रदर्शन संतोषजनक तो है, लेकिन उनमें सुधार की पर्याप्त गुंजाइश है। ऐसे नेताओं को तत्काल पद से हटाने के बजाय चेतावनी देकर बेहतर काम करने का अवसर दिया जाएगा। पार्टी संगठन की ओर से उन्हें अपनी कार्यशैली सुधारने और सक्रियता बढ़ाने के लिए समय दिया जा सकता है।
हालांकि, लगातार चेतावनी के बावजूद यदि किसी पदाधिकारी के प्रदर्शन में सुधार नहीं होता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि दो बार चेतावनी मिलने के बाद भी यदि संबंधित पदाधिकारी सक्रिय नहीं होता है तो उसे संगठनात्मक जिम्मेदारी से हटाया जा सकता है।
सबसे गंभीर श्रेणी ‘रेड जोन’ की होगी। इसमें ऐसे पदाधिकारियों को रखा जा सकता है जिनका प्रदर्शन बेहद कमजोर है या जो संगठनात्मक गतिविधियों में अपेक्षित योगदान नहीं दे रहे हैं। ऐसे पदाधिकारियों के खिलाफ सीधे कार्रवाई की संभावना जताई गई है। पार्टी प्रदर्शन को आधार बनाकर उन्हें पद से हटाने का निर्णय ले सकती है।
कांग्रेस हाईकमान की इस रणनीति का मुख्य उद्देश्य संगठन को कागजों तक सीमित रखने के बजाय जमीनी स्तर पर सक्रिय बनाना है। पार्टी आने वाले राजनीतिक दौर को देखते हुए जिला और ब्लॉक स्तर पर मजबूत नेटवर्क तैयार करना चाहती है। इसके लिए ऐसे नेताओं को आगे लाने की तैयारी है जो लगातार कार्यकर्ताओं के संपर्क में रहें और पार्टी के कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से जमीन पर लागू कर सकें।
बैठक में हाल के महीनों में कांग्रेस की ओर से चलाए गए विभिन्न राजनीतिक अभियानों में जिला और ब्लॉक कमेटियों की भूमिका की भी समीक्षा की गई। विशेष रूप से नीट पेपर लीक और श्रीराम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े चोरी के मामले को लेकर प्रदेशभर में पार्टी की ओर से किए गए आंदोलनों में स्थानीय संगठन की सक्रियता को भी प्रदर्शन का आधार माना गया।
पार्टी नेतृत्व ने यह देखने की कोशिश की कि राज्य स्तर से जारी किए गए कार्यक्रमों को जिला और ब्लॉक स्तर तक किस तरह लागू किया गया। स्थानीय पदाधिकारियों ने कितनी संख्या में कार्यकर्ताओं को जोड़ा, प्रदर्शन और अन्य कार्यक्रमों में कितनी सक्रियता दिखाई तथा पार्टी के मुद्दों को आम जनता तक पहुंचाने में उनकी भूमिका कैसी रही, इन पहलुओं पर भी ध्यान दिया गया।
इस समीक्षा के बाद आने वाले दिनों में हिमाचल कांग्रेस संगठन में बदलाव देखने को मिल सकता है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी में लंबे समय से लंबित कुछ नियुक्तियों को जल्द अंतिम रूप देने की तैयारी चल रही है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, संभावित नियुक्तियों की सूची पहले ही हाईकमान को भेजी जा चुकी है और अब मंजूरी का इंतजार है।
संगठन में नई नियुक्तियों का उद्देश्य केवल खाली पदों को भरना नहीं, बल्कि सक्रिय और प्रभावी नेताओं को जिम्मेदारी देना बताया जा रहा है। पार्टी नेतृत्व ऐसे चेहरों को आगे लाने की कोशिश कर सकता है जो संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में सक्षम हों।
बैठक के बाद मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू, प्रदेश प्रभारी रजनी पाटिल और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ अलग से भी चर्चा की। इस दौरान संगठन को मजबूत करने और लंबित नियुक्तियों के अलावा सरकार और संगठन के बीच तालमेल बेहतर बनाने के मुद्दे पर विचार-विमर्श हुआ।
सरकार और संगठन के बीच बेहतर समन्वय के लिए कैबिनेट मंत्रियों को विभिन्न जिलों की जिम्मेदारी सौंपने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। यदि यह व्यवस्था लागू होती है तो मंत्री अपने-अपने जिम्मेदारी वाले जिलों में संगठनात्मक गतिविधियों की निगरानी और कार्यकर्ताओं के साथ बेहतर संपर्क स्थापित कर सकते हैं। इससे सरकार की नीतियों और पार्टी संगठन के बीच संवाद को भी मजबूत करने का प्रयास होगा।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने इसके बाद कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से उनके आवास पर मुलाकात की। इस मुलाकात को संगठनात्मक बदलाव और प्रदेश की राजनीतिक स्थिति के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि बैठक में किन मुद्दों पर अंतिम सहमति बनी, इसकी आधिकारिक विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
इधर, हिमाचल प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। कुल्लू से विधायक सुंदर सिंह ठाकुर का नाम लंबे समय से संभावित मंत्री के तौर पर चर्चा में है। मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू कई मौकों पर सार्वजनिक मंचों और विधानसभा में भी उनके नाम का उल्लेख कर चुके हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की संभावना मजबूत है।
हालांकि, मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर अन्य नेताओं की दावेदारी भी बनी हुई है। पार्टी के भीतर कई विधायक नई जिम्मेदारी मिलने की उम्मीद लगाए हुए हैं। ऐसे में अंतिम फैसला मुख्यमंत्री और कांग्रेस हाईकमान के बीच चर्चा के बाद होने की संभावना है।
मंत्रिमंडल विस्तार के अलावा विधानसभा उपाध्यक्ष और मुख्य सचेतक जैसे पदों पर भी नियुक्ति को लेकर चर्चा चल रही है। पालमपुर से विधायक आशीष बुटेल को संगठन या सरकार में नई जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना भी राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है। हालांकि इन नियुक्तियों पर अंतिम निर्णय हाईकमान और मुख्यमंत्री स्तर पर होना बाकी है।
इस बीच कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के हिमाचल दौरे को लेकर भी गतिविधियां बढ़ गई हैं। उनके 15 अगस्त को शिमला पहुंचने की संभावना बताई जा रही है। इसके बाद 17 और 18 अगस्त को उनके मंडी जिले के प्रस्तावित दौरे की चर्चा है। यदि कार्यक्रम तय रहता है तो वह प्रदेश कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं से भी मुलाकात कर सकती हैं।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के भी आने वाले दिनों में हिमाचल प्रदेश दौरे का कार्यक्रम बनाए जाने की संभावना है। पार्टी के शीर्ष नेताओं के संभावित दौरों को आगामी राजनीतिक गतिविधियों और संगठन को मजबूत करने की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
दूसरी ओर, उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री गुरुवार को दिल्ली में हुई मुख्य समीक्षा बैठक में शामिल नहीं हुए। उन्होंने बुधवार को प्रदेश कांग्रेस प्रभारी रजनी पाटिल से मुलाकात की थी। इसके बाद गुरुवार को उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और हिमाचल के पूर्व प्रभारी राजीव शुक्ल से भी मुलाकात की। इन बैठकों के बाद वह वापस ऊना लौट गए।
मुकेश अग्निहोत्री की अनुपस्थिति को लेकर भी राजनीतिक हलकों में चर्चाएं रहीं, हालांकि उनके दिल्ली में अलग-अलग नेताओं से मिलने और फिर ऊना लौटने को लेकर आधिकारिक तौर पर किसी विवाद की पुष्टि नहीं हुई है। प्रदेश कांग्रेस में संगठनात्मक फेरबदल और सरकार में संभावित विस्तार के बीच नेताओं की दिल्ली आवाजाही को स्वाभाविक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कांग्रेस हाईकमान की मौजूदा रणनीति से यह संकेत साफ है कि पार्टी अब संगठन में सक्रियता को प्राथमिकता देना चाहती है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी, जिला और ब्लॉक स्तर के पदाधिकारियों को अब नियमित तौर पर अपने काम का प्रदर्शन दिखाना होगा। पार्टी की ओर से चलाए जाने वाले आंदोलनों, कार्यक्रमों और जनसंपर्क अभियानों में भागीदारी को भी उनकी कार्यक्षमता का पैमाना बनाया जा सकता है।
आने वाले समय में तीन महीने की रिपोर्ट इस पूरी प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाएगी। जिन नेताओं का प्रदर्शन मजबूत पाया जाएगा, उन्हें संगठन में आगे बढ़ने का अवसर मिल सकता है, जबकि कमजोर प्रदर्शन करने वालों को पहले सुधार का मौका और बाद में कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
इस व्यवस्था का सबसे बड़ा असर जिला और ब्लॉक स्तर पर पड़ने की संभावना है, क्योंकि पार्टी का वास्तविक जनसंपर्क नेटवर्क इन्हीं इकाइयों पर निर्भर करता है। कांग्रेस नेतृत्व चाहता है कि स्थानीय संगठन केवल चुनावों के दौरान सक्रिय न हों, बल्कि पूरे वर्ष जनता और कार्यकर्ताओं के बीच मौजूद रहें।
हिमाचल में आने वाले राजनीतिक समय को देखते हुए कांग्रेस के लिए संगठन को मजबूत करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार के कामकाज को जनता तक पहुंचाने, विपक्ष के आरोपों का जवाब देने और पार्टी के कार्यक्रमों को गांव तथा बूथ स्तर तक ले जाने के लिए सक्रिय संगठन की जरूरत होगी।
बैठक में दिए गए संकेतों से स्पष्ट है कि अब कांग्रेस संगठन में केवल पद हासिल करना पर्याप्त नहीं होगा। जिम्मेदारी मिलने के बाद उसका प्रभावी निर्वहन करना भी जरूरी होगा। पार्टी नेतृत्व की नजर अब इस बात पर रहेगी कि कौन नेता लगातार मैदान में दिखाई देता है, कार्यकर्ताओं को जोड़ता है और संगठन के कार्यक्रमों को सफल बनाने में भूमिका निभाता है।
कुल मिलाकर दिल्ली में हुई समीक्षा बैठक के बाद हिमाचल कांग्रेस में संगठनात्मक बदलाव की जमीन तैयार होती दिखाई दे रही है। एक ओर निष्क्रिय पदाधिकारियों के प्रदर्शन की समीक्षा होगी, वहीं दूसरी ओर नए चेहरों को जिम्मेदारी देने की तैयारी है। मंत्रिमंडल विस्तार और विधानसभा के महत्वपूर्ण पदों पर संभावित नियुक्तियों के साथ संगठन में फेरबदल की यह कवायद आने वाले दिनों में हिमाचल कांग्रेस की नई टीम और उसकी कार्यशैली को आकार दे सकती है।



