दो दशक की सेवा के बाद पक्की नौकरी की उम्मीद, 12 हजार गेस्ट टीचरों के मामले में हरियाणा सरकार ने बढ़ाया कदम

दो दशक की सेवा के बाद पक्की नौकरी की उम्मीद, 12 हजार गेस्ट टीचरों के मामले में हरियाणा सरकार ने बढ़ाया कदम

हरियाणा के सरकारी स्कूलों में लंबे समय से अतिथि अध्यापक के तौर पर सेवाएं दे रहे करीब 12 हजार शिक्षकों के नियमितीकरण का मामला एक बार फिर सरकार के स्तर पर सक्रिय हो गया है। लगभग दो दशक से नियमित नियुक्ति की मांग कर रहे इन अध्यापकों को अब मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से मामले की औपचारिक जांच और रिपोर्ट तैयार कराने के निर्देश दिए जाने के बाद नई उम्मीद जगी है। हालांकि अभी नियमितीकरण पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है, लेकिन सरकार की ओर से फाइल को आगे बढ़ाए जाने से यह मुद्दा प्रशासनिक स्तर पर दोबारा गंभीरता से विचार के दायरे में आ गया है।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ 31 अगस्त को हुई बैठक के बाद इस मामले में आगे की प्रक्रिया शुरू हुई। मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव अरुण गुप्ता ने मुख्यमंत्री के उप प्रधान सचिव यशपाल यादव को गेस्ट टीचरों के नियमितीकरण से संबंधित मामला भेजते हुए आवश्यक रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इसमें पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के आदेशों, नियमितीकरण से जुड़ी नीतियों और मामले के कानूनी पहलुओं का अध्ययन करने के साथ पूरी स्थिति मुख्यमंत्री के समक्ष रखने को कहा गया है। संबंधित पत्र पर 15 सितंबर की तारीख अंकित है।

इस घटनाक्रम के बाद अब अधिकारियों के स्तर पर यह देखा जाएगा कि किन परिस्थितियों और कानूनी प्रावधानों के तहत लंबे समय से सेवाएं दे रहे अतिथि अध्यापकों के नियमितीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सकता है। हाई कोर्ट में भी ऐसे मामलों में नियमितीकरण नीतियों और पात्रता से जुड़े मुद्दों पर सुनवाई हुई है। अगस्त 2026 के एक मामले में अदालत के समक्ष 2014 की नियमितीकरण नीतियों के तहत पात्रता और नियमितीकरण की मांग रखी गई थी।

31 अगस्त की बैठक के बाद आगे बढ़ी फाइल

गेस्ट टीचरों के प्रतिनिधिमंडल की 31 अगस्त को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ बैठक हुई थी। विधानसभा सत्र की कार्यवाही समाप्त होने के बाद विधानसभा सचिवालय परिसर में हुई इस बैठक में शिक्षकों की ओर से लंबे समय से चली आ रही नियमितीकरण की मांग मुख्यमंत्री के सामने रखी गई।

बैठक में शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा भी मौजूद थे। उन्होंने गेस्ट टीचरों की मांग और नियमितीकरण से जुड़े न्यायिक पहलुओं को मुख्यमंत्री के सामने रखा। प्रतिनिधिमंडल की ओर से भी शिक्षकों की सेवा अवधि, उनकी नियुक्ति की परिस्थितियों और लंबे समय से लंबित मांग का मुद्दा उठाया गया।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री की ओर से अधिकारियों को मामले की समीक्षा कर ठोस समाधान की दिशा में आगे बढ़ने के निर्देश दिए गए थे। अब मुख्यमंत्री कार्यालय से फाइल अधिकारियों के पास भेजे जाने के बाद इस प्रक्रिया ने अगला प्रशासनिक चरण शुरू कर दिया है।

करीब 20 साल से सरकारी स्कूलों में पढ़ा रहे शिक्षक

अतिथि अध्यापकों का कहना है कि बड़ी संख्या में शिक्षक सरकारी स्कूलों में करीब 20 से 21 वर्षों से लगातार सेवाएं दे रहे हैं। अगस्त में प्रकाशित रिपोर्टों के मुताबिक, राज्य में करीब 12 हजार गेस्ट टीचर हैं, जिनमें बड़ी संख्या ऐसे शिक्षकों की है जिन्होंने लगभग दो दशक की सेवा पूरी कर ली है।

शिक्षकों का तर्क है कि इतने लंबे समय तक सरकारी स्कूलों में पढ़ाने के बावजूद उनकी सेवा स्थिति स्थायी नहीं हुई है। उनका कहना है कि वे वर्षों से विद्यार्थियों को पढ़ाने, परीक्षा व्यवस्था और स्कूलों की शैक्षणिक गतिविधियों में जिम्मेदारियां निभाते रहे हैं। ऐसे में अब वे नियमितीकरण को अपनी सेवा का स्वाभाविक परिणाम मानते हैं।

गेस्ट टीचर संगठनों की ओर से पहले भी यह मांग उठाई जाती रही है। अगस्त 2026 में भी शिक्षकों ने अलग-अलग जिलों में जनप्रतिनिधियों और मंत्रियों को ज्ञापन देकर सरकार से नियमितीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की मांग की थी।

हाई कोर्ट के आदेशों ने बढ़ाई उम्मीद

नियमितीकरण की मांग के बीच पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में भी गेस्ट और अनुबंधित शिक्षकों से जुड़े कई मामले पहुंचे हैं। हालिया मामलों में अदालत के सामने 16 जून 2014 और 18 जून 2014 की नियमितीकरण नीतियों का संदर्भ आया है।

31 अगस्त 2026 के एक मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि वे करीब दो दशक से स्वीकृत पदों के विरुद्ध सेवाएं दे रहे हैं और संबंधित नियमितीकरण नीतियों के तहत उनके मामलों पर विचार किया जाना चाहिए। याचिका में सुप्रीम कोर्ट के अप्रैल 2026 के फैसले और हाई कोर्ट के मई 2026 के फैसले का भी हवाला दिया गया।

इसी तरह अगस्त में हाई कोर्ट के समक्ष गेस्ट और अनुबंधित शिक्षकों की ओर से नियमितीकरण और सेवा सुरक्षा से संबंधित मांगें रखी गई थीं। इन न्यायिक घटनाक्रमों के कारण सरकार के सामने इस मुद्दे के कानूनी पहलू भी महत्वपूर्ण हो गए हैं।

सरकार के सामने अब कानूनी और प्रशासनिक दोनों पहलू

मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से अधिकारियों को रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए जाने के बाद अब नियमितीकरण के रास्ते में आने वाले कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं का परीक्षण किया जाएगा। इसमें यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित शिक्षक किन शर्तों को पूरा करते हैं, उनकी नियुक्ति किस प्रक्रिया के तहत हुई, वे किन पदों पर सेवाएं दे रहे हैं और संबंधित नीतियों के तहत उनकी पात्रता क्या बनती है।

इसके साथ ही अदालतों के विभिन्न आदेशों और सरकार की मौजूदा भर्ती एवं सेवा नीतियों को भी ध्यान में रखना होगा। इसलिए फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि सभी गेस्ट टीचरों का नियमितीकरण तय हो गया है। सरकार की ओर से अभी मामले की रिपोर्ट और परीक्षण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

हालिया रिपोर्टों के अनुसार शिक्षा विभाग के स्तर पर शिक्षकों की सेवा अवधि और पात्रता से संबंधित विवरणों की समीक्षा की दिशा में भी काम हुआ है। इसका उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि किन शिक्षकों के मामले नियमितीकरण की निर्धारित कानूनी कसौटियों के तहत आते हैं।

पहले भी सरकार के सामने उठाते रहे हैं मांग

गेस्ट टीचर संगठनों के प्रतिनिधि नियमितीकरण के मुद्दे को लेकर इससे पहले शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से भी मुलाकात कर चुके हैं। इसके अलावा विधानसभा सत्र से पहले उन्होंने सरकार के मंत्रियों और विधायकों को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांग रखी थी।

विपक्षी विधायकों की ओर से भी विधानसभा में अतिथि अध्यापकों की सेवा और नियमितीकरण का मुद्दा उठाया गया। इससे यह मामला केवल कर्मचारी संगठनों की मांग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विधानसभा और सरकार के प्रशासनिक स्तर तक भी पहुंचा।

शिक्षकों का कहना है कि वे लंबे समय से इस मुद्दे पर सरकार के फैसले की प्रतीक्षा कर रहे हैं। अब मुख्यमंत्री के साथ बैठक और उसके बाद मुख्यमंत्री कार्यालय से फाइल आगे बढ़ाए जाने को वे प्रक्रिया में महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देख रहे हैं।

नियमितीकरण के साथ सेवा लाभ भी बड़ा मुद्दा

गेस्ट टीचरों के लिए नियमितीकरण केवल पदनाम बदलने तक सीमित विषय नहीं है। इसके साथ वेतनमान, सेवा सुरक्षा, भविष्य की नौकरी की स्थिति और अन्य सेवा लाभ भी जुड़े हैं। लंबे समय से अस्थायी या अतिथि व्यवस्था में काम कर रहे शिक्षकों के लिए स्थायी सेवा दर्जा उनके पेशेवर और पारिवारिक भविष्य से जुड़ा विषय है।

हालिया रिपोर्टों में गेस्ट टीचर संगठनों ने यह भी कहा है कि वे नियमितीकरण की प्रक्रिया को जल्द पूरा करने के लिए कुछ पुराने सेवा लाभ और बकाया दावों को छोड़ने तक की पेशकश कर चुके हैं। हालांकि इन दावों और सरकार के स्तर पर संभावित व्यवस्था पर अंतिम निर्णय अभी होना बाकी है।

अब रिपोर्ट और अगली बैठक पर टिकी नजर

मुख्यमंत्री कार्यालय से मामला आगे भेजे जाने के बाद अब गेस्ट टीचरों की नजर अधिकारियों द्वारा तैयार की जाने वाली रिपोर्ट और मुख्यमंत्री स्तर पर होने वाली अगली बैठक पर है। रिपोर्ट में हाई कोर्ट के आदेशों, नियमितीकरण की नीतियों और संबंधित शिक्षकों की पात्रता का पूरा विवरण शामिल किए जाने की उम्मीद है।

इसके बाद सरकार यह तय करेगी कि नियमितीकरण की प्रक्रिया किस कानूनी और प्रशासनिक ढांचे के तहत आगे बढ़ाई जा सकती है। फिलहाल सरकार की ओर से ऐसा कोई अंतिम आदेश जारी नहीं हुआ है, जिससे सभी 12 हजार शिक्षकों के नियमित होने की पुष्टि हो।

फिर भी, वर्षों से लंबित मांग पर मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से फाइल को दोबारा सक्रिय किया जाना गेस्ट टीचरों के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। करीब दो दशक से सरकारी स्कूलों में सेवाएं दे रहे शिक्षक अब उम्मीद कर रहे हैं कि कानूनी परीक्षण और प्रशासनिक रिपोर्ट के बाद सरकार उनके मामले में कोई ठोस निर्णय लेगी।

इस पूरे मामले में अगला महत्वपूर्ण पड़ाव अधिकारियों की रिपोर्ट और उसके बाद मुख्यमंत्री स्तर पर होने वाली समीक्षा होगी। यदि कानूनी और प्रशासनिक रास्ता स्पष्ट होता है तो नियमितीकरण की मांग पर आगे की प्रक्रिया तय हो सकती है। फिलहाल गेस्ट टीचरों के लिए सबसे बड़ी राहत यही है कि उनका लंबित मामला अब मुख्यमंत्री कार्यालय के स्तर से औपचारिक परीक्षण की दिशा में आगे बढ़ चुका है।