कटारिया ने दिल्ली में राष्ट्रपति समेत केंद्रीय मंत्रियों से की मुलाकात, पंजाब-चंडीगढ़ के कई मुद्दे उठाए

कटारिया ने दिल्ली में राष्ट्रपति समेत केंद्रीय मंत्रियों से की मुलाकात, पंजाब-चंडीगढ़ के कई मुद्दे उठाए

नई दिल्ली। पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने बुधवार को नई दिल्ली में राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और केंद्र सरकार के कई वरिष्ठ मंत्रियों से मुलाकात कर पंजाब और चंडीगढ़ से जुड़े विकास एवं जनहित के मुद्दों पर चर्चा की। अलग-अलग बैठकों में नशामुक्ति, स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार, शिक्षा संस्थानों को मजबूती देने, बाढ़ से स्थायी बचाव, चिकित्सा शिक्षा और सांस्कृतिक परियोजनाओं जैसे विषय प्रमुखता से उठाए गए।

राज्यपाल ने केंद्र सरकार के साथ समन्वय बढ़ाने और पंजाब तथा चंडीगढ़ से संबंधित लंबित परियोजनाओं को गति देने की दिशा में विभिन्न प्रस्तावों पर चर्चा की। बैठकों में राज्य की जरूरतों के अनुसार केंद्र से सहयोग और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के मुद्दे भी रखे गए।

राष्ट्रपति मुर्मु को विजय दिवस समारोह का निमंत्रण

राज्यपाल कटारिया ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रपति को पंजाब के फाजिल्का जिले में दिसंबर में प्रस्तावित विजय दिवस समारोह में शामिल होने का निमंत्रण दिया। यह कार्यक्रम असाफवाला युद्ध स्मारक में आयोजित किया जाना है।

असाफवाला युद्ध स्मारक देश के सैन्य इतिहास से जुड़े महत्वपूर्ण स्थलों में शामिल है। राज्यपाल की राष्ट्रपति से मुलाकात के दौरान इस आयोजन से जुड़े विषयों पर भी चर्चा हुई। कटारिया ने पंजाब में आयोजित होने वाले इस समारोह में राष्ट्रपति की भागीदारी का आग्रह किया।

उपराष्ट्रपति से पंजाब यूनिवर्सिटी को लेकर चर्चा

राष्ट्रपति से मुलाकात से पहले राज्यपाल ने उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन से मुलाकात की। बैठक में पंजाब यूनिवर्सिटी से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई। राज्यपाल ने विश्वविद्यालय को देश के अग्रणी उच्च शिक्षण संस्थानों में शामिल करने और उसे राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत बनाने से जुड़े प्रयासों पर बातचीत की।

बैठक में पंजाब यूनिवर्सिटी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई सेंटर स्थापित करने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। राज्यपाल ने इस दिशा में विश्वविद्यालय को आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर जोर दिया।

उल्लेखनीय है कि उपराष्ट्रपति की हालिया चंडीगढ़ यात्रा के दौरान भी पंजाब यूनिवर्सिटी के विकास और उसे देश की अग्रणी यूनिवर्सिटी बनाने से संबंधित विषय सामने आए थे। दिल्ली में हुई बैठक में इस लक्ष्य को आगे बढ़ाने को लेकर चर्चा की गई।

अमित शाह से नशामुक्ति और पुनर्वास पर बातचीत

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के साथ बैठक में राज्यपाल ने चंडीगढ़ को नशामुक्त बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों का मुद्दा उठाया। उन्होंने नशे की समस्या से प्रभावित लोगों के उपचार और पुनर्वास के साथ-साथ उनके पुनर्वास के बाद के जीवन को व्यवस्थित करने की जरूरत पर जोर दिया।

कटारिया ने कहा कि केवल नशे की लत से बाहर निकालना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि पुनर्वास के बाद संबंधित लोगों को कौशल प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना भी जरूरी है। इससे वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होकर सामान्य जीवन की ओर लौट सकेंगे।

बैठक में नशे की समस्या से निपटने के लिए केंद्र और स्थानीय स्तर पर चल रहे प्रयासों में बेहतर तालमेल की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई। राज्यपाल ने इस दिशा में केंद्र से आवश्यक सहयोग की मांग रखी, ताकि उपचार, पुनर्वास, कौशल विकास और रोजगार को एक साथ जोड़कर प्रभावी व्यवस्था तैयार की जा सके।

मेडिकल कॉलेज में पीजी सीटें बढ़ाने की मांग

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा के साथ मुलाकात के दौरान राज्यपाल ने स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा शिक्षा से जुड़े कई विषय उठाए। उन्होंने मेडिकल कॉलेज में पोस्ट ग्रेजुएट यानी पीजी की 36 अतिरिक्त सीटें बढ़ाने की मांग रखी।

राज्यपाल ने इसके अलावा ‘चंडीगढ़ रीजनल मेडिकल हब’ परियोजना को पूरी तरह सरकारी खर्च से विकसित करने का प्रस्ताव भी रखा। इसके लिए उन्होंने केंद्र सरकार से करीब 2,000 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का अनुरोध किया।

इस परियोजना को क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से जोड़कर देखा जा रहा है। राज्यपाल ने बैठक में चिकित्सा सुविधाओं को मजबूत करने और विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया।

पीजी सीटों में वृद्धि होने से चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में प्रशिक्षण क्षमता बढ़ सकती है। साथ ही क्षेत्र में विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता को मजबूत करने में भी मदद मिल सकती है।

पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज को केंद्रीय संस्थान बनाने की मांग

केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी से हुई बैठक में राज्यपाल ने पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए। उन्होंने कॉलेज को पूरी तरह केंद्र पोषित तकनीकी संस्थान यानी सीएफटीआई का दर्जा देने की मांग की।

राज्यपाल ने इसके लिए पश्चिम बंगाल के बंगाल कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, शिबपुर का उदाहरण देते हुए उसी तर्ज पर पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज को विकसित करने का प्रस्ताव रखा। उनका कहना था कि संस्थान को केंद्रीय स्तर पर मजबूत करने से तकनीकी शिक्षा और अनुसंधान को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

बैठक में कॉलेज के प्रशासनिक ढांचे से संबंधित मुद्दा भी उठाया गया। राज्यपाल ने यूजीसी नियम-2018 के तहत वर्तमान में डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा प्राप्त संस्थान के लिए कुलपति की नियुक्ति किए जाने की अपील की।

इससे संस्थान के शैक्षणिक और प्रशासनिक संचालन से जुड़े मुद्दों को स्पष्ट दिशा देने में मदद मिलने की उम्मीद जताई गई।

रावी बाढ़ से हुए नुकसान का मुद्दा केंद्र के सामने रखा

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल से मुलाकात में राज्यपाल ने पंजाब के सीमावर्ती जिलों में रावी नदी से आने वाली बाढ़ की समस्या को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने बताया कि रावी नदी में बाढ़ के कारण अमृतसर, गुरदासपुर और पठानकोट के सीमावर्ती क्षेत्रों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ता है।

राज्यपाल ने बार-बार आने वाली बाढ़ से निपटने के लिए केवल तत्काल राहत उपायों के बजाय दीर्घकालिक योजना तैयार करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने ऐसी स्थायी व्यवस्था विकसित करने की मांग की जिससे भविष्य में बाढ़ से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।

बैठक में नदी प्रबंधन, बाढ़ नियंत्रण और सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर भी चर्चा हुई। राज्यपाल ने केंद्र से इस समस्या का स्थायी समाधान तलाशने के लिए आवश्यक सहयोग देने का आग्रह किया।

सांस्कृतिक परियोजनाओं के लिए केंद्र के सहयोग का आभार

राज्यपाल कटारिया ने केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के प्रति भी आभार जताया। उन्होंने पंजाब और चंडीगढ़ में सांस्कृतिक एवं पर्यटन से जुड़ी परियोजनाओं के लिए केंद्र की ओर से स्वीकृत राशि का उल्लेख किया।

खरड़ में ‘अज्ज सरोवर’ परियोजना के लिए करीब 93 करोड़ रुपये की मंजूरी और चंडीगढ़ के सेक्टर-19 स्थित ले कोर्बुसिए केंद्र में डिजिटल म्यूजियम स्थापित करने के लिए लगभग 19 करोड़ रुपये की स्वीकृति के लिए राज्यपाल ने केंद्र सरकार का धन्यवाद किया।

इन परियोजनाओं को क्षेत्र में सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन को बढ़ावा देने से जोड़ा जा रहा है। डिजिटल म्यूजियम के माध्यम से चंडीगढ़ की स्थापत्य विरासत और ले कोर्बुसिए से जुड़े इतिहास को आधुनिक तकनीक के जरिए लोगों तक पहुंचाने की योजना है।

केंद्र के साथ समन्वय बढ़ाने पर जोर

राज्यपाल की दिल्ली यात्रा के दौरान हुई इन बैठकों में पंजाब और चंडीगढ़ से जुड़े अलग-अलग क्षेत्रों के मुद्दे सामने आए। इनमें नशामुक्ति, स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा, उच्च शिक्षा, बाढ़ नियंत्रण, सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन प्रमुख रहे।

कटारिया ने विभिन्न केंद्रीय मंत्रियों के समक्ष राज्य और चंडीगढ़ की जरूरतों के अनुरूप सहयोग और संसाधनों की मांग रखी। बैठकों का एक प्रमुख उद्देश्य केंद्र और पंजाब-चंडीगढ़ प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना और विकास परियोजनाओं को गति देना रहा।

नशामुक्ति के मामले में पुनर्वास के साथ कौशल विकास और रोजगार पर जोर दिया गया, जबकि स्वास्थ्य क्षेत्र में अतिरिक्त पीजी सीटों और क्षेत्रीय चिकित्सा केंद्र के लिए वित्तीय सहायता का प्रस्ताव रखा गया। शिक्षा के क्षेत्र में पंजाब यूनिवर्सिटी और पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज से जुड़े मुद्दे उठाए गए। वहीं रावी बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान के लिए दीर्घकालिक योजना की मांग की गई।

राज्यपाल की इन बैठकों के जरिए पंजाब और चंडीगढ़ से संबंधित कई प्रमुख विषय केंद्र के समक्ष पहुंचे हैं। अब इन प्रस्तावों पर केंद्र स्तर पर आगे की कार्रवाई और संबंधित विभागों के साथ समन्वय के आधार पर परियोजनाओं की प्रगति तय होगी।