हरियाणा में स्टार्टअप क्रांति को बढ़ावा, मुख्यमंत्री सैनी ने शुरू की ‘युवा उद्यमिता यात्रा’

हरियाणा में स्टार्टअप क्रांति को बढ़ावा, मुख्यमंत्री सैनी ने शुरू की ‘युवा उद्यमिता यात्रा’

हरियाणा में युवाओं को नौकरी तलाशने के बजाय रोजगार पैदा करने वाला बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने अपनी उद्यमिता नीति और स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने पर जोर दिया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि आने वाला दौर तकनीक, नवाचार और नए विचारों का है। ऐसे में युवाओं को बदलती तकनीकी दुनिया के अनुरूप खुद को तैयार करना होगा और अपने विचारों को केवल सोच तक सीमित रखने के बजाय उन्हें व्यावहारिक रूप से स्टार्टअप और सफल व्यवसाय में बदलने की दिशा में काम करना होगा।

मुख्यमंत्री शुक्रवार को गुरुग्राम विश्वविद्यालय में आयोजित Gen-H Startup Summit और युवा उद्यमी चौपाल में Gen-Z युवाओं तथा नए उद्यमियों के साथ सीधे संवाद कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने युवाओं की समस्याएं सुनीं, उनके सवालों के जवाब दिए और स्टार्टअप को लेकर सरकार की योजनाओं तथा भविष्य की रणनीति की जानकारी साझा की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि युवा शक्ति हरियाणा की सबसे बड़ी पूंजी है। प्रदेश के युवाओं में प्रतिभा, ऊर्जा और नए प्रयोग करने की क्षमता मौजूद है। जरूरत इस बात की है कि उन्हें सही दिशा, तकनीकी सहयोग, प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और अनुभवी लोगों का मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाए। सरकार इसी उद्देश्य के साथ ऐसा वातावरण तैयार कर रही है, जहां युवा अपने नए विचारों को व्यवसाय में बदल सकें और आगे चलकर दूसरे लोगों को भी रोजगार दे सकें।

उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य स्पष्ट है कि एक विचार को उद्यम में और उद्यम को रोजगार के अवसर में बदला जाए। मुख्यमंत्री ने इस सोच को ‘Idea to Enterprise और Enterprise to Employment’ के रूप में सामने रखा। उनका कहना था कि जब कोई युवा अपना कारोबार शुरू करता है तो वह सिर्फ अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं करता, बल्कि उसके उद्यम के विस्तार के साथ दूसरे युवाओं के लिए भी रोजगार के नए रास्ते खुलते हैं।

नायब सिंह सैनी ने कहा कि Gen-H युवा उद्यमी चौपाल का उद्देश्य केवल मंच से भाषण देना नहीं है। इसका मकसद युवाओं के बीच बैठकर उनके विचारों को समझना, स्टार्टअप शुरू करने में आने वाली परेशानियों को जानना और उन्हें समाधान उपलब्ध करवाना है। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि युवा अपनी जरूरतों और समस्याओं को सीधे प्रशासन तथा नीति बनाने वालों के सामने रखें, ताकि योजनाओं को जमीनी जरूरतों के अनुरूप तैयार किया जा सके।

मुख्यमंत्री ने बताया कि हरियाणा में इस समय करीब 12,500 स्टार्टअप मौजूद हैं। उन्होंने प्रदेश के मौजूदा स्टार्टअप्स से अपील की कि वे कम से कम एक नए उद्यमी को आगे बढ़ाने में मदद करें। यदि प्रत्येक स्टार्टअप एक और नए स्टार्टअप को तैयार करने में योगदान देता है तो राज्य में स्टार्टअप की संख्या 25 हजार से अधिक तक पहुंचाई जा सकती है। उन्होंने इसे प्रदेश में रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

कार्यक्रम के दौरान युवाओं को स्टार्टअप शुरू करने की प्रक्रिया से लेकर उसे बाजार तक पहुंचाने की जानकारी देने के लिए छह अलग-अलग मास्टर क्लासरूम भी स्थापित किए गए थे। इन क्लासरूम में अनुभवी उद्यमियों ने युवाओं के साथ अपने अनुभव साझा किए और उन्हें कारोबार शुरू करने, उसे संचालित करने तथा आगे विस्तार देने से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी दी।

प्रत्येक मास्टर क्लासरूम में लगभग 50 युवाओं ने प्रशिक्षण हासिल किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल किताबी जानकारी या एक दिन की ट्रेनिंग से उद्यमिता को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता। युवाओं को वास्तविक कारोबारी माहौल से जोड़ना भी जरूरी है। इसी उद्देश्य से प्रशिक्षण लेने वाले युवाओं को MSMEs के साथ जोड़ने की व्यवस्था की जा रही है, ताकि वे जमीनी स्तर पर कारोबार की कार्यप्रणाली समझ सकें और अपने आइडिया को बेहतर तरीके से विकसित कर सकें।

युवा उद्यमी चौपाल में Startup Room भी स्थापित किया गया, जहां सफल स्टार्टअप संचालकों ने नए उद्यम शुरू करने की इच्छा रखने वाले युवाओं के साथ सीधे संवाद किया। यहां युवाओं को स्टार्टअप के शुरुआती चरण, कारोबार की योजना, संभावित चुनौतियों, निवेश और बाजार से संबंधित विषयों पर जानकारी दी गई।

कार्यक्रम में बैंकों की ओर से भी वित्तीय सहायता और ऋण से संबंधित जानकारी उपलब्ध करवाई गई। युवाओं को बताया गया कि स्टार्टअप शुरू करने के लिए वित्तीय संसाधन जुटाने के कौन-कौन से विकल्प मौजूद हैं और विभिन्न संस्थाओं से किस प्रकार सहायता ली जा सकती है। वहीं स्किल यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों ने युवाओं को आवश्यक कौशल और प्रशिक्षण के संबंध में मार्गदर्शन दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्टार्टअप शुरू करने वाला कोई भी युवा खुद को अकेला महसूस न करे, इसके लिए सरकार एक ऐसा संस्थागत नेटवर्क तैयार कर रही है जहां उसे जरूरत पड़ने पर मेंटरशिप, तकनीकी सलाह, प्रशिक्षण, फंडिंग और बाजार से जुड़ी जानकारी मिल सके। उन्होंने कहा कि कई बार युवाओं के पास शानदार आइडिया होते हैं, लेकिन उन्हें यह जानकारी नहीं होती कि आगे किस संस्था से संपर्क किया जाए। सरकार इसी दूरी को कम करने का प्रयास कर रही है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने ‘युवा उद्यमिता यात्रा’ की भी शुरुआत की। उन्होंने कहा कि इसका दायरा केवल गुरुग्राम तक सीमित नहीं रहेगा। यात्रा के जरिए प्रदेश के अलग-अलग जिलों में युवाओं और विद्यार्थियों तक पहुंच बनाई जाएगी। कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, ITI, कोचिंग संस्थानों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों में युवाओं को उद्यमिता, स्टार्टअप और स्वरोजगार से जुड़े अवसरों की जानकारी दी जाएगी।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि युवा उद्यमिता यात्रा के रूट पहले से निर्धारित किए जाएं और संबंधित शिक्षण संस्थानों को समय रहते कार्यक्रम की जानकारी दी जाए। उन्होंने कहा कि युवाओं को यह बताया जाना चाहिए कि यदि उनके पास कोई नया आइडिया है तो उसे बिजनेस मॉडल में बदलने के लिए उन्हें किस तरह का मार्गदर्शन और सरकारी सहयोग मिल सकता है।

यात्रा के दौरान अलग-अलग स्थानों पर प्रदर्शनियां लगाने की योजना भी है। इसके साथ ही बैंकों के स्टॉल लगाए जाएंगे, जहां युवा ऋण और वित्तीय सहायता से जुड़ी जानकारी हासिल कर सकेंगे। इससे ग्रामीण और छोटे शहरों के युवाओं को भी स्टार्टअप और उद्यमिता के अवसरों से जोड़ने में मदद मिलेगी।

Gen-H Startup Summit में प्रदेश के युवाओं की रचनात्मक क्षमता भी सामने आई। राज्य स्तर पर आयोजित Ideathon में अब तक 45 हजार से अधिक आइडिया सामने आ चुके हैं। करीब 400 युवा उद्यमियों ने इस समिट में भाग लिया। इनमें से चयनित उद्यमियों ने राउंडटेबल चर्चा में हिस्सा लेकर अपने अनुभव और चुनौतियां साझा कीं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 45 हजार से अधिक आइडिया का सामने आना यह दिखाता है कि हरियाणा का युवा नई सोच के साथ आगे बढ़ना चाहता है। चुनौती अब इन विचारों को सही दिशा देने की है। उनका कहना था कि हर आइडिया सफल व्यवसाय में बदले, यह जरूरी नहीं, लेकिन सही मार्गदर्शन मिलने पर कई नए विचार बड़े उद्यम का रूप ले सकते हैं।

उन्होंने युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और दूसरी आधुनिक तकनीकों को समझने की सलाह दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि दुनिया में तकनीकी बदलाव बेहद तेजी से हो रहे हैं और जो युवा इन बदलावों के साथ खुद को अपडेट नहीं करेंगे, उनके लिए भविष्य की प्रतिस्पर्धा कठिन हो सकती है।

उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे AI और आधुनिक तकनीक को केवल सीखने तक सीमित न रखें, बल्कि इसका इस्तेमाल नए उत्पाद और सेवाएं तैयार करने में करें। उन्होंने कहा कि हरियाणा के युवाओं को अपने कारोबार का बाजार केवल प्रदेश या देश तक सीमित रखने के बजाय वैश्विक स्तर पर सोचने की जरूरत है।

कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मुख्यमंत्री और युवाओं के बीच खुला संवाद रहा। युवाओं ने स्टार्टअप के लिए फंडिंग, तकनीकी सहायता, प्रशिक्षण, रोजगार, बाजार और भविष्य की संभावनाओं को लेकर सवाल पूछे। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार युवाओं की आकांक्षाओं को गंभीरता से ले रही है और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा में काम करने के निर्देश दिए जा रहे हैं।

उन्होंने युवाओं को सफलता के साथ असफलताओं से सीखने की भी सलाह दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी बड़े उद्यम की शुरुआत एक छोटे विचार से हो सकती है। लगातार प्रयास, सही मार्गदर्शन, तकनीक का इस्तेमाल और बाजार की जरूरतों को समझने की क्षमता उस विचार को सफल कारोबार में बदल सकती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार, शिक्षण संस्थानों, उद्योग जगत, स्टार्टअप समुदाय और सामाजिक संस्थाओं को एक साझा मंच पर लाकर युवाओं के लिए बेहतर अवसर तैयार कर रही है। इसका उद्देश्य ऐसा इकोसिस्टम बनाना है जहां युवा अपने विचार को शुरुआती स्तर से लेकर कारोबार के विस्तार तक आवश्यक सहयोग प्राप्त कर सके।

उन्होंने दोहराया कि हरियाणा के युवाओं में क्षमता की कोई कमी नहीं है। जरूरत सिर्फ उन्हें अवसर उपलब्ध कराने और सही दिशा देने की है। राज्य सरकार की कोशिश है कि युवा अपनी ऊर्जा और प्रतिभा को नए उद्यमों के निर्माण में लगाए और प्रदेश के आर्थिक विकास में भागीदार बने।

कार्यक्रम में उद्योग मंत्री राव नरबीर सिंह, मुख्यमंत्री के ओएसडी राज नेहरू, वीरेंद्र बड़खालसा और गुरुग्राम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर संजय कौशिक सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। गुरुग्राम यूनिवर्सिटी के अलावा मास्टर्स यूनियन यूनिवर्सिटी, मानव रचना यूनिवर्सिटी फरीदाबाद, ऋषिहुड यूनिवर्सिटी सोनीपत, श्री विश्वकर्मा स्किल यूनिवर्सिटी पलवल, प्लेनएक्स स्टार्टअप और एज प्रमोटर्स ने भी कार्यक्रम में सहयोग किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि Gen-H युवा उद्यमी चौपाल को केवल एक आयोजन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह प्रदेश में उद्यमिता की संस्कृति को मजबूत करने की दिशा में एक व्यापक पहल है। सरकार का प्रयास है कि इसका संदेश हर जिले और हर शिक्षण संस्थान तक पहुंचे और युवा यह महसूस करें कि उनके नए विचारों को आगे बढ़ाने के लिए उन्हें सरकार और संस्थागत व्यवस्था का सहयोग मिल सकता है।

उन्होंने युवाओं से बड़े लक्ष्य निर्धारित करने, नई तकनीकों को अपनाने और जोखिम से घबराए बिना अपने विचारों पर काम करने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि युवा अपनी प्रतिभा को सही दिशा में इस्तेमाल करें और सरकार की ओर से उपलब्ध संसाधनों का लाभ उठाएं तो हरियाणा को स्टार्टअप और इनोवेशन के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल किया जा सकता है।