मोहाली की मतदाता सूची से राज्यसभा सदस्य राघव चड्ढा का नाम हटने को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में बदल गया है। आम आदमी पार्टी पंजाब ने इस मामले को लेकर भाजपा और राघव चड्ढा पर पंजाब तथा मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार को राष्ट्रीय स्तर पर बदनाम करने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता और विधायक कुलदीप सिंह धालीवाल ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि पूरे मामले में सबसे पहले चुनाव आयोग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि राघव चड्ढा का दिल्ली के राजिंदर नगर में मतदाता पंजीकरण इतनी तेजी से किस प्रक्रिया के तहत हुआ।
धालीवाल ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने जब चुनाव आयोग से चड्ढा के मतदाता पंजीकरण को लेकर जानकारी मांगी, तब सामने आया कि उनका वोट दिल्ली के राजिंदर नगर में पंजीकृत हो चुका है। उन्होंने सवाल उठाया कि आम नागरिकों को मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने या स्थानांतरण कराने के लिए अक्सर लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, जबकि इस मामले में पंजीकरण इतनी जल्दी कैसे पूरा हो गया।
आप नेता ने कहा कि उनका सवाल किसी व्यक्ति के मतदान के अधिकार को लेकर नहीं है, बल्कि पूरी प्रक्रिया में अपनाए गए नियमों और सत्यापन व्यवस्था को लेकर है। उन्होंने चुनाव आयोग से सार्वजनिक तौर पर जानकारी देने की मांग की कि आवेदन मिलने के बाद उसका सत्यापन किस स्तर पर किया गया और किन अधिकारियों ने प्रक्रिया पूरी की।
धालीवाल ने कहा कि आम लोगों को वोटर रजिस्ट्रेशन या मतदाता सूची में बदलाव के लिए बीएलओ, एसडीएम कार्यालय और तहसील स्तर के अधिकारियों से संपर्क करना पड़ता है। कई मामलों में आवेदन के बाद उन्हें लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में यदि किसी व्यक्ति का पंजीकरण अपेक्षाकृत कम समय में पूरा हो जाता है तो चुनाव आयोग को यह बताना चाहिए कि इसके पीछे सामान्य प्रक्रिया क्या थी और आवेदन का सत्यापन कैसे हुआ।
उन्होंने मतदाता पंजीकरण में पते के सत्यापन को लेकर भी सवाल खड़े किए। धालीवाल के अनुसार, सामान्य तौर पर बीएलओ द्वारा आवेदक के दिए गए पते का सत्यापन स्थानीय स्तर पर किया जाता है। इसमें स्थानीय प्रतिनिधियों, पड़ोसियों अथवा क्षेत्र से संबंधित अन्य लोगों से जानकारी लेने जैसी प्रक्रिया शामिल हो सकती है।
इसी आधार पर उन्होंने सवाल किया कि दिल्ली के राजिंदर नगर में राघव चड्ढा द्वारा दिए गए पते का सत्यापन आखिर किस व्यक्ति या अधिकारी ने किया। उन्होंने दावा किया कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार दिल्ली में चड्ढा का निवास और मतदाता पंजीकरण के लिए इस्तेमाल किया गया पता अलग-अलग है। ऐसे में उन्होंने चुनाव आयोग से इस पूरे सत्यापन की जानकारी सामने रखने की मांग की।
धालीवाल ने यह भी दावा किया कि राजिंदर नगर स्थित जिस आवास का पता मतदाता पंजीकरण के लिए इस्तेमाल किया गया, वह कुछ समय से बंद है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में चुनाव आयोग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि बीएलओ या संबंधित अधिकारी ने वहां जाकर किस तरह सत्यापन किया और आवेदन को मंजूरी देने से पहले कौन-कौन से दस्तावेज तथा तथ्य जांचे गए।
आप के मुख्य प्रवक्ता ने कहा कि यह सवाल केवल राघव चड्ढा से संबंधित नहीं है। यदि चुनाव आयोग की प्रक्रिया में कोई ऐसा तरीका मौजूद है जिसके माध्यम से मतदाता पंजीकरण तेजी से पूरा किया जा सकता है, तो देश के प्रत्येक नागरिक को इसकी जानकारी मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आम लोगों को भी यह जानने का अधिकार है कि यदि उनके आवेदन में कई सप्ताह या महीने लगते हैं तो किसी अन्य मामले में प्रक्रिया इतनी जल्दी क्यों पूरी हुई।
धालीवाल ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने किसी का वोट काटने के लिए चुनाव आयोग पर दबाव नहीं डाला और न ही पार्टी की ओर से किसी अवैध तरीके से मतदान की मांग की गई है। उनके अनुसार, पार्टी केवल यह चाहती है कि मतदाता सूची से जुड़े पूरे मामले के तथ्य सार्वजनिक किए जाएं और किसी भी तरह का भ्रम लोगों के बीच न रहे।
उन्होंने कहा कि मतदाता सूची चुनावी लोकतंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसमें नाम जोड़ने, हटाने या स्थानांतरित करने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए। किसी भी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में शामिल करना हो या किसी दूसरे निर्वाचन क्षेत्र में स्थानांतरित करना हो, दोनों मामलों में निर्धारित नियमों का पालन होना जरूरी है।
धालीवाल ने आरोप लगाया कि भाजपा लगातार पंजाब सरकार के खिलाफ राजनीतिक मुद्दे तलाश रही है और इस मामले को भी उसी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बनाया गया। उन्होंने कहा कि पंजाब से जुड़े राजनीतिक, सामाजिक, कृषि और नशे जैसे विभिन्न मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर अलग-अलग तरीके से पेश कर राज्य सरकार को घेरने की कोशिश की जाती रही है।
उन्होंने कहा कि राघव चड्ढा लंबे समय तक आम आदमी पार्टी के प्रमुख नेताओं में शामिल रहे और पंजाब ने उन्हें राज्यसभा में भेजने का अवसर दिया। अब भाजपा में शामिल होने के बाद उनके द्वारा पंजाब सरकार के खिलाफ उठाए जा रहे सवालों को धालीवाल ने राजनीतिक रूप से दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
आप नेता ने कहा कि जिस राज्य ने उन्हें राज्यसभा में प्रतिनिधित्व करने का अवसर दिया, उसी पंजाब को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर नकारात्मक धारणा बनाने वाली राजनीति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब की छवि को खराब करने की कोशिशों का पार्टी राजनीतिक और तथ्यात्मक दोनों स्तरों पर जवाब देगी।
धालीवाल ने कहा कि पंजाब के लोगों को इस तरह के विवादों के माध्यम से गुमराह नहीं किया जा सकता। उनके मुताबिक, यदि मतदाता सूची से जुड़ा कोई वास्तविक प्रशासनिक सवाल है तो उसका जवाब संबंधित चुनावी संस्था को देना चाहिए। सरकार या राजनीतिक दल पर आरोप लगाने से पहले पूरे तथ्यों को सामने रखना जरूरी है।
उन्होंने चुनाव आयोग से अपील की कि राघव चड्ढा के दिल्ली में हुए मतदाता पंजीकरण से जुड़ी प्रक्रिया की जानकारी सार्वजनिक की जाए। उन्होंने विशेष रूप से यह जानने की मांग की कि आवेदन कब किया गया, उसका सत्यापन किस स्तर पर हुआ, संबंधित पते की जांच किसने की और पंजीकरण को मंजूरी देने में कितना समय लगा।
धालीवाल ने कहा कि यदि नियम सभी नागरिकों के लिए समान हैं तो उनकी प्रक्रिया भी समान होनी चाहिए। आम नागरिकों को अपने वोटर कार्ड और मतदाता सूची से जुड़े काम के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। ऐसे में किसी प्रभावशाली व्यक्ति के मामले में प्रक्रिया अलग दिखाई देती है तो सवाल उठना स्वाभाविक है।
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि मतदाता पंजीकरण के लिए दिए गए पते और वास्तविक निवास के बीच किसी प्रकार का अंतर होने की स्थिति में क्या प्रक्रिया अपनाई जाती है। यदि निर्धारित नियमों के तहत पंजीकरण हुआ है तो उसकी जानकारी सामने आने से पूरे विवाद पर स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।
आप नेता ने यह भी आरोप लगाया कि इस पूरे विवाद को जरूरत से ज्यादा राजनीतिक रंग दिया गया। उनके अनुसार, एक प्रशासनिक और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवाल को इस तरह पेश किया गया कि ऐसा लगे जैसे पंजाब सरकार ने व्यक्तिगत रूप से राघव चड्ढा का वोट हटवा दिया। धालीवाल ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि आम आदमी पार्टी ने किसी का मताधिकार प्रभावित करने के लिए कोई निर्देश नहीं दिया।
उन्होंने कहा कि यदि किसी मतदाता का नाम एक निर्वाचन क्षेत्र से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित होता है तो यह निर्धारित चुनावी प्रक्रिया के तहत होता है। इसलिए इस मामले में भी चुनाव आयोग को ही पूरी प्रक्रिया और रिकॉर्ड के आधार पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
धालीवाल ने भाजपा और राघव चड्ढा से पंजाब सरकार को बदनाम करने के लिए इस तरह के मुद्दों का इस्तेमाल बंद करने की अपील की। उन्होंने कहा कि पंजाब के लोग राजनीतिक आरोपों से अधिक वास्तविक तथ्यों में विश्वास करते हैं। अगर किसी मामले में कोई अनियमितता हुई है तो उसकी जांच होनी चाहिए, लेकिन बिना तथ्यों के राज्य सरकार पर आरोप लगाना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी पंजाब से जुड़े हर उस मामले में तथ्य जनता के सामने रखेगी, जिसे राजनीतिक रूप से तोड़-मरोड़कर पेश करने की कोशिश की जाएगी। पार्टी का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पंजाब से जुड़े मामलों की वास्तविक तस्वीर लोगों तक पहुंचे।
वोटर लिस्ट विवाद के बीच धालीवाल के बयान ने मामले को एक नया राजनीतिक मोड़ दे दिया है। एक ओर राघव चड्ढा और भाजपा की ओर से पंजाब में उनके नाम से जुड़ी मतदाता सूची की स्थिति को लेकर सवाल उठाए गए हैं, वहीं आम आदमी पार्टी ने अब दिल्ली में उनके नए मतदाता पंजीकरण की प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस तरह विवाद का केंद्र अब केवल मोहाली की मतदाता सूची तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दिल्ली के राजिंदर नगर में हुए कथित नए पंजीकरण की प्रक्रिया भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गई है। आप की ओर से चुनाव आयोग से विस्तृत स्पष्टीकरण की मांग के बाद अब इस मामले में चुनाव आयोग की ओर से सामने आने वाली जानकारी महत्वपूर्ण होगी।
कुलदीप सिंह धालीवाल ने अंत में दोहराया कि आम आदमी पार्टी न तो किसी वैध मतदाता का वोट काटने के पक्ष में है और न ही किसी गैर-कानूनी मतदान का समर्थन करती है। उनका कहना है कि पार्टी केवल मतदाता पंजीकरण की प्रक्रिया में पारदर्शिता और समान नियमों की मांग कर रही है। उन्होंने कहा कि यदि नियम सभी नागरिकों के लिए समान हैं तो हर आवेदन का सत्यापन भी उन्हीं नियमों के तहत होना चाहिए और जनता को इस प्रक्रिया की जानकारी मिलने में कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए।




