हरियाणा में नौकरियों पर सियासी घमासान तेज, HKRN बना भाजपा-कांग्रेस के बीच नई जंग का मैदान

हरियाणा में नौकरियों पर सियासी घमासान तेज, HKRN बना भाजपा-कांग्रेस के बीच नई जंग का मैदान

चंडीगढ़। हरियाणा में युवाओं के रोजगार का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। हरियाणा कौशल रोजगार निगम (HKRN) के जरिए होने वाली नियुक्तियों, कर्मचारियों की नौकरी की स्थिरता, आरक्षण और भर्ती प्रक्रिया को लेकर सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्षी कांग्रेस आमने-सामने हैं। कांग्रेस की ओर से पंचकूला स्थित HKRN कार्यालय के घेराव के बाद भाजपा ने विपक्ष पर तीखा पलटवार किया और कांग्रेस के शासनकाल की रोजगार व्यवस्था को सवालों के घेरे में खड़ा किया।

भाजपा ने गुरुवार को सोशल मीडिया के माध्यम से कांग्रेस के आंदोलन पर प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया कि जिस ठेकेदारी व्यवस्था को लेकर कांग्रेस आज सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रही है, उसकी शुरुआत प्रदेश में कांग्रेस के शासन के दौरान ही हुई थी। भाजपा नेताओं और विधायकों ने अलग-अलग सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कांग्रेस के पुराने कार्यकाल और मौजूदा HKRN व्यवस्था की तुलना करते हुए कहा कि युवाओं के रोजगार के मुद्दे पर विपक्ष को पहले अपने शासनकाल का रिकॉर्ड देखना चाहिए।

भाजपा की ओर से उठाए गए सवालों का केंद्र सरकारी विभागों में ठेके के जरिए कर्मचारियों की नियुक्ति की पुरानी व्यवस्था रही। पार्टी नेताओं का दावा है कि कांग्रेस और इनेलो के शासन के दौरान बड़ी संख्या में कर्मचारियों की सेवाएं विभिन्न ठेकेदारों के माध्यम से ली जाती थीं। भाजपा का आरोप है कि इस मॉडल में कर्मचारियों और ठेकेदारों के बीच कई तरह की विसंगतियां रहती थीं और युवाओं को उनकी मेहनत के अनुरूप आर्थिक लाभ तथा नौकरी की सुरक्षा नहीं मिल पाती थी।

भाजपा ने यह भी सवाल उठाया कि उस दौर में सरकारी विभागों में ठेके के आधार पर नियुक्तियां किए जाने के दौरान मेरिट, आरक्षण और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए क्या प्रभावी व्यवस्था थी। पार्टी का कहना है कि अब जब सरकार ने मानव संसाधन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को एक केंद्रीय संस्थागत ढांचे के तहत लाने की कोशिश की है, तब कांग्रेस इसका विरोध कर रही है।

हालांकि कांग्रेस की ओर से इस पूरे मामले को अलग नजरिए से उठाया जा रहा है। विपक्ष का कहना है कि HKRN के माध्यम से नियुक्त किए गए युवाओं को लंबे समय तक अस्थायी रोजगार की स्थिति में रखना उचित नहीं है। कांग्रेस रोजगार की स्थिरता, कर्मचारियों की सेवा सुरक्षा और सामाजिक न्याय के तहत आरक्षण के प्रभावी अनुपालन को लेकर सरकार पर दबाव बना रही है। पार्टी की मांग है कि युवाओं के भविष्य को अनिश्चितता में रखने के बजाय उन्हें रोजगार को लेकर स्पष्ट और सुरक्षित व्यवस्था दी जाए।

HKRN की स्थापना को लेकर भी भाजपा ने अपना पक्ष सामने रखा है। पार्टी के अनुसार, प्रदेश में ठेकेदारी व्यवस्था से जुड़ी शिकायतों को देखते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल के कार्यकाल में एक वैकल्पिक व्यवस्था विकसित करने की दिशा में कदम उठाया गया था। भाजपा के मुताबिक, 13 अक्टूबर 2021 को हरियाणा कौशल रोजगार निगम का पंजीकरण किया गया और इसके बाद 1 नवंबर 2021 को इसका ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया गया।

पोर्टल के माध्यम से युवाओं को विभिन्न सरकारी विभागों और संस्थानों में उपलब्ध अवसरों के लिए आवेदन करने का मंच मिला। सरकार की ओर से HKRN को ऐसी व्यवस्था के रूप में पेश किया गया, जिसका उद्देश्य सरकारी संस्थानों में जरूरत के मुताबिक मानव संसाधन उपलब्ध कराना और युवाओं को रोजगार के अवसर देना था।

भाजपा का तर्क है कि HKRN के गठन के बाद पुरानी ठेकेदारी व्यवस्था को कम करने और नियुक्तियों को एक केंद्रीकृत प्रणाली के तहत लाने का प्रयास किया गया। पार्टी के मुताबिक, इस प्रक्रिया में उम्मीदवारों की पात्रता, उपलब्ध पद और निर्धारित मानदंडों को ध्यान में रखकर चयन किया जाता है। भाजपा इसे पारदर्शिता और व्यवस्थित भर्ती की दिशा में उठाया गया कदम बता रही है।

दूसरी तरफ अब मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की सरकार के सामने HKRN कर्मचारियों की नौकरी की सुरक्षा का सवाल अहम चुनौती बनकर सामने आया है। कांग्रेस के आंदोलन के बाद सरकार पर यह दबाव बढ़ा है कि निगम के जरिए विभिन्न विभागों में कार्यरत युवाओं के भविष्य को लेकर स्पष्ट नीति सामने रखी जाए। कर्मचारियों के बीच भी यह चिंता बनी हुई है कि उनकी सेवाओं की निरंतरता और भविष्य की सुरक्षा किस तरह सुनिश्चित होगी।

भाजपा की ओर से कहा जा रहा है कि सरकार HKRN से जुड़े कर्मचारियों के हितों और रोजगार व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। पार्टी का दावा है कि मौजूदा सरकार का उद्देश्य युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के साथ-साथ चयन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाना है। हालांकि राजनीतिक स्तर पर विपक्ष इस व्यवस्था को लेकर लगातार सवाल उठा रहा है।

हरियाणा की राजनीति में सरकारी नौकरी का मुद्दा लंबे समय से बेहद संवेदनशील रहा है। राज्य के हजारों युवा सरकारी और अर्धसरकारी संस्थानों में स्थिर रोजगार की तलाश में रहते हैं। ऐसे में भर्ती प्रक्रिया, परीक्षा प्रणाली, आरक्षण और नौकरी की सुरक्षा जैसे मुद्दे सीधे युवाओं की राजनीतिक प्राथमिकताओं से जुड़ जाते हैं। यही वजह है कि HKRN को लेकर शुरू हुआ विवाद अब व्यापक रोजगार राजनीति का रूप लेता जा रहा है।

आरक्षण का मुद्दा भी दोनों दलों के बीच बहस का प्रमुख हिस्सा बन चुका है। भाजपा का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में पात्रता और मेरिट को महत्व दिया जा रहा है तथा उम्मीदवारों के दस्तावेजों और पात्रता का सत्यापन करने के लिए उपलब्ध सरकारी डाटा का इस्तेमाल किया जा रहा है। पार्टी के अनुसार, नियमित सरकारी भर्तियों में संवैधानिक आरक्षण व्यवस्था का पालन किया जाता है।

भाजपा ने कांग्रेस से यह भी पूछा कि जब उसके शासनकाल में ठेकेदारों के माध्यम से कर्मचारियों की सेवाएं ली जाती थीं, तब आरक्षण के नियमों और पारदर्शी चयन प्रक्रिया को किस तरह लागू किया जाता था। पार्टी का कहना है कि युवाओं को ऐसी व्यवस्था चाहिए जहां सिफारिश और बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो तथा योग्यता और पारदर्शिता को प्राथमिकता मिले।

कांग्रेस का तर्क इसके विपरीत है। पार्टी का कहना है कि युवाओं को रोजगार देना तभी सार्थक होगा जब उन्हें नौकरी की स्थिरता और सामाजिक सुरक्षा भी मिले। कांग्रेस HKRN में कार्यरत कर्मचारियों के मुद्दे को इसी आधार पर उठा रही है। पार्टी का जोर इस बात पर है कि सरकारी कामकाज में वर्षों से योगदान दे रहे कर्मचारियों को भविष्य की अनिश्चितता में नहीं रखा जाना चाहिए।

इसी बीच भाजपा ने सरकार की रोजगार संबंधी अन्य पहलों का भी उल्लेख करना शुरू कर दिया है। भाजपा के एक विधायक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर रोजगार मेलों और कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट (CET) से जुड़े सरकार के प्रयासों का जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि आने वाले समय में प्रदेश में 1,150 रोजगार मेलों का आयोजन प्रस्तावित है, जिनके जरिए 44,500 प्लेसमेंट का लक्ष्य रखा गया है।

भाजपा की ओर से यह भी दावा किया गया कि रोजगार मेलों और अन्य पहलों के जरिए करीब 1.61 लाख युवाओं को रोजगार के अवसरों से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही CET पास करने वाले युवाओं को 9,000 रुपये मासिक सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में कदम उठाए जाने की बात भी कही गई है।

इन आंकड़ों के जरिए भाजपा यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि राज्य सरकार की रोजगार नीति केवल HKRN तक सीमित नहीं है। पार्टी का कहना है कि कौशल विकास, रोजगार मेलों और CET जैसी व्यवस्थाओं के जरिए युवाओं के लिए नौकरी के अवसरों का विस्तार किया जा रहा है। सरकार की ओर से इन पहलों को रोजगार की दिशा में व्यापक रणनीति का हिस्सा बताया जा रहा है।

वहीं कांग्रेस के लिए HKRN का मुद्दा सरकार को घेरने का एक अहम माध्यम बन गया है। पंचकूला स्थित HKRN कार्यालय के घेराव के जरिए पार्टी ने यह संकेत दिया है कि वह रोजगार और नौकरी की सुरक्षा को आने वाले समय में प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बनाने की तैयारी में है। कांग्रेस का फोकस युवाओं के साथ-साथ HKRN कर्मचारियों की सेवा शर्तों और आरक्षण से जुड़े सवालों पर रहेगा।

भाजपा की रणनीति फिलहाल कांग्रेस के आंदोलन की राजनीतिक काट तैयार करने की है। पार्टी लगातार यह याद दिलाने की कोशिश कर रही है कि ठेकेदारी व्यवस्था कोई नई व्यवस्था नहीं थी और कांग्रेस के शासनकाल में भी इसका व्यापक इस्तेमाल होता था। भाजपा का कहना है कि HKRN उसी व्यवस्था को व्यवस्थित करने की दिशा में बनाया गया संस्थागत मॉडल है।

इस राजनीतिक टकराव के बीच सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि HKRN से जुड़े कर्मचारियों को भविष्य में कितनी नौकरी सुरक्षा मिलेगी। सरकार के लिए चुनौती यह होगी कि वह एक तरफ पारदर्शी और मेरिट आधारित भर्ती व्यवस्था का दावा कायम रखे और दूसरी तरफ लंबे समय से काम कर रहे कर्मचारियों की सेवा निरंतरता को लेकर उठ रही चिंताओं का समाधान करे।

दूसरी बड़ी चुनौती आरक्षण और सामाजिक न्याय से जुड़ी है। हरियाणा में सरकारी नौकरियों में आरक्षण का मुद्दा सामाजिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर संवेदनशील रहा है। ऐसे में किसी भी भर्ती व्यवस्था को लेकर पारदर्शिता और संवैधानिक प्रावधानों के पालन पर उठने वाले सवाल सरकार के लिए महत्वपूर्ण होंगे।

आने वाले दिनों में HKRN से जुड़ी बहस और तेज होने के आसार हैं। कांग्रेस कर्मचारियों की मांगों और युवाओं की नौकरी की सुरक्षा को आधार बनाकर सरकार पर दबाव बढ़ा सकती है। वहीं भाजपा अपने शासनकाल में विकसित की गई HKRN व्यवस्था को पारंपरिक ठेकेदारी मॉडल के विकल्प के रूप में पेश करते हुए कांग्रेस के पुराने रिकॉर्ड को मुद्दा बनाएगी।

इस पूरे विवाद ने एक बात स्पष्ट कर दी है कि हरियाणा की राजनीति में रोजगार का मुद्दा फिर से प्रमुख स्थान हासिल कर रहा है। HKRN अब केवल सरकारी विभागों के लिए मानव संसाधन उपलब्ध कराने वाली संस्था नहीं रह गया है, बल्कि यह युवाओं की नौकरी, आरक्षण, भर्ती प्रक्रिया और सेवा सुरक्षा से जुड़ी व्यापक राजनीतिक बहस का केंद्र बन चुका है।

फिलहाल भाजपा अपनी व्यवस्था को पारदर्शिता, मेरिट और केंद्रीकृत भर्ती प्रक्रिया से जोड़ रही है, जबकि कांग्रेस रोजगार की स्थिरता, सामाजिक न्याय और कर्मचारियों की नौकरी की सुरक्षा को लेकर सरकार से जवाब मांग रही है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि नायब सिंह सैनी सरकार HKRN कर्मचारियों की चिंताओं का किस तरह समाधान करती है और युवाओं के लिए रोजगार की स्थायी तथा भरोसेमंद व्यवस्था बनाने में कितनी सफल रहती है। यही मुद्दा आने वाले दिनों में हरियाणा की रोजगार राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।