पंजाब में नशे के मुद्दे को लेकर सियासी टकराव एक बार फिर तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी की ओर से 18 से 30 सितंबर तक प्रस्तावित नशा विरोधी यात्राओं को लेकर आम आदमी पार्टी ने भाजपा पर निशाना साधा है। आप पंजाब के राज्य महासचिव (संगठन) और नशा मुक्ति मोर्चा के मुख्य प्रवक्ता बलतेज पन्नू ने कहा कि यदि भाजपा वास्तव में पंजाब को नशे से मुक्त कराने के लिए गंभीर है तो उसे अलग राजनीतिक अभियान चलाने के बजाय राज्य में पहले से जारी ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ मुहिम में शामिल होना चाहिए।
बलतेज पन्नू ने कहा कि पंजाब में नशे के खिलाफ लड़ाई किसी राजनीतिक दल के प्रचार का विषय नहीं बल्कि लोगों के भविष्य से जुड़ा गंभीर सवाल है। उन्होंने दावा किया कि पंजाब सरकार और आम आदमी पार्टी की ओर से मार्च 2025 से शुरू किए गए व्यापक अभियान के तहत अब तक 60,239 मामले दर्ज किए जा चुके हैं और 77,509 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। उनके मुताबिक यह आंकड़े बताते हैं कि राज्य में नशे के नेटवर्क के खिलाफ बड़े स्तर पर कार्रवाई की जा रही है।
उन्होंने कहा कि भाजपा को अलग से यात्राएं निकालने और इस मुद्दे को राजनीतिक रूप देने के बजाय सरकार और पंजाब के लोगों के साथ मिलकर नशे के खिलाफ चल रही मुहिम को मजबूत करना चाहिए। पन्नू ने आरोप लगाया कि भाजपा की अलग मुहिम शुरू करने की रणनीति का उद्देश्य नशे के खिलाफ चल रही सरकारी कार्रवाई की उपलब्धियों को कमजोर करना है।
पन्नू ने कहा कि पंजाब पिछले करीब डेढ़ साल से नशे के खिलाफ लगातार लड़ाई लड़ रहा है। उनके अनुसार, ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ अभियान को केवल सरकारी कार्रवाई तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि इसमें आम लोगों को भी जोड़ने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि इतने बड़े स्तर पर चलाया जा रहा अभियान इस बात का प्रमाण है कि पंजाब सरकार नशे के खिलाफ कार्रवाई को लेकर गंभीर है।
उन्होंने भाजपा से अपील करते हुए कहा कि पार्टी को नशे के मुद्दे पर अलग मंच तैयार करने के बजाय मौजूदा अभियान में सहयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई को राजनीतिक प्रतिस्पर्धा में बदलने से इसका उद्देश्य कमजोर होगा। पंजाब के युवाओं को नशे के जाल से बाहर निकालने के लिए सभी राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों को एकजुट होकर काम करने की जरूरत है।
पन्नू ने कहा, “भाजपा को ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ में शामिल होना चाहिए। हमने पिछले डेढ़ साल में इस दिशा में बड़े स्तर पर काम किया है। पंजाब के लोगों को साथ लेकर नशे के खिलाफ लड़ाई आगे बढ़ाई जा रही है। ऐसी व्यापक कोशिश शायद ही किसी दूसरे राज्य या देश में देखने को मिली हो।”
आप नेता ने भाजपा की प्रस्तावित यात्राओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि पार्टी की प्राथमिकता वास्तव में नशे के खिलाफ कार्रवाई है तो उसे सरकार के साथ खड़े होकर चल रहे अभियान को मजबूत करना चाहिए। उनके मुताबिक अलग अभियान चलाने से नशे के खिलाफ संदेश कमजोर हो सकता है और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप को बढ़ावा मिल सकता है।
उन्होंने सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 1 मार्च 2025 से 8 सितंबर 2026 तक पंजाब में नशे से जुड़े 60,239 मामले दर्ज हुए हैं, जबकि 77,509 लोगों को इन मामलों में नामजद किया गया है। उन्होंने कहा कि ये आंकड़े राज्य में नशे के नेटवर्क के खिलाफ की जा रही कार्रवाई के स्तर को सामने रखते हैं।
पन्नू के अनुसार इस अवधि के दौरान पुलिस और संबंधित एजेंसियों की कार्रवाई में बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थ भी बरामद किए गए हैं। उन्होंने बताया कि अभियान के तहत 3,821.105 किलोग्राम हेरोइन, 971.670 किलोग्राम अफीम, 45,209.509 किलोग्राम पोस्त/हरे पौधे, 1,329.192 किलोग्राम गांजा, 129.533 किलोग्राम चरस, 72.224 किलोग्राम बर्फ और 4.646 किलोग्राम कोकीन बरामद की गई है।
उन्होंने कहा कि कार्रवाई के दौरान 62,61,754 टैबलेट और कैप्सूल, 4,241 इंजेक्शन तथा 22.03 करोड़ रुपये की ड्रग मनी भी जब्त की गई। पन्नू ने इन आंकड़ों को सरकार की ओर से नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान की व्यापकता का प्रमाण बताया।
आप नेता ने भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा कि नशे के मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी करने से पहले भाजपा को पंजाब में अपने पुराने राजनीतिक रिकॉर्ड पर भी जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि भाजपा 2007 से 2017 तक राज्य में अकाली दल के नेतृत्व वाली सरकार की सहयोगी रही है। उनके अनुसार उस दौर में पंजाब में नशे की समस्या बेहद गंभीर रूप ले चुकी थी।
पन्नू ने आरोप लगाया कि अकाली-भाजपा सरकार के दस साल के कार्यकाल के दौरान पंजाब में ‘चिट्टा’ शब्द नशे के संकट के पर्याय के रूप में सामने आया। उन्होंने कहा कि उस समय राज्य के युवाओं के नशे की गिरफ्त में जाने को लेकर बड़े स्तर पर चिंता सामने आई थी।
उन्होंने कहा कि आज भाजपा नशे को लेकर यात्राएं निकाल रही है, लेकिन उसे पहले यह बताना चाहिए कि 2007 से 2017 के बीच उसकी सरकार की नीतियां इस संकट को रोकने में क्यों सफल नहीं हुईं। पन्नू ने आरोप लगाया कि उस समय पुलिस और राजनीतिक तंत्र के कुछ हिस्सों पर ड्रग तस्करों को संरक्षण देने और उनके साथ सांठगांठ के आरोप भी सामने आते रहे थे।
उन्होंने कहा कि नशे का मुद्दा पंजाब के लिए नया नहीं है और इसे केवल चुनाव के समय राजनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक पंजाब के लोगों ने नशे की समस्या के कारण एक पूरी पीढ़ी को प्रभावित होते देखा है। ऐसे में इस मुद्दे पर राजनीति करने के बजाय ठोस और सामूहिक कार्रवाई की जरूरत है।
पन्नू ने भाजपा से सवाल करते हुए कहा कि यदि पार्टी वास्तव में नशे के खिलाफ गंभीर है तो उसे मौजूदा सरकार के प्रयासों में सहयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ अभियान किसी एक पार्टी या सरकार की लड़ाई नहीं हो सकता। इसमें पुलिस, प्रशासन, सामाजिक संस्थाओं, युवाओं, अभिभावकों और राजनीतिक दलों की सामूहिक भूमिका जरूरी है।
उन्होंने कहा कि पंजाब में नशे के नेटवर्क को तोड़ने के साथ-साथ युवाओं को नशे से दूर रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इसके लिए कानून लागू करने के साथ जागरूकता, पुनर्वास और सामाजिक भागीदारी को भी मजबूत करना जरूरी है। पन्नू ने कहा कि सरकार की ओर से चलाए जा रहे अभियान का लक्ष्य केवल नशीले पदार्थों की बरामदगी या मामले दर्ज करना नहीं बल्कि पंजाब में नशे के खिलाफ एक व्यापक जनआंदोलन खड़ा करना है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की प्रस्तावित यात्राएं इसी समय शुरू करना राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है। पन्नू के मुताबिक जब राज्य में नशे के खिलाफ बड़े स्तर पर कार्रवाई चल रही है और उसके आंकड़े सामने आ रहे हैं, तब भाजपा का अलग अभियान शुरू करना इस बात का संकेत है कि पार्टी इस मुद्दे के जरिए राजनीतिक लाभ हासिल करना चाहती है।
पन्नू ने कहा कि पंजाब के लोगों को राजनीतिक बयानबाजी नहीं बल्कि नशे के खिलाफ परिणाम चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार की कार्रवाई का मूल्यांकन आंकड़ों और जमीन पर दिखाई देने वाले परिणामों के आधार पर होना चाहिए। उन्होंने भाजपा से आग्रह किया कि वह आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर इस लड़ाई में व्यावहारिक सहयोग दे।
उन्होंने कहा कि अगर भाजपा पंजाब के युवाओं को नशे से बचाने को लेकर वास्तव में प्रतिबद्ध है तो उसे ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ का हिस्सा बनना चाहिए। इससे न केवल राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर एक साझा संदेश जाएगा, बल्कि समाज में भी यह संदेश पहुंचेगा कि नशे के खिलाफ लड़ाई सभी की साझा जिम्मेदारी है।
बलतेज पन्नू ने अंत में कहा कि पंजाब को नशा मुक्त बनाने के अभियान को किसी राजनीतिक दल के प्रचार अभियान में बदलने के बजाय इसे जनआंदोलन का रूप दिया जाना चाहिए। उन्होंने भाजपा से अपील की कि वह अलग मुहिम चलाकर मौजूदा प्रयासों को कमजोर करने के बजाय सरकार और पंजाब के लोगों के साथ खड़ी हो तथा नशे के खिलाफ चल रही लड़ाई में अपना योगदान दे।




