गन्ना किसानों के लिए बड़ी राहत: आधुनिक खेती अपनाने पर हरियाणा सरकार देगी आर्थिक मदद, दिसंबर तक आवेदन का मौका

गन्ना किसानों के लिए बड़ी राहत: आधुनिक खेती अपनाने पर हरियाणा सरकार देगी आर्थिक मदद, दिसंबर तक आवेदन का मौका

चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने गन्ना उत्पादक किसानों को आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक पद्धतियों से खेती के लिए प्रोत्साहित करने की दिशा में नई पहल शुरू की है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की ओर से वर्ष 2026-27 के लिए ‘गन्ना तकनीकी उद्देश्य परियोजना’ लागू की गई है। इसके तहत किसानों को गन्ने की उन्नत एवं अनुशंसित किस्मों की खेती के साथ आधुनिक बिजाई और फसल प्रबंधन तकनीकों को अपनाने पर अनुदान उपलब्ध कराया जाएगा।

सरकार का उद्देश्य गन्ने की खेती में उत्पादन क्षमता बढ़ाने, गुणवत्तापूर्ण बीज सामग्री को बढ़ावा देने और किसानों को ऐसी तकनीकों से जोड़ना है, जिनसे कम लागत में बेहतर पैदावार हासिल की जा सके। योजना के तहत प्रदर्शन प्लाट तैयार करने वाले पात्र किसानों को निर्धारित प्रावधानों के अनुसार आर्थिक सहायता दी जाएगी।

यह योजना प्रदेश के उन क्षेत्रों में लागू की गई है, जहां गन्ने की खेती बड़े पैमाने पर होती है। यमुनानगर, नारायणगढ़, शाहाबाद, करनाल, असंध, भादसों, पानीपत, कैथल, रोहतक, सोनीपत, जींद, पलवल, भूना, गोहाना और महम क्षेत्र के सहायक गन्ना विकास अधिकारियों के अधिकार क्षेत्र में आने वाले किसान इस योजना के लिए आवेदन कर सकते हैं।

कृषि विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, योजना का प्रमुख फोकस गन्ने की खेती में पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ नई तकनीकों को अपनाने पर है। इसके अंतर्गत किसानों को प्रदर्शन प्लाट स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, ताकि आधुनिक तकनीकों के परिणाम खेत स्तर पर सामने आ सकें और दूसरे किसान भी उनसे प्रेरणा लेकर इन विधियों को अपना सकें।

योजना के तहत गन्ने की अधिसूचित और कृषि विशेषज्ञों द्वारा सिफारिश की गई किस्मों की बिजाई को बढ़ावा दिया जाएगा। किसानों को विशेष रूप से चार फीट चौड़ी पंक्ति दूरी वाली खेती, सिंगल-बड तकनीक और बड-चिप विधि जैसी आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके अलावा फाउंडेशन सीड नर्सरी तैयार करने और बीज उपचार जैसी गतिविधियों को भी योजना में शामिल किया गया है।

गन्ने की फसल में पेड़ी प्रबंधन भी योजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। चार फीट की चौड़ी कतार दूरी में पेड़ी प्रबंधन के माध्यम से प्रदर्शन प्लाट स्थापित करने वाले किसानों को भी निर्धारित नियमों के तहत अनुदान दिया जाएगा। विभाग का मानना है कि वैज्ञानिक तरीके से पेड़ी प्रबंधन करने से फसल की उत्पादकता और गुणवत्ता में सुधार लाने में मदद मिल सकती है।

आधुनिक बिजाई तकनीकों पर रहेगा जोर

गन्ने की खेती में लागत कम करने और बेहतर उत्पादन प्राप्त करने के लिए आधुनिक बिजाई पद्धतियां महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए विभाग ने योजना में कई तकनीकों को शामिल किया है। चार फीट की चौड़ी कतार दूरी में गन्ने की बिजाई से खेत में पौधों के बीच पर्याप्त जगह उपलब्ध होती है और कृषि कार्यों को वैज्ञानिक तरीके से करने में सुविधा मिल सकती है।

इसी तरह सिंगल-बड और बड-चिप विधि में गन्ने के बीज की आवश्यकता को कम करने तथा गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री के उपयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाता है। विभाग द्वारा किसानों को इन तकनीकों के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ प्रदर्शन प्लाटों के जरिए इनके व्यावहारिक परिणाम दिखाने की योजना बनाई गई है।

फाउंडेशन सीड नर्सरी और बीज उपचार को भी योजना में स्थान दिया गया है। गुणवत्तापूर्ण बीज सामग्री का उपयोग गन्ने की फसल के लिए महत्वपूर्ण है। बीज उपचार के जरिए स्वस्थ फसल स्थापना की दिशा में मदद मिलने की उम्मीद है। सरकार की कोशिश है कि किसान प्रमाणित और अनुशंसित किस्मों के साथ वैज्ञानिक पद्धतियों का इस्तेमाल करें।

दो चरणों में कर सकेंगे आवेदन

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने किसानों की सुविधा के लिए आवेदन की समय-सारिणी भी निर्धारित कर दी है। जिन किसानों ने अप्रैल 2026 के बाद वसंत अथवा ग्रीष्म ऋतु में गन्ने की बिजाई की है, वे योजना के तहत लाभ लेने के लिए 30 सितंबर 2026 तक पंजीकरण करा सकते हैं।

वहीं, आगामी शरद ऋतु यानी अक्टूबर और नवंबर 2026 के दौरान गन्ने की बिजाई करने वाले किसानों के लिए आवेदन प्रक्रिया अलग रखी गई है। ऐसे किसान 1 अक्टूबर 2026 से 31 दिसंबर 2026 तक योजना के लिए आवेदन कर सकेंगे।

इस व्यवस्था का उद्देश्य अलग-अलग मौसम में गन्ने की बिजाई करने वाले किसानों को आवेदन के लिए पर्याप्त समय उपलब्ध कराना है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे निर्धारित समय-सीमा के भीतर अपना पंजीकरण और आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें, ताकि योजना का लाभ प्राप्त करने में किसी प्रकार की परेशानी न हो।

ऑनलाइन करना होगा आवेदन

योजना का लाभ लेने के इच्छुक किसानों को कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन करना होगा। विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे आवेदन करने से पहले योजना से संबंधित पात्रता शर्तों और आवश्यक जानकारी को ध्यान से पढ़ें तथा निर्धारित अवधि में अपना आवेदन जमा करें।

विभागीय स्तर पर किसानों को योजना के बारे में जानकारी उपलब्ध कराने के लिए संबंधित क्षेत्रों में सहायक गन्ना विकास अधिकारियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहेगी। संबंधित अधिकारी अपने क्षेत्र के किसानों को योजना की तकनीकी जानकारी, आवेदन प्रक्रिया और प्रदर्शन प्लाट से जुड़े प्रावधानों के बारे में मार्गदर्शन दे सकते हैं।

15 प्रमुख गन्ना उत्पादक क्षेत्रों के किसानों को मिलेगा लाभ

सरकार की इस योजना का लाभ प्रदेश के 15 प्रमुख गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में आने वाले पात्र किसानों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इनमें यमुनानगर, नारायणगढ़, शाहाबाद, करनाल, असंध, भादसों, पानीपत, कैथल, रोहतक, सोनीपत, जींद, पलवल, भूना, गोहाना और महम शामिल हैं।

इन क्षेत्रों में गन्ने की खेती से जुड़े किसानों के लिए योजना विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो सकती है, क्योंकि इसके जरिए उन्हें अपने खेतों में आधुनिक तकनीकों का प्रदर्शन करने के साथ आर्थिक सहायता प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। सरकार का जोर केवल अनुदान उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि आधुनिक खेती के सफल मॉडल तैयार कर उन्हें व्यापक स्तर पर किसानों तक पहुंचाने पर भी है।

प्रदर्शन प्लाटों के जरिए किसानों को मिलेगा व्यावहारिक अनुभव

योजना के तहत प्रदर्शन प्लाट विकसित करने का उद्देश्य किसानों को आधुनिक तकनीक का प्रत्यक्ष अनुभव उपलब्ध कराना है। किसी तकनीक के बारे में केवल जानकारी देने के बजाय जब किसान उसे खेत में लागू होते हुए देखते हैं, तो उसे अपनाने में उनका भरोसा बढ़ता है। इसी सोच के तहत गन्ने की नई बिजाई तकनीकों और फसल प्रबंधन पद्धतियों को प्रदर्शन प्लाटों के माध्यम से बढ़ावा दिया जाएगा।

इन प्लाटों में अधिसूचित एवं अनुशंसित गन्ना किस्मों का इस्तेमाल करते हुए आधुनिक तकनीकों को लागू किया जाएगा। चौड़ी कतार दूरी, सिंगल-बड, बड-चिप, बीज उपचार, फाउंडेशन सीड नर्सरी और पेड़ी प्रबंधन जैसी तकनीकों के प्रदर्शन से किसानों को खेती के नए विकल्पों की जानकारी मिल सकेगी।

उत्पादन और गुणवत्ता बढ़ाने की दिशा में कदम

हरियाणा में गन्ना खेती किसानों की आय और कृषि अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में सरकार की इस पहल को गन्ने की उत्पादकता बढ़ाने और खेती में वैज्ञानिक तकनीकों के विस्तार से जोड़कर देखा जा रहा है। आधुनिक विधियों को अपनाने से खेती की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होने के साथ संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल की संभावना भी रहती है।

कृषि विभाग की योजना किसानों को बेहतर बीज सामग्री, वैज्ञानिक बिजाई और उचित फसल प्रबंधन की दिशा में आगे बढ़ाने की है। प्रदर्शन आधारित अनुदान के जरिए किसान अपने खेत में तकनीक को लागू कर उसके परिणामों को देख सकेंगे।

सरकार की इस पहल से गन्ना उत्पादक किसानों के बीच आधुनिक कृषि पद्धतियों को लेकर जागरूकता बढ़ने की उम्मीद है। खासकर युवा किसान नई तकनीकों को अपनाकर खेती को अधिक वैज्ञानिक और व्यवस्थित बनाने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने पात्र किसानों से योजना का लाभ उठाने की अपील की है। वसंत या ग्रीष्म ऋतु में अप्रैल के बाद गन्ना लगाने वाले किसानों के लिए 30 सितंबर तक आवेदन का मौका है, जबकि आगामी शरद ऋतु में गन्ने की बिजाई करने वाले किसान 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। इस तरह वर्ष 2026-27 के दौरान सरकार की यह योजना गन्ने की खेती में आधुनिक तकनीकों के विस्तार और किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों से जोड़ने की दिशा में एक अहम कदम साबित हो सकती है।