जालंधर। पंजाब सरकार ने नकोदर विधानसभा क्षेत्र में सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक और कदम उठाया है। जल संसाधन मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने क्षेत्र में करीब 5.50 करोड़ रुपये की लागत से पूरी की गई सिंचाई परियोजनाओं का उद्घाटन किया। इन योजनाओं के शुरू होने से अब करीब 4,017 एकड़ कृषि भूमि को नहरी पानी उपलब्ध कराया जा सकेगा। इससे पहले इन इलाकों में महज 1,265 एकड़ जमीन तक ही सिंचाई का पानी पहुंच पाता था।
गांव मवई में आयोजित कार्यक्रम के दौरान कैबिनेट मंत्री ने नकोदर की विधायक इंद्रजीत कौर मान की मौजूदगी में परियोजनाओं को किसानों को समर्पित किया। सरकार का दावा है कि इन कार्यों से नहरी सिंचाई का दायरा बढ़ेगा और किसानों को फसलों के लिए भूजल पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
इन परियोजनाओं को बिस्त-दोआब नहर प्रणाली के तहत पूरा किया गया है। विभाग के मुताबिक, कुल लागत में से 3.76 करोड़ रुपये 18.01 किलोमीटर लंबी पक्की खालों यानी नहरों से निकलने वाली सिंचाई नालियों के निर्माण पर खर्च किए गए हैं। इसके अलावा 1.74 करोड़ रुपये की लागत से 11.45 किलोमीटर लंबी भूमिगत पाइपलाइन तैयार की गई है। इन दोनों व्यवस्थाओं के जरिए नहरी पानी को खेतों तक अधिक प्रभावी तरीके से पहुंचाने की व्यवस्था की गई है।
मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने कहा कि पंजाब सरकार की सिंचाई नीति का मुख्य उद्देश्य किसानों को अधिक से अधिक नहरी पानी उपलब्ध करवाना और भूजल पर बढ़ते दबाव को कम करना है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में राज्य सरकार कृषि क्षेत्र की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सिंचाई के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर लगातार काम कर रही है।
गोयल के अनुसार, पंजाब में लंबे समय से खेती के लिए भूजल के अत्यधिक इस्तेमाल की समस्या रही है। ऐसे में नहरी नेटवर्क को मजबूत करना न केवल किसानों के लिए आर्थिक रूप से फायदेमंद है, बल्कि राज्य के प्राकृतिक जल संसाधनों को बचाने के लिए भी जरूरी है। सरकार का प्रयास है कि जहां भी संभव हो, किसानों को नहरी पानी उपलब्ध करवाया जाए ताकि ट्यूबवेल पर उनकी निर्भरता कम हो सके।
उन्होंने कहा कि सिंचाई परियोजनाओं का वास्तविक लाभ तभी माना जाएगा जब नहर का पानी खेतों के अंतिम छोर तक पहुंचे। इसी उद्देश्य के तहत सरकार द्वारा टेल तक पानी पहुंचाने के लिए कई स्तरों पर काम किया जा रहा है। नकोदर क्षेत्र में शुरू की गई परियोजनाओं को भी इसी प्रयास का हिस्सा बताया गया।
जल संसाधन मंत्री ने कहा कि नहरी पानी के विस्तार के साथ भूजल रिचार्ज पर भी ध्यान दिया जा रहा है। उनके मुताबिक, इस दिशा में किए गए प्रयासों से करीब 2.30 लाख लीटर पानी का रिचार्ज हुआ है। सरकार का मानना है कि नहरी सिंचाई और भूजल रिचार्ज की योजनाओं को एक साथ आगे बढ़ाकर राज्य में पानी के संकट को कम करने की दिशा में बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।
गोयल ने राज्य में नहरी नेटवर्क की मौजूदा स्थिति का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि पंजाब के 1,117 माइनरों और रजवाहों में इस समय करीब 39 हजार क्यूसेक पानी प्रवाहित हो रहा है। उन्होंने इसे नहरी जल आपूर्ति के क्षेत्र में महत्वपूर्ण वृद्धि बताते हुए कहा कि इससे राज्य के सिंचाई ढांचे में हो रहे बदलाव का पता चलता है।
मंत्री ने दावा किया कि पंजाब को कृषि सिंचाई के लिए नहरी पानी के इस्तेमाल में अधिक सक्षम बनाने के लिए राज्य सरकार अब तक करीब 7,500 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है। उनका कहना था कि नहर पानी की उपलब्धता बढ़ने से किसानों को कई स्तरों पर लाभ मिल सकता है। इससे भूजल के साथ-साथ सिंचाई के लिए इस्तेमाल होने वाली बिजली की बचत भी होगी और कृषि लागत को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
उन्होंने कहा कि पंजाब की खेती लंबे समय से भूजल पर निर्भर रही है। लगातार गिरते भूजल स्तर के कारण राज्य के कई इलाकों में भविष्य की कृषि व्यवस्था को लेकर चिंता बनी हुई है। इसलिए सरकार नहरों के जरिए खेतों तक पानी पहुंचाने को प्राथमिकता दे रही है। इसके लिए पुराने नहर तंत्र के सुधार, नई पाइपलाइन और पक्की खालों के निर्माण जैसे काम किए जा रहे हैं।
नकोदर क्षेत्र में पूरी की गई परियोजनाओं से सिंचाई क्षेत्र में करीब तीन गुना से अधिक विस्तार होने का दावा किया गया है। पहले जहां 1,265 एकड़ जमीन तक पानी पहुंच रहा था, वहीं अब करीब 4,017 एकड़ कृषि भूमि को नहरी सिंचाई का लाभ मिलने की उम्मीद है। इससे क्षेत्र के किसानों को अपनी फसलों के लिए वैकल्पिक जल स्रोत उपलब्ध होगा।
पक्के खालों के निर्माण से नहरी पानी की आपूर्ति को व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी। वहीं, भूमिगत पाइपलाइन के जरिए पानी को खेतों के करीब तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई है। इससे पानी के रिसाव और खुले रास्ते में होने वाली बर्बादी को कम करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
कार्यक्रम में नकोदर विधायक इंद्रजीत कौर मान ने परियोजनाओं के लिए राज्य सरकार का आभार जताया। उन्होंने कहा कि किसानों की सबसे बड़ी जरूरतों में से एक खेतों तक पर्याप्त पानी पहुंचाना है। लंबे समय से कई क्षेत्रों में किसान सिंचाई के लिए वैकल्पिक साधनों पर निर्भर रहे हैं, जिससे उनकी लागत भी बढ़ती है।
विधायक ने कहा कि सरकार ने किसानों की इस समस्या को गंभीरता से लिया और नहरी नेटवर्क को मजबूत करने के लिए जरूरी परियोजनाओं को मंजूरी दी। उनके अनुसार, अंतिम छोर तक पानी पहुंचने से क्षेत्र के किसानों को सीधे तौर पर फायदा होगा और कृषि गतिविधियों को भी मजबूती मिलेगी।
इंद्रजीत कौर मान ने कहा कि सिंचाई सुविधा में विस्तार से किसानों को फसल उत्पादन की बेहतर योजना बनाने में मदद मिल सकती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में नकोदर क्षेत्र के अन्य उन इलाकों में भी ऐसी परियोजनाएं लागू की जाएंगी, जहां अभी तक नहरी पानी पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुंच पा रहा है।
सरकार की ओर से सिंचाई व्यवस्था को लेकर किए जा रहे प्रयासों में नहरी पानी की उपलब्धता बढ़ाने के साथ जल संरक्षण को भी प्रमुखता दी जा रही है। पंजाब में भूजल स्तर को लेकर लंबे समय से विशेषज्ञों और कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों की चिंता रही है। धान जैसी अधिक पानी की जरूरत वाली फसलों के कारण कई इलाकों में भूजल का दबाव और बढ़ जाता है। ऐसे में नहरी पानी की पहुंच बढ़ाने को जल संरक्षण की व्यापक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
बरिंदर कुमार गोयल ने कहा कि राज्य में सिंचाई सुविधाओं को बेहतर बनाने का काम केवल वर्तमान फसल चक्र की जरूरत पूरी करने तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य आने वाली पीढ़ियों के लिए भी पानी के संसाधनों को सुरक्षित रखना है। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की आय, कृषि लागत और प्राकृतिक संसाधनों के बीच संतुलन बनाने के लिए सिंचाई ढांचे में निवेश कर रही है।
उन्होंने कहा कि जब खेतों तक नहरी पानी पहुंचता है तो किसानों को सिंचाई के लिए बिजली और भूजल पर कम निर्भर रहना पड़ता है। इससे सरकार और किसानों दोनों के संसाधनों की बचत हो सकती है। साथ ही भूजल स्तर पर पड़ने वाला दबाव भी कम किया जा सकता है।
कार्यक्रम के दौरान जिला परिषद के चेयरमैन दर्शन सिंह टाहली सहित क्षेत्र के अन्य गणमान्य लोग और संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने परियोजनाओं से संबंधित तकनीकी पहलुओं और भविष्य की सिंचाई व्यवस्था को लेकर भी जानकारी साझा की।
नकोदर में शुरू की गई इन परियोजनाओं को स्थानीय किसानों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 18.01 किलोमीटर पक्के खाल और 11.45 किलोमीटर भूमिगत पाइपलाइन के जरिए नहरी पानी के वितरण तंत्र को मजबूत किया गया है। सरकार के मुताबिक, इससे 4,017 एकड़ भूमि तक सिंचाई सुविधा पहुंचने का रास्ता साफ हुआ है।
कुल मिलाकर, नकोदर विधानसभा क्षेत्र में 5.50 करोड़ रुपये की लागत से पूरी की गई सिंचाई परियोजनाएं पंजाब सरकार की नहरी पानी को खेतों के अंतिम छोर तक पहुंचाने की नीति का हिस्सा हैं। सरकार का दावा है कि ऐसे प्रोजेक्ट न केवल किसानों को सिंचाई की सुविधा देंगे, बल्कि भूजल संरक्षण, बिजली की बचत और कृषि संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल में भी मददगार साबित होंगे।




