गांव शेरों, जिला संगरूर निवासी मोहन जीत सिंह से जुड़े कथित पुलिस प्रताड़ना के मामले ने अब राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचा है। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन हरजीत सिंह ग्रेवाल मंगलवार को पटियाला पहुंचकर राजिंदरा अस्पताल में उपचाराधीन मोहन जीत सिंह से मुलाकात करेंगे। आयोग के पास पहुंची शिकायत में पुलिस हिरासत के दौरान उनके साथ कथित मारपीट और प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इन्हीं आरोपों की वास्तविक स्थिति जानने के लिए आयोग के चेयरमैन स्वयं अस्पताल जाकर पीड़ित और उसके परिवार से बातचीत करेंगे।
हरजीत सिंह ग्रेवाल दोपहर करीब 12 बजे राजिंदरा अस्पताल पहुंचेंगे। इस दौरान वह मोहन जीत सिंह की मौजूदा स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी लेने के साथ-साथ उनके परिवार के सदस्यों से भी बातचीत करेंगे। माना जा रहा है कि मुलाकात के दौरान शिकायत में दर्ज आरोपों, घटना की परिस्थितियों और उसके बाद हुई कार्रवाई से संबंधित जानकारी जुटाई जाएगी।
मामला 2 सितंबर को सुनाम के गांव शेरों में आयोजित ‘लोक मिलनी’ कार्यक्रम से जुड़ा बताया गया है। शिकायत के मुताबिक इस कार्यक्रम के दौरान मोहन जीत सिंह ने पंजाब में नशे की समस्या के विरोध में काला झंडा दिखाया था। इसके बाद उन्हें पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने का आरोप लगाया गया है।
शिकायत में दावा किया गया है कि हिरासत के दौरान उनके साथ कथित तौर पर शारीरिक हिंसा और अमानवीय व्यवहार किया गया। इसमें मारपीट करने, चोटें पहुंचाने और बिजली के झटके देने जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और आयोग द्वारा मामले की जानकारी जुटाए जाने के बाद ही घटनाक्रम की पूरी तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।
धार्मिक पहचान से छेड़छाड़ का भी आरोप
मामले को और गंभीर बनाने वाला पहलू शिकायत में लगाए गए वे आरोप हैं, जिनमें मोहन जीत सिंह की धार्मिक पहचान के साथ कथित तौर पर छेड़छाड़ किए जाने की बात कही गई है। शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से आरोप लगाया गया है कि हिरासत के दौरान उनका जबरन जूड़ा खोला गया तथा बाल और दाढ़ी खींची गई।
शिकायत में लगाए गए इन आरोपों को राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने गंभीरता से लिया है। यही वजह है कि आयोग के चेयरमैन ने स्वयं मौके पर जाकर संबंधित व्यक्ति से मुलाकात करने और पूरे मामले की जानकारी हासिल करने का निर्णय लिया है।
अस्पताल में मुलाकात के दौरान आयोग अध्यक्ष मोहन जीत सिंह से घटना के संबंध में उनका पक्ष जान सकते हैं। इसके साथ ही परिवार से घटना से पहले और बाद की परिस्थितियों के बारे में जानकारी ली जाएगी। अस्पताल में मौजूद चिकित्सकीय रिकॉर्ड और उपचार से जुड़ी जानकारी भी मामले की जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
सरकार से मांगे गए दस्तावेज और जांच रिकॉर्ड
राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने पंजाब सरकार के संबंधित अधिकारियों को मामले से जुड़े दस्तावेज और रिकॉर्ड उपलब्ध रखने के निर्देश दिए हैं। आयोग की ओर से अधिकारियों से घटना से संबंधित फाइलें, पुलिस रिकॉर्ड, जांच दस्तावेज, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य आवश्यक सामग्री तैयार रखने को कहा गया है।
इसके साथ ही वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी सुनिश्चित करने के लिए भी कहा गया है, ताकि आयोग के चेयरमैन को मामले की पृष्ठभूमि और अब तक हुई कार्रवाई के बारे में सीधे जानकारी मिल सके।
आयोग यह जानना चाहता है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों के संबंध में पुलिस और प्रशासन की ओर से अब तक क्या कार्रवाई की गई है। घटना के बाद किसी स्तर पर जांच शुरू हुई या नहीं, संबंधित अधिकारियों ने क्या रिपोर्ट तैयार की और मोहन जीत सिंह के इलाज तथा मेडिकल परीक्षण से संबंधित रिकॉर्ड में क्या स्थिति सामने आई है, इन सभी पहलुओं की जानकारी जुटाई जाएगी।
अस्पताल में आमने-सामने होगी जानकारी
हरजीत सिंह ग्रेवाल के अस्पताल दौरे को मामले की आगे की दिशा तय करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शिकायत में गंभीर आरोप लगाए जाने के बाद आयोग के चेयरमैन पीड़ित से सीधे बातचीत कर घटनाक्रम को समझने का प्रयास करेंगे।
इस दौरान मोहन जीत सिंह की चिकित्सकीय स्थिति के बारे में डॉक्टरों से जानकारी लिए जाने की भी संभावना है। परिवार के सदस्यों से बातचीत के जरिए आयोग घटना के क्रम, हिरासत और उसके बाद अस्पताल पहुंचने की परिस्थितियों के बारे में जानकारी हासिल कर सकता है।
आयोग की ओर से अधिकारियों को संबंधित सभी रिकॉर्ड तैयार रखने के निर्देश दिए जाने से यह संकेत मिलता है कि मामले को केवल शिकायत के स्तर पर नहीं छोड़ा जा रहा, बल्कि उपलब्ध दस्तावेजों और रिकॉर्ड के आधार पर घटनाक्रम की पड़ताल की जाएगी।
नशे के विरोध से जुड़ा है घटनाक्रम
शिकायत के अनुसार पूरे मामले की शुरुआत उस समय हुई जब मोहन जीत सिंह ने लोक मिलनी कार्यक्रम में पंजाब में नशे के खिलाफ विरोध दर्ज कराने के लिए काला झंडा दिखाया। पंजाब में नशे का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक बहस का केंद्र बना हुआ है। ऐसे में इस घटना ने विरोध प्रदर्शन के बाद कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।
शिकायतकर्ता पक्ष का आरोप है कि काला झंडा दिखाने के बाद पुलिस ने मोहन जीत सिंह को हिरासत में लिया और इसके बाद उनके साथ कथित तौर पर मारपीट तथा प्रताड़ना की गई। हालांकि पुलिस की ओर से इस मामले में क्या पक्ष रखा गया है और घटना के संबंध में सरकारी स्तर पर क्या तथ्य सामने आए हैं, यह आयोग की ओर से जानकारी लिए जाने के बाद अधिक स्पष्ट हो सकता है।
आयोग की नजर मेडिकल रिपोर्ट पर भी
मामले में मेडिकल रिपोर्ट को महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जा रहा है। शिकायत में हिरासत के दौरान चोट पहुंचाने और शारीरिक प्रताड़ना के आरोप लगाए गए हैं। ऐसे में उपचार कर रहे डॉक्टरों की रिपोर्ट और मेडिकल जांच से संबंधित रिकॉर्ड से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि मोहन जीत सिंह को किस प्रकार की चोटें आईं और उनका उपचार किस स्थिति में किया जा रहा है।
आयोग ने पंजाब सरकार के अधिकारियों से मेडिकल रिपोर्ट समेत सभी संबंधित दस्तावेज उपलब्ध रखने को कहा है। इससे आयोग को शिकायत में लगाए गए आरोपों और उपलब्ध मेडिकल रिकॉर्ड के बीच तथ्यों का मिलान करने में मदद मिल सकती है।
इसके अलावा पुलिस जांच से जुड़े दस्तावेज भी आयोग के लिए अहम होंगे। हिरासत की परिस्थितियां, संबंधित पुलिस अधिकारियों की भूमिका, दर्ज रिकॉर्ड और अब तक की जांच जैसे पहलुओं पर भी जानकारी मांगी गई है।
दोपहर 2 बजे प्रेस ब्रीफिंग
अस्पताल में मोहन जीत सिंह से मुलाकात के बाद हरजीत सिंह ग्रेवाल दोपहर 2 बजे पटियाला के सर्किट हाउस में प्रेस ब्रीफिंग करेंगे। इस दौरान वह अस्पताल दौरे के दौरान सामने आई जानकारी और अधिकारियों से प्राप्त विवरण के संबंध में जानकारी साझा कर सकते हैं।
प्रेस ब्रीफिंग पर इसलिए भी नजर रहेगी क्योंकि इससे मामले में आयोग की प्रारंभिक स्थिति स्पष्ट हो सकती है। यदि आयोग को शिकायत और उपलब्ध रिकॉर्ड में गंभीर विसंगतियां मिलती हैं तो आगे की कार्रवाई को लेकर भी संकेत सामने आ सकते हैं।
हालांकि आयोग की ओर से अंतिम निष्कर्ष जांच और उपलब्ध दस्तावेजों के अध्ययन के बाद ही सामने आने की संभावना है।
प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई पर भी रहेगी नजर
इस मामले में अब प्रशासन और पुलिस की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है। आयोग ने वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं, जिससे संबंधित अधिकारियों से सीधे जवाब और तथ्य लेने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।
आयोग यह भी देख सकता है कि घटना के बाद शिकायत पर क्या कार्रवाई की गई और क्या किसी स्तर पर जांच अथवा मेडिकल प्रक्रिया अपनाई गई। यदि शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि करने वाले तथ्य सामने आते हैं तो संबंधित एजेंसियों की जवाबदेही का सवाल भी उठ सकता है।
दूसरी ओर, यदि उपलब्ध रिकॉर्ड शिकायत में लगाए गए आरोपों से अलग तस्वीर पेश करते हैं तो वह पक्ष भी आयोग के सामने रखा जाएगा। इसलिए आज होने वाली मुलाकात और इसके बाद की प्रेस ब्रीफिंग को मामले में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
फिलहाल पूरा मामला राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के संज्ञान में पहुंच चुका है और आयोग के चेयरमैन का प्रत्यक्ष दौरा यह संकेत देता है कि शिकायत में उठाए गए आरोपों की गंभीरता से पड़ताल की जा रही है। मोहन जीत सिंह के बयान, मेडिकल रिकॉर्ड, पुलिस दस्तावेज और प्रशासनिक अधिकारियों से मिलने वाली जानकारी के आधार पर आगे की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।




