सेवा संकल्प अभियान में 79.52 लाख दीयों का वितरण; सरकार ने जिलों को स्थानीय कुम्हारों से खरीद के निर्देश दिए, हिसार को सबसे बड़ा लक्ष्य
हरियाणा में इस बार 17 सितंबर की शाम जलने वाले मिट्टी के दीये सिर्फ रोशनी का माध्यम नहीं होंगे, बल्कि प्रदेश के पारंपरिक कुम्हार समुदाय के लिए रोजगार और आय का जरिया भी बनेंगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर राज्य में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलने वाले ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत घर-घर मिट्टी के दीये पहुंचाने की तैयारी की गई है। अभियान में इन दीयों को ‘आशीर्वाद का दीया’ नाम दिया गया है।
इस पहल की खास बात यह है कि सरकार ने दीयों की खरीद किसी बड़े कारोबारी, बाहरी आपूर्तिकर्ता या केंद्रीकृत बाजार से कराने के बजाय संबंधित जिलों के स्थानीय कुम्हारों से करवाने का निर्णय लिया है। इसका उद्देश्य सरकारी कार्यक्रम के साथ-साथ स्थानीय कारीगरों और छोटे पारंपरिक कारोबार को आर्थिक सहारा देना है।
प्रदेश सरकार की ओर से खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के माध्यम से सभी जिलों को दीयों की खरीद और वितरण के लक्ष्य निर्धारित कर दिए गए हैं। संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि तय संख्या में दीयों की खरीद अभियान शुरू होने से पहले पूरी कर ली जाए, ताकि लाभार्थी परिवारों तक इनके वितरण में किसी तरह की देरी न हो।
मुख्यमंत्री की मंजूरी के बाद जिलों को निर्देश
हरियाणा के खाद्य एवं आपूर्ति राज्य मंत्री राजेश नागर की ओर से रखे गए प्रस्ताव को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की मंजूरी मिलने के बाद विभाग ने इस संबंध में सभी जिलों को दिशा-निर्देश जारी किए हैं। जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रकों को अपने-अपने क्षेत्रों में दीयों की खरीद और वितरण की व्यवस्था सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है।
सरकारी निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि दीयों की खरीद स्थानीय स्तर पर की जाए। इसके पीछे मकसद यह है कि सरकारी खरीद का लाभ अधिक से अधिक कुम्हार परिवारों तक पहुंच सके। विभाग ने अधिकारियों को केवल तय संख्या में दीये खरीदने तक सीमित नहीं रहने, बल्कि खरीद की पूरी प्रक्रिया को व्यवस्थित ढंग से पूरा करने और समय पर वितरण सुनिश्चित करने को कहा है।
अधिकारियों को यह भी देखना होगा कि खरीदे जा रहे दीये निर्धारित गुणवत्ता के हों। उनका आकार उचित हो और वे उपयोग के योग्य स्थिति में हों। यानी खरीद के दौरान केवल संख्या पूरी करने के बजाय सामग्री की गुणवत्ता पर भी ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकारी मांग से कुम्हारों के चाक को मिलेगा सहारा
हरियाणा में पारंपरिक कुम्हार लंबे समय से बदलते बाजार, मशीन से बने उत्पादों और बदलती उपभोक्ता आदतों की चुनौती का सामना कर रहे हैं। ऐसे में सरकारी स्तर पर बड़ी संख्या में मिट्टी के दीयों की खरीद उनके लिए अतिरिक्त बाजार तैयार कर सकती है।
इस पहल के तहत एक ही समय में बड़ी संख्या में दीयों की मांग पैदा होगी। यदि खरीद अलग-अलग जिलों में स्थानीय कुम्हारों से की जाती है तो इसका सीधा फायदा उन परिवारों को मिल सकता है, जो पीढ़ियों से मिट्टी के बर्तन और दीये बनाने का काम करते आ रहे हैं।
सरकार की योजना का महत्वपूर्ण पहलू यही है कि अभियान के नाम पर होने वाली खरीद का आर्थिक लाभ स्थानीय स्तर पर ही रहे। इससे एक ओर कुम्हारों को निश्चित मात्रा में काम मिलेगा, वहीं दूसरी ओर उनके पारंपरिक हुनर को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
39.76 लाख राशन कार्ड, 79.52 लाख दीये
17 सितंबर को प्रदेश के प्रत्येक अंत्योदय परिवार को दो-दो मिट्टी के दीये निशुल्क दिए जाएंगे। विभाग ने प्रत्येक दीये की दर एक रुपये निर्धारित की है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार हरियाणा में कुल 39 लाख 76 हजार 273 राशन कार्ड हैं।
इन्हीं कार्डों के आधार पर कुल 79 लाख 52 हजार 546 मिट्टी के दीयों का वितरण किया जाना है। प्रत्येक परिवार को दो दीये मिलेंगे और इनका वितरण लाभार्थियों को निशुल्क किया जाएगा।
इस हिसाब से सरकारी अभियान के तहत प्रदेशभर में करीब 80 लाख मिट्टी के दीयों की खरीद और वितरण होगा। इतनी बड़ी संख्या में दीयों की जरूरत पूरी करने के लिए स्थानीय स्तर पर कुम्हारों से खरीद करने का फैसला छोटे कारीगरों के लिए महत्वपूर्ण आर्थिक अवसर पैदा कर सकता है।
हिसार में सबसे बड़ा लक्ष्य
जिलावार वितरण व्यवस्था में हिसार को सबसे अधिक दीयों का लक्ष्य दिया गया है। यहां 5 लाख 76 हजार 608 दीयों का आवंटन किया गया है। यह प्रदेश के अन्य जिलों की तुलना में सबसे बड़ा लक्ष्य है।
जिला स्तर पर निर्धारित लक्ष्य के अनुसार संबंधित अधिकारियों को समय रहते खरीद पूरी करने और उसके बाद वितरण की प्रक्रिया को निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग की ओर से यह भी सुनिश्चित किया जाना है कि किसी पात्र परिवार को दीये उपलब्ध करवाने में अनावश्यक देरी न हो।
खरीद में पारदर्शिता और रिकॉर्ड पर जोर
सरकार ने दीयों की खरीद और वितरण की प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने पर भी विशेष जोर दिया है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप खरीद की जाए और पूरी प्रक्रिया का रिकॉर्ड व्यवस्थित तरीके से रखा जाए।
जिला स्तर पर अभियान से जुड़ी गतिविधियों की निगरानी की जाएगी। संबंधित अधिकारियों को प्रगति की जानकारी उच्च स्तर पर उपलब्ध करवाने के लिए भी कहा गया है। इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि किस जिले में कितनी खरीद हुई, कितना वितरण किया गया और अभियान के निर्धारित लक्ष्य को किस स्तर तक पूरा किया गया।
सरकार की कोशिश है कि अभियान के दौरान किसी तरह की प्रशासनिक देरी या वितरण संबंधी समस्या सामने न आए। इसलिए खरीद और वितरण दोनों चरणों पर निगरानी रखने की व्यवस्था की गई है।
गुणवत्ता के साथ स्थानीय खरीद पर जोर
निर्देशों में दीयों की गुणवत्ता को लेकर भी स्पष्ट व्यवस्था की गई है। अधिकारियों से कहा गया है कि ऐसे दीये खरीदे जाएं जो आकार और गुणवत्ता के लिहाज से उचित हों और जिन्हें परिवार आसानी से उपयोग कर सकें।
साथ ही स्थानीय खरीद को केवल औपचारिकता नहीं बनाने पर जोर है। जिलों को इस तरह खरीद करने के लिए कहा गया है कि अधिक से अधिक कुम्हार परिवारों को इसका लाभ मिले। इससे एक ही कारोबारी या सीमित संख्या में आपूर्तिकर्ताओं तक सरकारी खरीद का लाभ सीमित होने की संभावना कम होगी।
यह पहल स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की सरकार की सोच से भी जुड़ी हुई है। यदि सरकारी जरूरत की पूर्ति स्थानीय उत्पादकों से की जाती है तो उसका पैसा भी स्थानीय बाजार में घूमता है और छोटे कारोबारियों तक पहुंचता है।
‘आशीर्वाद का दीया’ बनेगा अभियान का प्रतीक
सेवा संकल्प अभियान के प्रचार में इन मिट्टी के दीयों को ‘आशीर्वाद का दीया’ कहा जा रहा है। 17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर इन दीयों को अंत्योदय परिवारों तक पहुंचाने की योजना है।
सरकार इस पहल को सेवा और सामाजिक भागीदारी से जोड़कर देख रही है। वहीं स्थानीय कुम्हारों से खरीद का निर्णय इसे आर्थिक रूप से भी महत्वपूर्ण बनाता है। एक तरफ गरीब परिवारों तक निशुल्क दीये पहुंचेंगे और दूसरी ओर इन दीयों को बनाने वाले कारीगरों को उनकी मेहनत का प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ मिलेगा।
इससे अभियान का स्वरूप केवल सरकारी कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें स्थानीय कारीगर, लाभार्थी परिवार और जिला प्रशासन तीनों की भागीदारी होगी।
रोशनी के साथ स्थानीय कारोबार को बढ़ावा
सरकारी स्तर पर करीब 79.52 लाख दीयों की खरीद का फैसला कुम्हार समुदाय के लिए एक बड़े बाजार के रूप में सामने आ रहा है। आम तौर पर मिट्टी के दीयों की मांग त्योहारों और धार्मिक अवसरों के आसपास बढ़ती है, लेकिन बड़े पैमाने पर सरकारी खरीद से कुम्हारों को पहले ही निश्चित मांग मिल सकती है।
इससे कुम्हार परिवारों को मिट्टी, ईंधन और श्रम पर किए गए खर्च की भरपाई के साथ अतिरिक्त आमदनी का अवसर भी मिल सकता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सरकारी अभियान के तहत स्थानीय स्तर पर खरीद होने से बिचौलियों की भूमिका कम करने और वास्तविक कारीगर तक लाभ पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
सरकार का यह कदम पारंपरिक शिल्प को प्रोत्साहन देने के नजरिए से भी अहम माना जा रहा है। आधुनिक बाजार में मशीन से तैयार उत्पादों की बढ़ती उपलब्धता के बीच मिट्टी के दीये बनाने का पारंपरिक काम कई परिवारों के लिए चुनौतीपूर्ण हो गया है। ऐसे में सरकारी खरीद उनके पारंपरिक व्यवसाय को कुछ हद तक सहारा दे सकती है।
17 सितंबर को जब प्रदेश के लाखों अंत्योदय परिवारों के घरों में दो-दो मिट्टी के दीये जलेंगे, तब इनकी रोशनी के साथ उन कुम्हार परिवारों की मेहनत भी सामने आएगी, जिनके हाथों से ये दीये तैयार होंगे। सरकार की योजना के मुताबिक इस अभियान में करीब 79.52 लाख दीयों का वितरण होना है। इसलिए इस बार का ‘आशीर्वाद का दीया’ केवल एक प्रतीक नहीं, बल्कि स्थानीय कारीगरों को सरकारी मांग से जोड़ने वाली पहल के रूप में भी देखा जा रहा है।




