OPS पर फिर गरमाई पंजाब की सियासत, बाजवा ने सरकार से पूछा- पुरानी पेंशन लागू होगी या अंशदायी व्यवस्था?

OPS पर फिर गरमाई पंजाब की सियासत, बाजवा ने सरकार से पूछा- पुरानी पेंशन लागू होगी या अंशदायी व्यवस्था?

पंजाब में सरकारी कर्मचारियों की पुरानी पेंशन योजना (OPS) का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने आम आदमी पार्टी सरकार पर चुनाव के दौरान किए गए वादे से पीछे हटने का आरोप लगाते हुए पेंशन व्यवस्था को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। बाजवा ने कहा कि सरकार पुरानी पेंशन योजना को लागू करने के बजाय ऐसी व्यवस्था पर विचार कर रही है, जिसमें कर्मचारियों का अंशदान जारी रहेगा।

बाजवा के मुताबिक, अगर नई व्यवस्था में कर्मचारियों को अपने वेतन का हिस्सा पेंशन के लिए जमा करना होगा, तो इसे पुरानी पेंशन योजना के बराबर नहीं माना जा सकता। उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान और वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा से इस मुद्दे पर स्पष्ट जवाब देने को कहा है कि सरकार वास्तव में कर्मचारियों के लिए गैर-अंशदायी पुरानी पेंशन योजना लागू करेगी या अंशदायी पेंशन व्यवस्था को आगे बढ़ाएगी।

चुनावी वादे को लेकर सरकार पर सवाल

प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले सरकारी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना बहाल करने का स्पष्ट वादा किया था। उन्होंने कहा कि उस समय कर्मचारियों के बीच यह मुद्दा प्रमुख था और पार्टी ने सत्ता में आने पर पुरानी व्यवस्था बहाल करने की बात कही थी।

बाजवा ने अगस्त 2021 में तत्कालीन विपक्ष के नेता और वर्तमान वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा की ओर से दिए गए बयानों का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, चीमा ने सार्वजनिक रूप से पुरानी पेंशन योजना को पार्टी के चुनावी वादों का हिस्सा बताते हुए सत्ता में आने पर इसे लागू करने की बात कही थी।

विपक्ष के नेता ने कहा कि चुनाव के बाद सरकार ने पुरानी पेंशन योजना की बहाली को लेकर सैद्धांतिक निर्णय लिया और इस संबंध में अधिसूचना भी जारी की गई। हालांकि, उनके अनुसार, इसके बावजूद कर्मचारियों को अब तक पूरी तरह लागू व्यवस्था का इंतजार करना पड़ रहा है।

समिति का कार्यकाल बढ़ाए जाने पर आपत्ति

बाजवा ने पेंशन व्यवस्था की समीक्षा के लिए गठित समिति के कार्यकाल को चार महीने और बढ़ाए जाने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने पुरानी पेंशन योजना को लेकर सैद्धांतिक निर्णय ले लिया था और अधिसूचना भी जारी कर दी थी, तो फिर अंतिम व्यवस्था तय करने में इतना समय क्यों लग रहा है।

उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को लगातार समिति, समीक्षा और कार्यकाल विस्तार के जरिए इंतजार कराया जा रहा है। बाजवा ने सरकार की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए पूछा कि इस मामले को अंतिम रूप देने के लिए कितनी समितियों और कितने विस्तार की जरूरत पड़ेगी।

उनके मुताबिक, सरकारी कर्मचारियों के लिए पेंशन केवल सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाली आर्थिक सहायता का विषय नहीं है, बल्कि यह उनके भविष्य की वित्तीय सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है। इसलिए सरकार को इस मुद्दे पर स्पष्ट नीति के साथ आगे बढ़ना चाहिए।

‘गारंटीकृत पेंशन’ व्यवस्था पर भी सवाल

बाजवा ने दावा किया कि सरकार अब ‘गारंटीकृत पेंशन’ जैसी व्यवस्था पर विचार कर रही है। उनके अनुसार, प्रस्तावित व्यवस्था में कर्मचारियों का अंशदान जारी रहने की बात सामने आ रही है। उन्होंने कहा कि ऐसी व्यवस्था को पुरानी पेंशन योजना नहीं कहा जा सकता।

उन्होंने कहा कि पुरानी पेंशन योजना और अंशदायी पेंशन व्यवस्था के बीच मूल अंतर कर्मचारियों के योगदान और सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले लाभ की संरचना से जुड़ा है। यदि कर्मचारी को पेंशन के लिए नियमित रूप से अपने वेतन से अंशदान करना पड़े, तो यह पुरानी गैर-अंशदायी व्यवस्था से अलग होगी।

बाजवा ने सरकार से प्रस्तावित व्यवस्था का पूरा विवरण सार्वजनिक करने की मांग की, ताकि कर्मचारियों को यह पता चल सके कि उनके लिए किस तरह की पेंशन प्रणाली लागू की जा रही है और उसमें उनके अधिकार एवं वित्तीय दायित्व क्या होंगे।

10 प्रतिशत अंशदान को लेकर सरकार से जवाब मांगा

विपक्ष के नेता ने प्रस्तावित व्यवस्था में कर्मचारियों के 10 प्रतिशत अंशदान से जुड़े मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने सवाल किया कि अगर कर्मचारियों को अपने वेतन का 10 प्रतिशत पेंशन के लिए योगदान देना होगा, तो सरकार यह स्पष्ट करे कि ऐसी व्यवस्था पुरानी पेंशन योजना से किस तरह अलग है।

बाजवा ने कहा कि कर्मचारियों को केवल योजना का नाम बदलकर कोई नई व्यवस्था नहीं दी जानी चाहिए। उनके अनुसार, सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि प्रस्तावित मॉडल में कर्मचारी और सरकार दोनों का योगदान कितना होगा, सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन की गणना किस आधार पर होगी और कर्मचारियों को किस स्तर की वित्तीय सुरक्षा मिलेगी।

उन्होंने कहा कि जब तक इन सवालों के स्पष्ट जवाब नहीं दिए जाते, तब तक कर्मचारियों के बीच पेंशन व्यवस्था को लेकर असमंजस बना रहेगा।

‘करीब चार साल बाद भी इंतजार’

बाजवा ने कहा कि 2022 में आम आदमी पार्टी के सत्ता में आने के बाद सरकार ने पुरानी पेंशन की बहाली को लेकर सैद्धांतिक निर्णय लिया था। इसके बाद अधिसूचना जारी किए जाने की बात भी सामने आई, लेकिन कर्मचारियों को अभी तक ऐसी व्यवस्था का इंतजार है, जिसे वे वास्तविक रूप से पुरानी पेंशन योजना की बहाली मान सकें।

उन्होंने कहा कि सरकार के कार्यकाल का एक बड़ा हिस्सा बीत जाने के बाद भी यदि कर्मचारियों को अपनी पेंशन व्यवस्था को लेकर स्पष्टता नहीं है, तो सरकार को इसका जवाब देना चाहिए।

बाजवा ने आरोप लगाया कि सरकार इस मुद्दे को लगातार आगे बढ़ा रही है और अलग-अलग प्रक्रियाओं के जरिए अंतिम निर्णय में देरी हो रही है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के लिए यह केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि उनके भविष्य और सेवानिवृत्ति के बाद की आर्थिक सुरक्षा से जुड़ा मामला है।

2027 चुनाव से पहले मुद्दा गरमाने के संकेत

बाजवा ने आरोप लगाया कि 2027 के विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ सरकार इस मुद्दे को फिर से टालने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों ने सरकार से अपने चुनावी वादे को पूरा करने की उम्मीद की थी, लेकिन अब नई व्यवस्था पर चर्चा की जा रही है।

उन्होंने सरकार से कहा कि कर्मचारियों को नए नाम, समितियों और कार्यकाल विस्तार के बजाय स्पष्ट निर्णय चाहिए। उनके अनुसार, सरकार को यह बताना चाहिए कि पुरानी पेंशन योजना को किस रूप में लागू किया जाएगा और इसकी समयसीमा क्या होगी।

पेंशन योजना पंजाब के सरकारी कर्मचारियों के बीच लंबे समय से प्रमुख मुद्दा रही है। विभिन्न कर्मचारी संगठनों की ओर से भी समय-समय पर पुरानी पेंशन व्यवस्था को लागू करने की मांग उठती रही है। ऐसे में विपक्ष की ओर से इस मुद्दे को दोबारा उठाए जाने से आने वाले समय में राजनीतिक बहस और तेज हो सकती है।

मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री से मांगा सीधा जवाब

प्रताप सिंह बाजवा ने मुख्यमंत्री भगवंत मान और वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा से इस मामले में सीधा जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वह कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना लागू करने जा रही है या फिर अंशदायी पेंशन व्यवस्था को ही आगे बढ़ाएगी।

उन्होंने कहा कि दोनों व्यवस्थाओं के बीच अंतर को कर्मचारियों के सामने स्पष्ट किया जाना चाहिए। साथ ही प्रस्तावित योजना की वित्तीय संरचना, कर्मचारी अंशदान और सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले लाभ की जानकारी भी सार्वजनिक की जानी चाहिए।

बाजवा ने कहा कि सरकारी कर्मचारियों को अपनी पेंशन के भविष्य को लेकर लंबे समय तक अनिश्चितता में नहीं रखा जा सकता। उनके अनुसार, सरकार को अब प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के बजाय अंतिम फैसला लेना चाहिए और कर्मचारियों को उसकी स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए।

उन्होंने दोहराया कि कर्मचारियों के लिए पेंशन व्यवस्था को लेकर सरकार की नीति स्पष्ट होनी चाहिए। बाजवा के मुताबिक, कर्मचारियों को योजना का नाम या नई समिति नहीं, बल्कि ऐसा स्पष्ट निर्णय चाहिए जिससे उन्हें अपने भविष्य की वित्तीय सुरक्षा को लेकर स्थिति समझ में आ सके।