चंडीगढ़: हरियाणा कांग्रेस में रतिया से विधायक जरनैल सिंह को लेकर चल रहा विवाद अब संगठनात्मक अनुशासन से आगे बढ़कर विधानसभा की सदस्यता से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों तक पहुंच गया है। कांग्रेस विधायक दल के मुख्य सचेतक और रोहतक से विधायक भारत भूषण बतरा ने जरनैल सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। यह नोटिस विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान पार्टी के तीन लाइन वाले व्हिप का कथित रूप से पालन नहीं करने और सदन के भीतर पोस्टर लेकर सत्ता पक्ष की ओर जाने के मामले में दिया गया है।
नोटिस में संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत अयोग्यता से संबंधित प्रावधानों का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि, अभी विधायक की सदस्यता को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है और उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया है। कांग्रेस विधायक दल ने जरनैल सिंह से 30 दिन के भीतर दस्तावेजी साक्ष्यों के साथ जवाब देने को कहा है।
मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि जरनैल सिंह पहले से कांग्रेस के निलंबित विधायकों में शामिल हैं। ऐसे में नए कारण बताओ नोटिस के बाद पार्टी और विधायक के बीच विवाद का एक और अनुशासनात्मक अध्याय शुरू हो गया है।
तीन लाइन के व्हिप का पालन नहीं करने का आरोप
कांग्रेस विधायक दल के मुख्य सचेतक भारत भूषण बतरा की ओर से जारी नोटिस के मुताबिक, 27 अगस्त को कांग्रेस विधायक दल ने विधानसभा में स्थगन प्रस्ताव यानी एडजर्नमेंट मोशन के समर्थन में तीन लाइन का व्हिप जारी किया था। पार्टी के सभी विधायकों को सदन में मौजूद रहकर इस प्रस्ताव का समर्थन करने का निर्देश दिया गया था।
नोटिस में आरोप लगाया गया है कि कांग्रेस के अन्य विधायकों ने पार्टी के निर्देश का पालन करते हुए प्रस्ताव के समर्थन में हिस्सा लिया, लेकिन जरनैल सिंह ने पार्टी लाइन के अनुरूप कार्रवाई नहीं की। इसी को लेकर मुख्य सचेतक ने उनसे विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा है।
जरनैल सिंह से यह भी पूछा गया है कि उन्हें पार्टी का व्हिप कब और किस माध्यम से मिला था। इसके अलावा नोटिस में यह जानने की कोशिश की गई है कि क्या उन्हें व्हिप की प्रति उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया था और क्या वह पार्टी के निर्देश से पूरी तरह अवगत थे।
मुख्य सचेतक ने विधायक से कुल 17 बिंदुओं पर जवाब मांगा है। इनमें व्हिप की जानकारी, उसके संचार और उसकी प्रति से जुड़े सवालों के अलावा यह भी पूछा गया है कि पार्टी के निर्देश की जानकारी होने के बावजूद उन्होंने उसके अनुरूप आचरण क्यों नहीं किया।
पोस्टर लेकर सत्ता पक्ष की ओर जाने का भी मुद्दा
नोटिस में विधानसभा के भीतर जरनैल सिंह की गतिविधियों को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। कांग्रेस विधायक दल का आरोप है कि वह पोस्टर या प्लेकार्ड लेकर सदन में सत्ता पक्ष की ओर गया था।
इस संबंध में नोटिस में फोटो और वीडियो सामग्री का हवाला दिया गया है। विधायक से पूछा गया है कि क्या वह पोस्टर लेकर ट्रेजरी बेंचों की ओर गए थे और क्या उन्होंने सत्ता पक्ष के सदस्यों के साथ कांग्रेस विधायक दल के खिलाफ नारेबाजी में हिस्सा लिया था।
मानसून सत्र के पहले दिन 1984 के दंगों से संबंधित पोस्टर दिखाए जाने की घटना भी इस विवाद से जुड़ी बताई गई है। कांग्रेस विधायक दल की ओर से इस पूरे घटनाक्रम को पार्टी अनुशासन के संदर्भ में देखा जा रहा है।
नोटिस में फोटो और वीडियो जैसे उपलब्ध साक्ष्यों को भी मामले का हिस्सा बनाया गया है। विधायक से इन घटनाओं को लेकर अपना पक्ष स्पष्ट करने और यदि उनके पास कोई संबंधित दस्तावेज या स्पष्टीकरण हो तो उसे जवाब के साथ प्रस्तुत करने को कहा गया है।
राज्यसभा चुनाव के बाद से निलंबित हैं जरनैल सिंह
जरनैल सिंह का कांग्रेस के साथ विवाद नया नहीं है। वह उन पांच कांग्रेस विधायकों में शामिल हैं जिन्हें राज्यसभा चुनाव के दौरान कथित क्रॉस-वोटिंग के बाद पार्टी ने मार्च में निलंबित कर दिया था।
हालांकि, जरनैल सिंह ने क्रॉस-वोटिंग के आरोप को स्वीकार नहीं किया था। उन्होंने अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि उन्होंने कांग्रेस के उम्मीदवार के पक्ष में ही मतदान किया। इसके बावजूद पार्टी की ओर से उन पर कार्रवाई की गई और वे वर्तमान में निलंबित विधायकों में शामिल हैं।
राज्यसभा चुनाव के बाद विधायक की राजनीतिक गतिविधियां भी चर्चा में रही हैं। विशेष रूप से सत्ता पक्ष के नेताओं के साथ उनकी मौजूदगी और सरकारी कार्यक्रमों में उनकी भागीदारी को लेकर कांग्रेस के भीतर सवाल उठते रहे हैं।
स्वतंत्रता दिवस समारोह का भी हुआ था जिक्र
अगस्त में हरियाणा सरकार की ओर से जरनैल सिंह को रतिया में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में ध्वजारोहण के लिए आमंत्रित किया गया था। इस घटनाक्रम को भी प्रदेश की राजनीति में अलग-अलग नजरियों से देखा गया था।
एक ओर वह कांग्रेस के निलंबित विधायकों में शामिल हैं, वहीं दूसरी ओर राज्य सरकार के कार्यक्रम में उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दिए जाने को लेकर राजनीतिक चर्चा हुई। अब विधानसभा में पार्टी व्हिप के कथित उल्लंघन और पोस्टर प्रदर्शन को लेकर जारी नया नोटिस इस राजनीतिक घटनाक्रम को और गंभीर बना रहा है।
दसवीं अनुसूची के उल्लेख से बढ़ी गंभीरता
कारण बताओ नोटिस का सबसे महत्वपूर्ण पहलू इसमें संविधान की दसवीं अनुसूची का उल्लेख है। दसवीं अनुसूची दल-बदल से जुड़े मामलों और कुछ परिस्थितियों में विधायकों की अयोग्यता से संबंधित संवैधानिक प्रावधानों से जुड़ी है।
नोटिस में इसका उल्लेख होने का अर्थ यह नहीं है कि जरनैल सिंह की विधानसभा सदस्यता तत्काल समाप्त हो गई है। फिलहाल उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है और उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया है। आगे की कार्रवाई उनके जवाब और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर तय हो सकती है।
यदि विधायक निर्धारित अवधि में जवाब दाखिल नहीं करते हैं या पार्टी विधायक दल उनके स्पष्टीकरण को संतोषजनक नहीं मानता, तो कांग्रेस उपलब्ध दस्तावेजों, फोटो-वीडियो सामग्री, व्हिप और अन्य रिकॉर्ड के आधार पर मामले को सक्षम प्राधिकारी के समक्ष ले जाने पर विचार कर सकती है।
इस प्रक्रिया में अंतिम निर्णय संबंधित संवैधानिक और विधिक प्रावधानों के तहत ही होगा। इसलिए फिलहाल जरनैल सिंह की विधानसभा सदस्यता पर किसी तरह का अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
30 दिन में देना होगा जवाब
नोटिस के अनुसार, जरनैल सिंह को 30 दिनों के भीतर अपना लिखित जवाब दाखिल करना होगा। उन्हें अपने पक्ष के समर्थन में दस्तावेजी साक्ष्य भी प्रस्तुत करने को कहा गया है। कांग्रेस विधायक दल की ओर से उठाए गए 17 सवालों का जवाब विधायक के अगले कदम को महत्वपूर्ण बनाएगा।
जरनैल सिंह के जवाब में यह स्पष्ट करना होगा कि उन्हें पार्टी का व्हिप किस समय और किस माध्यम से मिला, क्या वह उसके निर्देशों से अवगत थे और यदि अवगत थे तो उन्होंने सदन में उसके अनुरूप व्यवहार क्यों नहीं किया। साथ ही पोस्टर लेकर सत्ता पक्ष की ओर जाने और कथित नारेबाजी में भाग लेने के आरोपों पर भी उन्हें अपना पक्ष रखना होगा।
यदि विधायक इन आरोपों से असहमति जताते हैं तो उन्हें अपने पक्ष में उपलब्ध साक्ष्य पेश करने का अवसर दिया गया है।
कांग्रेस के लिए भी अहम है मामला
यह प्रकरण कांग्रेस विधायक दल के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि जरनैल सिंह पहले से पार्टी से निलंबित हैं। ऐसे में ताजा नोटिस पार्टी के अनुशासन और विधायक की विधानसभा में भूमिका से जुड़े विवाद को नए स्तर पर ले गया है।
पार्टी व्हिप की अवहेलना और सत्ता पक्ष के साथ कथित तौर पर खड़े होने के आरोप कांग्रेस के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि विधानसभा में विधायक दल की एकजुटता बनाए रखना पार्टी अनुशासन का अहम हिस्सा माना जाता है।
दूसरी तरफ, जरनैल सिंह के सामने अब अपने ऊपर लगाए गए आरोपों का विस्तृत जवाब देने का अवसर है। उनके जवाब और उसके बाद पार्टी विधायक दल की कार्रवाई से यह तय होगा कि मामला आगे किस दिशा में बढ़ता है।
फिलहाल मामला कारण बताओ नोटिस के स्तर पर है। विधायक की सदस्यता को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। हालांकि संविधान की दसवीं अनुसूची के प्रावधानों का उल्लेख होने के कारण यह विवाद अब सामान्य पार्टी अनुशासन के बजाय विधानसभा की सदस्यता और संवैधानिक प्रक्रिया से जुड़े संभावित सवालों तक पहुंच गया है।




