मोहाली बनेगा पंजाब के टेक स्टार्टअप्स का नया ठिकाना, 29 करोड़ से शुरू होगा ‘न्यूरॉन 2.0’ इनक्यूबेशन हब

मोहाली बनेगा पंजाब के टेक स्टार्टअप्स का नया ठिकाना, 29 करोड़ से शुरू होगा ‘न्यूरॉन 2.0’ इनक्यूबेशन हब

चंडीगढ़/मोहाली। पंजाब में तकनीक आधारित स्टार्टअप और नवाचार को बढ़ावा देने की दिशा में राज्य सरकार ने एक अहम पहल की है। सरकार ने मोहाली स्थित सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (STPI) के साथ साझेदारी करते हुए ‘स्टार्टअप पंजाब हब-न्यूरॉन 2.0’ स्थापित करने का फैसला किया है। करीब 29 करोड़ रुपये की लागत से विकसित होने वाली यह अत्याधुनिक सुविधा विशेष रूप से साइबर सुरक्षा और उभरती तकनीकों पर काम करने वाले स्टार्टअप्स के लिए एक प्रमुख इनक्यूबेशन सेंटर के रूप में विकसित की जाएगी।

इस परियोजना को लेकर उद्योग भवन में पंजाब सरकार और STPI के बीच औपचारिक समझौता हुआ। कार्यक्रम में पंजाब के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री अमन अरोड़ा मौजूद रहे। समझौते पर उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के निदेशक एवं पंजाब स्टार्टअप के नोडल अधिकारी जसप्रीत सिंह तथा STPI के निदेशक शैलेंद्र के. त्यागी ने हस्ताक्षर किए।

राज्य सरकार का कहना है कि इस परियोजना के जरिए पंजाब में ऐसा तकनीकी वातावरण तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है, जहां नए विचारों को उत्पादों में बदलने, स्टार्टअप्स को शुरुआती दौर में आवश्यक सहायता देने और युवाओं को उन्नत तकनीकी कौशल से लैस करने के लिए एक ही स्थान पर कई सुविधाएं उपलब्ध हों। खासतौर पर साइबर सुरक्षा जैसे तेजी से बढ़ते क्षेत्र को परियोजना में प्रमुख स्थान दिया गया है।

अमन अरोड़ा ने कहा कि ‘न्यूरॉन 2.0’ की योजना पहले चरण में मिली सफलता को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से तैयार की गई है। उन्होंने बताया कि ‘न्यूरॉन 1.0’ के तहत 114 स्टार्टअप्स को इनक्यूबेशन सपोर्ट दिया गया। इसके अलावा 158 उत्पादों और 171 प्रोटोटाइप के विकास में मदद की गई। इस पूरी प्रक्रिया के परिणामस्वरूप करीब 2,700 रोजगार के अवसर पैदा होने का दावा किया गया है।

उन्होंने कहा कि पिछले चरण से जुड़े स्टार्टअप्स को निवेश हासिल करने में भी सफलता मिली। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, इन स्टार्टअप्स ने कुल 251 करोड़ रुपये का निवेश जुटाया है, जबकि इनका संयुक्त मूल्यांकन लगभग 2,890 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। सरकार का मानना है कि इसी अनुभव को आधार बनाकर न्यूरॉन 2.0 को पहले से अधिक व्यापक और आधुनिक स्वरूप दिया जाएगा।

नई परियोजना के लिए कुल 29 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसमें पंजाब सरकार की ओर से 12 करोड़ रुपये की सैद्धांतिक मंजूरी दी गई है, जबकि 17 करोड़ रुपये का योगदान STPI की ओर से किया जाएगा। दोनों संस्थाओं की साझेदारी से इस केंद्र को विकसित और संचालित किया जाएगा।

सरकार ने इस परियोजना के लिए अगले पांच वर्षों के लक्ष्य भी निर्धारित किए हैं। योजना के तहत कम से कम 50 स्टार्टअप्स को तैयार और विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही उभरती तकनीकों में संरचित प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से करीब 2,000 पेशेवरों को प्रशिक्षित करने की योजना है।

‘न्यूरॉन 2.0’ में तकनीकी क्षेत्र के कई महत्वपूर्ण डोमेन को शामिल किया जाएगा। इनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिटिक्स, इंटरनेट ऑफ थिंग्स और ऑडियो-विजुअल ग्राफिक्स जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इसके साथ साइबर सुरक्षा को इस परियोजना के प्रमुख क्षेत्रों में रखा गया है। इसका उद्देश्य ऐसे स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित करना है, जो डिजिटल सुरक्षा और आधुनिक तकनीक से जुड़े नए समाधान विकसित कर रहे हैं।

परियोजना की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक अत्याधुनिक साइबर सुरक्षा लैब होगी। इस लैब में स्टार्टअप्स को अपने उत्पादों और तकनीकी समाधानों को विकसित करने तथा उनका परीक्षण करने के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। सरकार का मानना है कि साइबर सुरक्षा की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए यह सुविधा पंजाब के तकनीकी स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

अमन अरोड़ा ने कहा कि आज तकनीक केवल आईटी कंपनियों तक सीमित नहीं है, बल्कि कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग, वित्त और शासन समेत लगभग हर क्षेत्र में इसका इस्तेमाल बढ़ रहा है। ऐसे में पंजाब में ऐसे उद्यमियों को बेहतर प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराने की जरूरत है, जो नई तकनीकों के जरिए स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर की समस्याओं के समाधान विकसित कर सकें।

उन्होंने कहा कि STPI के साथ यह साझेदारी पंजाब में तकनीकी उद्यमिता को नई गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सरकार का उद्देश्य केवल स्टार्टअप्स की संख्या बढ़ाना नहीं है, बल्कि उन्हें बाजार की जरूरतों के अनुरूप उत्पाद विकसित करने, निवेश हासिल करने और व्यावसायिक स्तर पर विस्तार करने में मदद करना भी है।

‘न्यूरॉन 2.0’ को केवल एक इनक्यूबेशन सेंटर के रूप में विकसित करने की योजना नहीं है। इसे एक व्यापक इनोवेशन प्लेटफॉर्म के तौर पर तैयार किया जाएगा। यहां स्टार्टअप्स को शुरुआती विचार से लेकर उत्पाद तैयार करने और उसे बाजार तक पहुंचाने की प्रक्रिया में विभिन्न स्तरों पर सहयोग देने की व्यवस्था होगी।

इस केंद्र में स्टार्टअप इनक्यूबेशन के अलावा मेंटरिंग, आधुनिक तकनीकी बुनियादी ढांचा, कौशल विकास, उत्पादों का व्यावसायीकरण और उद्योगों के साथ संपर्क स्थापित करने जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। इससे नए उद्यमियों को तकनीकी समाधान विकसित करने के साथ-साथ उन्हें व्यावसायिक रूप से सफल बनाने में भी सहायता मिलने की उम्मीद है।

परियोजना के संचालन और प्रबंधन की जिम्मेदारी STPI को दी गई है। STPI केंद्र की तकनीकी सुविधाओं के संचालन के साथ-साथ साइबर सुरक्षा लैब का रखरखाव भी करेगी। इसके अलावा स्टार्टअप्स और युवाओं तक पहुंच बनाने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

इन गतिविधियों में हैकाथॉन, बूटकैंप, आउटरीच प्रोग्राम और निवेशकों से संपर्क कराने वाले कार्यक्रम शामिल होंगे। इनके माध्यम से नए विचारों को सामने लाने, युवाओं को तकनीकी समस्याओं पर काम करने का अवसर देने और संभावित निवेशकों के साथ स्टार्टअप्स की बातचीत कराने का प्रयास किया जाएगा।

कौशल विकास कार्यक्रमों को भी अलग-अलग स्तरों पर संचालित करने की योजना है। इसके तहत शुरुआती स्तर से लेकर विशेषज्ञ स्तर तक प्रशिक्षण दिया जाएगा। यानी जिन युवाओं को तकनीक के क्षेत्र में शुरुआती जानकारी है, उनके लिए फाउंडेशन स्तर के कार्यक्रम होंगे, जबकि पहले से अनुभव रखने वाले प्रतिभागियों के लिए इंटरमीडिएट और एक्सपर्ट स्तर के प्रशिक्षण आयोजित किए जाएंगे।

पंजाब सरकार का स्टार्टअप पंजाब प्लेटफॉर्म भी इस परियोजना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। पात्र स्टार्टअप्स को ‘स्टार्टअप पंजाब’ के तहत पंजीकरण कराने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, ताकि वे राज्य की स्टार्टअप नीति के तहत उपलब्ध विभिन्न सुविधाओं और प्रोत्साहनों का लाभ उठा सकें।

इसके अलावा स्टार्टअप पंजाब की ओर से स्टार्टअप आउटरीच, मेंटरिंग और इकोसिस्टम डेवलपमेंट में सहयोग दिया जाएगा। हब को सरकारी विभागों, शिक्षण संस्थानों और उद्योग संगठनों से जोड़ने की योजना भी है। इसका उद्देश्य स्टार्टअप्स को केवल तकनीकी सहायता तक सीमित न रखना बल्कि उन्हें संभावित ग्राहकों, संस्थानों और औद्योगिक भागीदारों से जोड़ना है।

इस परियोजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा विद्यार्थियों को तकनीकी प्रशिक्षण से जोड़ना भी होगा। सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों तथा कॉलेजों के विद्यार्थियों के लिए भी प्रशिक्षण और सीखने के अवसर उपलब्ध कराने की योजना है। इससे कम उम्र से ही छात्रों में तकनीक, नवाचार और उद्यमिता के प्रति रुचि विकसित करने का प्रयास किया जाएगा।

सरकार का मानना है कि स्कूल और कॉलेज स्तर पर विद्यार्थियों को नई तकनीकों से परिचित कराने से भविष्य में पंजाब को तकनीकी रूप से कुशल युवा प्रतिभा का बड़ा आधार मिल सकता है। ऐसे विद्यार्थी आगे चलकर स्टार्टअप शुरू करने के साथ-साथ मौजूदा तकनीकी कंपनियों के लिए भी कुशल मानव संसाधन उपलब्ध करा सकते हैं।

अमन अरोड़ा ने कहा कि पंजाब के युवाओं में प्रतिभा और क्षमता की कोई कमी नहीं है। जरूरत केवल उन्हें सही प्लेटफॉर्म, आधुनिक तकनीकी संसाधन और विशेषज्ञ मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की है। उनके अनुसार, ‘न्यूरॉन 2.0’ इसी दिशा में एक ऐसा प्लेटफॉर्म तैयार करेगा जहां युवा अपने विचारों को प्रयोग और उत्पाद के स्तर तक ले जा सकेंगे।

राज्य सरकार इस परियोजना को रोजगार सृजन से भी जोड़कर देख रही है। नए स्टार्टअप्स के विकसित होने के साथ प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। इसके अलावा प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से तकनीकी रूप से कुशल युवाओं की संख्या बढ़ाने का लक्ष्य भी रखा गया है।

पंजाब में मोहाली पहले से ही आईटी और तकनीकी गतिविधियों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। ऐसे में STPI परिसर में इस नए हब की स्थापना से क्षेत्र के मौजूदा तकनीकी इकोसिस्टम को भी फायदा मिलने की संभावना है। स्टार्टअप्स को तकनीकी संस्थानों, उद्योग और निवेशकों के साथ संपर्क का अवसर मिल सकेगा।

विशेषज्ञता वाले क्षेत्रों में साइबर सुरक्षा को शामिल करने से इस पहल का दायरा और बढ़ सकता है। डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ साइबर सुरक्षा की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में साइबर सुरक्षा से जुड़े उत्पाद और सेवाएं विकसित करने वाले स्टार्टअप्स के लिए एक समर्पित लैब और इनक्यूबेशन सुविधा उपयोगी साबित हो सकती है।

सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले पांच वर्षों में न्यूरॉन 2.0 से जुड़े स्टार्टअप्स केवल पंजाब तक सीमित न रहें, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपनी पहचान बनाएं। इसके लिए निवेशकों से संपर्क, उत्पादों के व्यावसायीकरण और उद्योग के साथ साझेदारी पर विशेष जोर दिया जाएगा।

कुल मिलाकर 29 करोड़ रुपये की यह परियोजना पंजाब में स्टार्टअप और तकनीकी उद्यमिता को नई दिशा देने की कोशिश के रूप में सामने आई है। न्यूरॉन 1.0 की उपलब्धियों को आधार बनाकर न्यूरॉन 2.0 में साइबर सुरक्षा और नई पीढ़ी की तकनीकों पर विशेष ध्यान, 50 स्टार्टअप्स को विकसित करने और 2,000 पेशेवरों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य इस पहल को रोजगार, कौशल विकास और नवाचार से जोड़ता है।

सरकार और STPI के बीच हुए समझौते के बाद अब परियोजना को जमीन पर उतारने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। यदि निर्धारित लक्ष्यों के मुताबिक इनक्यूबेशन, प्रशिक्षण, निवेश और औद्योगिक संपर्क की गतिविधियां सफलतापूर्वक संचालित होती हैं, तो मोहाली आने वाले वर्षों में पंजाब के तकनीकी स्टार्टअप इकोसिस्टम का एक प्रमुख केंद्र बनकर उभर सकता है।