हरियाणा में किसानों को फिर मिला फसल पंजीकरण का मौका, 21 से 27 सितंबर तक खुलेगा मेरी फसल-मेरा ब्यौरा पोर्टल

हरियाणा में किसानों को फिर मिला फसल पंजीकरण का मौका, 21 से 27 सितंबर तक खुलेगा मेरी फसल-मेरा ब्यौरा पोर्टल

खरीफ फसल का विवरण दर्ज नहीं करा सके किसान अब कर सकेंगे पंजीकरण, सरकारी खरीद से लेकर मुआवजे और योजनाओं का लाभ लेने में होगी सुविधा

हरियाणा सरकार ने खरीफ फसलों की जानकारी दर्ज कराने से वंचित रह गए किसानों को एक और मौका देने का फैसला किया है। किसानों की मांग और उनकी सुविधा को देखते हुए ‘मेरी फसल-मेरा ब्यौरा’ पोर्टल को दोबारा खोला जा रहा है। जिन किसानों ने निर्धारित अवधि में अपनी फसल का पंजीकरण नहीं कराया था, वे अब 21 से 27 सितंबर तक पोर्टल पर अपनी खरीफ फसल का विवरण दर्ज कर सकेंगे।

सरकार के इस फैसले से उन किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो किसी कारण से समय पर पंजीकरण नहीं करा पाए थे। फसल का विवरण पोर्टल पर दर्ज होना किसानों के लिए कई सरकारी योजनाओं और सुविधाओं से जुड़ा हुआ है। ऐसे में दोबारा पंजीकरण का अवसर मिलने से किसानों को अपनी फसल संबंधी जानकारी सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज कराने का मौका मिलेगा।

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की ओर से किसानों से अपील की गई है कि वे तय समय सीमा का इंतजार किए बिना जल्द से जल्द अपना पंजीकरण पूरा कर लें। किसान स्वयं ऑनलाइन माध्यम से पोर्टल पर जानकारी दर्ज कर सकते हैं। इसके अलावा नजदीकी अटल सेवा केंद्र या सामान्य सेवा केंद्र के माध्यम से भी पंजीकरण कराया जा सकता है।

एक सप्ताह के लिए फिर खुलेगा पोर्टल

‘मेरी फसल-मेरा ब्यौरा’ पोर्टल 21 सितंबर से 27 सितंबर तक किसानों के लिए उपलब्ध रहेगा। इस अवधि में ऐसे किसान अपनी खरीफ फसल का विवरण दर्ज करा सकेंगे, जिनका पंजीकरण पहले नहीं हो पाया था।

पोर्टल पर किसान को अपनी जमीन और फसल से संबंधित आवश्यक जानकारी दर्ज करनी होगी। पंजीकरण पूरा होने के बाद फसल का विवरण सरकारी रिकॉर्ड में शामिल हो जाएगा। इससे संबंधित विभागों के पास किसान और उसकी फसल से जुड़ी जानकारी उपलब्ध रहेगी।

सरकार ने किसानों को सलाह दी है कि पंजीकरण करते समय फसल और भूमि से जुड़ी जानकारी सावधानीपूर्वक दर्ज करें। किसी तरह की त्रुटि होने पर आगे चलकर सरकारी खरीद या संबंधित योजना का लाभ लेने में परेशानी हो सकती है।

विभाग की ओर से यह भी कहा गया है कि किसान अंतिम दिन तक इंतजार न करें। पोर्टल खुलने के शुरुआती दिनों में ही अपना पंजीकरण पूरा करने से तकनीकी या अन्य किसी समस्या की स्थिति में उसे ठीक कराने का समय मिल सकता है।

सरकारी खरीद में पंजीकरण का महत्व

फसल का ब्योरा दर्ज कराने का सबसे बड़ा लाभ किसानों को सरकारी खरीद व्यवस्था में मिल सकता है। सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसलों की खरीद करती है और इसके लिए किसानों की फसल संबंधी जानकारी का रिकॉर्ड महत्वपूर्ण होता है।

‘मेरी फसल-मेरा ब्यौरा’ में पंजीकरण होने से किसान की फसल और भूमि का विवरण सरकारी व्यवस्था में दर्ज रहता है। इससे खरीद प्रक्रिया के दौरान पात्र किसानों की पहचान और उनकी फसल का रिकॉर्ड तैयार करने में सुविधा होती है।

किसानों के लिए यह भी महत्वपूर्ण है कि वे पोर्टल पर वही फसल दर्ज करें, जिसकी वास्तव में उनके खेत में बुवाई की गई है। गलत जानकारी दर्ज होने की स्थिति में आगे सरकारी खरीद या अन्य लाभ से संबंधित प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

भावांतर भरपाई और दूसरी योजनाओं में भी उपयोगी

फसल का ऑनलाइन पंजीकरण केवल सरकारी खरीद तक सीमित नहीं है। कृषि विभाग के अनुसार किसानों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ देने में भी फसल संबंधी डिजिटल रिकॉर्ड का उपयोग किया जाता है।

भावांतर भरपाई जैसी योजनाओं में फसल का विवरण महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसी तरह कृषि क्षेत्र से जुड़ी अन्य योजनाओं के तहत सहायता या लाभ देने के लिए भी किसान की फसल संबंधी जानकारी की आवश्यकता हो सकती है।

कृषि उपकरणों पर मिलने वाली सब्सिडी और अन्य कृषि योजनाओं के लिए भी किसानों का रिकॉर्ड सरकारी व्यवस्था में उपलब्ध होना उपयोगी रहता है। इसलिए विभाग किसानों को सलाह दे रहा है कि वे पोर्टल पर अपनी फसल का विवरण समय पर दर्ज कराएं।

फसल खराब होने पर मुआवजे में भी मदद

प्राकृतिक आपदा, अत्यधिक बारिश, सूखा, ओलावृष्टि या अन्य मौसम संबंधी परिस्थितियों के कारण फसल को नुकसान होने की स्थिति में भी फसल का सरकारी रिकॉर्ड महत्वपूर्ण होता है।

किसान की फसल का विवरण सरकारी पोर्टल पर दर्ज होने से नुकसान का आकलन और संबंधित प्रक्रिया में विभागीय स्तर पर सुविधा मिल सकती है। पात्रता के अनुसार मुआवजा या सहायता राशि सीधे किसान के बैंक खाते तक पहुंचाने की व्यवस्था में भी डिजिटल रिकॉर्ड मददगार होता है।

ऐसे में किसानों के लिए केवल सरकारी खरीद के उद्देश्य से ही नहीं, बल्कि संभावित फसल नुकसान और अन्य कृषि योजनाओं के लाभ के लिए भी पंजीकरण कराना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इन माध्यमों से करा सकेंगे पंजीकरण

सरकार ने किसानों को पंजीकरण के लिए कई विकल्प उपलब्ध कराए हैं। किसान स्वयं ऑनलाइन माध्यम से ‘मेरी फसल-मेरा ब्यौरा’ पोर्टल पर अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं। जिन किसानों को ऑनलाइन प्रक्रिया में परेशानी होती है, वे नजदीकी अटल सेवा केंद्र या सामान्य सेवा केंद्र पर जाकर भी पंजीकरण करा सकते हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में किसान ऑनलाइन सेवाओं के लिए इन केंद्रों का सहारा लेते हैं। ऐसे में सरकार की ओर से किसानों को सलाह दी गई है कि वे अपने आवश्यक दस्तावेज और संबंधित जानकारी के साथ समय रहते केंद्र पर पहुंचें।

पंजीकरण के दौरान जमीन और फसल से जुड़ी जानकारी सही होना जरूरी है। किसानों को अपनी फसल, क्षेत्रफल और अन्य आवश्यक विवरण की जांच करने के बाद ही अंतिम रूप से जानकारी दर्ज कराने की सलाह दी गई है।

अंतिम तारीख का इंतजार नहीं करने की अपील

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने किसानों से 27 सितंबर की अंतिम तारीख का इंतजार न करने की अपील की है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि पोर्टल सीमित अवधि के लिए दोबारा खोला जा रहा है। ऐसे में जिन किसानों का पंजीकरण अभी तक नहीं हुआ है, उन्हें 21 से 27 सितंबर के बीच यह प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

किसानों के बीच इस बात को लेकर भी जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है कि फसल का ब्यौरा दर्ज कराना केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं है। सरकारी खरीद, फसल से जुड़ी योजनाओं, सहायता और संभावित मुआवजे जैसी व्यवस्थाओं में यह जानकारी उपयोगी हो सकती है।

किसानों के रिकॉर्ड को डिजिटल बनाने की दिशा में कदम

‘मेरी फसल-मेरा ब्यौरा’ व्यवस्था का उद्देश्य किसानों और उनकी फसलों से संबंधित जानकारी को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराना है। इससे सरकार को फसलवार आंकड़े तैयार करने, खरीद व्यवस्था की योजना बनाने और विभिन्न कृषि योजनाओं के क्रियान्वयन में सुविधा मिलती है।

वहीं किसानों के लिए भी एक ही मंच के माध्यम से विभिन्न सरकारी सुविधाओं से जुड़ने का रास्ता आसान होता है। फसल का विवरण दर्ज होने से सरकारी एजेंसियों के पास किसान की फसल संबंधी जानकारी उपलब्ध रहती है, जिसका इस्तेमाल संबंधित योजनाओं और खरीद प्रक्रिया में किया जा सकता है।

हरियाणा सरकार की ओर से पोर्टल को दोबारा खोलने का फैसला ऐसे किसानों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जो पहले किसी कारण से पंजीकरण नहीं करा पाए थे। अब उनके पास अपनी खरीफ फसल का रिकॉर्ड दर्ज कराने का एक और अवसर है।

इसलिए विभाग ने पात्र किसानों से 21 से 27 सितंबर के बीच पंजीकरण पूरा करने की अपील की है। किसान स्वयं ऑनलाइन प्रक्रिया अपनाने के साथ-साथ अटल सेवा केंद्र और सामान्य सेवा केंद्र की मदद भी ले सकते हैं। समय पर पंजीकरण कराने से उन्हें सरकारी खरीद और कृषि क्षेत्र से जुड़ी विभिन्न योजनाओं का लाभ लेने की प्रक्रिया में सुविधा मिलने की उम्मीद है।