मजीठिया ने परिसर में बाहरी लोगों की मौजूदगी की जांच की मांग की, भाजपा नेताओं ने नशामुक्ति यात्रा से जोड़कर भी उठाए सवाल; पुलिस ने एसआईटी गठित कर शुरू की जांच
चंडीगढ़। फगवाड़ा स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) में रविवार को छात्रों के प्रदर्शन के हिंसक रूप लेने के बाद पंजाब की सियासत में भी मामला गरमा गया है। छात्र प्रदर्शन, पुलिस के साथ टकराव, पथराव, वाहनों में आगजनी और विश्वविद्यालय परिसर में हुई तोड़फोड़ को लेकर विपक्षी दलों ने सरकार और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने पूरे मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) से कराने की मांग की है, जबकि शिरोमणि अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल ने पुलिस कार्रवाई और विशेष रूप से छात्राओं के साथ कथित दुर्व्यवहार की जांच की मांग उठाई है।
वहीं अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने विश्वविद्यालय परिसर में बाहरी लोगों की कथित मौजूदगी और उनके पास वॉकी-टॉकी समेत अन्य सामान होने के दावों की जांच की मांग की है। भाजपा नेता रवनीत सिंह बिट्टू ने भी केंद्रीय एजेंसी से जांच कराने की मांग की है।
दूसरी ओर, पुलिस ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया है। पुलिस के मुताबिक प्रदर्शन के दौरान पथराव और पुलिस वाहनों को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं हुईं। विश्वविद्यालय ने भी नियमित कक्षाएं दस दिन के लिए स्थगित कर दी हैं और मध्यावधि परीक्षाएं अगले आदेश तक टाल दी हैं।
जाखड़ बोले- पूरे घटनाक्रम की हो केंद्रीय जांच
सुनील जाखड़ ने सोशल मीडिया के माध्यम से एलपीयू घटनाक्रम की विस्तृत जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के हितों और उनकी भावनाओं को ध्यान में रखते हुए यह पता लगाना जरूरी है कि प्रदर्शन किस तरह हिंसक हुआ और इसके पीछे किन परिस्थितियों ने भूमिका निभाई।
जाखड़ ने सवाल उठाया कि क्या विद्यार्थियों की भावनाओं का इस्तेमाल पंजाब का माहौल खराब करने के लिए किया गया। उन्होंने कथित तौर पर बाहरी हथियारबंद लोगों की मौजूदगी और घटनाक्रम के दौरान उनकी भूमिका की जांच की मांग की है।
उन्होंने यह भी कहा कि जांच में यह सामने आना चाहिए कि विवाद के पीछे कोई बाहरी या आंतरिक ताकत सक्रिय थी या नहीं। जाखड़ ने राजनीतिक रंजिश के चलते युवाओं की भावनाओं के इस्तेमाल की आशंका जताते हुए पड़ोसी देश और अमेरिका में बैठे अलगाववादी तत्वों से जुड़े होने के अपने आरोपों की भी जांच की मांग की।
इन आरोपों की फिलहाल स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस की ओर से उपलब्ध जानकारी के अनुसार वॉकी-टॉकी लेकर दिखाई दिए कुछ लोगों की पहचान भारतीय सेना के अधिकारियों के रूप में की गई है, जो अपने बच्चे को लेने विश्वविद्यालय पहुंचे थे। इसलिए इस पहलू को जांच के निष्कर्ष के आधार पर ही देखा जाना बाकी है।
अमित शाह के कार्यक्रम से जोड़कर भी उठाया सवाल
जाखड़ ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के 30 सितंबर को प्रस्तावित जालंधर कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए आशंका जताई कि उससे पहले पंजाब का माहौल खराब करने की कोशिश हो सकती है। हालांकि, एलपीयू में हुए घटनाक्रम और अमित शाह के प्रस्तावित कार्यक्रम के बीच किसी संबंध की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
उन्होंने कहा कि ऐसे संवेदनशील मामले में किसी भी संभावना को नजरअंदाज करने के बजाय जांच एजेंसियों को सभी पहलुओं की पड़ताल करनी चाहिए। उनका कहना है कि यदि कोई साजिश या सुनियोजित प्रयास हुआ है तो उसकी पहचान जांच के जरिए होनी चाहिए।
भाजपा ने नशामुक्ति यात्रा से भी जोड़ा मामला
भाजपा नेताओं ने एलपीयू विवाद को पार्टी की ओर से चल रही नशामुक्ति पंजाब यात्रा के संदर्भ में भी उठाया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि जब भाजपा की यात्रा प्रदेश में विभिन्न स्थानों से होकर गुजर रही है, उसी दौरान एलपीयू में बड़ा विवाद सामने आया।
भाजपा की ओर से यह आशंका जताई गई कि इस विवाद के कारण लोगों का ध्यान नशामुक्ति अभियान से हट सकता है और यात्रा प्रभावित हो सकती है। पूर्व केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने भी घटनाक्रम की केंद्रीय एजेंसी से जांच की मांग की।
हालांकि, एलपीयू में हुए हंगामे और भाजपा की नशामुक्ति यात्रा को डिरेल करने के कथित प्रयास के बीच कोई प्रत्यक्ष संबंध अभी जांच में सामने नहीं आया है। यह भाजपा नेताओं की ओर से उठाया गया राजनीतिक आरोप है।
हरसिमरत ने छात्राओं से व्यवहार पर उठाए सवाल
बठिंडा की सांसद हरसिमरत कौर बादल ने पुलिस की ओर से प्रदर्शनकारियों से निपटने के तरीके पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कथित लाठीचार्ज के वीडियो का हवाला देते हुए कहा कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
हरसिमरत का कहना है कि सामने आए कुछ वीडियो में पुलिसकर्मियों और प्रदर्शन कर रहे युवाओं के बीच धक्का-मुक्की दिखाई देती है। उन्होंने विशेष रूप से छात्राओं के साथ पुलिस के व्यवहार की जांच की मांग की।
उन्होंने कहा कि एलपीयू में देश के विभिन्न हिस्सों के अलावा कई देशों से विद्यार्थी पढ़ते हैं। ऐसे में विश्वविद्यालय परिसर में हुई हिंसा और उसके बाद पुलिस कार्रवाई का असर केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पंजाब की कानून-व्यवस्था और राज्य में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े होते हैं।
हालांकि पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच बल प्रयोग को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। पुलिस अधिकारियों की ओर से कहा गया है कि प्रदर्शनकारियों ने पथराव किया और स्थिति बिगड़ने के बाद कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई की गई। दूसरी ओर, प्रदर्शनकारी और कुछ राजनीतिक नेता पुलिस के बल प्रयोग पर सवाल उठा रहे हैं।
मजीठिया बोले- बाहरी लोगों की भूमिका साफ हो
शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने भी एलपीयू प्रकरण में कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को किसी राजनीतिक लड़ाई का हिस्सा नहीं बनाया जाना चाहिए।
मजीठिया ने विश्वविद्यालय परिसर में कथित तौर पर मौजूद बाहरी लोगों को लेकर जांच की मांग की। उन्होंने वॉकी-टॉकी, बैट और अन्य सामान लेकर कुछ लोगों के परिसर में होने के दावों का उल्लेख करते हुए पूछा कि ये लोग कौन थे और वहां किस उद्देश्य से मौजूद थे।
उन्होंने इस पूरे मामले की जांच एनआईए या केंद्रीय जांच ब्यूरो से कराने की मांग की है। हालांकि, वॉकी-टॉकी से जुड़े लोगों को लेकर पुलिस की जांच में अलग जानकारी सामने आई है। पुलिस के अनुसार ऐसे कुछ लोगों की पहचान सेना के अधिकारियों के रूप में हुई है, जो अपने बच्चों को लेने विश्वविद्यालय पहुंचे थे।
विवाद की शुरुआत कथित यौन उत्पीड़न की सूचना से
एलपीयू में तनाव की शुरुआत एक छात्रा से कथित यौन उत्पीड़न की खबर को लेकर छात्रों के बीच फैली सूचना के बाद हुई। पुलिस ने इस संबंध में अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज किया है और एसआईटी गठित की है। वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन ने परिसर में ऐसी घटना होने के दावे को अफवाह बताया है।
यही विरोधाभासी दावे पूरे घटनाक्रम की जांच को महत्वपूर्ण बनाते हैं। एक ओर छात्र घटना को लेकर जवाब और कार्रवाई की मांग करते हुए सड़कों पर उतरे, वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन ने आरोपों को खारिज किया। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इसलिए कथित घटना की वास्तविक स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
हाईवे जाम से बिगड़े हालात
रविवार को प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने जालंधर-फगवाड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग-44 को भी जाम कर दिया था। लंबे समय तक यातायात प्रभावित रहने के बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति बनी।
पुलिस के अनुसार प्रदर्शनकारियों को हाईवे खाली करने के लिए समझाने का प्रयास किया गया। स्थिति बिगड़ने पर पथराव की घटनाएं हुईं और पुलिस के वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया। इसके बाद पुलिस ने भीड़ को हटाने के लिए कार्रवाई की। देर रात बड़ी संख्या में पुलिस बल विश्वविद्यालय परिसर में पहुंचा और अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था संभाली। बाद में हाईवे पर यातायात बहाल कर दिया गया।
हिंसा के दौरान कई पुलिस वाहन क्षतिग्रस्त हुए और कुछ वाहनों में आग लगाए जाने की घटनाएं सामने आईं। पुलिसकर्मियों के घायल होने की भी सूचना है। इन घटनाओं की जांच अब पुलिस द्वारा दर्ज मामलों और उपलब्ध वीडियो तथा अन्य साक्ष्यों के आधार पर की जा रही है।
विश्वविद्यालय ने दस दिन के लिए कक्षाएं कीं स्थगित
हंगामे के बाद एलपीयू प्रशासन ने नियमित कक्षाएं दस दिन के लिए स्थगित कर दी हैं। मध्यावधि परीक्षाएं भी अगले आदेश तक टाल दी गई हैं। विद्यार्थियों को अभिभावकों से सलाह के बाद घर जाने की अनुमति दी गई है, जबकि परिसर में रहने वाले विद्यार्थियों को अनावश्यक रूप से बाहर न निकलने की सलाह दी गई है।
इस फैसले के बाद विश्वविद्यालय परिसर में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। प्रशासन का प्रयास है कि विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ स्थिति को सामान्य किया जा सके।
अब जांच से सामने आएगी वास्तविक स्थिति
एलपीयू प्रकरण में इस समय कई दावे और आरोप एक साथ सामने आ रहे हैं। कथित यौन उत्पीड़न की घटना, प्रदर्शन के हिंसक होने की परिस्थितियां, बाहरी लोगों की मौजूदगी, पुलिस की कार्रवाई और आगजनी जैसे सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।
पुलिस की ओर से एसआईटी गठित होने के बाद अब जांच में वीडियो फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों को शामिल किए जाने की उम्मीद है। इसके अलावा प्रदर्शन के दौरान क्षतिग्रस्त संपत्ति और पुलिस वाहनों से जुड़े मामलों की भी जांच होगी।
राजनीतिक दल इस घटनाक्रम को लेकर सरकार पर सवाल उठा रहे हैं और अलग-अलग स्तर पर जांच की मांग कर रहे हैं। भाजपा ने जहां केंद्रीय एजेंसी से जांच की मांग की है, वहीं अकाली दल ने भी पुलिस कार्रवाई और परिसर में बाहरी लोगों की कथित मौजूदगी को जांच के दायरे में लाने की बात कही है।
फिलहाल मामले में सबसे अहम यह है कि जांच के जरिए यह स्पष्ट किया जाए कि प्रदर्शन की वास्तविक शुरुआत किन परिस्थितियों में हुई, कथित घटना की सच्चाई क्या है, हिंसा किस वजह से बढ़ी, किन लोगों ने आगजनी और तोड़फोड़ की और पुलिस ने किस परिस्थिति में बल प्रयोग किया। इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।




