ग्रामीण सफाई कर्मियों के लिए हरियाणा सरकार का बड़ा पैकेज, बढ़ा मानदेय मिलेगा एरियर; ड्यूटी में मौत पर परिवार को नौकरी

ग्रामीण सफाई कर्मियों के लिए हरियाणा सरकार का बड़ा पैकेज, बढ़ा मानदेय मिलेगा एरियर; ड्यूटी में मौत पर परिवार को नौकरी

हरियाणा सरकार ने प्रदेश के ग्रामीण सफाई कर्मियों के आर्थिक हितों और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कई अहम फैसले किए हैं। सरकार की ओर से लिए गए इन निर्णयों में बढ़े हुए मानदेय की बकाया राशि का भुगतान, गांव से बाहर ड्यूटी करने पर दैनिक भत्ता, वर्दी और धुलाई भत्ते में बढ़ोतरी तथा ड्यूटी के दौरान मृत्यु होने पर परिवार के एक सदस्य को अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति देने का प्रावधान शामिल है।

ग्रामीण सफाई कर्मियों की ओर से 29 मई 2026 को सरकार के समक्ष रखी गई मांगों के आधार पर इन फैसलों को आगे बढ़ाया गया है। विकास एवं पंचायत विभाग के निदेशक की ओर से इस संबंध में संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। सरकार का कहना है कि इन प्रावधानों का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता व्यवस्था से जुड़े कर्मचारियों को बेहतर आर्थिक सुरक्षा और काम के दौरान जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

सरकार के फैसलों में सबसे प्रमुख मुद्दा ग्रामीण सफाई कर्मियों के मानदेय से जुड़ा है। जनवरी 2026 से उनके मानदेय में 2100 रुपये प्रतिमाह की बढ़ोतरी की गई है। इसके बाद मासिक मानदेय 16 हजार रुपये से बढ़कर 18,100 रुपये हो गया है। यह संशोधित मानदेय जनवरी 2026 से 30 जून 2026 तक की अवधि के लिए लागू किया गया है और इस अवधि की बकाया बढ़ी हुई राशि का भुगतान पात्र कर्मियों को किया जाएगा।

इस निर्णय से उन ग्रामीण सफाई कर्मियों को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा, जिन्हें बढ़े हुए मानदेय का लाभ संबंधित अवधि में नहीं मिल पाया था। सरकार ने बकाया राशि का भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि कर्मचारियों को उनके संशोधित मानदेय का पूरा लाभ मिल सके।

सरकार ने अक्टूबर 2023 में हुई हड़ताल की अवधि से जुड़े मानदेय के मामले में भी राहत का रास्ता साफ किया है। उस दौरान जिन पात्र ग्रामीण सफाई कर्मियों का मानदेय लंबित रह गया था, उनके रिकॉर्ड की जांच और सत्यापन के बाद बकाया राशि जारी की जाएगी। इस श्रेणी में ढांड के 48, फरुखनगर के 54, सिंहमा के 25 और निजामपुर के 15 ग्रामीण सफाई कर्मी शामिल हैं।

इन मामलों में आधिकारिक रिकॉर्ड का सत्यापन महत्वपूर्ण होगा। संबंधित रिकॉर्ड की जांच के बाद पात्र पाए जाने वाले कर्मचारियों को लंबित मानदेय का भुगतान किया जाएगा। सरकार के इस निर्णय से लंबे समय से भुगतान का इंतजार कर रहे कर्मियों को राहत मिलने की उम्मीद है।

ग्रामीण सफाई कर्मियों की कार्य परिस्थितियों को देखते हुए सरकार ने गांव से बाहर ड्यूटी लगाने की स्थिति में भी आर्थिक सहायता का प्रावधान किया है। यदि किसी कर्मचारी को उसके गांव से बाहर जाकर ड्यूटी करनी पड़ती है तो उसे प्रतिदिन 200 रुपये का भत्ता दिया जाएगा। यह राशि संबंधित खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी यानी बीडीपीओ कार्यालय की ओर से पेटी कैश के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी।

इस प्रावधान का उद्देश्य बाहर जाकर काम करने वाले सफाई कर्मियों के अतिरिक्त खर्च को कम करना है। ग्रामीण क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था से जुड़ी जरूरतों के कारण कई बार कर्मियों को अपने निर्धारित गांव से बाहर भी सेवाएं देनी पड़ सकती हैं। ऐसे में सरकार की ओर से दैनिक भत्ते का प्रावधान कर्मचारियों के लिए अतिरिक्त आर्थिक सहायता के तौर पर काम करेगा।

सरकार ने सफाई कर्मियों के वर्दी भत्ते में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है। अब उन्हें सालाना वर्दी भत्ते के रूप में 4 हजार रुपये के स्थान पर 6 हजार रुपये मिलेंगे। यानी वर्दी भत्ते में प्रतिवर्ष 2 हजार रुपये की वृद्धि की गई है। सफाई कार्य के दौरान कर्मचारियों को निर्धारित पोशाक और जरूरी सुरक्षा संबंधी सामान की आवश्यकता होती है। ऐसे में बढ़ा हुआ वर्दी भत्ता उनके लिए उपयोगी साबित हो सकता है।

इसी तरह धुलाई भत्ते को भी बढ़ाया गया है। पहले ग्रामीण सफाई कर्मियों को सालाना 1000 रुपये धुलाई भत्ता मिलता था, जिसे अब 1500 रुपये कर दिया गया है। इसमें 500 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। सरकार ने इन दोनों भत्तों में बदलाव करते हुए कर्मचारियों के कार्य से जुड़े खर्चों को ध्यान में रखने का प्रयास किया है।

ग्रामीण सफाई कर्मियों के परिवारों की सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा फैसला भी सरकार के आदेश में शामिल है। यदि किसी कर्मचारी की ड्यूटी के दौरान मृत्यु हो जाती है तो उसके परिवार के एक सदस्य को अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति देने का प्रावधान किया गया है। यह फैसला ऐसे परिवारों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिनके कमाने वाले सदस्य की सेवा के दौरान मृत्यु हो जाने के बाद परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो जाता है।

अनुकंपा नियुक्ति के प्रावधान का उद्देश्य प्रभावित परिवार को आय का एक वैकल्पिक सहारा उपलब्ध कराना है। इसके तहत पात्र परिवार के एक सदस्य को नियमानुसार रोजगार देने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इससे मृतक कर्मचारी के आश्रित परिवार को भविष्य में आर्थिक असुरक्षा से बचाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

ड्यूटी के दौरान कर्मचारी की मृत्यु के बाद परिवार को ईपीएफ और ईएसआई से जुड़े मृत्यु दावे हासिल करने में भी सहायता दी जाएगी। इसके लिए संबंधित बीडीपीओ कार्यालय को सहयोग करने की जिम्मेदारी दी गई है। कार्यालय परिवार के सदस्यों को आवश्यक प्रक्रिया और कागजी कार्रवाई में सहायता करेगा।

सरकार का यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ईपीएफ और ईएसआई से जुड़े दावों के लिए कई प्रकार के दस्तावेज और औपचारिकताएं पूरी करनी होती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों के लिए इन प्रक्रियाओं को पूरा करना कई बार कठिन हो सकता है। ऐसे में सरकारी स्तर पर सहायता मिलने से उन्हें दावा प्रक्रिया पूरी करने में सुविधा होगी।

इसके साथ ही सरकार ने यह भी सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि मृतक कर्मचारी के परिवार को किसी निजी एजेंसी या बिचौलिए के माध्यम से प्रक्रिया पूरी कराने के लिए निर्भर न रहना पड़े। बीडीपीओ कार्यालय की सहायता से परिवार को आधिकारिक प्रक्रिया के तहत दावा प्राप्त करने में सहयोग दिया जाएगा। इससे किसी भी प्रकार के संभावित शोषण को रोकने में मदद मिलेगी।

सरकार ने ग्रामीण सफाई कर्मियों को हर महीने समय पर मानदेय उपलब्ध कराने को लेकर भी स्पष्ट व्यवस्था तय की है। जारी निर्देशों के अनुसार प्रत्येक माह की 7 तारीख तक मानदेय का भुगतान करना अनिवार्य होगा। यानी कर्मचारियों को अपने मानदेय के लिए महीने के लंबे समय तक इंतजार न करना पड़े, इसके लिए भुगतान की समयसीमा निर्धारित की गई है।

समय पर भुगतान नहीं होने की स्थिति में जिम्मेदारी तय करने का भी प्रावधान किया गया है। यदि निर्धारित समयसीमा के भीतर मानदेय का भुगतान नहीं होता है तो संबंधित स्तर पर 500 रुपये का जुर्माना देय होगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य भुगतान प्रक्रिया में लापरवाही को रोकना और अधिकारियों को समय पर मानदेय जारी करने के लिए जवाबदेह बनाना है।

ग्रामीण सफाई कर्मचारी प्रदेश के गांवों में स्वच्छता व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। घरों और सार्वजनिक स्थानों के आसपास सफाई, कचरा प्रबंधन और ग्रामीण स्वच्छता से जुड़े कार्यों में उनकी भूमिका रहती है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखने के लिए इन कर्मचारियों की सेवाएं लगातार आवश्यक रहती हैं।

ऐसे में सरकार द्वारा मानदेय और भत्तों में वृद्धि के साथ-साथ परिवार की सामाजिक सुरक्षा से जुड़े प्रावधान लागू करने को कर्मचारियों के कल्याण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। जनवरी 2026 से बढ़े हुए मानदेय का बकाया भुगतान, वर्दी और धुलाई भत्ते में वृद्धि तथा बाहर ड्यूटी के लिए दैनिक भत्ता कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में मदद कर सकते हैं।

29 मई को हुई बैठक में उठी मांगों के बाद सरकार की ओर से जारी इन निर्देशों से यह भी संकेत मिलता है कि ग्रामीण सफाई कर्मियों से संबंधित विभिन्न लंबित मांगों को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की कोशिश की जा रही है। विशेष रूप से उन कर्मियों के लिए राहत का प्रावधान किया गया है जिनका पुराना मानदेय लंबित है या जिन्हें अपने निर्धारित गांव से बाहर जाकर ड्यूटी करनी पड़ती है।

ड्यूटी के दौरान मृत्यु होने पर आश्रित परिवार को अनुकंपा नियुक्ति और ईपीएफ-ईएसआई दावों में सरकारी सहायता का फैसला कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा के लिहाज से सबसे महत्वपूर्ण प्रावधानों में शामिल है। इससे यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है कि सेवा के दौरान किसी अप्रिय घटना की स्थिति में कर्मचारी का परिवार पूरी तरह असहाय न रह जाए।

सरकार की ओर से निर्धारित समय पर मानदेय भुगतान की व्यवस्था भी कर्मचारियों के लिए अहम है। हर महीने की 7 तारीख तक भुगतान और देरी होने पर 500 रुपये के जुर्माने का प्रावधान भुगतान व्यवस्था में जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में उठाया गया कदम है।

कुल मिलाकर, हरियाणा सरकार के इन फैसलों से ग्रामीण सफाई कर्मियों को एक साथ कई स्तरों पर राहत मिलने की उम्मीद है। बढ़ा हुआ मानदेय, लंबित भुगतान, दैनिक भत्ता, वर्दी और धुलाई भत्ते में वृद्धि तथा परिवार के लिए अनुकंपा नियुक्ति जैसे प्रावधान ग्रामीण सफाई कर्मियों की आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। सरकार के निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन पर अब इन कर्मचारियों को मिलने वाली वास्तविक राहत निर्भर करेगी।