खैहरा की AI-जनित अश्लील वीडियो पर कोर्ट सख्त, मेटा को 72 घंटे में फेसबुक-इंस्टाग्राम से हटाने का निर्देश

खैहरा की AI-जनित अश्लील वीडियो पर कोर्ट सख्त, मेटा को 72 घंटे में फेसबुक-इंस्टाग्राम से हटाने का निर्देश

चंडीगढ़। पंजाब के भुलत्थ विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैहरा को सोशल मीडिया पर प्रसारित की जा रही कथित आपत्तिजनक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से तैयार वीडियो के मामले में चंडीगढ़ जिला अदालत से अंतरिम राहत मिली है। अदालत ने फेसबुक और इंस्टाग्राम पर प्रसारित की जा रही संबंधित वीडियो को हटाने के लिए मेटा को 72 घंटे का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 14 सितंबर को होगी।

सुखपाल सिंह खैहरा ने पिछले सप्ताह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक और इंस्टाग्राम का संचालन करने वाली कंपनी मेटा के खिलाफ चंडीगढ़ जिला अदालत में याचिका दायर की थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि अज्ञात लोगों ने AI तकनीक का इस्तेमाल कर उनकी आपत्तिजनक वीडियो तैयार की और इसके बाद उसे सोशल मीडिया के अलग-अलग अकाउंट के माध्यम से प्रसारित कर दिया।

खैहरा की ओर से अदालत में दायर याचिका में कहा गया कि वीडियो वास्तविक नहीं है, बल्कि तकनीक के माध्यम से तैयार की गई है। इसके बावजूद इसे इस तरह प्रसारित किया जा रहा है, जिससे देखने वाले लोगों के बीच विधायक की छवि और प्रतिष्ठा को लेकर गलत धारणा पैदा हो सकती है।

मामले की सुनवाई सिविल जज कौशल कुमार यादव की अदालत में हुई। अदालत ने याचिका पर सुनवाई करते हुए अंतरिम आदेश जारी किया और मेटा को संबंधित आपत्तिजनक सामग्री हटाने के निर्देश दिए। अदालत ने संबंधित फेसबुक और इंस्टाग्राम अकाउंट्स से वीडियो हटाने के लिए 72 घंटे की समयसीमा निर्धारित की है।

याचिका में खैहरा की ओर से दावा किया गया कि सोशल मीडिया पर प्रसारित की जा रही सामग्री से उनकी सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचने की आशंका है। वह पंजाब की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय हैं और भुलत्थ से विधायक हैं। याचिका में यह भी कहा गया कि पंजाब के अलावा प्रवासी पंजाबी समुदाय में भी उनकी पहचान और राजनीतिक प्रतिष्ठा है।

खैहरा के वकील ने अदालत के समक्ष तर्क दिया कि संबंधित वीडियो को सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित किया जा रहा था। इसे देखने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही थी और इसी कारण तत्काल हस्तक्षेप की आवश्यकता थी। याचिका में अदालत से मांग की गई थी कि वीडियो को जल्द से जल्द हटाने के निर्देश दिए जाएं, ताकि इसके आगे प्रसार को रोका जा सके।

याचिका के मुताबिक, ‘चढ़दा पंजाब’ नाम से बनाए गए फेसबुक और इंस्टाग्राम अकाउंट्स पर कथित AI-जनित वीडियो पोस्ट की गई थी। इन अकाउंट्स के पीछे कौन लोग हैं और इन्हें कौन संचालित कर रहा है, इसकी फिलहाल जानकारी सामने नहीं आई है। इसी वजह से खैहरा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को संबंधित सामग्री हटाने के निर्देश देने की मांग की थी।

मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अदालत के अंतरिम आदेश के तहत संबंधित सामग्री को हटाने की प्रक्रिया अब निर्धारित समयसीमा में पूरी करनी होगी। इससे सोशल मीडिया पर प्रसारित सामग्री के आगे फैलने की संभावना को सीमित करने में मदद मिल सकती है।

खैहरा की याचिका में सोशल मीडिया पर AI तकनीक के दुरुपयोग को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। आधुनिक तकनीक के जरिए किसी व्यक्ति की तस्वीर, आवाज या वीडियो में बदलाव कर उसे वास्तविक जैसा दिखाने वाली सामग्री तैयार की जा सकती है। ऐसी सामग्री यदि किसी सार्वजनिक व्यक्ति के बारे में आपत्तिजनक या भ्रामक रूप में प्रसारित की जाए तो इससे उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंच सकता है।

राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों के लिए यह समस्या और गंभीर हो जाती है, क्योंकि सोशल मीडिया पर कोई भी सामग्री बहुत कम समय में बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंच सकती है। खैहरा की ओर से अदालत में यही चिंता जाहिर की गई कि वीडियो के व्यूज तेजी से बढ़ रहे थे और यदि समय रहते इसे नहीं हटाया गया तो इसके व्यापक स्तर पर प्रसारित होने की आशंका थी।

अदालत के आदेश के बाद अब मेटा को संबंधित फेसबुक और इंस्टाग्राम अकाउंट्स पर उपलब्ध वीडियो को हटाने की कार्रवाई करनी होगी। हालांकि, मामले की अंतिम सुनवाई अभी बाकी है और अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 14 सितंबर की तारीख निर्धारित की है।

अंतरिम आदेश का अर्थ यह है कि फिलहाल अदालत ने वीडियो हटाने को लेकर तत्काल राहत प्रदान की है, जबकि पूरे मामले में पक्षों की दलीलों और अन्य पहलुओं पर आगे सुनवाई जारी रहेगी। अगली सुनवाई में अदालत के समक्ष मामले से संबंधित अन्य पक्ष और तथ्य रखे जा सकते हैं।

खैहरा की ओर से दायर याचिका में यह भी कहा गया कि अज्ञात लोगों द्वारा बनाए गए अकाउंट्स के जरिए वीडियो को सोशल मीडिया पर फैलाया जा रहा है। याचिका में संबंधित अकाउंट्स के संचालकों की पहचान का मुद्दा भी उठाया गया है। हालांकि, फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि वीडियो तैयार करने और पोस्ट करने वाले लोगों की पहचान कैसे होगी और इस संबंध में आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।

मामला केवल एक सोशल मीडिया पोस्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि AI तकनीक के जरिए तैयार की गई कथित फर्जी सामग्री को लेकर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ ऐसे मामलों में यह चुनौती सामने आ रही है कि वास्तविक और डिजिटल रूप से बदली गई सामग्री के बीच अंतर करना आम लोगों के लिए मुश्किल हो सकता है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर किसी व्यक्ति के नाम, तस्वीर या पहचान का इस्तेमाल कर बनाए गए अकाउंट्स से आपत्तिजनक सामग्री पोस्ट किए जाने की स्थिति में सामग्री हटाने के साथ-साथ संबंधित अकाउंट के संचालन की जांच भी महत्वपूर्ण हो जाती है। खैहरा के मामले में भी यही सवाल सामने आया है कि ‘चढ़दा पंजाब’ नाम के अकाउंट्स के पीछे कौन लोग हैं।

याचिका में खैहरा की सामाजिक और राजनीतिक प्रतिष्ठा का उल्लेख करते हुए कहा गया कि ऐसी सामग्री का प्रसार उनकी छवि पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि के रूप में उनकी सार्वजनिक पहचान को देखते हुए इस तरह की सामग्री का तेजी से फैलना उनके लिए गंभीर चिंता का विषय है।

अदालत के निर्देश के बाद अब संबंधित वीडियो को हटाने की कार्रवाई पर नजर रहेगी। इसके साथ ही यह भी देखा जाएगा कि क्या वीडियो किसी अन्य अकाउंट, पेज या सोशल मीडिया माध्यम से दोबारा अपलोड की जाती है। इंटरनेट पर सामग्री के दोबारा प्रसारित होने की स्थिति में उसे हटाने के लिए आगे भी कानूनी प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।

खैहरा के मामले ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सार्वजनिक व्यक्तियों की तस्वीरों और पहचान के दुरुपयोग से जुड़े सवालों को भी सामने ला दिया है। AI तकनीक के जरिए तैयार की गई सामग्री के संबंध में सबसे बड़ी चुनौती यही है कि ऐसी वीडियो देखने में वास्तविक लग सकती है, जबकि उसमें दिखाए गए दृश्य या व्यक्ति की प्रस्तुति वास्तविक न हो।

अदालत का अंतरिम आदेश इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण है कि संबंधित सामग्री को हटाने के लिए स्पष्ट समयसीमा तय की गई है। इससे शिकायतकर्ता को तत्काल राहत मिलती है और विवादित सामग्री के ऑनलाइन प्रसार को सीमित करने का प्रयास किया जाता है।

मामले की अगली सुनवाई 14 सितंबर को होगी। तब अदालत के समक्ष आगे की कानूनी कार्रवाई और संबंधित पक्षों की दलीलों पर विचार किया जा सकता है। फिलहाल अंतरिम आदेश के तहत मेटा को 72 घंटे के भीतर खैहरा से संबंधित कथित आपत्तिजनक AI वीडियो को फेसबुक और इंस्टाग्राम से हटाने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

गौरतलब है कि सोशल मीडिया पर किसी सार्वजनिक व्यक्ति से संबंधित फर्जी या छेड़छाड़ की गई सामग्री के तेजी से वायरल होने से उसके वास्तविक प्रभाव को रोकना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसी कारण खैहरा की ओर से अदालत में तत्काल राहत की मांग की गई थी। अदालत ने भी मामले की गंभीरता को देखते हुए सामग्री हटाने के संबंध में अंतरिम निर्देश जारी किए हैं।

अब इस पूरे मामले में आगे की सुनवाई अहम होगी। एक ओर खैहरा की ओर से अपनी प्रतिष्ठा और अधिकारों की सुरक्षा को लेकर दलीलें रखी जाएंगी, वहीं दूसरी ओर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से संबंधित कानूनी और तकनीकी पहलुओं पर भी विचार हो सकता है। साथ ही कथित वीडियो तैयार करने और प्रसारित करने वाले अज्ञात लोगों की पहचान का मुद्दा भी आगे की कार्रवाई में महत्वपूर्ण रह सकता है।

फिलहाल चंडीगढ़ जिला अदालत के अंतरिम आदेश के बाद खैहरा को तत्काल राहत मिली है। फेसबुक और इंस्टाग्राम पर मौजूद संबंधित वीडियो को हटाने के निर्देश के साथ अदालत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मामले की अगली सुनवाई तक विवादित सामग्री के ऑनलाइन प्रसार को रोकने के लिए अंतरिम स्तर पर कार्रवाई की जानी है। 14 सितंबर को होने वाली सुनवाई में इस विवाद से जुड़े अगले कानूनी कदम की दिशा स्पष्ट होने की उम्मीद है।