पंजाब में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई को लेकर आम आदमी पार्टी और केंद्र सरकार के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। पंजाब में कई स्थानों पर ईडी की तलाशी और सर्वे के बाद आम आदमी पार्टी के नेताओं ने केंद्र की भाजपा सरकार पर केंद्रीय जांच एजेंसियों के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाया है। पार्टी नेताओं ने कहा है कि जांच एजेंसियों की कार्रवाई से पंजाब सरकार या उसके नेताओं को दबाव में नहीं लाया जा सकता।
ईडी ने तिरुपति इंफ्राप्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड और उससे जुड़ी कंपनियों के खिलाफ मनी लांड्रिंग जांच के तहत दिल्ली, मोहाली, चंडीगढ़, पंचकूला और लुधियाना समेत 26 परिसरों में तलाशी और सर्वे की कार्रवाई की है। एजेंसी के मुताबिक जांच का संबंध कथित बैंक धोखाधड़ी और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन से है। इसी जांच के दौरान ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (गमाडा) और पंजाब के आवास एवं शहरी विकास विभाग से संबंधित रिकॉर्ड की भी जांच की गई।
कार्रवाई के बाद आम आदमी पार्टी ने इसे राजनीतिक दबाव से जोड़ते हुए केंद्र सरकार पर हमला बोला है। पार्टी नेताओं का कहना है कि पंजाब में सरकार के कामकाज और आगामी राजनीतिक माहौल को प्रभावित करने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। हालांकि ईडी की ओर से जांच को मनी लांड्रिंग और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा बताया गया है।
सिसोदिया बोले- पंजाब को डराया नहीं जा सकता
दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री और पंजाब में आम आदमी पार्टी के प्रभारी मनीष सिसोदिया ने ईडी की कार्रवाई को लेकर भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव नजदीक आने पर भाजपा की ओर से ईडी की कार्रवाई तेज कर दी जाती है।
सिसोदिया ने कहा कि पंजाब को दबाने की कोशिश सफल नहीं होगी। उनके मुताबिक पंजाबियों को केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्रवाई से डराया नहीं जा सकता। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा की नजर पंजाब की सत्ता पर है और इसी राजनीतिक उद्देश्य से ईडी की कार्रवाई कराई जा रही है।
उन्होंने दावा किया कि जांच एजेंसी की कार्रवाई से पंजाब में कोई बड़ा भ्रष्टाचार सामने नहीं आएगा। सिसोदिया ने पंजाब सरकार को ईमानदार सरकार बताते हुए कहा कि जांच एजेंसी को कार्रवाई में कुछ नहीं मिलेगा।
सिसोदिया ने ईडी की तलाशी प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए। उनका आरोप था कि अधिकारियों की ओर से लोगों के घरों के ताले तोड़कर प्रवेश किया गया। ये आरोप आम आदमी पार्टी की ओर से लगाए गए हैं, जबकि ईडी की कार्रवाई जांच प्रक्रिया और कानूनी प्रावधानों के तहत होने की बात एजेंसी की ओर से कही गई है।
मुंडियां के भतीजे के घर पर भी हुई तलाशी
ईडी की कार्रवाई के दायरे में पंजाब के कैबिनेट मंत्री हरदीप सिंह मुंडियां के भतीजे गुरप्रीत सिंह उर्फ प्रिंस का साहनेवाल स्थित आवास भी आया। इसके बाद मंत्री ने केंद्रीय एजेंसी की कार्रवाई पर कड़ी प्रतिक्रिया दी।
मुंडियां ने आरोप लगाया कि तलाशी के दौरान उनके परिवार को कई घंटे तक परेशान किया गया। उन्होंने कहा कि जब ईडी की टीम उनके भतीजे के घर पहुंची, उस समय परिवार के सदस्य घर में मौजूद थे।
मंत्री के मुताबिक परिवार में प्रिंस की मां, पत्नी, सालेहार और तीन साल की बच्ची भी मौजूद थी। उन्होंने दावा किया कि कार्रवाई देर रात तक चली और परिवार के सदस्यों से कई तरह के सवाल पूछे गए।
मुंडियां ने आरोप लगाया कि प्रिंस की पत्नी को कई घंटे तक खड़ा रखा गया। उन्होंने कहा कि अधिकारियों की ओर से उनसे मंत्री के साथ रिश्ते और वेतन से संबंधित सवाल किए गए।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि ईडी की कार्रवाई से वह राजनीतिक रूप से पीछे हटने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि केंद्रीय एजेंसी की कार्रवाई के बावजूद वह आम आदमी पार्टी के साथ खड़े रहेंगे।
बिट्टू के बयान पर मुंडियां का पलटवार
केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू की ओर से विदेश जाने को लेकर की गई टिप्पणी पर भी हरदीप सिंह मुंडियां ने जवाब दिया। मुंडियां ने कहा कि वह अमेरिका नहीं गए हैं।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि बिट्टू ने तो उनके और उनके भतीजे के अमेरिका जाने की टिकट तक बुक कर दी थी। मुंडियां ने इस बयान के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की कि ईडी की कार्रवाई के बाद भी वह पंजाब में ही हैं और राजनीतिक गतिविधियों से पीछे नहीं हटे हैं।
ईडी की कार्रवाई के बाद पंजाब की सियासत में व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज हो गया है। सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी के नेता इसे राजनीतिक दबाव बता रहे हैं, जबकि जांच एजेंसी की कार्रवाई एक वित्तीय जांच के तहत होने की बात सामने आई है।
हरजोत बैंस बोले- सरकार के काम रोकने की कोशिश
पंजाब के कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने भी ईडी की कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार के कामकाज में बाधा डालने का प्रयास किया जा रहा है।
बैंस ने कहा कि पंजाब के लोग दबाव की राजनीति स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई को राजनीतिक संदर्भ में रखते हुए कहा कि राज्य सरकार अपने काम जारी रखेगी।
आप के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष अमनशेर सिंह शैरी कलसी ने भी केंद्र पर निशाना साधा। उन्होंने भाजपा की नशा मुक्ति यात्रा और ईडी की कार्रवाई को एक साथ जोड़ते हुए आरोप लगाया कि पंजाब में आम आदमी पार्टी सरकार को दबाव में लाने की कोशिश की जा रही है।
कलसी ने दावा किया कि भाजपा की नशा मुक्ति रैली को पंजाब में अपेक्षित समर्थन नहीं मिल रहा और अब केंद्रीय एजेंसियों के माध्यम से राजनीतिक दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसी कोशिशों से पंजाब और पंजाबियों को पीछे नहीं हटाया जा सकता।
ईडी की जांच का केंद्र गमाडा और रियल एस्टेट कंपनियां
ईडी की मौजूदा कार्रवाई का मुख्य आधार तिरुपति इंफ्राप्रोजेक्ट्स और उससे जुड़ी कंपनियों के खिलाफ चल रही मनी लांड्रिंग जांच है। एजेंसी ने 26 परिसरों में तलाशी और सर्वे किया। इनमें तिरुपति इंफ्राप्रोजेक्ट्स के अलावा रेमिगेट बिल्डेस्टेट्स, एमबी इंफ्राबिल्ड, मेरा बाबा रियलिटी एसोसिएट्स और मेरा बाबा इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े परिसरों को भी शामिल किया गया।
ईडी की जांच में गमाडा से जुड़े भूमि अधिग्रहण, जमीन की नीलामी, निजी डेवलपर्स से संबंधित लेनदेन और कुछ वित्तीय रियायतों की भी पड़ताल की जा रही है। एजेंसी ने गमाडा और पंजाब के आवास एवं शहरी विकास विभाग में सर्वे की कार्रवाई भी की।
ईडी ने अपनी जांच में कथित तौर पर गमाडा की जमीनों की नीलामी और कुछ डेवलपर्स को दी गई रियायतों से जुड़े मामलों की जांच की बात कही है। एजेंसी की ओर से कुछ मामलों में बड़ी वित्तीय अनियमितताओं और संभावित सरकारी नुकसान के आरोप भी लगाए गए हैं। ये जांच एजेंसी के आरोप हैं और इनकी अंतिम पुष्टि जांच तथा कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।
सिसोदिया और सत्तेंद्र जैन को लेकर भी विवाद
ईडी ने अपनी जांच से संबंधित जानकारी में आम आदमी पार्टी के नेताओं मनीष सिसोदिया और सत्तेंद्र जैन के नाम भी लिए हैं। एजेंसी ने दावा किया है कि कुछ बैठकों और गमाडा से जुड़े मामलों में उनकी भूमिका की जांच की जा रही है।
हालांकि आम आदमी पार्टी ने इन आरोपों को खारिज किया है। पार्टी का कहना है कि सिसोदिया और जैन का गमाडा के कामकाज या परियोजनाओं से कोई संबंध नहीं था और उनके संबंध में किए जा रहे दावे राजनीतिक रूप से प्रेरित हैं।
इस तरह ईडी की जांच अब केवल निजी कंपनियों से जुड़े वित्तीय लेनदेन तक सीमित नहीं दिख रही, बल्कि गमाडा की भूमि और प्रशासनिक फैसलों से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा रही है।
पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट का रुख भी किया
ईडी की गमाडा में कार्रवाई के दौरान पंजाब सरकार की ओर से अधिकारियों को कथित रूप से रोके जाने को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का रुख किया गया था। अदालत ने मामले की स्थिति देखने के लिए वारंट अधिकारी नियुक्त किया। बाद में अधिकारियों से पूछताछ और दस्तावेजों की जांच के बाद राज्य सरकार ने अपनी याचिका वापस ले ली।
ईडी की ओर से कहा गया कि अधिकारियों की मौजूदगी इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और अन्य सामग्री की जांच के लिए जरूरी थी। वहीं राज्य सरकार ने कार्रवाई के तरीके को लेकर आपत्ति जताई थी। अदालत की प्रक्रिया के बाद यह मामला फिलहाल अलग कानूनी मंचों पर उठाए जाने की स्वतंत्रता के साथ वापस लिया गया।
राजनीतिक टकराव के बीच जांच जारी
ईडी की कार्रवाई के बाद पंजाब में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी इसे केंद्र और भाजपा की ओर से राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश बता रही है, जबकि ईडी की जांच का आधिकारिक आधार मनी लांड्रिंग और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा मामला है।
जांच एजेंसी ने तिरुपति इंफ्राप्रोजेक्ट्स और उससे जुड़ी कंपनियों के परिसरों के साथ-साथ गमाडा से संबंधित रिकॉर्ड की जांच की है। एजेंसी की ओर से जमीन अधिग्रहण, नीलामी, डेवलपर्स को दी गई रियायतों और कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।
वहीं आम आदमी पार्टी के नेता लगातार यह संदेश दे रहे हैं कि केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई से पंजाब सरकार की राजनीतिक दिशा नहीं बदलेगी। आने वाले दिनों में ईडी की जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और पंजाब सरकार तथा आम आदमी पार्टी की ओर से इस पर क्या कानूनी और राजनीतिक प्रतिक्रिया दी जाती है, इस पर सबकी नजर रहेगी।




