एसआईआर पर राहुल गांधी के सवालों को अनिल विज ने घेरा, बोले- मतदाता सूची पर भरोसा नहीं तो चुनाव जीतने का आधार क्या

एसआईआर पर राहुल गांधी के सवालों को अनिल विज ने घेरा, बोले- मतदाता सूची पर भरोसा नहीं तो चुनाव जीतने का आधार क्या

हरियाणा के कैबिनेट मंत्री अनिल विज ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ओर से चुनाव आयोग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर पलटवार किया है। विज ने कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और उसकी कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठाने के बजाय विपक्ष को यह बताना चाहिए कि जिन मतदाता सूचियों के आधार पर उसके उम्मीदवार चुनाव जीतते रहे हैं, उन पर अब अविश्वास क्यों जताया जा रहा है।

विज ने कहा कि मतदाता सूची को समय-समय पर अद्यतन करना चुनाव प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा है। उनके अनुसार, ऐसे लोगों के नामों की जांच जरूरी है जिनकी मृत्यु हो चुकी है या जो स्थायी रूप से अपना स्थान बदल चुके हैं। उन्होंने कहा कि यदि मतदाता सूची में किसी प्रकार की गड़बड़ी है तो उसे सामने लाने के लिए निर्धारित प्रक्रिया मौजूद है।

उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग पर आरोप लगाने से पहले यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि किस मतदाता का नाम गलत तरीके से जोड़ा गया है या किस पात्र मतदाता का नाम सूची से हटाया गया है। विज के मुताबिक, लोकतांत्रिक व्यवस्था में संस्थाओं पर सवाल उठाने के साथ-साथ ठोस तथ्य भी सामने रखने चाहिए।

चुनाव आयोग पर सवाल को लेकर कांग्रेस पर निशाना

अनिल विज ने राहुल गांधी की ओर से चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठाए जा रहे सवालों को लेकर कहा कि चुनाव आयोग स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर उठाई जा रही आपत्तियों पर भी कांग्रेस से तथ्य सामने रखने को कहा।

विज ने कहा कि यदि विपक्ष को चुनाव प्रक्रिया पर किसी तरह की आपत्ति है तो उसे कानूनी और संवैधानिक रास्ते से उठाया जा सकता है। केवल सार्वजनिक मंचों पर आरोप लगाने से चुनाव प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों का समाधान नहीं होगा।

उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में सुधार की प्रक्रिया का उद्देश्य चुनाव व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित बनाना है। मृत मतदाताओं या स्थायी रूप से दूसरी जगह जा चुके लोगों के नाम सूची में बने रहने से चुनावी प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो सकते हैं। इसलिए ऐसे नामों की जांच को प्रक्रिया का हिस्सा माना जाना चाहिए।

राहुल गांधी से विज का सवाल- जिन सूचियों से जीते, अब उन्हीं पर सवाल क्यों?

विज ने राहुल गांधी और कांग्रेस से यह भी सवाल किया कि यदि उन्हें मतदाता सूचियों पर भरोसा नहीं है तो उन्हीं सूचियों के आधार पर कांग्रेस उम्मीदवारों की जीत को किस आधार पर स्वीकार किया गया।

उन्होंने कहा कि चुनाव में हारने के बाद पूरी व्यवस्था पर सवाल उठाना अलग बात है, लेकिन लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए आरोपों के साथ प्रमाण भी प्रस्तुत किए जाने चाहिए।

विज के मुताबिक, किसी भी राजनीतिक दल को चुनाव आयोग के समक्ष शिकायत दर्ज कराने, दस्तावेज प्रस्तुत करने और कानूनी उपाय अपनाने का अधिकार है। ऐसे मामलों में राजनीतिक बयानबाजी के बजाय तथ्यात्मक तरीके से आपत्तियां दर्ज कराना अधिक महत्वपूर्ण है।

रॉबर्ट वाड्रा मामले में बोले- कानून के अनुसार होगी कार्रवाई

रॉबर्ट वाड्रा से जुड़े जमीन के मामले पर भी अनिल विज ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सरकार किसी व्यक्ति के खिलाफ व्यक्तिगत आधार पर कार्रवाई नहीं करती, बल्कि संबंधित मामले में कानून और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कदम उठाए जाते हैं।

उन्होंने कहा कि यदि किसी मामले में जांच चल रही है तो जांच एजेंसियां उपलब्ध तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर आगे बढ़ती हैं। किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी भी कानून में निर्धारित प्रक्रिया के तहत ही की जा सकती है।

विज ने कहा कि राजनीतिक आरोपों से अलग जांच और कानूनी प्रक्रिया को अपना काम करने दिया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी मामले में कार्रवाई के लिए कानून में निर्धारित प्रावधानों का पालन आवश्यक है।

‘कॉकरोच जनता पार्टी’ वाले बयान पर भी साधा निशाना

अनिल विज ने कांग्रेस की ओर से भाजपा को लेकर की जा रही राजनीतिक टिप्पणियों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि केवल बयानबाजी और राजनीतिक तमाशे से जनता के बीच विश्वसनीयता कायम नहीं की जा सकती।

उन्होंने कांग्रेस के नेताओं द्वारा सरकारी स्कूलों के निरीक्षण और व्यवस्थाओं को लेकर उठाए जा रहे मुद्दों पर भी टिप्पणी की। विज ने कहा कि यदि किसी सरकारी संस्थान में कमी दिखाई देती है तो उसे सामने लाने के साथ-साथ सुधार के लिए सकारात्मक सुझाव भी दिए जाने चाहिए।

उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को केवल कमियां गिनाने के बजाय यह भी बताना चाहिए कि वे समस्याओं का समाधान किस तरीके से करेंगे। उनके अनुसार, जनता के मुद्दों पर राजनीति करने के बजाय ठोस काम और समाधान की चर्चा होनी चाहिए।

पंजाब में भाजपा-अकाली गठबंधन पर बोले- फैसला हाईकमान करेगा

पंजाब में भाजपा और शिरोमणि अकाली दल के बीच संभावित गठबंधन को लेकर पूछे गए सवाल पर अनिल विज ने कहा कि इस संबंध में अंतिम फैसला पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व करेगा।

उन्होंने कहा कि राज्य स्तर पर किसी भी गठबंधन को लेकर अटकलों के आधार पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है। पार्टी नेतृत्व संबंधित राजनीतिक परिस्थितियों का आकलन करने के बाद निर्णय लेगा।

पंजाब की राजनीति में भाजपा और अकाली दल के संबंध लंबे समय तक गठबंधन के रूप में रहे हैं। ऐसे में दोनों दलों के बीच भविष्य में राजनीतिक तालमेल को लेकर चर्चा लगातार बनी हुई है। हालांकि, विज ने इस मुद्दे पर कोई अंतिम स्थिति बताने के बजाय फैसला पार्टी हाईकमान पर छोड़ दिया।

राहुल के प्रधानमंत्री बनने के सवाल पर विज का तंज

राहुल गांधी के प्रधानमंत्री बनने से जुड़े सवाल पर भी अनिल विज ने तंज कसा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री पद का फैसला चुनाव और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से होता है। किसी नेता की ओर से खुद को प्रधानमंत्री पद का दावेदार बताना अपने आप में पर्याप्त नहीं है।

विज ने कहा कि देश में प्रधानमंत्री का चयन संसदीय लोकतंत्र की प्रक्रिया के तहत होता है और जनता के जनादेश की इसमें केंद्रीय भूमिका होती है।

‘जेन-जी’ को लेकर राहुल गांधी के दावे पर भी प्रतिक्रिया

राहुल गांधी की ओर से युवाओं और जेन-जी को लेकर किए गए दावों पर भी विज ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव के परिणामों का उल्लेख करते हुए कहा कि छात्र राजनीति के परिणामों को भी युवाओं के राजनीतिक रुझान के संदर्भ में देखा जा सकता है।

हालिया छात्रसंघ चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने केंद्रीय पैनल के चार में से तीन पदों पर जीत दर्ज की, जबकि उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहा। अध्यक्ष पद पर यश डबास, सचिव पद पर रिया छाबड़ी और संयुक्त सचिव पद पर लक्ष्य राज सिंह ने जीत हासिल की।

विज ने इन परिणामों का हवाला देते हुए राहुल गांधी के जेन-जी से जुड़े दावों पर सवाल उठाया। हालांकि, किसी एक छात्रसंघ चुनाव के परिणामों को पूरे देश के युवाओं की राजनीतिक पसंद का प्रतिनिधि मानने के लिए व्यापक और अलग-अलग आबादी के आंकड़ों की जरूरत होगी।

संस्थाओं पर भरोसे और राजनीतिक बहस का मुद्दा

अनिल विज के बयान से एक बार फिर चुनाव आयोग, मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता को लेकर राजनीतिक बहस सामने आई है। विपक्ष की ओर से चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूचियों को लेकर सवाल उठाए जाते रहे हैं, जबकि सरकार और भाजपा इन आरोपों को खारिज करते हुए चुनाव आयोग की संवैधानिक भूमिका पर जोर देती रही हैं।

एसआईआर के तहत मतदाता सूची की जांच और अद्यतन करने की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद बने हुए हैं। ऐसे में आने वाले समय में मतदाता सूची में बदलाव, आपत्तियों के निपटारे और चुनाव आयोग की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक चर्चा और तेज होने की संभावना है।

अनिल विज ने अपने बयान में कांग्रेस और राहुल गांधी के आरोपों का जवाब देते हुए यह स्पष्ट करने की कोशिश की कि चुनाव प्रक्रिया से जुड़े किसी भी विवाद का समाधान संस्थागत और कानूनी प्रक्रिया के जरिए होना चाहिए। वहीं, विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों का केंद्र मतदाता सूची की पारदर्शिता और चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता है।