भारतीय जनता पार्टी ने हरियाणा के संगठनात्मक ढांचे में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री और राष्ट्रीय महामंत्री स्मृति ईरानी को राज्य का नया प्रभारी नियुक्त किया है। पार्टी ने 23 सितंबर 2026 को 28 राज्यों और आठ केंद्र शासित प्रदेशों के लिए प्रभारी और सह-प्रभारियों की नई सूची जारी की। इसी सूची में स्मृति ईरानी को हरियाणा के साथ छत्तीसगढ़ की जिम्मेदारी भी दी गई है। हरियाणा में उनके साथ भाजपा सांसद और राष्ट्रीय सचिव डॉ. भोला सिंह को सह-प्रभारी नियुक्त किया गया है।
यह बदलाव ऐसे समय हुआ है जब भाजपा अपने राज्यों में संगठनात्मक जिम्मेदारियों का पुनर्गठन कर रही है। हरियाणा में स्मृति ईरानी की नियुक्ति से प्रदेश संगठन और केंद्रीय नेतृत्व के बीच समन्वय की जिम्मेदारी अब नई टीम के पास होगी। पार्टी की ओर से जारी नियुक्तियों में अलग-अलग राज्यों के लिए वरिष्ठ नेताओं को संगठनात्मक दायित्व दिए गए हैं।
स्मृति ईरानी के पास केंद्र सरकार में मंत्री के रूप में काम करने का अनुभव रहा है और वर्तमान में वह भाजपा की राष्ट्रीय महामंत्री हैं। सितंबर में घोषित नई जिम्मेदारियों के तहत उन्हें दो राज्यों का संगठनात्मक प्रभार मिला है। हरियाणा के लिए डॉ. भोला सिंह को सह-प्रभारी बनाए जाने से प्रदेश भाजपा में केंद्रीय संगठन के साथ समन्वय के लिए दो सदस्यीय नेतृत्व व्यवस्था सामने आई है।
अनिल विज ने स्मृति ईरानी की नियुक्ति का किया स्वागत
हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने स्मृति ईरानी को प्रदेश भाजपा का प्रभारी बनाए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए उनकी नियुक्ति का स्वागत किया है। हरियाणा सरकार के जनसंपर्क विभाग की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, विज ने स्मृति ईरानी को अनुभवी रणनीतिकार बताया और कहा कि उनकी नियुक्ति से पार्टी संगठन तथा सरकार दोनों को लाभ मिल सकता है।
विज की प्रतिक्रिया मुख्य रूप से स्मृति ईरानी के संगठनात्मक और प्रशासनिक अनुभव पर केंद्रित रही। उन्होंने कहा कि उनके अनुभव से प्रदेश में संगठनात्मक काम को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है। उनके अनुसार, संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल से सरकारी कामकाज को आगे बढ़ाने में भी सहयोग मिल सकता है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब भाजपा ने प्रदेश संगठन के लिए नई जिम्मेदारियों की घोषणा की है। इसलिए स्मृति ईरानी की भूमिका को केवल एक औपचारिक नियुक्ति के तौर पर देखने के बजाय आने वाले समय में होने वाली संगठनात्मक बैठकों, प्रदेश पदाधिकारियों के साथ संवाद और कार्यकर्ताओं से संपर्क के माध्यम से समझा जाएगा।
हरियाणा में स्मृति ईरानी की भूमिका क्या होगी
भाजपा के संगठनात्मक ढांचे में प्रदेश प्रभारी की भूमिका राज्य इकाई और केंद्रीय संगठन के बीच समन्वय से जुड़ी होती है। प्रभारी आम तौर पर प्रदेश संगठन की गतिविधियों, पार्टी की बैठकों, संगठनात्मक समीक्षा और केंद्रीय नेतृत्व के साथ संवाद में भूमिका निभाते हैं।
हरियाणा में स्मृति ईरानी के सामने भी प्रदेश संगठन के साथ नियमित संवाद बनाए रखने, पार्टी की संगठनात्मक गतिविधियों की समीक्षा करने और केंद्रीय नेतृत्व के निर्देशों के साथ राज्य इकाई के कामकाज में तालमेल स्थापित करने जैसी जिम्मेदारियां रहेंगी।
हालांकि, उनकी नियुक्ति के बाद उनकी प्राथमिकताओं की पूरी तस्वीर अभी सामने नहीं आई है। किसी भी नए प्रभारी की वास्तविक कार्यशैली उसके बाद स्पष्ट होती है जब वह प्रदेश नेतृत्व, जिला इकाइयों, मोर्चों और अन्य संगठनात्मक पदाधिकारियों के साथ बैठकें शुरू करता है।
इसलिए फिलहाल उनकी भूमिका को लेकर संभावनाओं और अटकलों के बजाय नियुक्ति से जुड़े उपलब्ध आधिकारिक तथ्यों पर ध्यान देना अधिक उचित होगा।
डॉ. भोला सिंह को सह-प्रभारी की जिम्मेदारी
हरियाणा में स्मृति ईरानी के साथ सांसद एवं भाजपा राष्ट्रीय सचिव डॉ. भोला सिंह को सह-प्रभारी बनाया गया है। इससे प्रदेश संगठन के कामकाज में प्रभारी और सह-प्रभारी की संयुक्त व्यवस्था लागू होगी। भाजपा की 23 सितंबर की नियुक्ति सूची में हरियाणा के लिए स्मृति ईरानी को प्रभारी और भोला सिंह को सह-प्रभारी दर्ज किया गया है।
सह-प्रभारी की भूमिका प्रदेश प्रभारी के साथ संगठनात्मक गतिविधियों में सहयोग करने की होती है। इससे राज्य में पार्टी की अलग-अलग संगठनात्मक इकाइयों के साथ संवाद और कार्यक्रमों की निगरानी में जिम्मेदारियों का विभाजन किया जा सकता है।
डॉ. भोला सिंह के पास संसद और पार्टी संगठन दोनों का अनुभव है। हरियाणा के लिए उनकी नियुक्ति स्मृति ईरानी के साथ मिलकर प्रदेश संगठन के विभिन्न स्तरों पर संवाद स्थापित करने की व्यवस्था का हिस्सा है।
डॉ. अर्चना गुप्ता पहले से संभाल रही हैं प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी
स्मृति ईरानी की नियुक्ति के साथ हरियाणा भाजपा के संगठनात्मक ढांचे में महिला नेतृत्व की मौजूदगी भी चर्चा में है। डॉ. अर्चना गुप्ता मई 2026 में हरियाणा भाजपा की प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त की गई थीं और जून में उन्होंने औपचारिक रूप से पदभार संभाला था। उन्होंने मोहन लाल बड़ौली का स्थान लिया।
डॉ. अर्चना गुप्ता इससे पहले प्रदेश महामंत्री की जिम्मेदारी निभा चुकी थीं। उनके प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद हरियाणा भाजपा के संगठन में महिला नेतृत्व को लेकर चर्चा हुई थी। अब प्रदेश प्रभारी के पद पर स्मृति ईरानी की नियुक्ति के बाद संगठन के शीर्ष स्तर पर दो महत्वपूर्ण भूमिकाएं महिला नेताओं के पास हैं।
हालांकि, प्रदेश अध्यक्ष और प्रदेश प्रभारी की भूमिकाएं अलग-अलग होती हैं। प्रदेश अध्यक्ष राज्य इकाई के संगठनात्मक नेतृत्व की जिम्मेदारी संभालते हैं, जबकि प्रभारी केंद्रीय संगठन और प्रदेश इकाई के बीच समन्वय की महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं। इसलिए दोनों पदों को एक ही जिम्मेदारी के रूप में देखना उचित नहीं होगा।
आने वाले समय में दोनों नेताओं के बीच संगठनात्मक समन्वय किस तरह आगे बढ़ता है, यह प्रदेश भाजपा की बैठकों और गतिविधियों से स्पष्ट होगा।
भाजपा ने एक साथ कई राज्यों में बदली संगठनात्मक जिम्मेदारियां
स्मृति ईरानी की हरियाणा नियुक्ति भाजपा के व्यापक संगठनात्मक पुनर्गठन का हिस्सा है। 23 सितंबर को पार्टी ने 28 राज्यों और आठ केंद्र शासित प्रदेशों के लिए प्रभारी और सह-प्रभारियों की घोषणा की। कुल 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के संगठनात्मक ढांचे में नई जिम्मेदारियां तय की गईं।
नई सूची में कई वरिष्ठ नेताओं को अलग-अलग राज्यों की जिम्मेदारी दी गई। उदाहरण के लिए विनोद तावड़े को उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया गया, जबकि सतिश पूनिया को पंजाब की जिम्मेदारी दी गई। राम माधव को तमिलनाडु और उत्तराखंड से संबंधित संगठनात्मक जिम्मेदारियां दी गईं।
इस व्यापक फेरबदल के कारण हरियाणा में स्मृति ईरानी की नियुक्ति को भी भाजपा के राष्ट्रीय संगठनात्मक पुनर्गठन के संदर्भ में देखा जा रहा है। हालांकि, किसी विशेष नियुक्ति के पीछे नेतृत्व की आंतरिक रणनीति क्या है, इसकी पुष्टि तभी की जा सकती है जब पार्टी स्वयं उसका कारण सार्वजनिक रूप से बताए।
संगठन और सरकार के बीच समन्वय पर रहेगा ध्यान
अनिल विज ने स्मृति ईरानी की नियुक्ति के बाद विशेष रूप से संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल की बात कही है। हरियाणा में भाजपा की सरकार होने के कारण पार्टी संगठन और सरकार के बीच संवाद का महत्व स्वाभाविक रूप से बढ़ जाता है।
संगठन की भूमिका कार्यकर्ताओं, स्थानीय इकाइयों और विभिन्न स्तरों से मिलने वाले फीडबैक को प्रदेश नेतृत्व तक पहुंचाने में रहती है। दूसरी ओर सरकार प्रशासनिक और नीतिगत स्तर पर काम करती है। ऐसे में दोनों के बीच नियमित संवाद से पार्टी के संगठनात्मक फीडबैक और सरकार के कामकाज के बीच समन्वय स्थापित करने की व्यवस्था बनाई जा सकती है।
विज ने इसी संदर्भ में कहा कि स्मृति ईरानी के अनुभव का लाभ संगठन और सरकार दोनों को मिल सकता है। यह उनका राजनीतिक आकलन है; इसका वास्तविक प्रभाव आगे होने वाली संगठनात्मक गतिविधियों से ही देखा जा सकेगा।
बूथ स्तर तक संगठन की गतिविधियों की अहमियत
किसी भी राजनीतिक दल के लिए प्रदेश स्तर की नियुक्तियों का प्रभाव केवल राज्य मुख्यालय तक सीमित नहीं रहता। जिला, मंडल और बूथ स्तर की इकाइयां पार्टी के जमीनी संगठन का हिस्सा होती हैं। ऐसे में नए प्रभारी के सामने प्रदेश नेतृत्व से लेकर स्थानीय संगठन तक संवाद की व्यवस्था को समझना एक महत्वपूर्ण कार्य होगा।
हरियाणा में नई टीम के सामने संगठन की नियमित बैठकों, कार्यकर्ताओं के साथ संवाद, जिलों की गतिविधियों की समीक्षा और पार्टी कार्यक्रमों के संचालन जैसे विषय रहेंगे। इन गतिविधियों में प्रदेश अध्यक्ष, प्रभारी और सह-प्रभारी के बीच जिम्मेदारियों का समन्वय महत्वपूर्ण होगा।
भाजपा ने अगस्त 2026 में हरियाणा प्रदेश संगठन की नई टीम में भी कई पदाधिकारियों की नियुक्तियां की थीं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार प्रदेश कार्यकारिणी में उपाध्यक्ष, महामंत्री, मंत्री और विभिन्न मोर्चों के पदाधिकारियों की नई टीम बनाई गई थी। ऐसे में सितंबर की प्रभारी नियुक्ति प्रदेश संगठन में हालिया बदलावों की अगली कड़ी के रूप में सामने आई है।
स्मृति ईरानी का राजनीतिक और संगठनात्मक अनुभव
स्मृति ईरानी लंबे समय से भाजपा की राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय रही हैं। वह केंद्र सरकार में मंत्री रह चुकी हैं और पार्टी संगठन में भी राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारियां निभा चुकी हैं। सितंबर 2026 की नई नियुक्तियों से पहले उन्हें भाजपा की राष्ट्रीय टीम में राष्ट्रीय महामंत्री की जिम्मेदारी मिली थी।
अब हरियाणा और छत्तीसगढ़ जैसे दो राज्यों का संगठनात्मक प्रभार मिलने से उनकी भूमिका राष्ट्रीय स्तर से प्रदेश स्तर के संगठनात्मक कामकाज तक विस्तारित हुई है।
हरियाणा के संदर्भ में उनका काम प्रदेश संगठन की वर्तमान संरचना, स्थानीय राजनीतिक परिस्थितियों और पार्टी की संगठनात्मक प्राथमिकताओं के साथ तालमेल बनाने से जुड़ा होगा। हालांकि, उनकी आगामी बैठकों और कार्यक्रमों के बारे में आधिकारिक जानकारी आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि वह किन विषयों को प्राथमिकता देती हैं।
कांग्रेस को लेकर अनिल विज की टिप्पणी भी चर्चा में
स्मृति ईरानी की नियुक्ति पर प्रतिक्रिया देते समय अनिल विज ने कांग्रेस और उसके नेताओं को लेकर भी टिप्पणी की। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व पर विभिन्न मुद्दों को लेकर आरोप लगाए और पार्टी की राजनीतिक भूमिका पर सवाल उठाए।
इन टिप्पणियों को विज की राजनीतिक प्रतिक्रिया के रूप में देखा जाना चाहिए। इनके संबंध में कांग्रेस की ओर से अलग प्रतिक्रिया आने पर दोनों पक्षों के दावों को अलग-अलग संदर्भ में देखा जा सकता है।
स्मृति ईरानी की नियुक्ति से जुड़ी विज की मुख्य प्रतिक्रिया हालांकि भाजपा संगठन, सरकार और नई प्रभारी की भूमिका पर केंद्रित रही। उन्होंने स्मृति ईरानी के अनुभव को प्रदेश के लिए उपयोगी बताया है।
आगे की बैठकों से स्पष्ट होगी नई टीम की दिशा
स्मृति ईरानी को हरियाणा का प्रभारी और डॉ. भोला सिंह को सह-प्रभारी बनाए जाने के बाद अब प्रदेश भाजपा में नई संगठनात्मक टीम के साथ कामकाज शुरू होगा। प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अर्चना गुप्ता पहले से संगठन की जिम्मेदारी संभाल रही हैं, इसलिए प्रभारी और प्रदेश अध्यक्ष के बीच समन्वय आगामी गतिविधियों का महत्वपूर्ण हिस्सा रहेगा।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी नियुक्तियों और नेताओं की शुरुआती प्रतिक्रियाओं तक सीमित है। स्मृति ईरानी के हरियाणा में कार्यक्रम, प्रदेश पदाधिकारियों के साथ उनकी बैठकें, जिलों से संवाद और संगठनात्मक समीक्षा के बाद उनकी भूमिका की दिशा अधिक स्पष्ट होगी।
भाजपा की 23 सितंबर की व्यापक नियुक्तियों के बाद हरियाणा में संगठनात्मक स्तर पर एक नई व्यवस्था सामने आई है। स्मृति ईरानी, डॉ. भोला सिंह और डॉ. अर्चना गुप्ता की अलग-अलग जिम्मेदारियों के साथ प्रदेश संगठन अब नई टीम के साथ आगे बढ़ेगा। आने वाले महीनों में बैठकों और संगठनात्मक कार्यक्रमों के माध्यम से इस नई व्यवस्था के कामकाज की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।



