हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा के सज्जन कुमार को लेकर दिए गए बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। विज ने कहा कि इस बयान ने कांग्रेस की राजनीतिक सोच और उसके अतीत को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व की चुप्पी पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी को इस मामले में अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।
सोमवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान अनिल विज ने कहा कि दीपेंद्र हुड्डा के बयान को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। उनके अनुसार, इस पूरे विवाद में सबसे बड़ा सवाल यह है कि कांग्रेस नेतृत्व ने अब तक इस पर स्पष्ट प्रतिक्रिया क्यों नहीं दी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के भीतर ऐसे और कितने नेता हैं, जिनकी सोच इसी तरह की है, यह भी विचार करने का विषय है।
विज ने कहा कि देश के इतिहास में कांग्रेस के शासनकाल के दौरान कई ऐसे दौर आए, जब बड़े पैमाने पर हिंसा और तनाव की स्थिति पैदा हुई। उन्होंने गुजरात, मेरठ, मुरादाबाद और 1984 के सिख विरोधी दंगों का उल्लेख करते हुए कांग्रेस पर गंभीर राजनीतिक आरोप लगाए। उनका कहना था कि देश ने अलग-अलग समय पर सांप्रदायिक और सामाजिक हिंसा की बड़ी घटनाओं का सामना किया है।
उन्होंने 1984 के सिख विरोधी दंगों का जिक्र करते हुए कांग्रेस को कठघरे में खड़ा किया। विज ने आरोप लगाया कि ऐसी घटनाओं के पीछे मौजूद राजनीतिक सोच को लेकर कांग्रेस को देश के सामने जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व की ओर से यदि किसी विवादित बयान पर स्पष्ट असहमति नहीं जताई जाती तो इससे पार्टी की नीयत को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
अनिल विज ने देश के विभाजन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि विभाजन के दौरान बड़े पैमाने पर जनहानि हुई और करीब 10 लाख लोगों की जान चली गई। विज के मुताबिक, समाज को बांटने वाली राजनीति का नुकसान आम लोगों को उठाना पड़ता है और इतिहास इस बात का गवाह है।
विज ने आरोप लगाया कि कांग्रेस जब भी सत्ता में आती है तो देश को इसकी कीमत चुकानी पड़ती है। उन्होंने कांग्रेस की मौजूदा राजनीतिक गतिविधियों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी लगातार नए मुद्दे उठाकर लोगों को भड़काने और देश में अस्थिरता का माहौल पैदा करने की कोशिश कर रही है।
हरियाणा के मंत्री ने कहा कि राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी समस्याओं का समाधान खोजने की होनी चाहिए, लेकिन कांग्रेस कई मुद्दों को समाधान की दिशा में ले जाने के बजाय राजनीतिक प्रदर्शन और तमाशे का रूप देने की कोशिश करती है। उन्होंने कहा कि जनता अब ऐसी राजनीति को समझने लगी है और विकास तथा स्थिरता को प्राथमिकता देती है।
दीपेंद्र हुड्डा के बयान को लेकर विज ने कांग्रेस से जवाब मांगते हुए कहा कि पार्टी नेतृत्व को स्पष्ट करना चाहिए कि वह इस तरह के बयानों के साथ खड़ा है या नहीं। उन्होंने कहा कि केवल चुप रहना किसी राजनीतिक दल को जिम्मेदारी से मुक्त नहीं करता। यदि कांग्रेस किसी बयान को गलत मानती है तो उसे सार्वजनिक रूप से अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
विज ने कहा कि देश के इतिहास से जुड़े संवेदनशील मुद्दों को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, 1984 जैसे घटनाक्रमों ने देश के सामाजिक ताने-बाने पर गहरा असर डाला और ऐसी घटनाओं को लेकर राजनीतिक दलों को संवेदनशीलता तथा जिम्मेदारी के साथ व्यवहार करना चाहिए।
उन्होंने कांग्रेस पर राजनीतिक अस्थिरता को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्ष को सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने का पूरा अधिकार है, लेकिन विरोध के नाम पर लोगों को भड़काने या समाज में तनाव पैदा करने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।
हरियाणा विधानसभा के आगामी मानसून सत्र को लेकर पूछे गए सवाल पर भी अनिल विज ने विपक्ष को चुनौती दी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सत्र के लिए चाहे जितनी तैयारी कर ले, राज्य सरकार विपक्ष के सवालों का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।
विज ने कहा कि सरकार के पास प्रत्येक सवाल का तथ्यात्मक जवाब है और विधानसभा में विपक्ष द्वारा उठाए जाने वाले मुद्दों पर सरकार अपनी स्थिति स्पष्ट करेगी। उन्होंने संकेत दिया कि मानसून सत्र के दौरान विपक्ष कई मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश कर सकता है, लेकिन सरकार हर सवाल का जवाब सदन के भीतर देने में सक्षम है।
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विधानसभा का मंच जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए होता है। विपक्ष को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन सरकार भी अपने काम और उपलब्धियों का हिसाब देने के लिए तैयार है।
अनिल विज ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि मौजूदा दौर में जनता राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से अधिक विकास और स्थिर शासन चाहती है। उनके अनुसार सरकार का ध्यान प्रदेश के विकास, रोजगार, परिवहन, ऊर्जा और श्रम क्षेत्र में सुधार पर केंद्रित है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस को भी अपने अतीत और वर्तमान राजनीति को लेकर आत्ममंथन करना चाहिए। विज ने दावा किया कि कांग्रेस के नेताओं के अलग-अलग बयानों से पार्टी की एकरूपता पर सवाल खड़े होते हैं। ऐसे में केंद्रीय नेतृत्व को यह स्पष्ट करना चाहिए कि पार्टी की आधिकारिक सोच क्या है।
सज्जन कुमार से जुड़े विवाद के संदर्भ में विज का बयान ऐसे समय आया है जब पंजाब और हरियाणा की राजनीति में 1984 के सिख विरोधी दंगों का मुद्दा फिर चर्चा में है। दीपेंद्र हुड्डा के कथित बयान के बाद विपक्षी दल कांग्रेस पर निशाना साध रहे हैं और पार्टी नेतृत्व से स्पष्टीकरण की मांग कर रहे हैं।
अनिल विज ने इसी राजनीतिक माहौल के बीच कांग्रेस के पुराने रिकॉर्ड और उसके नेताओं के बयानों को लेकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को यह बताना चाहिए कि वह हिंसा और विभाजन से जुड़े ऐतिहासिक घटनाक्रमों को किस नजरिए से देखती है।
हालांकि कांग्रेस की ओर से इस मुद्दे पर क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया आती है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। फिलहाल भाजपा की ओर से इस बयान को लेकर कांग्रेस पर हमला तेज कर दिया गया है। हरियाणा के मंत्री ने इसे कांग्रेस की विचारधारा और नेतृत्व की चुप्पी से जोड़ते हुए कई सवाल खड़े किए हैं।
विज ने कहा कि राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सौहार्द से जुड़े विषयों पर सभी दलों को जिम्मेदारी दिखानी चाहिए। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह राजनीतिक फायदे के लिए संवेदनशील मुद्दों को बार-बार उछालती है।
उन्होंने यह भी कहा कि देश में कानून-व्यवस्था और सामाजिक शांति बनाए रखना सभी राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है। सरकार किसी भी प्रकार की हिंसा या अस्थिरता को बढ़ावा देने वाली राजनीति के खिलाफ है।
हरियाणा विधानसभा के मानसून सत्र को लेकर विज ने एक बार फिर कहा कि सरकार पूरी तैयारी के साथ सदन में पहुंचेगी। विपक्ष की ओर से चाहे भ्रष्टाचार, कानून-व्यवस्था, विकास, रोजगार या किसी अन्य मुद्दे पर सवाल उठाए जाएं, सरकार उनका जवाब देगी।
कुल मिलाकर सज्जन कुमार को लेकर दीपेंद्र हुड्डा के बयान ने हरियाणा की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। भाजपा इस मुद्दे को कांग्रेस के अतीत और उसकी राजनीतिक सोच से जोड़कर हमलावर है, जबकि अब नजर इस बात पर है कि कांग्रेस नेतृत्व इस पूरे मामले पर कब और किस रूप में अपना आधिकारिक रुख सामने रखता है।




