पायलट की गैरमौजूदगी में फिर दिखी पंजाब कांग्रेस की गुटबाजी, चन्नी-बाजवा प्रदर्शन से दूर

पायलट की गैरमौजूदगी में फिर दिखी पंजाब कांग्रेस की गुटबाजी, चन्नी-बाजवा प्रदर्शन से दूर

पंजाब कांग्रेस में अंदरूनी खींचतान पूरी तरह खत्म होती नजर नहीं आ रही है। पार्टी के नए प्रभारी सचिन पायलट की सक्रियता के बाद वरिष्ठ नेताओं के एक मंच पर आने से संगठन में एकजुटता का संदेश जरूर गया था, लेकिन पायलट की गैरमौजूदगी में हुए एक ताजा प्रदर्शन ने एक बार फिर पार्टी के भीतर चल रही गुटबाजी और आपसी मतभेदों की चर्चाओं को हवा दे दी है।

पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से अलग-अलग खेमों में दिखाई देने वाले वरिष्ठ नेताओं को पिछले दिनों सचिन पायलट के चंडीगढ़ दौरे के दौरान एक साथ देखा गया था। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा और अन्य वरिष्ठ नेता एक ही मंच पर नजर आए थे। उस समय पार्टी नेताओं की साथ मौजूदगी को संगठन में एकजुटता की दिशा में अहम संकेत माना गया था।

पायलट के सामने एक मंच पर आए थे वरिष्ठ नेता

सचिन पायलट के पंजाब कांग्रेस प्रभारी बनने के बाद पार्टी की गतिविधियों में उनकी भूमिका को लेकर लगातार चर्चा रही है। चंडीगढ़ दौरे के दौरान पायलट ने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें करने के साथ-साथ सरकार के खिलाफ आयोजित विरोध प्रदर्शन में भी हिस्सा लिया था।

15 सितंबर को चंडीगढ़ स्थित पंजाब कांग्रेस भवन से पंजाब सरकार के खिलाफ निकाले गए विरोध प्रदर्शन में पायलट के साथ पार्टी के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए थे। इस दौरान अलग-अलग गुटों से जुड़े माने जाने वाले नेताओं की एक साथ मौजूदगी ने पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच यह संदेश दिया कि लंबे समय से चले आ रहे मतभेदों को पीछे छोड़कर कांग्रेस अब सरकार के खिलाफ सामूहिक रूप से संघर्ष करने की तैयारी कर रही है।

प्रदर्शन में राजा वड़िंग के अलावा चन्नी, प्रताप सिंह बाजवा और अन्य प्रमुख नेता मौजूद थे। नेताओं की एकजुट तस्वीर को कांग्रेस संगठन के लिए सकारात्मक राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा गया था। पार्टी के भीतर भी यह उम्मीद जगी थी कि नए प्रभारी के नेतृत्व में वरिष्ठ नेताओं के बीच संवाद बढ़ेगा और गुटबाजी कम होगी।

पायलट के बिना प्रदर्शन में बदली तस्वीर

लेकिन शुक्रवार को चंडीगढ़ में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आयोजित कांग्रेस के प्रदर्शन में तस्वीर कुछ अलग नजर आई। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजा वड़िंग ने प्रदर्शन की अगुवाई की और पार्टी कार्यकर्ताओं को एकजुट करने की कोशिश की, लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा समेत कुछ प्रमुख नेता प्रदर्शन में दिखाई नहीं दिए।

वरिष्ठ नेताओं की गैरमौजूदगी के बाद कांग्रेस के भीतर एक बार फिर यह सवाल उठने लगा कि क्या पार्टी के अलग-अलग गुटों के बीच बनी एकजुटता स्थायी है या फिर यह मुख्य रूप से केंद्रीय नेतृत्व की मौजूदगी में ही दिखाई देती है।

पायलट के चंडीगढ़ दौरे के दौरान जिन नेताओं को एक साथ देखा गया था, उनके बाद के कार्यक्रम में अलग-अलग नजर आने से पार्टी के अंदरूनी समीकरणों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, कांग्रेस नेताओं की ओर से इसे सीधे तौर पर गुटबाजी से जोड़ने से परहेज किया जा रहा है।

गैरमौजूद नेताओं ने दिए अलग-अलग कारण

प्रदर्शन में शामिल नहीं होने वाले नेताओं की ओर से अपनी गैरमौजूदगी के लिए तबीयत खराब होने और पहले से तय कार्यक्रमों का हवाला दिया गया। ऐसे में उनकी अनुपस्थिति को लेकर पार्टी के भीतर चल रही चर्चाओं के बावजूद इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई कि यह किसी सामूहिक रणनीति के तहत प्रदर्शन से दूरी थी।

कुछ कांग्रेस नेता प्रदर्शन में पहुंचे भी, लेकिन कुछ समय बाद वहां से चले गए। इससे पार्टी कार्यकर्ताओं और राजनीतिक हलकों में इस बात को लेकर चर्चा हुई कि वरिष्ठ नेतृत्व को एक मंच पर बनाए रखने के लिए पंजाब कांग्रेस प्रभारी के स्तर पर लगातार हस्तक्षेप और समन्वय की जरूरत पड़ सकती है।

कांग्रेस के एक विधायक ने भी पार्टी के भीतर मतभेदों की चर्चा के बीच कहा कि नेताओं के बीच गिले-शिकवे हो सकते हैं, लेकिन इन्हें बातचीत के जरिए दूर किया जाएगा। उनका कहना था कि पार्टी का उद्देश्य व्यक्तिगत मतभेदों को आगे बढ़ाना नहीं, बल्कि पंजाब से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ संघर्ष को मजबूत करना है।

राजा वड़िंग के सामने संगठन को साथ रखने की चुनौती

पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष राजा वड़िंग लगातार पार्टी के कार्यक्रमों में अधिक से अधिक नेताओं और कार्यकर्ताओं को साथ लाने की कोशिश कर रहे हैं। शुक्रवार के प्रदर्शन में भी उन्होंने कार्यकर्ताओं और नेताओं की भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

हालांकि, कांग्रेस के लिए चुनौती केवल विरोध प्रदर्शन में भीड़ जुटाने की नहीं, बल्कि पार्टी के प्रमुख नेताओं को लगातार एक मंच पर बनाए रखने की है। पंजाब में अगले विधानसभा चुनाव को अभी समय है, लेकिन उससे पहले पार्टी संगठन को मजबूत करने और बूथ स्तर तक सक्रिय करने की कवायद शुरू हो चुकी है।

ऐसे में वरिष्ठ नेताओं के बीच आपसी समन्वय कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी में अलग-अलग नेताओं के अपने राजनीतिक आधार और समर्थक हैं। कई मौकों पर इन नेताओं के बीच मतभेद सार्वजनिक रूप से भी सामने आते रहे हैं। यही वजह है कि नए प्रभारी सचिन पायलट के सामने सबसे बड़ी संगठनात्मक चुनौतियों में से एक वरिष्ठ नेताओं के बीच समन्वय स्थापित करना भी है।

पायलट के नेतृत्व पर टिकी नजर

सचिन पायलट को पंजाब कांग्रेस का प्रभारी बनाए जाने के बाद पार्टी नेतृत्व की ओर से संगठन को सक्रिय करने और नेताओं के बीच बेहतर तालमेल बनाने पर जोर दिया जा रहा है। पायलट के पहले दौरे में जिस तरह पार्टी के अलग-अलग खेमों के नेता एक साथ दिखाई दिए, उससे कांग्रेस को एकजुटता का राजनीतिक संदेश देने में मदद मिली।

अब पायलट की गैरमौजूदगी में वरिष्ठ नेताओं की अलग-अलग मौजूदगी ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या वह एक ऐसी स्थायी व्यवस्था तैयार कर पाएंगे जिसमें पार्टी के नेता केवल केंद्रीय प्रभारी की मौजूदगी में ही नहीं, बल्कि नियमित संगठनात्मक कार्यक्रमों में भी एक साथ नजर आएं।

पार्टी के भीतर यह भी माना जा रहा है कि नेताओं के बीच व्यक्तिगत और राजनीतिक मतभेदों को पूरी तरह खत्म करना आसान नहीं होगा। लेकिन कांग्रेस नेतृत्व की कोशिश यह है कि इन मतभेदों का असर संगठन के सामूहिक कार्यक्रमों और सरकार के खिलाफ राजनीतिक अभियान पर न पड़े।

29 सितंबर की बैठक पर टिकी नजर

अब कांग्रेस के भीतर आगामी 29 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाली कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक को लेकर भी नजरें बनी हुई हैं। इस बैठक में पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

पार्टी के लिए यह देखना अहम होगा कि पंजाब के प्रमुख नेता इस बैठक में किस तरह एक साथ नजर आते हैं। यदि सभी प्रमुख नेता बैठक में शामिल होते हैं तो इसे संगठनात्मक स्तर पर संवाद और समन्वय की दिशा में एक और कदम माना जा सकता है। वहीं, किसी प्रमुख नेता की अनुपस्थिति फिर से पार्टी के भीतर चल रहे मतभेदों को लेकर चर्चा को जन्म दे सकती है।

फिलहाल पंजाब कांग्रेस में तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। पायलट के आने के बाद एक मंच पर नजर आए वरिष्ठ नेताओं ने एकजुटता का संदेश जरूर दिया, लेकिन इसके बाद हुए कार्यक्रम में कुछ प्रमुख चेहरों की अनुपस्थिति ने संकेत दिया है कि पार्टी के भीतर मतभेदों को स्थायी रूप से दूर करने की प्रक्रिया अभी जारी है।

आने वाले दिनों में सचिन पायलट की रणनीति, राजा वड़िंग की संगठनात्मक भूमिका और वरिष्ठ नेताओं के बीच तालमेल इस बात को तय करेगा कि कांग्रेस अपने अलग-अलग राजनीतिक खेमों को किस हद तक एक साझा मंच पर बनाए रख पाती है।